Suraj Shukla
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Suraj Shukla
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विकसित भारत और 'लेट-लतीफी' एक साथ नहीं चल सकते! 🚩 कल कन्नौज के रोमा मंच पर आयोजित कार्यक्रम में एक कड़वा अनुभव हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में नियत समय पर पहुँचने के बावजूद, मेजबान अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण 45 मिनट तक प्रतीक्षा करनी पड़ी और अंततः मुझे वहां से प्रस्थान करना पड़ा। यह विषय किसी 'मंत्री' के व्यक्तिगत अपमान का नहीं है। प्रश्न गहरा है: ❓ यदि मुख्य अतिथि मैं न होता, तो क्या इस देरी की गंभीरता कम हो जाती? ❓ क्या हर नागरिक के समय का मूल्य समान नहीं है? ❓ क्या पद पर बैठे व्यक्तियों को दूसरों का समय नष्ट करने का नैतिक अधिकार है? मेरे कई साथी और मित्र इस घटना पर प्रदर्शन या आंदोलन की इच्छा जता रहे हैं, लेकिन मुझे लगता है जिलाधिकारी द्वारा मिलकर माफी मांगने और लिखित रुप में खेद व्यक्त करने के बाद इसकी आवश्यकता नहीं है। आवश्यकता है इस घटना से एक बड़ा सबक लेने की। यदि हमें 'विकसित भारत' बनाना है, तो हमें अपनी कार्य-संस्कृति से अधकच्चेपन और लापरवाही को तुरंत त्यागना होगा। समयबद्धता (Punctuality) को हमें अपने DNA में उतारना होगा। हमें जापान, जर्मनी और स्विट्जरलैंड जैसे देशों के नागरिकों की तरह समय का पाबंद बनना होगा—धीरे-धीरे नहीं, बल्कि 'एक झटके में'। हमारे पास प्रेरणा के जीवंत उदाहरण मौजूद हैं: 📍 प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, जिनके आवागमन से लोग अपनी घड़ियाँ मिला सकते हैं। 📍 मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी, जो सदैव समय पर पहुँचकर अनुशासन का मानक स्थापित करते हैं। हमें अपने नेतृत्व से प्रेरणा लेकर इस सांस्कृतिक परिवर्तन को धरातल पर लाना होगा। विकसित देश बनने की पहली शर्त विकसित नागरिक बनना है। आपके विचार क्या हैं? क्या आपने भी कभी ऐसी 'लेट-लतीफी' का कष्ट झेला है? विकसित देशों जैसी समयबद्धता भारत में लाने के लिए हमें व्यक्तिगत और प्रशासनिक स्तर पर और क्या कदम उठाने चाहिए? अपने अनुभव और सुझाव जरूर साझा करें। 👇

पेट्रोल-डीजल के लिए जद्दोजहद..बस कतार देखिए..हर कोई टंकी फुल करवा रहा है..इसलिए और अफ़रा-तारीफ़ बढ़ रही है..धैर्य रखने की भी ज़रूरत है..!! रात 12:25 बजे 📍मुंशीपुलिया, लखनऊ

ये बस्ती जिला है.. जहां पत्रकार वैदिक द्विवेदी पेट्रोल-डीजल किल्लत को लेकर हालत बता रहे हैं, तभी पेट्रोल पंप वाले आये और गालियाँ देकर उन पर टूट पड़े हेलो @bastipolice ये बस्ती जिला भारत में है या तालिबान में..कोई इतना मनबढ़ कैसे हो सकता है..इन बेअंदाज़ लोगों का इलाज करने के बजाए शिकायत दर्ज करायें जैसा अलाप कर रहे हो..!!





