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Upmita Vajpai
Upmita Vajpai@upmita·
हमारी काशी के हिस्से एक दिवाली ज्यादा आती है, देवों वाली दिवाली… उपमिता वाजपेयी, वाराणसी। अपने अचरा में बेहिसाब नावों, बजड़ों, मोटरबोट्स और क्रूज को संभाले मां गंगा का वेग आज अपनी सबसे ऊंची हदें पार कर रहा था। किसी अतिउत्साहित जेन जी की तरह। और उनकी लहरें ऐसी जैसे किसी ओलिंपिक में अनगिनत धावक दौड़े जा रहे हों। पानी में वेग इतना कि मजबूत, हष्ट पुष्ट बजड़ों को भी कागज की कश्ती सा डगमगा दे रही थी। नमो घाट, दशाश्वमेध, अस्सी तो बारह मास, चौबीसों घंटे रौशन रहते हैं। लेकिन आमतौर पर चुप और गुमसुम रहनेवाले घाट भी आज उस बहुरिया से नजर आ रहे थे जो सिर्फ त्यौहारों पर तिजौरी से सास के दिए गहने पहनकर सुहाग सजाती है। काशी के सब के सब मल्लाहों के घर की हर नाव गंगा में। जो महीनों से सूखी किनारे पड़ी थीं वो भी और जो आखिरी सांसे गिन रहीं थीं वो भी। मरम्मत और झाड़ पोछकर उन्हें आज उजालों के इस उत्सव के कुरुक्षेत्र में उतारा गया है। वो क्या है ना, हमारी काशी के हिस्से एक एक्स्ट्रा दिवाली आती है। देवों वाली देव दिवाली। पहले घाट से आखिरी घाट तक जाने के लिए आज गंगाजी में बकायदा ट्रैफिक डायवर्जन था। जेट्टी के सहारे गंगा के दोनों किनारों को बांटा गया था। एक हिस्से में नावें जा रहीं थी, दूसरे से आ रहीं। लेकिन जैसे ही घाट के छोर पर वो यू टर्न लेने को होती वहां कई नावें एक दूसरे से टकरा जातीं। छोटी नावों पर बैठे हाईड्रोफोबिक लोगों के दिल मुंह को आ जाते। चिल्लाने की आवाज आती। और फिर अचानक बीच से कहीं काशी का वॉर क्राय गूंजने लगता, नमः पार्वती पतेय, हर हर महादेव। महादेव सब ठीक करेंगे, यही सोच वो मुस्कुराकर आगे बढ़ जाते। जैसे डैशिंग कार वाला कोई खेल लुत्फ लेकर आए हों। इन नावों के साथ किनारों पर किसी सुनहरे गोटे जैसे पिरोए घाट चल रहे थे। कुछ घाट रौशनी से चौंधियाए और अघाए थे तो कुछ के हिस्से उजालों में कंजूसी भी आई थी। उन घाटों को छेककर बैठे इतने ज्यादा लोग कि घाट अपनी सीढ़ियों का रंग भूल गए। ये सब लोग इंतजार में उस आतिशबाजी का जो गंगा पार से होनी है। जिसे देखने और जब्त करने के लिए ये कई घंटों से फ्रैम सेट कर चुके हैं। जिसे वो कई महीनों तक अपने सोशल मीडिया पर डालेंगे और काशी हो साथ कर लेंगे। ललिता घाट के ठीक सामने आतिशबाजी की पहली लौ उठी ही थी कि बनारस, उसके चौरासी घाट और का हो गुरु कहकर उस पर गुरुर करने वाले बनारसियों का उत्साह डेसीबल का हर पैमाना पार कर गया। किसी खेल मैदान में चौके-छक्के में उठनेवाले नाद की तरह वो आसमान को छू रहा था। और पंचगंगा घाट से परंपरा बतौर शुरू हुआ ये उत्सव इस पीढ़ी को छूकर अद्भुत से अद्भुतास हुआ जा रहा था। #DevDiwali #Kashi
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AIR News Lucknow
AIR News Lucknow@airnews_lucknow·
➡️#वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में बढ़ती गर्मी को देखते हुए जर्मन हैंगर की व्यवस्था की गई है। ➡️काशी विश्वनाथ मंदिर के एसडीएम शंभू शरण ने बताया कि लगातार सुविधाओं को बढ़ाया जा रहा है इसके अलावा पेयजल की भी भरपूर व्यवस्था की गई है।
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Government of UP
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श्री काशी विश्वनाथो विजयतेतराम श्री काशी विश्वनाथ धाम में पावन रंगभरी एकादशी पर काशीवासियों ने अपने आराध्य श्री विश्वेश्वर महादेव की अविरल भक्ति में लीन होकर रंगोत्सव की भव्य, दिव्य एवं अद्भुत परम्परा का निर्वहन किया। #RangBhariEkadashi | @uptourismgov | @upculturedept
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Shri Kashi Vishwanath Temple Trust
आज दिनांक 8 मार्च को सायं काल सोनभद्र से श्रीकाशी विश्वनाथ धाम पधारे वनवासी समाज के भक्त जिनका स्वागत मंदिर के डिप्टी कलेक्टर शंभु शरण जी ने बड़े ही हर्षोल्लास से किया , वनवासी समाज के भक्त श्री काशी विश्वनाथ धाम अन्न क्षेत्र में प्रसाद ग्रहण करने के बाद रात्रि विश्राम करेंगे और कल प्रातः बाबा को पलाश गुलाल और काशी भस्म अर्पित कर 3 दिवसीय रंग भरी एकादशी महोत्सव में अपनी सहभागिता करेंगे। #banaras #kashivishwanath #HarHarMahadev#rangbhariekadashi
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Shri Kashi Vishwanath Temple Trust
रंगभरी एकादशी के इस त्रिदिवसीय लोक उत्सव में, इस वर्ष बाबा विश्वनाथ एवं मां गौरा की चल प्रतिमा को शास्त्रीय अर्चना के साथ मंदिर चौक में शिवार्चनम मंच के निकट विराजमान किया गया। आज, 8 मार्च की सायं वेला में हजारों श्रद्धालुओं ने श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचकर फूलों की होली के साथ इस कार्यक्रम की शुरुआत की। तीन दिनों तक सांस्कृतिक और लोक उत्सव का यह आयोजन श्रद्धा और उल्लास से भरपूर रहेगा। #banaras #kashivishwanath #bholenath #holi #SanatanDharma
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Shri Kashi Vishwanath Temple Trust
Shri Kashi Vishwanath Temple Trust@ShriVishwanath·
दिनांक 13.13.2024, "श्री काशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद" के नवीनीकृत परिसर के लोकार्पण के तृतीय वर्षगाठ पर विशेष सांस्कृतिक संध्या का आयोजन I @VishwaMishr @DDNewslive @DDNational @ANI @PTI_News @PMOIndia
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Shri Kashi Vishwanath Temple Trust
Shri Kashi Vishwanath Temple Trust@ShriVishwanath·
13 दिसंबर 2024, त्रिदिवसीय महोत्सव के अंतर्गत आज अपराह्न वेला में श्री काशी विश्वनाथ गर्भगृह में विशेष पूजन एवं अभिषेक संपन्न किया गया। ।।श्री काशीविश्वनाथो विजयतेतराम।।
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Vishwa Bhushan
Vishwa Bhushan@VishwaMishr·
*प्रेस नोट* *काशी में सूर्य आराधना पर्व कार्तिक सूर षष्ठी के अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ धाम स्थित द्रौपदादित्य सूर्यदेव की विशिष्ट आराधना* छठ महापर्व, कार्तिक मास सूर षष्‍ठी की पूजा का पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को मनाया जाता है। आज दिनांक 07 नवम्बर 2024 को काशी विश्वनाथ धाम में सूर्योपासना के अनुपम पर्व कार्तिक सूर षष्ठी (छठ पूजा) के पावन अवसर पर विशेष पूजन संपन्न हुआ। काशी के बारह प्रधान आदित्यों में से एक द्रौपदादित्य श्री काशी विश्वनाथ धाम में स्थापित हैं। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा संकल्पित समस्त सनातन पर्व उत्सव आयोजन के संकल्प को आज भी सुनिश्चित किया गया। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा आज के विशिष्ट भास्कर पर्व पर रुद्र धाम में आदित्य देव की विधिपूर्वक पूजा अर्चना हेतु समस्त आवश्यक शास्त्रीय एवं लोक आचार सुनिश्चित करने हेतु प्रबंध सुनिश्चित किए गए। शास्त्रीय आराधना के क्रम में आज भगवान द्रौपदादित्य विग्रह के समक्ष आदित्यहृदय स्तोत्र का पाठ किया गया। भगवान दिवाकर के आशीर्वाद से समृद्धि, स्वास्थ्य और सुख की प्राप्ति होती है। आज के इस पवन पर्व के लोक प्रचलित स्वरूप का भी आयोजन प्रतीकात्मक रूप से न्यास द्वारा किया गया। यह संज्ञान में आया कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर विशिष्ट क्षेत्र प्राधिकरण में कार्यरत डिप्टी कलेक्टर श्री शम्भू शरण के परिवार में पारिवारिक परंपरा के अंतर्गत लोक पर्व छठ को मनाया जाता है। अतः मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा लोक पर्व की परंपरा हेतु न्यास के प्रतिनिधि याजक की भूमिका निर्वाह हेतु डिप्टी कलेक्टर श्री शंभू शरण से अनुरोध किया गया। डिप्टी कलेक्टर श्री शंभू शरण ने यह अनुरोध सहर्ष स्वीकार किया। याजक की भूमिका में श्री शंभू शरण ने सपत्नीक व्रत एवं पूजन का पारंपरिक तरीके से निर्वहन कर हुए सायंकालीन अस्ताचल सूर्य देव का विशिष्ट लोकपर्व की परंपरा के अनुसार श्री विश्वेश्वर के ज्योतिर्लिंग धाम में पूजन किया। न्यास द्वारा समस्त सनातन पर्वों के आयोजन द्वारा काशी सहित पूर्वांचल की भी विशिष्ट क्षेत्रीय संस्कृति और सनातन परंपराओं का विशेष रूप से संरक्षण किया जा रहा है। इस विशेष अवसर पर सूर्य देव से सभी की जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की कामना की गई। इस के साथ ही, न्यास के प्रबंधन में आने वाले संकटहरण हनुमान मंदिर बेनीपुर में विशाल स्तर पर स्थानीय काशी वासी श्रद्धालुओं की सहभागिता में सामूहिक लोकपर्व छठ का सोल्लास समारोहपूर्वक आयोजन किया गया। न्यास के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्री निखिलेश कुमार एवं नायब तहसीलदार श्री मिनी एल शेखर की देख रेख में आयोजित इस लोक उत्सव के सामूहिक आयोजन से मंदिर परिसर सूर्योपासना के मधुर लोक गीतों से गुंजित हो उठा। पर्यावरण संरक्षण के साथ ही साथ प्रकृति के प्रति कृतज्ञता दर्शित करने की इस अनूठी परंपरा को आत्मसात करते हुए अंगीकृत कर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास सभी सनातन आस्था के अनुयायियों के अखण्ड सौभाग्य की कामना करता है। II श्री काशीविश्वनाथो विजयतेतराम II
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Vishwa Bhushan
Vishwa Bhushan@VishwaMishr·
*प्रेस विज्ञप्ति दिनांक: 08-11-2024* *विषय: बैकुंठ चतुर्दशी एवं देव दीपावली के पावन पर्व पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में विशेष पूजा* दिनांक 14 नवम्बर 2024, बैकुंठ चतुर्दशी के पवित्र अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में विशेष पूजा एवं आरती का आयोजन किया जाएगा। यह पूजा श्री हरि भगवान विष्णु के समस्त प्रधान विग्रह पर की जाएगी। बैकुंठ चतुर्दशी कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है, जिसे विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा एवं आराधना का दिन माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु जी की योग निद्रा समाप्त होती है और वे बैकुंठ लोक से जागकर सृष्टि की गतिविधियों में सक्रिय हो जाते हैं। इस दिन भगवान शिव सृष्टि की जिम्मेदारी विष्णु जी को सौंपते हैं। इस दिन की पूजा और आराधना से व्यक्ति के जीवन में शांति, समृद्धि, और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से भगवान विष्णु की कृपा से भक्त को बैकुंठ लोक की प्राप्ति हेतु श्री हरि के भक्त आराधना करते हैं। बैकुंठ चतुर्दशी के अवसर श्री काशी विश्वनाथ धाम में निम्न विग्रहों पर विशिष्ट पूजन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे :– *1– बैकुंठ जी* *(मुख्य मंदिर परिसर में गर्भगृह एवं दण्डपाणि विग्रह के मध्य)* इस शुभ अवसर पर बैकुंठ जी विग्रह पर सहस्त्रार्चन एवं राग-भोग आरती का आयोजन किया जाएगा। *2– सत्यनारायण जी* *(मुख्य मंदिर परिसर में बी गेट “सरस्वती द्वार” प्रवेश के दाहिने तरफ)* बैकुंठ चतुर्दशी के अवसर पर सत्यनारायण जी विग्रह पर शुक्ल यजुर्वेद के पुरुष सूक्त पाठ के उपरांत आरती संपन्न की जाएगी। *3– बद्रीनारायण जी* *(मुख्य मंदिर परिसर में ए गेट “गंगा द्वार” प्रवेश के दाहिने तरफ)* बद्रीनारायण जी के विग्रह पर विष्णु सहस्त्रनाम पाठ के उपरांत राग-भोग आरती संपन्न की जाएगी। *4– ललिता घाट पर स्थित भगवन विष्णु जी का मंदिर* *(“पद्म्नाभेश्वर मंदिर”)* पंचामृत से पूजन के उपरांत षोडशोपचार पूजन किया जाएगा। *देव दीपावली* *15 नवम्बर 2024* देव दीपावली के पावन पर्व पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में इस वर्ष विशेष रूप से भव्य सजावट और धार्मिक आयोजन किए जाएंगे। देव दीपावली अविमुक्त क्षेत्र काशी विश्वेश्वर भगवान की आराधना का एक महत्वपूर्ण पर्व है। इस अवसर पर सनातन परंपरा के अनुसार काशी में समस्त देवता देवलोक से पधार कर स्वयं के पुण्यलाभ हेतु महादेव के सेवार्थ प्रकाश पर्व मनाते हैं। इस अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ धाम को फूलों से सजाने की योजना बनाई गई है, जिससे वातावरण और भी भव्य एवं उल्लासपूर्ण बन जाएगा। सम्पूर्ण धाम में विभिन्न प्रकार के रंग-बिरंगे फूलों से आकर्षक सजावट की जाएगी, जो श्रद्धालुओं को एक दिव्य और दिव्यतम अनुभव प्रदान करेगी। फूलों के अलावा, दीपों की सजावट भी की जाएगी। विशेष रूप से दीपोत्सव की तैयारियाँ की गई हैं, जिसमें मंदिर क्षेत्र को हजारों दीपों से सजाया जाएगा, जिससे सम्पूर्ण धाम दीपों की आभा से रोशन होगा। इसके अतिरिक्त, इस वर्ष देव दीपावली के अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ धाम स्थित ललिता घाट पर सायंकाल वेला में एक विशेष आतिशबाजी और लेज़र शो का आयोजन किया जाएगा, जिसे जिला प्रशासन द्वारा आयोजित किया जाएगा। इस शो में श्रद्धालु और पर्यटक दोनों ही आनंदित होंगे, और यह काशी के इस अद्वितीय पर्व को और भी भव्य बनाएगा। सभी तैयारियों के मद्देनजर, काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन और स्थानीय प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष प्रबंध किए हैं। मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए बेहतर सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। साथ ही, काशी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया गया है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। श्री काशी विश्वनाथ धाम में इस देव दीपावली के दौरान काशी की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को और भी उजागर करने का प्रयास किया गया है। ।।श्री काशीविश्वनाथो विजयतेतराम।।
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Vishwa Bhushan
Vishwa Bhushan@VishwaMishr·
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में नवरात्रि पर्व, 2024 में प्रस्तावित कार्यक्रमों का विवरण:– प्रथमा: 03-10-2024 :- (क) प्रातः – 5 शास्त्री गण द्वारा कलश स्थापना (मंदिर परिसर में) (ख) सायं – भजन, बनारसी लोकगीत पचरा (मंदिर चौक स्थित सांस्कृतिक मंच) द्वितीया: 04-10-2024:- (क) रामलीला में धनुष यज्ञ का मंचन (मंदिर चौक स्थित सांस्कृतिक मंच) तृतीया: 05-10-2024 :- (क) राम में रावण वध का मंचन (मंदिर चौक स्थित सांस्कृतिक मंच) चतुर्थी: 06-10-2024 :- (क) बंगाली लोक नृत्य धनूची (मंदिर चौक स्थित सांस्कृतिक मंच) पंचमी: 07-10-2024 :- (क) ललिता सहस्रनाम स्तोत्र, 51 शक्तिपीठों को प्रतिबिंबित करती 51 मातृशक्तियों द्वारा, (मंदिर चौक स्थित सांस्कृतिक मंच) षष्ठी: 08-10-2024 :- (क) महिषामर्दिनी स्तोत्र नृत्य (मंदिर चौक स्थित सांस्कृतिक मंच) सप्तमी: 09-10-2024 :- देवी मां का भजन अष्टमी: 10-10-2024 :- माता के नौ स्वरूपों को दर्शाती 9 कन्याओं द्वारा दुर्गा सप्तशती का पाठ (मंदिर चौक स्थित सांस्कृतिक मंच) नवमी: 11-10-2024 :- (क) प्रातःकाल: यज्ञ / हवन (नीलकंठ मंदिर के समीप यज्ञ कुंड पर। (ख) सायंकाल: भजन / नृत्य (मंदिर चौक स्थित सांस्कृतिक मंच) दशमी: 12-10-2024 :- (क) प्रातःकाल: सांकेतिक रूप से शस्त्र पूजा (मंदिर प्रांगण में) (ख) सायंकाल: शास्त्रीय युद्ध कला का प्रदर्शन (मंदिर चौक स्थित सांस्कृतिक मंच) प्रतिदिन के नियमित कार्यक्रम:– * पांच शास्त्रियों द्वारा नौ दिन दुर्गा सप्तशती का नियमित पाठ। * नवरात्रि के नौ दिन विशालाक्षी माता को चुनरी, सोलह श्रृंगार व प्रसाद भेंट। * नवरात्रि में प्रत्येक दिवस नौ देवियों के अलग-अलग सिद्ध पीठों में चुनरी, सोलह श्रृंगार व प्रसाद भेंट।
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Vishwa Bhushan
Vishwa Bhushan@VishwaMishr·
श्री काशी विश्वनाथ धाम में आज दिनांक 11.09.2024 को “राधा अष्टमी” के पुनीत पर्व पर माँ राधा रानी की विशिष्ट आराधना संपन्न हुई I धाम स्थित मंदिर प्रांगण में श्री बद्रीनारायण जी के मंदिर में राधा रानी की भगवान कृष्ण के साथ युगल छवि की अराधना संपन्न की गयी I सनातन मत में मातृ शक्ति की ज्योति अथवा ज्वाला के स्वरूप में संकल्पना की जाती है। अतः माँ राधा रानी की राधा ज्योति का आरती के पश्चात धाम में शोभायात्रा निकालकर उत्सव मनाया गया। श्री राधा ज्योति को माँ गौरा पार्वती से भेंट के पश्चात श्री काशी विश्वनाथ महादेव के गर्भगृह में अनुष्ठान पूर्वक ले जा कर जन्मोत्सव के अवसर पर श्री विश्वेश्वर महादेव से साक्षात्कार भी कराया गयाI इस प्रकार माँ राधा रानी के जन्मोत्सव का पर्व सात्विक, सनातन शास्त्रीय आचार के साथ संपन्न किया गया I राधा ज्योति आराधना एवं शोभायात्रा में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के सम्मानित सदस्य प्रो० ब्रज भूषण ओझा, न्यास के अधिकारीगण एवं कार्मिकों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित हुए। इसके उपरांत धाम स्थित मंदिर चौक में काव्यपाठ का आयोजन कर राधा रानी को काव्यांजलि के माध्यम से भाव अर्पित किए गए। काव्य गोष्ठी में वाराणसी के विद्वान महनीय कवियों यथा सुश्री शाम्भवी चतुर्वेदी, श्री रजनीकांत त्रिपाठी, श्री संतोष कुमार 'प्रीत', श्री गिरीश पांडेय, श्री आलोक सिंह, श्रीमती कंचन लता चतुर्वेदी, डॉ0 शरद श्रीवास्तव, श्री सिद्धनाथ शर्मा सिद्ध, श्री आलोक द्विवेदी, श्री सूर्यप्रकाश मिश्र, डॉ0 अशोक सिंह द्वारा श्री जी राधा रानी को समर्पित कविताओं एवम गीतों के स–स्वर पाठ कर श्री जी की सारस्वत आराधना संपन्न की गई। राधाष्टमी के सांस्कृतिक कार्यक्रम में धाम स्थित मंदिर चौक में नृत्य की भी प्रस्तुति भी संपन्न की गई। इस प्रकार समारोहपूर्वक सांस्कृतिक कार्यक्रमों, नृत्य, काव्यांजलि तथा शास्त्रीय पूजा पद्धति के माध्यम से राधा रानी के जन्मोत्सव पर “राधा अष्टमी” का उत्सव श्री काशी विश्वनाथ धाम में आज समारोहपूर्वक मनाया गया। ।।श्री राधे।। ।।श्री विशेवश्वर की सदा ही जय हो।।
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Vishwa Bhushan
Vishwa Bhushan@VishwaMishr·
9 सितंबर, 2024 @ShriVishwanath आज सनातन पौराणिक परंपरा के अनुसार एक महत्वपूर्ण तिथि है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को भगवान स्कन्द (कार्तिकेय) की तारकासुर पर विजय की एवम् द्वापर युग में श्री हरि कृष्ण के बड़े भाई शेषावतार भगवान बलभद्र (बलदेव जी) के प्राकट्य की तिथि के रूप में मनाया जाता है। शैव मत में स्कन्द छठी तथा ब्रज में बलभद्र छठी के रूप में यह सनातन तिथि उत्सव पूर्वक अनुष्ठान से मनाई जाती है। आज की ही तिथि पर माता ललिता षष्ठी भी मनाई जाती है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा समस्त सनातन पर्वों को समारोह पूर्वक आयोजित किए जाने के पुण्य संकल्प के अनुपालन में आज श्री काशी विश्वनाथ धाम में विशिष्ट पूजन अनुष्ठान संपन्न किए गए। इस अवसर पर ललिता घाट पर स्थित भगवान स्कन्द के विग्रह पर आराधना संपन्न की गई। साथ ही भगवान शेषनाग की आराधना के द्वारा बलभद्र प्राकट्य उत्सव भी संपन्न किया गया। भगवान शेषनाग कैलाश पर्वत पर छत्र फैला कर महादेव की निरंतर सेवा करते हैं। कैलाश के निकट स्थित शेषनाग झील पौराणिक मान्यता के अनुसार शेषनाग का मूल स्थान है। वहीं भगवान स्कन्द स्वयं महादेव से उत्पन्न हैं। भगवान स्कंद समस्त सात्विक शक्तियों के प्रधान योद्धा देव सेनापति के रूप में भी पूजे जाते हैं। प्रतिदिन श्री विश्वेश्वर के आरती श्रृंगार में भगवान शेषनाग के रजत छत्र से महादेव के साथ शेषनाग की उपस्थिति श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शायी जाती है। भगवान शेषनाग ने ही त्रेतायुग में भगवान राम के अनुज लक्ष्मण जी के रूप में अवतार लिया था। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास समस्त सनातन परंपराओं को जीवंत एवम उल्लासित बनाए रखने हेतु सतत प्रयत्नशील है। समस्त सनातन बांधवों एवम् भगिनियों को आज की पुनीत तिथि पर इन तीनों पर्वों की अशेष शुभकामनाएं। भगवान स्कंद की आराधना से सर्वविजय एवम भगवान शेषनाग की आराधना से श्री हरि विष्णु तथा महादेव दोनों की कृपा प्राप्त होती है। वहीं ललिता छठी की आराध्य मां ललिता की आराधना त्रिपुरसुंदरी स्वरूप में शाक्त तंत्र मार्ग की सर्वोच्च साधना है। षष्ठी भाद्रपदे शुक्ला वैघृतेन समन्विता । विशाखाभौमयोगेन सा चम्पेतीह विश्रुता।। भाद्रपद शुक्लपक्ष स्मृतिकौस्तुभ के अनुसार चम्पाषष्ठीव्रत करना चाहिए।और व्रतराज के अनुसार ललिताषष्ठी का करना चाहिए। भगवान मुरुगन के भक्तों के लिए स्कंद षष्ठी का बहुत महत्व है । यह उस दिन की याद दिलाता है जब भगवान मुरुगन ने राक्षस सुरपदमन को हराया था, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र भगवान कार्तिकेय ने तारकासुर राक्षस का वध किया था। इसलिए कार्तिकेय जी की विजय के उपलक्ष्य में स्कंद षष्ठी मनाई जाती है। स्वामी स्कंद के विग्रह दर्शन से मनुष्य को कुमार शरीर की कांति प्राप्त होती है तथा स्कंदलोक में पुण्यवास का फल तथा मृत्युलोक से मुक्ति का लाभ मिलता है। इस उत्सव आयोजन में श्री काशी विश्वनाथ धाम में ललिता घाट स्थित स्कंद भगवान के विशाल विग्रह पर समारोह पूर्वक पूजन संपन्न कर भगवान शेषनाग की शोभायात्रा मंत्रोच्चार एवम शंखनाद के साथ निकाली गई। पूजन एवं शोभायात्रा में न्यास के अर्चक गण, शास्त्री गण, न्यास के अधिकारी एवं कार्मिक तथा काशीवासियों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित हुए। श्री काशी विश्वनाथ महादेव की प्रिय काशी प्राचीन काल से ही सनातन परंपराओं की संरक्षक एवं संवाहक रही है। यह सनातन नगरी विधर्मी शासकों एवम् आक्रांताओं के हाथों अनेक बार विध्वंस तथा सनातन आस्था द्वारा पुनर्स्थापना के काल से निकल कर पुनः अपने स्वरूप को प्राप्त कर रही धरा है। इसी श्रृंखला में आज की यह पवित्र तिथि उत्सव पूर्वक श्री काशी विश्वनाथ धाम में मनायी गई। आज भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि शेषावतार के कारण वैष्णव परंपरा में महत्व रखती है, स्कंद विजयोत्सव के कारण शैव परंपरा में पूज्य है तथा ललिता षष्ठी पर्व के रूप में शाक्त आराधना में विशिष्ट है। इस तिथि का माहात्म्य अत्यंत विशिष्ट एवं सर्व फलदायक है। आज श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा इस पर्व उत्सव की तिथि को पुनः समारोह पूर्वक मनाते हुए प्राचीन परंपरा एवं सनातन गौरव को पुनर्स्थापित करने का सनातन प्रयास किया गया है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास महादेव शिव, श्री हरि विष्णु एवं माता त्रिपुरसुंदरी की विशिष्ट आराधना पद्धतियों के समन्वय की इस विशिष्ट एवं पवित्र तिथि पर सभी सनातन जगत के कल्याण की बारंबार कामना करता है। ।।श्री काशीविश्वनाथो विजयतेतराम।।
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Shri Kashi Vishwanath Temple Trust
निराकारमोङ्करमूलं तुरीयं गिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम् । करालं महाकालकालं कृपालं गुणागारसंसारपारं नतोहम् दिनांक- 04.09.2024, बाबा विश्वनाथ के श्रृंगार आरती, दर्शन
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Vishwa Bhushan
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@ShriVishwanath धाम में समस्त देवताओं के एकसाथ पूजन का यज्ञ संपन्न। देवान्भावयतानेन ते देवाभावयन्तु वः। परस्परं भावयन्तः श्रेयः परमवाप्स्यथ ।। “अर्थ- यज्ञ के द्वारा देवताओं को उन्नत करो और वे देवता तुम लोगों को उन्नत करें। इस प्रकार तुम लोग परम कल्याण को प्राप्त हो जाओगे”
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आज दिनांक 31 अगस्त 2024 को श्री काशी विश्वनाथ धाम में मध्याह्न भोग आरती में महादेव श्री विश्वेश्वर के साथ भोग ग्रहण करते लड्डू गोपाल। भोग आरती के पश्चात धाम में भोग आरती की समयावधि में पधारे सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया। भोग प्रसाद ग्रहण कर लड्डू गोपाल ने महादेव से विदा ली। वापसी में जाते समय श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रांगण में बद्री नारायण जी के सम्मुख पहुंचने पर श्री लड्डू गोपाल ने ऊपर उठकर शिखर दर्शन भी किए। उसके बाद लड्डू गोपाल जी सत्यनारायण जी के मंदिर में मध्याह्न विश्राम हेतु विराजे। सायंकाल 5 बजे भगवान लड्डू गोपाल को श्रद्धालु माताओं के सहयोग से सोहर गायन कर जगाया जायेगा और भगवान से विष्णु स्वरूप हो अगले वर्ष जन्माष्टमी पर पुनः पधारने की प्रार्थना की जाएगी।
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@ShriVishwanath धाम में पंचम दिवस कृष्णोत्सव, दिनांक 30 अगस्त 2024 श्री लड्डू गोपाल की शक्ति स्वरूपा माँ गौरा के साथ आराधना। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा संकल्पित नवाचारों के अंतर्गत धाम में आयोजित श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व को न्यास के विद्वान अर्चकों के परामर्श के अनुरूप छः दिवसीय पर्व के रूप में मनाया जा रहा है, जिसकी चर्चा पूरे देश में व्यापक रूप से हो रही है। कल दिनांक 29-08-2024 को श्री लड्डू गोपाल की चतुर्थ दिवस की आराधना विष्णु सहस्रनाम के साथ संपन्न हुई थी। आज दिनांक 30.08.2024 को शुक्रवार का दिन मातृ शक्ति की आराधना का है। अतः आज श्री कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव के पांचवे दिन श्री लड्डू गोपाल ने मां को प्रिय लाल रंग एवं सफ़ेद रंग के फूलों से श्रृंगार कर लाल रंग के वस्त्र धारण किए। शक्ति स्वरूपा माँ गौरा के साथ विराजमान हो कर सायं काल से शयन आरती तक निरंतर भक्तगणों को लड्डू गोपाल दर्शन दे रहे हैं I नारायण स्त्रोत के पाठ से श्री लड्डू गोपाल की आराधना प्रारंभ हुई। भारी संख्या में धाम पधारे श्रद्धालु भाव विभोर हो उत्सव में सम्मिलित हुए I कल लड्डू गोपाल भगवान छठ्ठी के पश्चात अगले वर्ष तक के लिए विष्णुरूप में ही विराजेंगे। अतः आज शोभायात्रा के समय लड्डू गोपाल ने सभी देवताओं से उनके मंदिर में जा जा कर भेंट की। माता पार्वती के पास से शोभा यात्रा प्रारंभ हुई। सबसे पहले श्री विश्वेश्वर के उत्तरी द्वार से दर्शन के पश्चात लड्डू गोपाल ने निकुंभ विनायक से भेंट की। फिर नंदीश्वर, व्यासेश्वर, कुबेरेश्वर जी से मिलते हुए लड्डू गोपाल ने विश्वनाथ जी से ईशान कोण में स्थित देवी अन्नपूर्णा माता के मंदिर में रुक कर अन्नपूर्णा माता से अक्षत ग्रहण किया। उसके बाद बद्री नारायण जी और त्रिदेवियों मां गंगा, यमुना एवम सरस्वती से मिलते हुए लड्डू गोपाल ने सत्यनारायण मंदिर में रुक कर अपनी माला बदली। उसके बाद भौमेश्वर, अविमुक्तेश्वर एवं तारकेश्वर महादेव को प्रणाम कर लड्डू गोपाल ने दक्षिणी द्वार से प्रवेश कर विश्वनाथ जी से भेंट की और रुद्राक्ष धारण किया। उसके बाद दंडपाणी जी को नमस्कार कर लड्डू गोपाल ने हनुमान जी से भी भेंट की। साल भर के लिए पुनः विष्णु रूप होने से पूर्व लड्डू गोपाल की सभी देवताओं से भेंट करा कर पुनः समारोह पूर्वक शोभायात्रा वापस हुई। वापस आ कर लड्डू गोपाल ने माता पार्वती से सम्मुख आसन ग्रहण किया। माता के साथ लड्डू गोपाल की चित्ताकर्षक छवि के दर्शन हो रहे हैं। शयन आरती तक भगवान लड्डू गोपाल के मां पार्वती के मातृ रूप के साथ दर्शन प्राप्त होंगे। आज की सायंकालीन विशिष्ट अराधना में द्वारकाधीश मंदिर गुजरात के पुजारी श्री हार्दिक जी महाराज, प्रख्यात कलाकार/फोटोग्राफर श्री मनीष खत्री, विन्ध्याचल धाम से पधारे माँ विंध्यवासिनी के उपासक श्री अनुपम जी महाराज, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के सम्मानित सदस्य श्री वेंकट रमन घनपाठी, मंदिर न्यास के समस्त अधिकारी एवं कार्मिक, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के @DrVNMishraa एवम अन्य साथी न्यूरोलॉजिस्ट सहित अनेक गणमान्य जन एवम श्रद्धालुगण द्वारा सहर्ष उल्लास के साथ प्रतिभाग किया गया I सम्पूर्ण धाम का वातावरण उत्सवमय रहाI भगवान श्री कृष्ण की लड्डू गोपाल स्वरुप बाल लीलाओं में माता के ममत्व का सार्वकालिक सर्वश्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत होता है। अतः मातृशक्ति स्वरूपा के साथ भगवान श्री लड्डू गोपाल के विराजमान होने का आज का दिन अतिविशिष्ट हैI आज के उत्सव में धाम पधारे अनेक श्रद्धालुओं विशेष कर माताओं ने उत्साह पूर्वक लड्डू गोपाल की शोभायात्रा में भगवान को अपने आंचल में, माथे पर और गोद में ले कर यात्रा में प्रतिभाग भी किया। श्री काशी विश्वनाथ धाम में पहली बार आयोजित हो रहे लड्डू गोपाल के छः दिवसीय महोत्सव में लोक प्रतिभागिता एवम श्रद्धालुओं का सहज जुड़ाव इतना नैसर्गिक है कि पांचवे दिन तक यह लोक उत्सव में परिवर्तित हो चला है। कल भगवान लड्डू गोपाल श्री काशी विश्वनाथ जी की मध्यान्ह भोग आरती में सम्मिलित हो भगवान् विश्वनाथ के साथ प्रसाद ग्रहण करेंगे I तत्पश्चात सायं 5 बजे सत्यनारायण भगवान् के मंदिर में भगवान श्री लड्डू गोपाल की विशिष्ट अराधना कर उनके विष्णु स्वरुप होने का अनुष्ठान सम्प्पन्न किया जायेगा। भगवान् श्री हरि विष्णु लड्डू गोपाल विग्रह से विष्णु स्वरुप हो पुनः श्री हरि सत्यनारायण के विष्णु स्वरुप में धाम में विराजमान रहेंगे। भगवान् से यह प्रार्थना की जाएगी कि अगले वर्ष श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर पुनः लड्डू गोपाल स्वरुप में इसी प्रकार उत्सव, मंगल एवं कल्याण का आशीर्वाद भक्तों को प्रदान करने के लिए लड्डू गोपाल स्वरुप धारण कर समस्त भक्तों को कृतार्थ करें।
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