
Shakeel Akhtar
35.7K posts

Shakeel Akhtar
@shakeelNBT
Journalist, Commentator on current affairs. Former Political Editor and Chief of Bureau Navbharat Times





मोदी सरकार के पिछले लगभग 12 साल के कार्यकाल में सामाजिक सुरक्षा की कई योजनाएं धीरे-धीरे कमजोर होती चली गई हैं, या उन्हें जानबूझकर कमजोर कर दिया गया है। पेंशन जैसी बुनियादी सुविधा भी लंबे समय से बढ़ती महंगाई के बावजूद लगभग जस की तस बनी हुई है। इसका सीधा असर बुजुर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर पेंशनभोगियों पर पड़ा है, जो समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग माने जाते हैं। मौजूदा दौर में जब सरकार की खराब नीतियों की वजह से महंगाई चरम पर है, स्वास्थ्य खर्च और रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के दाम बेतहाशा बढ़ चुके हैं, ऐसे में 1000 की न्यूनतम ईपीएफ पेंशन एक तरह से मजाक ही है। संसद की स्थायी समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में साफ कहा है कि 1995 की पेंशन योजना के तहत मिलने वाली 1000 मासिक पेंशन आज के समय में पूरी तरह अपर्याप्त है। समिति ने सुझाव दिया है कि न्यूनतम पेंशन को जीवन-यापन के अनुरूप और सम्मानजनक स्तर तक बढ़ाया जाए। यह लाखों रिटायर्ड कामगारों की सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन से जुड़ा मुद्दा है। उम्मीद की जानी चाहिए कि भाजपा के ही लोकसभा सांसद की अध्यक्षता वाली श्रम, वस्त्र एवं कौशल विकास स्थायी समिति की इस रिपोर्ट के बाद सरकार जागेगी और इस बारे में ठोस कदम उठाएगी।






किरण चौधरी का हमने नाम लिखा था और कांग्रेस ने उन्हें नोटिस दिया। मगर बहुत सारे लोग कहते रहे की नोटिस नहीं दिया गया और किरण चौधरी को भी बचाते रहे। बीजेपी में जाने के बाद भी कांग्रेस के नेताओं ने उनका समर्थन जारी रखा। अजय माकन की हार कोई मामूली नहीं थी राहुल गांधी के इस समय के सबसे खास लोगों में हैं। मगर यहां तो खुद राहुल के खिलाफ काम करने वालों पर कार्रवाई नहीं होती है तो माकन को हराने में किरण चौधरी की मदद करने वालों के खिलाफ क्या होती? परिणाम हरियाणा विधानसभा का चुनाव फिनिशिंग लाइन पर हार गए। अब राज्यसभा में हारते हारते बचे हैं। देखते हैं कांग्रेस कितना जागती है!











