छल, कपट, लोभ, ईर्ष्या, भय आदि इंसान की फितरत है...
ज़रूरतमंदों के काम आना, गलत होता देख रोकने का प्रयास करना, इंसानों को इन बेजुबानों से सीखना चाहिए...
ज़रा पाने की चाहत में..
बहुत कुछ छूट जाता है,
न जाने सबर का धागा..
कहाँ पर टूट जाता है,
किसे हमराह कहते हो..
यहाँ तो अपना साया भी..
कहीं पर साथ रहता है
कहीं पर छूट जाता है... :)
हिंदी को हमारी नहीं, हमें हिंदी की जरूरत हैं
हम हिंदी नहीं बचाएंगे, हिंदी हमें बचायेगी
घर में मातृभाषा बोलिये,
बच्चों से मातृभाषा में बात कीजिये
मातृभाषा आ जाए, फिर कितनी भी भाषाएं सिखाइये
आंखे हैं तो कितने भी अलग अलग चश्मे लगा सकते हैं
#हिंदी_दिवस