Shivam Pandey
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Shivam Pandey
@shivamself
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कोई भी साधारण राजनीतिक कार्यकर्ता अपने ही नेता की अर्धांगिनी और उनके चार बच्चों की मां, एक महिला के लिए इतनी चरित्रहीन और घृणित विचारधारा वाली भाषा का प्रयोग जब करते हैं तो कार्यकर्ताओं का यह आचरण ऊपर से स्वीकृत होता है और ऐसे आचरण को प्रोत्साहन दिया जाता है संविधान जीवित है इसलिए हमारी माँ को कोई "छोड़ी हुई स्त्री" नहीं बना सकता। There is a reason the most marginalised put their deepest faith in the constitution. It isn’t just a legal document it is what has given people without power the confidence that dignity, rights and justice belong to them too. संविधान ने इस देश के अंतिम व्यक्ति को भी यह विश्वास दिया कि उसकी गरिमा किसी सत्ता, किसी पद और किसी राजनीतिक व्यवहार से छोटी नहीं है। सम्मान और न्याय सभी का समान अधिकार है और यही भारत की असली ताकत है। #JaiSamvidhan






आज से 6 वर्ष पूर्व के ये प्रस्तुत चित्र हमें उस बेहद भयावह व कठिन दौर की याद दिलाते हैं, जब सम्पूर्ण विश्व कोरोना महामारी की भयानक त्रासदी से जूझ रहा था, लोग अपने घरों से बाहर निकलने से डरते थे, बाहर से आने वाले अपने परिवार तक के लोगों से दूरी बना रहे थे, उन्हें छूने से डर रहे थे। ऐसे संकटपूर्ण समय में जनसत्ता दल के सैकड़ों ऊर्जावान कार्यकर्ताओं ने मानवता की सेवा का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया था, वाराणसी कोलकाता से कानपुर हाईवे NH-19 पर लगातार 25 दिनों तक दिन-रात शिविर लगाकर राहगीरों, श्रमिकों एवं जरूरतमंद लोगों के लिए भोजन, पानी, दूध, विश्राम स्थल तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई। साथ ही उन्हें सुरक्षित रूप से उनके गंतव्य तक पहुँचाने में हरसंभव सहयोग प्रदान किया गया था। सेवा, समर्पण और मानवता के उन अविस्मरणीय क्षणों को आज भी गर्व के साथ याद किया जाता है। "यादों के झरोखे से" "कोविड महामारी 2020 के दौरान लोगों की सहायतार्थ सेवा शिविर"

















