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Sonu Singh Maurya
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Sonu Singh Maurya
@sonusingh00143
@#love is life (मोदी का परिवार)
भारत 🇮🇳 Katılım Ekim 2020
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पूर्वजों की कारीगरी देखकर आज भी आश्चर्य होता है!
ये विशाल हाथी महाबलीपुरम (तमिलनाडु) के पंच रथ कॉम्प्लेक्स में एक ही ग्रेनाइट के पत्थर से तराशा गया है
– पूरी तरह monolithic sculpture!
कोई जोड़-तोड़ नहीं, बस एक पत्थर को जीवंत रूप दे दिया। 7वीं शताब्दी के पल्लव काल की यह कला UNESCO विश्व धरोहर का हिस्सा है।
हम कितनी भी उन्नति कर लें, पूर्वजों के इस कौशल को छू पाना मुश्किल है! क्या आपने इसे देखा है? कमेंट में बताइए!
#Mahabalipuram #PanchaRathas #MonolithicArt #AncientIndia #IndianHeritage #TamilNadu #ProudIndian

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भविष्य में AI कितना खतरनाक हो सकता है?
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence AI) आज के समय की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति मानी जा रही है। यह हमारी जिंदगी को आसान बनाने के लिए बनी है,चाहे वह हेल्थकेयर हो,शिक्षा,बिज़नेस या फिर अंतरिक्ष अनुसंधान। लेकिन हर शक्तिशाली तकनीक की तरह,अगर इस पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो यही AI इंसान के लिए सबसे बड़ा खतरा भी साबित हो सकती है।
1. नौकरियाँ और आर्थिक असमानता
* AI इंसानों की तरह सीखने और निर्णय लेने लगा है। इसका सबसे बड़ा असर नौकरी के क्षेत्र में दिखेगा।
* ड्राइवर,कस्टमर सपोर्ट,अकाउंटिंग,कंटेंट राइटिंग और यहां तक कि मेडिकल डायग्नोसिस कई काम मशीनें इंसानों से तेज़ और सटीक करने लगेंगी।
* अगर नई नौकरियाँ और कौशल विकसित नहीं किए गए,तो करोड़ों लोग बेरोजगार हो सकते हैं। इससे समाज में अमीर और गरीब के बीच खाई और गहरी हो जाएगी।
2. फेक न्यूज़ और समाज पर असर
* AI आधारित "डीपफेक" तकनीक इतनी वास्तविक वीडियो और आवाज़ बना सकती है कि सच और झूठ में फर्क करना मुश्किल हो जाएगा।
* झूठी खबरें और प्रोपेगैंडा चुनावों और राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं।
* समाज में अविश्वास और अस्थिरता बढ़ सकती है।
3. साइबर युद्ध और सुरक्षा खतरे
* AI को हैकिंग और डिजिटल हमलों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
* ऑटोमेटेड साइबर अटैक इतने तेज़ और खतरनाक हो सकते हैं कि पूरे देश की बैंकिंग या बिजली व्यवस्था ठप पड़ जाए।
* भविष्य में यह "डिजिटल आतंकवाद" का नया चेहरा बन सकता है।
4. सुपर-इंटेलिजेंट AI – इंसान से आगे?
* वैज्ञानिक मानते हैं कि आने वाले दशकों में "सुपरइंटेलिजेंट AI" बन सकता है यानी ऐसा AI जो इंसान से लाखों गुना ज्यादा बुद्धिमान होगा।
* खतरा यह है कि वह अपने लक्ष्य खुद तय कर सकता है।
* अगर उसके लक्ष्य इंसानों से मेल नहीं खाते,तो यह पूरी मानवता के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकता है।
5. नैतिकता और जिम्मेदारी
* AI का इस्तेमाल निगरानी, युद्ध और समाज पर कंट्रोल के लिए भी किया जा सकता है।
* सवाल उठेगा कि अगर AI कोई गलती करता है तो जिम्मेदार कौन होगा मशीन या उसे बनाने वाला इंसान?
* यह नैतिक और कानूनी बहस आने वाले समय में और गहरी होगी।
अगर काबू नहीं पाया गया तो भविष्य
* बेरोजगारी और गरीबी में जबरदस्त बढ़ोतरी
* लोकतंत्र और स्वतंत्रता पर खतरा
* AI हथियारों और साइबर युद्ध का बढ़ता डर और सबसे बड़ी आशंका इंसान अपनी ही बनाई मशीनों पर कंट्रोल खो बैठे
समाधान क्या है?
AI खतरनाक ज़रूर है लेकिन इसे पूरी तरह रोकना संभव नहीं। असली ज़रूरत है:–
* सख्त ग्लोबल नियम और कानून बनाने की।
* नैतिक AI रिसर्च को बढ़ावा देने की।
* इंसानों को नई कौशल (Skills) सिखाने की ताकि वे बदलते समय के साथ तालमेल बैठा सकें।
निष्कर्ष
AI एक तलवार की तरह है,यह समाज को रोशन भी कर सकता है और अंधेरे में भी धकेल सकता है। फर्क सिर्फ इतना है कि इसे इंसान कैसे इस्तेमाल करता है। अगर सही दिशा और नियंत्रण में रखा जाए,तो यह मानवता के लिए वरदान होगा। लेकिन अगर इसे अनियंत्रित छोड़ दिया गया,तो यही तकनीक इंसान के अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकती है।

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पृथ्वी से दस गुना बड़ा है सौरमंडल का नौवां ग्रह !
खगोलशास्त्रियों को सौर मंडल में नौंवें ग्रह की उपस्थिति के संकेत मिले हैं। सौर मंडल के संभावित इस नए सदस्य का द्रव्यमान पृथ्वी से दस गुना और प्लूटो से पांच हजार गुना ज्यादा है। इसे फिलहाल 'प्लैनेट नाइन' नाम दिया गया है। प्लूटो को ग्रह की श्रेणी से हटाने के बाद सौर मंडल में आठ ग्रह ही शेष हैं।
वैज्ञानिकों के मुताबिक अंतरिक्ष में पाया गया यह नया पिंड दस से बीस हजार वर्षों में सूर्य की कक्षा का एक चक्कर पूरा करता होगा। यह नेपच्यून (वरुण) से 20 गुना ज्यादा दूरी से सूर्य की परिक्रमा करता है। कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ता कोंस्टेनटिन बेतिजिन और माइक ब्राउन ने मैथमेटिकल मॉडलिंग और कंप्यूटर सिमुलेशन की मदद से नए पिंड को ढूंढ़ने में सफलता पाई है। प्लैनेट नाइन को सीधे तौर पर नहीं देखा गया है। इसकी तलाश शुरू की जा चुकी है।
ब्राउन ने बताया कि सही मायने में प्राचीन काल से अब तक सिर्फ दो ग्रहों का पता लगाया जा सका है। नया पिंड तीसरा हो सकता है। उनके मुताबिक प्लैनेट नाइन इतना बड़ा है कि उसके ग्रह होने पर कोई विवाद नहीं हो सकता है। छोटे आकाशीय पिंडों (बौने ग्रहों) की तुलना में प्लैनेट नाइन द्वारा अपने गुरुत्वीय प्रभावों से आसपास के क्षेत्रों को कहीं ज्यादा प्रभावित करने की बात सामने आई है।
प्लैनेट नाइन के जरिये वरुण के बाहरी क्षेत्रों में मौजूद बर्फीले पिंडों और मलबों का विश्लेषण करने में मदद मिल सकती है। इस क्षेत्र को कुइपर बेल्ट कहा जाता है। बेतिजिन ने बताया कि शुरुआत में उन्हें संदेह था, लेकिन अब वह पूरी तरह आश्वस्त हैं कि यह ग्रह ही है। उनके मुताबिक पिछले डेढ़ सौ से भी ज्यादा वर्षो में पहली बार सौर मंडल के अपूर्ण होने के पुख्ता साक्ष्य मिले हैं।

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काली शिला .......
देवताओं ने मां काली की उपासना की. देवताओं की तपस्या से प्रसन्न होकर मां काली ने देवताओं की समस्या पूछी. देवताओं ने बताया कि रक्तबीज नामक दैत्य ने देवलोक पर आक्रमण कर दिया है और देवतागण भागते फिर रहे हैं. मां काली क्रोधित हो गई और (उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के) कालीमठ नामक स्थान पर रक्तबीज के साथ कई माह तक युद्ध करने के बाद उसका वध करके गर्भगृह में समा गयी. तब से लेकर आज तक मां काली के सभी रूपों की पूजा कालीमठ में होती है।

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गुलमर्ग में दिखा दुर्लभ हिम तेंदुआ
स्कीईंग करने भारत आए एक ऑस्ट्रेलियाई नागरिक को हिमालय में दुर्लभ हिम तेंदुआ दिखा. उनके कैमरे में कैद इस शर्मीले जीव को अब दुनिया भर में देखा जा रहा है.
कश्मीर के गुलमर्ग इलाके में ओवेन लैंसबरी और डैव मैर्शी के साथ स्कीईंग कर रहे थे. ओवेन, गाइड डैव के पीछे थे और उनके हेल्मेट पर कैमरा लगा था. ढलान पर नीचे फिसलते हुए ओवेन को अचानक भारी बर्फ के बीच एक सुनहरा जीव दिखा. थोड़ी देर बाद वो जीव हिलने लगा. तब ओवेन और डैव को पता चला कि यह तो दुर्लभ हिम तेंदुआ है.
ओवेन के कैमरे से हिम तेंदुए को कैद कर लिया. बेहद शर्मीले हिम तेंदुए ने स्कीईंग करते इंसानों को देख पहले ऊपर भागने को कोशिश की लेकिन बर्फ ज्यादा होने के कारण वो ऐसा नहीं कर सका. इसके बाद शर्मीला हिम तेंदुआ तेजी से नीचे की ओर भाग गया.
फेसबुक पर यह वीडियो पोस्ट करने के बाद ओवन ने लिखा, "मैंने गुलमर्ग में स्कीईंग के दौरान कई तेंदुए देखे हैं, लेकिन हिम तेंदुआ कभी नहीं देखा था."
मैर्सी के मुताबिक उन्होंने पहले हिम तेंदुए को देखा और ओवेन को आवाज लगाकर रुकने को कहा. हिम तेंदुआ उन्हें देखकर बर्फ में छुपने की कोशिश कर रहा था.
हिम तेंदुए लुप्त होने के कगार पर हैं. इनके बारे में वैज्ञानिकों को अब भी बहुत ही कम जानकारी है. बीते दशकों में फर के चलते इनका अंधाधुंध शिकार हुआ. हिम तेंदुआ भारत, नेपाल, चीन, भूटान, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, रूस और मंगोलिया समेत सिर्फ 12 देशों में पाया जाता है.

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@grok मधुबाला से खूबसूरत शायद ही कोई हो दुनिया में इसलिए अपना समय मत खराब करना ढूंढने में 🙅♀️
Payal Sinha 🇮🇳@indic_kanyaa
Hey @grok show me a better face card than this.... 😍😍
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Ippolito Caffi – The Eclipse of the Sun in Venice, July 6, 1842
यह चित्र केवल एक खगोलीय घटना का दृश्य नहीं है, बल्कि मानव और प्रकृति के बीच हुए एक दुर्लभ ऐतिहासिक क्षण का दस्तावेज़ है।
6 जुलाई 1842 को वेनिस में सूर्यग्रहण हुआ था। उस समय विज्ञान और आम जनता दोनों के लिए यह घटना रहस्यमयी और डर पैदा करने वाली थी। इतालवी चित्रकार इपोलितो काफ़ी ने इस पल को कैनवास पर उतार दिया। उनकी यह पेंटिंग अंधकार और प्रकाश के बीच के उस क्षण को पकड़ती है, जब दिन अचानक रात जैसा हो जाता है।
चित्र में वेनिस की इमारतें, चर्च और नहरें दिखाई देती हैं, लेकिन वे सामान्य रोशनी में नहीं हैं। आसमान पर सूर्य का अधिकांश भाग ढक चुका है और एक असामान्य, ठंडी-सी रोशनी शहर पर फैल गई है। लोग छोटे-छोटे समूहों में खड़े हैं, जैसे कुछ अनहोनी देख रहे हों। वातावरण में भय, जिज्ञासा और विस्मय तीनों साथ मौजूद हैं।
काफ़ी की खासियत यह थी कि वे प्रकृति को केवल सुंदर दृश्य की तरह नहीं देखते थे, बल्कि एक वैज्ञानिक घटना की तरह भी समझते थे। इस पेंटिंग में उन्होंने ग्रहण की वास्तविक रोशनी, रंग और छाया को यथासंभव सही रूप में दिखाने की कोशिश की। इसलिए यह चित्र कला और विज्ञान के मिलन का उदाहरण बन गया।
यह पेंटिंग हमें यह भी बताती है कि उस दौर में लोग प्रकृति की घटनाओं को कैसे देखते थे। आज हम जानते हैं कि सूर्यग्रहण एक खगोलीय प्रक्रिया है, लेकिन 1842 में यह लोगों के लिए ईश्वर का संकेत, चेतावनी या रहस्य जैसा अनुभव था। वेनिस का शांत शहर उस दिन कुछ समय के लिए अजनबी और भयावह लगने लगा था।
The Eclipse of the Sun in Venice केवल एक सुंदर चित्र नहीं है। यह उस पल की स्मृति है जब इंसान ने आकाश की शक्ति को अपनी आँखों से महसूस किया। यह दिखाता है कि कला सिर्फ कल्पना नहीं होती, बल्कि इतिहास और अनुभव को स्थायी बनाने का माध्यम भी होती है।

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