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Kabhi bhi @flipkart @flipkartsupport se koi v cheez na khride bina cancle kiye order cancle kr diya gaya

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@flipkartsupport Please share customer care support executive number
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#flipkart I have order one item tday is my cpd.but item is not out for delivery yet
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अतः आपसे आग्रह है कि इस मामले को संज्ञान में लेकर उचित निर्णय ले। जिसके लिए इस विद्यालय के हम सभी पेरेंट्स आपका सदा आभारी रहेंगे।
जोहार।।#DC_Palamu
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@Dc_Palamu मैम
झारखंडी जोहार
मैं आपको मेदिनिरॉय पब्लिक स्कूल जो कि ग्राम - पोलपोल थाना - सतबरवा मेदिनीनगर पलामू में स्थित है, कि ओर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। यहां हर वर्ष पुराने बुक को बदलकर नए बुक ला लाकर पेरेंट्स को आर्थिक रूप से कमजोर किया जा रहा है। अतः आपसे आग्रह है
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सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल है. पति ने दिहाड़ी मजदूरी कर के अपनी पत्नी को पढ़ाया लिखाया.
पत्नी की फायर ब्रिगेड में नौकरी लगी. पत्नी फायर ब्रिगेड डिपार्टमेंट में ही गैर-पुरुष से नाजायज संबंध बनाने लगी.
खबर बिहार के वैशाली जिले की है. पति ने रंगेहाथों दोनों को पकड़ा. पति के आते ही पत्नी ने फटाफट यूनिफॉर्म पहन लिया और प्रेमी को खाट के नीचे छुपा दिया.
पति ने पत्नी के प्रेमी से कहा बाहर आ जाओ, तुम दोनों का भेद खुल गया है. पूरी मानव सभ्यता शादी नाम के मजबूत इंस्टीट्यूशन पर टिकी है. शादी के पवित्र बंधन को बदनाम नही करना चाहिए.
घुटन है या कोई समस्या है या कोई पसंद आ गया है तो पहले शादी को खत्म करो फिर दूसरे से जितना पलंग तोड़ करना है करो, कोई नही रोकेगा और टोकेगा.


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@congressmahabir @HemantSorenJMM Inlog whi h jinke bache berojgaar h or 1000 maiya saman yojna k labh lekar khus h
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@HemantSorenJMM अबुआ आवास एवं सम्मान योजना ने ये सिद्ध किया है की आप वास्तविक झारखंडी माटी के कोहिनूर है,माता बहनों के आंखों में हमने आपके प्रति जो विश्वास देखा है,स्पष्ट है की आप फिर से मुख्यमंत्री बनेंगे और करोड़ों झारखंडियों के सपने को पूरा करेंगे।
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भाजपा के षड्यंत्र, साजिश और तमाशों को राज्य में सरकार बनने के बाद से मैं देख रहा हूँ। और हर बार ईस्ट इंडिया कंपनी के इन वंशजों को करारा जवाब भी दिया है।
इन्होंने मुझे तोड़ने की कोशिश की, इनसे हो न सका। इन्होंने मुझे झुकाने की कोशिश की, झारखण्ड को झुकाने की कोशिश की, इनसे हो न सका।
क्यूंकि झारखण्ड की मेरी करोड़ों जनता का भरोसा और उम्मीद मुझे हर षड्यंत्र और साजिशों से लड़ने की ताकत देता है। जनता का आशीर्वाद ही मेरी हिम्मत, मेरी ताकत है।

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@AvPakad @ChampaiSoren Hemant Soren ko jaankr hi aap kya kr diye
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@ChampaiSoren अगर हेमंत सोरेन अपनी पत्नी को सीएम बना दिया होता तो कितने लोग आज चंपई सोरेन को जानते होते.....????वफादारी और विश्वास इस युग में बहुत ही कीमती चीज है। लोग विश्वास करने पर तुरंत पीठ में छुरा मारते हैं।।

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जोहार साथियों,
आज समाचार देखने के बाद, आप सभी के मन में कई सवाल उमड़ रहे होंगे। आखिर ऐसा क्या हुआ, जिसने कोल्हान के एक छोटे से गांव में रहने वाले एक गरीब किसान के बेटे को इस मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया।
अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत में औद्योगिक घरानों के खिलाफ मजदूरों की आवाज उठाने से लेकर झारखंड आंदोलन तक, मैंने हमेशा जन-सरोकार की राजनीति की है। राज्य के आदिवासियों, मूलवासियों, गरीबों, मजदूरों, छात्रों एवं पिछड़े तबके के लोगों को उनका अधिकार दिलवाने का प्रयास करता रहा हूं। किसी भी पद पर रहा अथवा नहीं, लेकिन हर पल जनता के लिए उपलब्ध रहा, उन लोगों के मुद्दे उठाता रहा, जिन्होंने झारखंड राज्य के साथ, अपने बेहतर भविष्य के सपने देखे थे।
इसी बीच, 31 जनवरी को, एक अभूतपूर्व घटनाक्रम के बाद, इंडिया गठबंधन ने मुझे झारखंड के 12वें मुख्यमंत्री के तौर पर राज्य की सेवा करने के लिए चुना। अपने कार्यकाल के पहले दिन से लेकर आखिरी दिन (3 जुलाई) तक, मैंने पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ राज्य के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया। इस दौरान हमने जनहित में कई फैसले लिए और हमेशा की तरह, हर किसी के लिए सदैव उपलब्ध रहा। बड़े-बुजुर्गों, महिलाओं, युवाओं, छात्रों एवं समाज के हर तबके तथा राज्य के हर व्यक्ति को ध्यान में रखते हुए हमने जो निर्णय लिए, उसका मूल्यांकन राज्य की जनता करेगी।
जब सत्ता मिली, तब बाबा तिलका मांझी, भगवान बिरसा मुंडा और सिदो-कान्हू जैसे वीरों को नमन कर राज्य की सेवा करने का संकल्प लिया था। झारखंड का बच्चा- बच्चा जनता है कि अपने कार्यकाल के दौरान, मैंने कभी भी, किसी के साथ ना गलत किया, ना होने दिया।
इसी बीच, हूल दिवस के अगले दिन, मुझे पता चला कि अगले दो दिनों के मेरे सभी कार्यक्रमों को पार्टी नेतृत्व द्वारा स्थगित करवा दिया गया है। इसमें एक सार्वजनिक कार्यक्रम दुमका में था, जबकि दूसरा कार्यक्रम पीजीटी शिक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरण करने का था। पूछने पर पता चला कि गठबंधन द्वारा 3 जुलाई को विधायक दल की एक बैठक बुलाई गई है, तब तक आप सीएम के तौर पर किसी कार्यक्रम में नहीं जा सकते।
क्या लोकतंत्र में इस से अपमानजनक कुछ हो सकता है कि एक मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों को कोई अन्य व्यक्ति रद्द करवा दे? अपमान का यह कड़वा घूंट पीने के बावजूद मैंने कहा कि नियुक्ति पत्र वितरण सुबह है, जबकि दोपहर में विधायक दल की बैठक होगी, तो वहां से होते हुए मैं उसमें शामिल हो जाऊंगा। लेकिन, उधर से साफ इंकार कर दिया गया।
पिछले चार दशकों के अपने बेदाग राजनैतिक सफर में, मैं पहली बार, भीतर से टूट गया। समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं। दो दिन तक, चुपचाप बैठ कर आत्म-मंथन करता रहा, पूरे घटनाक्रम में अपनी गलती तलाशता रहा। सत्ता का लोभ रत्ती भर भी नहीं था, लेकिन आत्म-सम्मान पर लगी इस चोट को मैं किसे दिखाता? अपनों द्वारा दिए गए दर्द को कहां जाहिर करता?
जब वर्षों से पार्टी के केन्द्रीय कार्यकारिणी की बैठक नहीं हो रही है, और एकतरफा आदेश पारित किए जाते हैं, तो फिर किस से पास जाकर अपनी तकलीफ बताता? इस पार्टी में मेरी गिनती वरिष्ठ सदस्यों में होती है, बाकी लोग जूनियर हैं, और मुझ से सीनियर सुप्रीमो जो हैं, वे अब स्वास्थ्य की वजह से राजनीति में सक्रिय नहीं हैं, फिर मेरे पास क्या विकल्प था? अगर वे सक्रिय होते, तो शायद अलग हालात होते।
कहने को तो विधायक दल की बैठक बुलाने का अधिकार मुख्यमंत्री का होता है, लेकिन मुझे बैठक का एजेंडा तक नहीं बताया गया था। बैठक के दौरान मुझ से इस्तीफा मांगा गया। मैं आश्चर्यचकित था, लेकिन मुझे सत्ता का मोह नहीं था, इसलिए मैंने तुरंत इस्तीफा दे दिया, लेकिन आत्म-सम्मान पर लगी चोट से दिल भावुक था।
पिछले तीन दिनों से हो रहे अपमानजनक व्यवहार से भावुक होकर मैं आंसुओं को संभालने में लगा था, लेकिन उन्हें सिर्फ कुर्सी से मतलब था। मुझे ऐसा लगा, मानो उस पार्टी में मेरा कोई वजूद ही नहीं है, कोई अस्तित्व ही नहीं है, जिस पार्टी के लिए हम ने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। इस बीच कई ऐसी अपमानजनक घटनाएं हुईं, जिसका जिक्र फिलहाल नहीं करना चाहता। इतने अपमान एवं तिरस्कार के बाद मैं वैकल्पिक राह तलाशने हेतु मजबूर हो गया।
मैंने भारी मन से विधायक दल की उसी बैठक में कहा कि - "आज से मेरे जीवन का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है।" इसमें मेरे पास तीन विकल्प थे। पहला, राजनीति से सन्यास लेना, दूसरा, अपना अलग संगठन खड़ा करना और तीसरा, इस राह में अगर कोई साथी मिले, तो उसके साथ आगे का सफर तय करना।
उस दिन से लेकर आज तक, तथा आगामी झारखंड विधानसभा चुनावों तक, इस सफर में मेरे लिए सभी विकल्प खुले हुए हैं।
आपका,
चम्पाई सोरेन
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