
Puspendra Ty@gi
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Puspendra Ty@gi
@tyagi_puspendra
#जय श्री राम 🙏🙏





















आप किस Iran को हल्के में ले रहे हैं? यह वह कौम है जो 'या हुसैन' के नारों के साथ अपनी आस्था को अपने लहू से सींचती है। मातम के दौरान खुद को चाबुक मारकर अपना खून निकालने की परंपरा इस बात का सबूत है कि जो कौम अपने इमाम की याद में खुद को दर्द देने से नहीं कतराती, उसे मौत का डर दिखाकर झुकाना नामुमकिन है। ईरान इस दुनिया के नक़्शे पर एक ज़िद का नाम है। पश्चिमी मीडिया और कुछ सतही विश्लेषक अक्सर इसे केवल प्रतिबंधों से जूझती अर्थव्यवस्था की तरह देखते हैं, लेकिन वे उस मनोवैज्ञानिक और ताक़त को भूल जाते हैं जो इस कौम की रगों में दौड़ती है। क्या आज की किसी और अब्राहमिक ताकत में ऐसा साहस है? जहाँ दुनिया कंफर्ट और कंज्यूमरिज्म की गुलाम हो चुकी है, वहां ईरानी समाज आज भी कर्बला के दर्शन पर टिका है। कर्बला का दर्शन सिखाता है कि संख्या बल मायने नहीं रखता, मायने रखता है हक के लिए आखिरी सांस तक लड़ना। ईरान Strategic Patience का उस्ताद है। वे जानते हैं कि कब झुकना है और कब वार करना है। जो लोग अपने शरीर पर ज़ख्म सहने की शक्ति रखते हैं, वे युद्ध के मैदान में पीछे नहीं हटते।

यूपी: बिजनौर में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली की शहादत का यूं गम ए इजहार किया गया। इजहार ए गम में बच्चे भी शामिल हुए।
















