Sourabh Behera
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कौन किसको इंटरव्यू देगा वह खुद तय कर रहा है क्योंकि इंटरव्यू देने वाला अपनी सहजता, पब्लिसिटी और प्रोपगेंडा के लिए लार्जर स्पेस चाहता है। पुतिन को किसको इंटरव्यू देना है वह खान सर नहीं तय करेंगे और मैक्रॉन ने U ट्यूब पर इंटरव्यू किसे दिए वह उनकी मर्जी है।




देश के इन हालातों के लिए इस देश की मीडिया पूरी तरह जिम्मेदार है जिसने सत्ता की एक तरफा तरफदारी की और विपक्ष और देश के मुद्दों पर सवाल करने वालों को दुश्मन की तरह पेश किया। आज YouTube मीडिया जर्नलिस्ट तक TV मीडिया को गलत कहते और रोस्ट करते दिख जाएंगे... आज back to back paper leak हो रहे हैं, परीक्षाएँ cancel हो रही हैं, सरकार back foot पर है, असहाय महसूस कर रही है, मगर TV मीडिया और उनके so called बड़े anchors इस दर्द को अपना दर्द मानकर सरकार को बचाने के लिए बौखलाहट में कुछ भी बयान दे रहे हैं।नैतिकता भी कोई चीज़ होती है.... जैसा अंजना ने इस व्यवस्था में सबसे बड़ा दोषी YouTube Teachers को बता दिया और 2 कौड़ी तक का कह दिया.....यदि किसी व्यक्ति विशेष से असहमति थी तो उसका नाम लेकर आलोचना करती। इसके लिए India Today @aroonpurie को और अंजना को सार्वजनिक स्पष्टीकरण और माफ़ी जारी करनी चाहिए, India Today के हर platform का boycott होना चाहिए और किसी भी शिक्षक को कभी वहाँ नहीं जाना चाहिए। हमें 2 कौड़ी का कह देना उन छात्र समुदाय के दिल पर भी आघात है जो हमें गुरु मानते हैं... अगर आज आप अपने घर में पढ़ रहे बच्चों से... सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे बच्चों से पूछेंगे, तो हमारे योगदान को आपको बता पाएंगे... पिछले 10 वर्षों से गणित पढ़ाने के साथ मैं बेरोज़गारी, भर्ती प्रक्रिया की खामियों, पेपर लीक और छात्रों के अधिकारों की लड़ाई भी लड़ रहा हूँ।






मासूम बच्चे और उनके माता-पिता की गाढ़ी मेहनत की कमाई का पैसा लूटने वाले कुछ कोचिंग सेंटर के सेलिब्रिटी टीचर्स आज भाड़े के वीडियो बना बनाकर ज्ञान दे रहे हैं। सार्वजनिक रूप से महिलाओं को गाली देने वाले, उनकी नक़ल उतारने वाले ये छिछले यूट्यूबर बच्चों की कड़ी मेहनत पर अपनी दुकान सजाते हैं। असल हीरो बच्चे हैं, ये माँ बाप की मेहनत की कमाई के लुटेरे कितना भी कूदें, देशभर के बच्चों को live जोड़कर हमने पेपर लीक के पिड़ित बच्चों को आवाज़ दी तो इनके स्टारडम को बड़ा धक्का लगा है! शिक्षा को धंधा बनाने वालों को दर्द हो तो अच्छा है।वैसे कोचिंग माफिया के खिलाफ मेरा विडियो वायरल करने के लिए धन्यवाद! मेरे शो पर सभी panelist ने बोला कि कोचिंग माफिया पर नकेल कसी जाए।



















जिसने वर्षों तक पत्रकारिता को TRP, प्रोपेगेंडा और सत्ता के पक्ष-विपक्ष की लड़ाई में बदल दिया हो, उसे शिक्षकों को 'धंधेबाज' कहने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए। शिक्षा में गलत लोग भी हैं। लेकिन पत्रकारिता में भी हैं। राजनीति में भी हैं। व्यापार में भी हैं। तो क्या कुछ गलत लोगों के कारण पूरे शिक्षक समाज को "दो कौड़ी का" कह दिया जाएगा? anjana शिक्षक का सम्मान कमाने में वर्षों लगते हैं। भर्तियाँ अटक रही थीं, लाखों युवाओं की उम्र निकल रही थी, तब आपके स्टूडियो की आवाज़ कहाँ थी? शिक्षकों ने पैसे लेकर शिक्षा दी है। लेकिन पैसे लेकर किसी राजनीतिक दल का प्रवक्ता बन जाना, व्यवस्था की हर गलती पर पर्दा डालना, और जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाना... यह सिर्फ पत्रकारिता का पतन नहीं, बल्कि अपने पेशे के साथ गद्दारी है। शिक्षक फीस लेकर ज्ञान देता है, मेहनत करवाता है, बच्चे का भविष्य बनाता है शिक्षकों ने पैसे लेकर पढ़ाया है, देश के लाखों युवाओं को रोजगार तक पहुँचाया है। लेकिन गलत को सही और सही को गलत साबित करने की कीमत लेकर काम करना, समाज और लोकतंत्र दोनों के साथ विश्वासघात किसने किया ?




