आज की समाज में लोग अक्सर किसी व्यक्ति को उसकी शारीरिक ताकत, पैसे और स्टेटस के आधार पर आंकते हैं। लगभग 99% लोग उसी व्यक्ति को महत्व देते हैं जो मजबूत और सफल दिखाई देता है। अगर कोई कमजोर लगता है, तो उसे नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि जो व्यक्ति मजबूत और आत्मविश्वासी होता है,
यहाँ वहीं जगह है
जहाँ रास्ते उलझते भी हैं और खुलते भी—
मुसीबत अपनी बाँह पकड़कर खींचती है,
और उसी बाँध के पास
किसी शांत कोने में
किस्मत अपना दरवाज़ा रख जाती है।
जो गिरने का डर समझ लेता है,
वही उड़ने की ताकत पहचान लेता है।
समस्या की मिट्टी में ही
सफलता के बीज पलते हैं—
कभी एक शाम
खुद के नाम किया करो,
थोड़ी देर को ही सही,
ज़िंदगी से यूँ ही गले मिला करो।
शहर की हलचल से दूर,
किसी खामोश मोड़ पर,
अपने ही साए के संग
कुछ पल चुपचाप चला करो।
थके हुए दिल को
थोड़ा सुकून मिलता है,
जब अपने लिए
खुद को ही वक़्त दिया करो।
कभी एक शाम
बस यूँ ही मुस्कुरा दिया