Udayan Sharma

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@udayansharmabjp

संयोजक- ब्रज क्षेत्र ,भाजपा, राष्ट्रीय सदस्यता अभियान। प्रदेश अध्यक्ष- भारतीय नमो संघ। विचार प्रमुख- स्वदेशी जागरण मंच, ब्रज प्रान्त।

Vrindavan, India Katılım Mart 2015
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Udayan Sharma
Udayan Sharma@udayansharmabjp·
दुर्वासा ने श्रीकृष्ण को आगम की शिक्षा दी थी , ऐसी प्रसिद्धि है । यह कितना पौराणिक है , ठीक ठीक न जान सकने पर भी इसके मूल में ऐतिहासिक सत्य है , ऐसा लगता है । ऐसी भी प्रसिद्धि है , बाद के युग में कामरूप -मठ से मीननाथ ने इसका प्रचार किया था । आपाततः मीननाथ और मत्स्येंद्रनाथ को एक ही व्यक्ति माना जा सकता है । मत्स्येंद्रनाथ नाथ सम्प्रदाय के आदि गुरु हैं । मत्स्येंद्रनाथ तथा गोरख के प्रवर्तित मत में अवान्तर भेद -अभेद जो भी हो , मत्स्येंद्रनाथ का आकर्षण ही शक्ति की उपासना की ओर था , गोरक्ष का शिव की उपासना की ओर । इसके सिवाय शक्ति -प्रस्थान की और भी बहुत सी धाराएँ थीं । महार्घ सम्प्रदाय ( महानय सम्प्रदाय ? ) ने अपनी उपासना- पद्धति में शक्ति के रहस्य के सम्बंध में अनेक अभिनव तथ्य प्रकाशित किये हैं । विरूपाक्ष ने अपनी प्रसिद्ध पञ्चाशिका में अद्वैत शैव मत की ही बात कही है । परन्तु वहाँ भी शिवशक्ति अभिन्न है । शाक्त मत की इन दृष्टियों के सम्बंध में यहाँ चर्चा करना सम्भव नहीं । जैनों ने भी अपने तांत्रिक प्रस्थान में शाक्तमत के प्रति अनुगतता का परिचय दिया है । इस विषय की सबसे ज्यादा चर्चा उत्तरयुग में महायान बौद्ध -सम्प्रदाय में मिलती है । इनके कालचक्रयान आदि शाक्तदृष्टि के अनुकूल ग्रन्थ ही हैं । तिब्बत में बहुत बहुत पहले से यह शाक्त अद्वैत तन्त्रमत प्रचलित था और ऐतिहासिकों को मालूम है कि इस श्रेणी के शाक्त आगमसिद्ध मार्ग से वैष्णव सहजिया सम्प्रदाय का कितना सम्बंध था । मातृका रहस्य ।।12।। #तांत्रिक_साधना_और_सिद्धान्त
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DM Mathura
DM Mathura@DMMathura1·
माननीय सांसद श्रीमती हेमा मालिनी जी ने किया मेरो मथुरा ऐप का शुभारंभ। माननीय सांसद जी ने विश्व प्रसिद्ध गोवर्धन परिक्रमा मार्ग पर लगाई गई 500 सोलर लाइटों का लोकार्पण किया। @UPGovt @myogiadityanath @CMOfficeUP @InfoDeptUP
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ASHWANI MAHAJAN
ASHWANI MAHAJAN@ashwani_mahajan·
अपनी शर्तों पर साझेदारी भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता बदलती वैश्विक व्यापार व्यवस्था में भारत की नई रणनीति को दर्शाता है। यह समझौता केवल टैरिफ तक सीमित नहीं, बल्कि निवेश, सेवाओं, मोबिलिटी और नियामक सहयोग को भी समाहित करता है। panchjanya.com/2026/05/13/470…
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Udayan Sharma
Udayan Sharma@udayansharmabjp·
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे / आज के दर्शन हे मातः आप सिद्ध और असिद्ध स्वरूपों वाली हैं , चन्द्रमा तथा सूर्य की कला वाली हैं , मात्र कमल में निवास करती हैं ,अपनी स्थिति से आनन्द देती हैं ,नेत्र कमल के मध्य प्रकाश करने वाली , नित्य श्रद्धा तथा गति केमार्ग पर चलाने वाली , सृष्टि कर्त्री ,कामनाओं का विनाश करने वाली , आप अनंत स्वरूप वाली का आज मैं भजन करता हूँ और पुनः पुनः उनका ध्यान करता हूँ ! #रुद्रयामल
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Udayan Sharma
Udayan Sharma@udayansharmabjp·
खोजता हूँ तो पाता हूँ एक मरियल सी जिज्ञासा है एक लकीर सी शंका है एक गर्दन उठाये स्वार्थ है एक अनुभवहीन तर्क है एक अहंकारी श्रद्धा है एक चाटुकार विनय है ।
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Udayan Sharma
Udayan Sharma@udayansharmabjp·
दुर्वासा ने श्रीकृष्ण को आगम की शिक्षा दी थी , ऐसी प्रसिद्धि है । यह कितना पौराणिक है , ठीक ठीक न जान सकने पर भी इसके मूल में ऐतिहासिक सत्य है , ऐसा लगता है । ऐसी भी प्रसिद्धि है , बाद के युग में कामरूप -मठ से मीननाथ ने इसका प्रचार किया था । आपाततः मीननाथ और मत्स्येंद्रनाथ को एक ही व्यक्ति माना जा सकता है । मत्स्येंद्रनाथ नाथ सम्प्रदाय के आदि गुरु हैं । मत्स्येंद्रनाथ तथा गोरख के प्रवर्तित मत में अवान्तर भेद -अभेद जो भी हो , मत्स्येंद्रनाथ का आकर्षण ही शक्ति की उपासना की ओर था , गोरक्ष का शिव की उपासना की ओर । इसके सिवाय शक्ति -प्रस्थान की और भी बहुत सी धाराएँ थीं । महार्घ सम्प्रदाय ( महानय सम्प्रदाय ? ) ने अपनी उपासना- पद्धति में शक्ति के रहस्य के सम्बंध में अनेक अभिनव तथ्य प्रकाशित किये हैं । विरूपाक्ष ने अपनी प्रसिद्ध पञ्चाशिका में अद्वैत शैव मत की ही बात कही है । परन्तु वहाँ भी शिवशक्ति अभिन्न है । शाक्त मत की इन दृष्टियों के सम्बंध में यहाँ चर्चा करना सम्भव नहीं । जैनों ने भी अपने तांत्रिक प्रस्थान में शाक्तमत के प्रति अनुगतता का परिचय दिया है । इस विषय की सबसे ज्यादा चर्चा उत्तरयुग में महायान बौद्ध -सम्प्रदाय में मिलती है । इनके कालचक्रयान आदि शाक्तदृष्टि के अनुकूल ग्रन्थ ही हैं । तिब्बत में बहुत बहुत पहले से यह शाक्त अद्वैत तन्त्रमत प्रचलित था और ऐतिहासिकों को मालूम है कि इस श्रेणी के शाक्त आगमसिद्ध मार्ग से वैष्णव सहजिया सम्प्रदाय का कितना सम्बंध था । मातृका रहस्य ।।12।। #तांत्रिक_साधना_और_सिद्धान्त
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Udayan Sharma
Udayan Sharma@udayansharmabjp·
इस प्रसङ्ग में विशेष आलोचना से पहले एक बात याद रखना जरूरी है कि प्राचीन काल में विभिन्न प्रस्थानों का अवलम्बन करके शाक्तमत प्रचारित हुआ था । इन प्रस्थानों में कुल -मत या कौलिक अन्यतम प्रधान है । कौलिक मत के मूल सिद्धांत का आदिरूप क्या है , यह जानने का कोई उपाय नहीं है । बहुत प्राचीन काल में ऋषि दुर्वासा के साथ इस मत का सम्बंध था ऐसा सुना जाता है । इस मत के अंतर्गत -- दुर्वासा का न होते हुए भी उनका अनुमोदित -- परम्परागत मत कौलसूत्र में विद्यमान है । वह भारत के किसी ख़ास स्थान में हस्तलिखित ग्रन्थ के रूप में बहुतों की जानकारी से बाहर पड़ा है । प्रायः चालीस साल हुए , इस ग्रन्थ का पता मुझे चला था , पर उसके बाद उसे प्रकाशित होते हुए मैने नहीं देखा । इस ग्रन्थ में भी ऐसे अनेक गुह्य तत्वों की चर्चा है , साधारणतः जो लोगों के परिचित नहीं हैं । दुर्वासा ने श्रीकृष्ण को आगम की शिक्षा दी थी , ऐसी प्रसिद्धि है । मातृका रहस्य ।।11।। #तांत्रिक_साधना_और_सिद्धांत
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