Ⓜ️r. Yadav 🇮🇳
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@ImranSi89243976 @AnilYadavmedia1 Abe tum log gali to dete hi ho.. usne sach bol diya to mirchi kyo lag rhi hai .. puri duniya me tum logo ne naam kama rakha hai .. or bhart ko badnam kar rakha h
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@AnilYadavmedia1 Eh nafrat pattalkar kya ghant insaaf karenge eh bh@sdiwale muslim ke dushman aur sanghi hain
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ये कोई मनीष झा है,
TV 9 का रिपोर्टर है, इजराइल गया हुआ है
War Reporting करने,
इजराइल में एक लड़की इसे रोक लेती है,
इससे पूछताछ करती है,
इसकी सिट्टी पिट्टी गुम हो जाती है,
लड़की कहती है कि मेरी इंस्टाग्राम ID पर Indian लोग मुझे गाली देते हैँ,
ये कहता है कि,
Indian लोग इजराइल को प्यार करते हैँ,
जो तुम्हें गाली देते हैँ वो इंडिया के मुसलमान लोग हैँ,


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🚨 MISSING – URGENT HELP NEEDED 🚨
My wife Sushma and our two children, Anaya and Pradyumn, are missing.
They were travelling from Bangalore to Delhi on 25th of march from Karnataka express ( Train no 12627). They boarded the train but did not reach New Delhi. @AshwiniVaishnaw




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@Kanchanyadav000 फिर चारा चोर सजा पाने के बाद भी घर में क्यों बैठा है?? उत्तर दो राजद की तोतली प्रवक्ता ?
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@ShivAroor Indian media and #modi are currently having sleepless nights 😅
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@arifomar007 @AnilYadavmedia1 😂🤪😂🤪😛😂😛😂😛😂😛😆😂😆😂😛😂🤪😆😆🤪😆🤪🤪😆😛😛😂🤪🤪😂🤪🤪😂😆😂😛🤪😂😛😆😛😘🤪😂🤪😂🤪😂🤪😂🤪😂😀😂😛😆🤪😆🤪😆🤪😆😛😂😛😆😆😆😂😂😛😂😛😛😛😛😛😛😛😛😛😛😛😛😛😛😛😛😛😛😛😂😂😂😂😂😂🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣
QME

@AnilYadavmedia1 मुसलमान ईमानदार होते ही है । ये हमारा इस्लाम सिखाता है ।
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@AnilYadavmedia1 वाह बड़ा नेक बन्दा है अनिल भाई
आप ने बड़ी कबाड़ और सेकुलर टाइप कहानी लिखी है।
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@umashankarsingh आप की दो कौड़ी की औकात नहीं है। सर बक्चोदी मत किया करो। 😂😂
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@DrLaxman_Yadav आवा करियां बाबू लाड्ड चाट ला अकलेश का चाट के छिल देहले हाऊआ!
लालू के चरवाहा विद्यालय से पास आउट बैल बुद्धि करियां अब जाति जनगणना से समाज में और जहर घोलेगा।
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“आवा लक्ष्मण बाबू, किताब के लिए बहुत बधाई। बहुत सुने हैं तोहरे बारे में। लड़ाई जारी रखिहा।”
मेरी किताब ‘जाति जनगणना’ उस जननेता के हाथों में, जिनके स्वप्न, संघर्ष और राजनीतिक हस्तक्षेपों ने इस देश में सामाजिक न्याय की ऐसी अनगिनत रचनात्मक संभावनाओं को जन्म दिया। कल पटना में मेरी किताब पर एक पुस्तक परिचर्चा आयोजित है; उस बिहार की राजधानी में, जिसकी मिट्टी ने सामाजिक न्याय, समाजवादी चेतना और बहुजन राजनीति के अनेक निर्णायक अध्याय लिखे हैं।
उसी आयोजन के सिलसिले में एक शाम पहले पटना पहुँचा, तो मन में सबसे पहले यही इच्छा उठी कि अगर इस किताब को आदरणीय लालू प्रसाद जी तक पहुँचा पाऊँ, तो यह सिर्फ़ एक औपचारिक भेंट नहीं होगी, बल्कि उस वैचारिक-राजनीतिक परंपरा को सलाम होगा, जिसकी लंबी लड़ाइयों ने हम जैसे लोगों के लिखने-बोलने और हस्तक्षेप करने की ज़मीन तैयार की है।
पटना पहुँचते ही संपर्क किया, संदेश भिजवाया। थोड़ी ही देर में उधर से बुलावा आ गया। समय काफ़ी हो चुका था, लेकिन यह जानकर मन और भी भीग गया कि आदरणीय लालू जी इंतज़ार कर रहे थे। सामने पहुँचा तो उन्होंने अपने परिचित अपनापे और सहज आत्मीयता के साथ कहा— “आवा लक्ष्मण बाबू, किताब के लिए बहुत बधाई। बहुत सुने हैं तोहरे बारे में। लड़ाई जारी रखिहा।” यह सिर्फ़ एक वाक्य नहीं था; यह जैसे संघर्ष की एक पूरी परंपरा का हस्तांतरण था, एक पीढ़ी का दूसरी पीढ़ी के कंधे पर रखा हुआ भरोसेमंद हाथ।
उसके बाद जिस उत्सुकता, स्नेह और तल्लीनता से उन्होंने किताब को हाथ में लिया, उसे पलटा, देखा और अपने पास रखा वह क्षण मेरे लिए सिर्फ़ निजी खुशी का नहीं, बल्कि गहरे ऐतिहासिक अर्थ का क्षण था। लगा जैसे किताब के उन पन्नों में दर्ज शब्दों के भीतर वे अपने समय के संघर्ष, जनता की आकांक्षाएँ और सामाजिक न्याय की अब तक अधूरी परियोजना को फिर से प्राणवत्ता दे रहे हों।
हम जानते हैं कि कोई भी बौद्धिक व्यक्ति विचारों को व्यवस्थित करता है, उन्हें अपने समय के संघर्षों के अनुकूल नए रूप में ढालता है, दर्शन को स्पष्टता देता है, और कलम-किताब के माध्यम से उन्हें दस्तावेज़ी रूप में इतिहास के हवाले करता है। लेकिन एक जननेता वही विचार तब सचमुच इतिहास में बदलता है, जब वह उसे विश्वविद्यालयों, सेमिनारों और पुस्तकों की दुनिया से निकालकर आम जन के जीवन, दुख, ग़ुस्से, सपनों और राजनीतिक आकांक्षाओं से जोड़ देता है।
जब वह सड़क, संसद और सत्ता तीनों स्तरों पर लड़ते हुए राजनीति की धारा को मोड़ देता है, तब विचार सिर्फ़ विचार नहीं रह जाता, वह समाज बदलने की ठोस ताक़त बन जाता है। मेरे लिए आज का यह अनुभव ठीक वैसा ही था जैसे कलम अपने स्रोत से मिल रही हो, जैसे किताब अपने सामाजिक अर्थ की सार्थकता से और भर उठी हो।
‘जाति जनगणना’ पर लिखी गई यह किताब सिर्फ़ आँकड़ों, बहसों और नीतिगत विमर्शों का संकलन नहीं है; यह उस ऐतिहासिक सवाल का दस्तावेज़ है कि भारत जैसे समाज में जाति-आधारित गैर-बराबरी, प्रतिनिधित्व की असमानता, संसाधनों के बँटवारे में पक्षपात और सामाजिक अपमान के विरुद्ध न्याय का रास्ता कैसे निर्मित होगा।
जननायक कर्पूरी ठाकुर, बाबू जगदेव प्रसाद, बी.पी. मंडल की धरती पर लालू प्रसाद, शरद यादव, नीतीश कुमार और रामविलास पासवान का राजनीतिक दौर बहुत हद तक उसी ऐतिहासिक दिशा में आगे बढ़ा, जिसे इस किताब में दर्ज करने की कोशिश की गई है। यह दौर अपने अंतर्विरोधों, सीमाओं और उपलब्धियों के साथ सामाजिक न्याय की राजनीति का एक महत्वपूर्ण अध्याय रहा है।
उस पीढ़ी के एक बड़े नायक के हाथों में इस किताब को देखना, सच कहूँ, मेरे लिए किसी जीवित इतिहास से साक्षात्कार जैसा था। लगा कि किताब केवल पढ़े जाने की वस्तु नहीं रही, बल्कि वह अपने समय, अपने स्रोत और अपने संघर्षशील वंशक्रम से फिर जुड़ गई है। यह क्षण इसलिए भी भावुक कर देने वाला था, क्योंकि इसमें निजी संतोष से कहीं अधिक सामूहिक स्मृति और राजनीतिक उत्तराधिकार की चमक थी।
सामाजिक न्याय का संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है। न्याय, समता और समाजवाद की राह अभी अधूरी है। जाति जनगणना से लेकर प्रतिनिधित्व, शिक्षा, रोज़गार, भूमि, सत्ता-साझेदारी और गरिमा तक यह लड़ाई लंबी है, कठिन है, लेकिन ज़रूरी है। और जब तक यह समाज अपने सबसे वंचित, सबसे बहिष्कृत, सबसे दबे हुए लोगों के लिए बराबरी का घर नहीं बन जाता, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा। हम उसी संकल्प, उसी वैचारिक प्रतिबद्धता और उसी जनपक्षधर ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने का वचन दोहराते हैं।
इन तस्वीरों को साझा करते हुए मन गहरे आभार से भरा है। आदरणीय @laluprasadrjd जी का यह स्नेह, यह आत्मीयता, यह प्रोत्साहन और यह भरोसा मेरे लिए निजी रूप से बहुत मूल्यवान है; लेकिन उससे भी अधिक, यह उस विचारधारा और संघर्षधारा का सम्मान है, जिससे हम सब अपनी ताक़त लेते हैं। उनके प्रति हृदय से आभार।
संघर्ष ज़िंदा है।
स्वप्न ज़िंदा है।
सामाजिक न्याय की लड़ाई जारी है और जारी रहेगी।




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I posted a Donkey s picture .. but why are Bhakts seeing and reacting as if is their leaders Photo.. 🙃🙃🙃 a Donkey is a Donkey .. simple. isn’t it ??? #justasking
Prakash Raj@prakashraaj
Your comments #justasking
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@DrLaxman_Yadav Backchodi karte time kuch bhi bol do, jab koi pelne wala ho tab Dalit Mukesh Mohan ban jao,
Wah re Akhilesh kalu Latkan..
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मुकेश मोहन के साथ जो हो रहा है, वह सिर्फ़ एक पत्रकार/क्रिएटर पर दबाव नहीं, बल्कि सवाल पूछने और बोलने की आज़ादी पर सीधा हमला है। तथ्यों और तर्कों के आधार पर कंटेंट बनाने पर 50 करोड़ की मानहानि नोटिस और FIR लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है। हम मुकेश मोहन के साथ खड़े हैं। असहमति का जवाब दमन नहीं, जवाब और बहस होनी चाहिए।
@MukeshMohannn
#IStandWithMukeshMohan

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@HPhobiaWatch Bas yhi sab kar sakte hai, Eid wale din Jaipur road ki photo dekhi thi ? Bulle ke samne ye chup ke Beth jate hai Sarkar hone bad bhi . Yogi baba ki tarh koi CM nhi hai .
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@QamarAnchor Aisa lag rha hai jese kisi geb karte ki kutai ke bad ki photo hai.. 😛😆
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@ImshikharNegi Dhurandar ke Laure ka baal lag rha hai 😄
Kitna bhi PR kar lo hakla barabari nhi kar payega..
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♥️𝒦𝑒𝒽𝒹𝑒 𝒫𝒶𝓈𝑒𝓎 𝒥𝒶𝒾𝓎𝑒 𝒮𝒶𝒿𝒶𝓃𝒶♥️
समझेगा शायद एस प्यार दे रिवाज नूं !
दस्सो कोई हाल जा के साडे सरताज नूं !
आह मोहब्बतां दे वास्ते मैं पावां वे;
गीत ओही गाईए सज्जणा !
सानूं सारीयां विसर गईਆਂ राहवां वे; l
किहड़े पासे जाईए सज्जणा !
किवें रुस्सी तक़दीर नूं मनावां वे ; l
किद्दां समझाईए सज्जणा !
{ Perhaps he will understand the customs of this love. Go, tell my “Sartaaj” of my conditions ; for the sake of this love ; let’s sing the same song, my love ! I have forgotten all the paths; which direction shall I take, beloved ? How do I appease a fate that has turned away, how do I make it understand, my love ? }
youtu.be/bxwqdbIHgiQ
#kehdepaseyjaiyesajana #ahmedabad #dhurandhar2 #sartaajlive #satindersartaaj

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