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Chairman, Shri Vaidic Swasti Pantha Trust, Author of VedVigyanAlok & Vedarth Vigyanam, 150K+ on YouTube Channel @VaidicPhysics

Bhinmal, Rajasthan, India Katılım Ağustos 2014
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॥ ओ३म् ॥ 🌼 वेद सृष्टि कथा 🌼 📅 दिनांक: 02 अप्रैल 2026 से 05 अप्रैल 2026 तक चैत्र शु० १५ से वैशाख कृ० ३ वि.सं. २०८३, सृ.सं. १,९६,०८,५३,१२७ 📍 स्थान: आर्य समाज मन्दिर रानी बाग WZ-1194, महात्मा हंसराज मार्ग, मेन बाजार, रानी बाग, दिल्ली-110034 🎙️ मुख्य प्रवचन आचार्य अग्निव्रत नैष्ठिक इस स्वर्णिम अवसर का लाभ उठाये तथा सृष्टि के रहस्यों को जानकर मानव जीवन को सार्थक बनाने हेतु आप सपरिवार तथा इष्ट मित्रों सहित सादर आमन्त्रित है। 📅 02 अप्रैल 2026 से 04 अप्रैल 2026 तक 🔸 प्रातः कालीन कार्यक्रम ▪️ यज्ञ – प्रातः 07:30 बजे ▪️ प्रवचन – प्रातः 08:30 बजे 🔸 रात्रि कालीन कार्यक्रम ▪️ प्रवचन – रात्रि 08:30 बजे ▪️ ऋषिलंगर – रात्रि 09:30 बजे पूर्णाहुति एवं समापन समारोह 📆 रविवार, 05 अप्रैल 2026 ▪️ यज्ञ – प्रातः 08:00 बजे ▪️ प्रवचन – 11:00 बजे ▪️ ऋषिलंगर – 12:30 बजे सम्पर्क करें: जोगेन्द्र खट्टर (प्रधान) 📞 9810040982
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क्या व्याकरण में मांसाहार की चर्चा है? youtu.be/rcy02Ug0ITY
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ईश्वर रंगों से खेलता है! क्या आप जानते हैं कि ईश्वर रंगों से खेलता है? आप सोच रहे होंगे कि यह कैसे सम्भव है। आइये विचार करते हैं— ऋषियों के अनुसार यह सम्पूर्ण सृष्टि वेद मन्त्रों के अनन्त स्पंदनों से प्रकट हुई है। [वागेवेदं सर्वम् —ऐतरेय आरण्यक] महर्षि पिंगल ने वेद मन्त्रों को सात मुख्य छन्दों में विभाजित किया और अपने छन्द शास्त्र में प्रत्येक छन्द का एक विशिष्ट रंग बताया है। जैसे गायत्री छन्द का सफेद माना गया, त्रिष्टुप् का लाल, पंक्ति का नीला आदि। [सितसारङ्गि॒पिशङ्कृष्णीलोहितगौरा वर्णाः] यह पूरी सृष्टि इन सात छन्दों का ही अद्भुत खेल है। हर छन्द के अपने गुण और प्रभाव हैं। महर्षि यास्क के अनुसार इन्हें ‘छन्द’ इसलिए कहते हैं, क्योंकि प्रत्येक वेद मन्त्र किसी न किसी पदार्थ को आच्छादित किए हुए है। [छन्दांसि च्छादनात् —महर्षि यास्क] रंगों को देखकर उस दिव्य विज्ञान को याद करे कि सम्पूर्ण जगत् उस परम स्पंदन (ओम्) के विभिन्न रंग हैं, जिसका स्रोत परम चेतन सत्ता परमात्मा है। आप सभी को श्री वैदिक स्वस्ति पन्था न्यास और वैदिक भौतिकी परिवार की ओर से वासन्ती नवसस्येष्टि (होली) की हार्दिक शुभकामनाएँ। परमपिता परमात्मा से प्रार्थना है कि वासन्ती नवसस्येष्टि का यह पवित्र पर्व आपके जीवन को वैदिक ज्ञान-विज्ञान से भर दे। नोट— वैदिक विज्ञान से मिलने वाला आनन्द वा सुख ही इस संसार में स्थायी है। ज्ञान प्राप्त करने की कोई आयु नहीं होती, आप जीवन के किसी भी पड़ाव पर सीखना प्रारम्भ कर सकते हैं। यदि आप वैदिक विज्ञान सीखना चाहते हैं, तो इन पुस्तकों को निःशुल्क डाउनलोड करें— परिचय वैदिक भौतिकी tinyurl.com/IntroVPHi Introduction to Vaidic Physics tinyurl.com/IntroVPEn वैदिक रश्मिविज्ञानम् tinyurl.com/vaidicrashmivi… सभी पुस्तकों के लिए— vaidicphysics.org/ebooks-download
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बाँटो और राज करो 2.0 (जागो या मिटने के लिए तैयार हो जाओ) भारत की तथाकथित स्वतन्त्रता के 75 वर्ष पूर्ण होने पर मैकाले एवं डलहौजी दोनों ही इस लुटे-पिटे बौद्धिक दासता से ग्रस्त भारत में एक साथ राजनेताओं के रूप में प्रकट हो गये हैं। इनका लक्ष्य जहाँ मुस्लिमों को हिन्दुओं के विरुद्ध तेजी से हिंसक बनाना है, वहीं हिन्दुओं में फूट का ऐसा बीज बोना है, जो कभी आपस में मिलकर न रह सकें। रही सही कमी समय-2 पर लगने वाले विषैले टीके पूरी कर देंगे, जो हिन्दूओं के भविष्य को बर्बाद कर देंगे। राजनेताओं के रूप में आया मैकाले व डलहौजी का यह नया अवतार जानता है कि मुसलमानों ने तो पूर्व वाला टीका भी नहीं के बराबर लगवाया था, तो वे अब क्या लगवायेंगे? हिन्दू ही उन्हें मूर्ख व गुलाम दिखाई देता है, जो अपने नेताओं का पूरी तरह गुलाम है और हमारे नेता जनसंख्या नियन्त्रण कानून व समान नागरिक संहिता को तो इस अवतार ने अभी तक नहीं लाने दिए, परन्तु हिन्दुओं के सर्वनाश और मुसलमानों को सुविधाएँ देने का गोपनीय अभियान तो चल ही रहा है। पक्ष-विपक्ष दोनों ही इसी लक्ष्य को पूर्ण करने में लगे हैं, हाँ, उनके मार्ग पृथक्-2 हैं, परन्तु अन्दर से एक ही हैं। UGC के नये एक्ट को देखकर और उसके कारण हिन्दुओं को परस्पर लड़ते देखकर, आज डलहौजी कितना प्रसन्न है। आज अंग्रेजों के इस अवतार के कारण जो लोग सेना में वीरतापूर्वक लड़ते हैं और स्वयं को वीर क्षत्रियों का वंशज मानते हैं, उन्हें आपस में बाँट दिया गया है। यदि आज आर्यावर्त (भारत) के चक्रवर्ती सम्राट् सत्यवादी महाराजा हरिश्चन्द्र होते, तो पौराणिक कथा का डोम, जिसने उन्हें खरीदा था, महाराज पर SC-ST एक्ट लगवा देता। यह काला कानून तथाकथित माता शबरी के द्वारा ही भगवान् श्रीराम, वीरवर लक्ष्मण को कारागार में बंद करवा देता। काले अंग्रेजों का यह कानून आज महावीर हनुमान् व महाराज सुग्रीव को पिछड़ा बताकर श्रीराम पर UGC एक्ट लगवा देता। महिला आयोग माता सीता द्वारा महाराजा दशरथ व माता कैकेयी को बन्दी बनवा देता। वर्तमान नेता यदि उस समय होते, तो महर्षि वाल्मीकि जैसे वैज्ञानिक को दलित बताकर उन्हें रामायण लिखने की प्रेरणा व आदेश देने वाले महर्षि ब्रह्मा, उन्हें श्रीराम का इतिहास सुनाने वाले देवर्षि नारद तथा भगवान् श्रीराम पर ही यह एक्ट लगवाकर तीनों महानुभावों को अपराधी घोषित कर देते। यह काला कानून आचार्य चाणक्य को ब्राह्मण बताकर किसी भी श्रमिक आदि के द्वारा इस काले एक्ट के अन्तर्गत कारावास दिला देता और आद्य शंकराचार्य को भी इसी में फँसा कर चार धामों की स्थापना से रोक देता। यह कानून भारतवर्ष के साथ कई पूर्वी देशों की इस्लामी आक्रान्ताओं से रक्षा करने वाले अजेय योद्धा बप्पा रावल और उनके वीर वंशज राणा कुम्भा, सांगा व प्रताप पर उनके ही बहादुर भील सहयोगी सैनिकों के द्वारा यह एक्ट लगवा कर मेवाड़ के साथ समूचे भारतवर्ष एवं पूर्वी एशियाई देशों में इस्लाम का परचम लहराने में सबसे बड़ी भूमिका निभाता। यह पापी कानून महान् योद्धा एवं हिन्दू धर्म रक्षक महाराजा सूरजमल जाट एवं उनके पूर्वज अमर बलिदानी गोकुलसिंह जाट को पिछड़ा बताकर उस गरीब ब्राह्मणी को ही उन मुगलों के हाथों बन्दी बनवा देता, जिन मुगलों से उस ब्राह्मणी-पुत्री की रक्षा के लिए उन्होंने लालकिले पर आक्रमण किया था। यदि यह कानून महाराजा सांगा के काल में होता, तो उस त्यागमूर्ति पन्नाधाय, जिसे राजपूत व गुर्जर दोनों ही देवी के रूप में मानते हैं और वे इस योग्य हैं भी, के द्वारा महारानी कर्मावती पर UGC एक्ट लगवा कर, उदयसिंह को भी बन्दी बनवाकर स्वयं मेवाड़ की सत्ता पर अधिकार करवा देता। हमारे ये कानूनवेत्ता व राजनेता संत रविदास द्वारा अपनी ही शिष्या भक्त शिरोमणि मीराबाई पर यह एक्ट लगवाकर उनका जीवन बर्बाद कर देते। यह कानून हिन्दू हृदय सम्राट् छत्रपति शिवाजी को क्षत्रिय राजा के स्थान पर पिछड़ा मूलनिवासी राजा बताकर मेवाड़ के महान् योद्धा महाराणा राजसिंह पर ही UGC एक्ट लगवा कर मेवाड़ को औरंगजेब का गुलाम बनाने में सहयोग करता और शिवाजी महाराज तथा गोकुलसिंह जाट जैसे महान् सनातन धर्मरक्षक वीरों से ‘जय भीम-जय भीम’ के नारे लगवा देता। यह कानून महान् योद्धा अमर सिंह राठौड़ पर उनके ही भक्त वीर साथी कृष्णा नाई द्वारा यह एक्ट लगवा कर शाहजहाँ के द्वारा बन्दी बनवा देता। आज का कानून वीरांगना झलकारी बाई द्वारा महारानी लक्ष्मी बाई, तात्याँ टोपे, नाना साहब पर ही यह एक एक्ट लगवा कर उन्हें अंग्रेजों का बन्दी बनवा देता। पं. चन्द्रशेखर आजद, भगतसिंह, ठा. रोशनसिंह, नेताजी सुभाषन्द्र बोस, लाला लाजपत राय, कुँवर सिंह, महर्षि दयानन्द, स्वामी श्रद्धानन्द जैसे क्रान्तिकारी भी इस एक्ट के अन्तर्गत अपराधी बनाए जा सकते थे। आज डलहौजी के अवतार इन राजनेताओं व उनकी सरकारों को मैकाले के अवतार तथाकथित बुद्धिजीवियों व शोधकर्ताओं से पूर्ण समर्थन व साहस प्राप्त हो रहा है। उनकी लेखनी आज सम्पूर्ण हिन्दू समाज, भारतवर्ष व सनातन धर्म के सर्वनाश के लिए चल रही हैं। उनके बौद्धिक दास भारतीय, विशेषकर हिन्दू उनकी लेखनी पर ही विश्वास करके परस्पर एक-दूसरे के शत्रु बनते जा रहे हैं। डलहौजी व मैकाले के अवतार राजनेता मस्तक पर तिलक लगाकर, भगवा दुपट्टा कन्धे पर डालकर और मन्दिरों में पूजा का नाटक करके ईसा के इन आदेशों को साकार करने में लगे हैं, जो बाइबिल में लिखे हैं— ‘‘यह न समझो, कि मैं पृथ्वी पर मिलाप कराने को आया हूँ, मैं मिलाप कराने को नहीं, पर तलवार चलाने आया हूँ। मैं तो आया हूँ कि मनुष्य को उसके पिता से, और बेटी को उसकी माँ से, और बहू को उसकी सास से अलग करूँ, मनुष्य के बैरी उसके घर के ही लोग होंगे।’’ (बाइबिल, मत्ती प.10/आ.34-36) ‘‘मैं पृथ्वी पर आग लगाने आया हूँ और क्या चाहता हूँ कि यह अभी सुलग जाती। क्या तुम समझते हो कि मैं पृथ्वी पर मिलाप कराने आया हूँ, नहीं, बरन अलग कराने आया हूँ।’’ (लूका 12 / 49, 51) आज के राष्ट्रवादी वक्ता व लेखक कुरान की विभाजनकारी आयतों को तो पढ़ते हैं, परन्तु बाइबिल की इन आयतों को कभी नहीं पढ़ते। घोर दुर्भाग्य का विषय है कि हमारे ये काले अंग्रेज राजनेता छुआछूत के नाम पर पूर्वजों की कुछ भूलों के कारण उनके वंशजों को दण्ड देने के कानून बनाते हैं, परन्तु उन पूर्वजों के महान् बलिदानों, ज्ञान विज्ञान की रक्षा के महान् प्रयत्न तथा भारत को विश्व का समृद्धतम देश बनाने के कार्यों को कभी स्मरण नहीं करते। उधर जिन बर्बर मुस्लिम व अंग्रेज लुटेरों ने भारतीयों के रक्त से इस माँ भारती को सींचा, हमारे धन-सम्पत्ति को लूटा, साहित्य को जलाया व लूटा, हमारी माताओं के अस्मिता से खेले, उन मुस्लिम व ईसाई देशों में जाकर उनसे सम्मानित होकर स्वयं को गौरवान्वित अनुभव करते हैं। उनसे यह कहने का साहस ये नेता नहीं कर पाते कि आपने हमारे देश को लूटा व हमारा रक्त बहाया था। यदि हमारे वीर पूर्वज न होते, तो आज सम्पूर्ण भारत में कोई हिन्दू ही नहीं होता, तब कोई दलित व पिछड़े के नाम पर न तो आरक्षण आदि सरकारी लाभ को अयोग्यतापूर्वक प्राप्त कर पाता और न ऐसी माँग कर पाता और न कोई इनके नाम पर गन्दी राजनीति ही कर पाता, बल्कि सभी मुस्लिम व ईसाई बन गये होते और सनातन धर्म का कोई नाम लेवा भी नहीं होता। शोक है कि आज उन वीर पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता के स्थान पर घृणा भरी जा रही है। यह कृतघ्नता इस देश को बर्बाद कर देगी। वास्तविकता यह है कि आज भगवा दुपट्टा वा हरी टोपी धारण करने वाले सभी राजनेताओं ने बाइबिल के आदेश का पालन करने का व्रत लेकर गुप्त व प्रकट रूप से इस देश को फिर से गुलाम बनाने का व्रत ले लिया है। यदि हिन्दू अब भी नहीं समझे और सरकार के द्वारा फैलायी गई जातिवादी विभाजनकारी राजनीति और ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक व्याप्त ऊँच-नीच, छुआछूत से न बचे और जातीय कानूनों का एक होकर डटकर विरोध नहीं किया, तो यह देश फिर से गुलाम हो जायेगा। यहाँ मुस्लिमों व ईसाई-यहूदियों में प्रतिस्पर्धा होगी कि भारत पर कौन शासन करके हिन्दुओं व सनातन धर्म को पूर्णत: विनष्ट करे। हिन्दुओं का कोई रक्षक दिखाई नहीं देता, जो सबके साथ न्याय कर सके। कुछ गिने-चुने हैं भी, तो उनके हाथ में कोई शक्ति नहीं है और वे भी परस्पर एक नहीं हैं। किसी भी दोषी को दण्ड आवश्यक मिले, परन्तु किसी निर्दोष को झूठा फँसाने की छूट भी किसी को न मिले। झूठा फँसाने वाले को और भी कठोर दण्ड मिले, तभी सबके साथ न्याय हो सकेगा। संसार के कुख्यात यौन अपराधी एप्सटीन की फाइल खुलने से विश्व को चलाने वाले लोगों के चेहरे, चाल व चरित्र सब स्पष्ट हो गए हैं। जब ऐसे गन्दे व भयानक लोगों का संसार पर कुराज्य है, तब भारत, भारतीयता, वैदिक सनातन धर्म तथा ऋषि-मुनियों व देवों की परम्परा कैसे बचेगी? इसलिये यदि अपने अस्तित्व को बचाना चाहते हो, तो एक होकर अन्याय के विरुद्ध उनसे भी लड़ने के लिए तैयार रहो, जिन्हें अब तक अपना समझकर सत्तासीन किया है, अन्यथा रोने के लिए आँखों में आँसू भी कम पड़ जायेंगे अथवा वे लोग तुम्हारे रोने के अधिकार को भी तुमसे छीन लेंगे। आज कुछ लोग रावण की भांति हमारी संस्कृति रूपी सीता का हरण कर रहे हैं, तो कुछ दुर्योधन की भांति भाई-भाई के बीच में महाभारत करना चाहते हैं। इनमें से किसने इस देश का अधिक नाश किया? यह आप स्वयं विचार कर सकते हैं। जय माँ वेदभारती! वेद एवं मानवता का विनम्र सेवक —आचार्य अग्निव्रत प्रमुख, वैदिक एवं आधुनिक भौतिकी शोध संस्थान (श्री वैदिक स्वस्ति पन्था न्यास द्वारा संचालित) Ph. 9829148400
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✨ विशेष पॉडकास्ट – Consciousness पर गहन चर्चा ✨ Zee Media के नए प्लेटफॉर्म Soul's Own Lab (SOL) पर Consciousness विषय पर आधारित यह विशेष पॉडकास्ट अवश्य देखें, साझा करें और अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाएँ। 👉 अभी देखें और प्रचार करें— youtu.be/6oZ0-pY1ziY 📢 ज्ञान को फैलाएँ, चेतना को जगाएँ। #Consciousness #SoulsOwnLab #ZeeMedia #Podcast #SpiritualGrowth
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@Supertalks by themovingship पर श्री राघव शर्मा जी के साथ हुए इस संवाद के लिए उनका धन्यवाद। इसमें वैदिक विज्ञान के माध्यम से मानव सभ्यता के भविष्य, वेदों, रामायण और महाभारत काल की उन्नत तकनीकों, विमानों, सिद्धियों तथा आधुनिक विज्ञान से उनके गहरे सम्बन्ध पर विचार किया गया है। ब्लैक होल, समय और ‘ओम्’ नाद की शक्ति जैसे विषयों पर यह चर्चा आपको प्राचीन भारतीय ज्ञान की वास्तविक गहराई से परिचित कराएगी। वीडियो अवश्य देखें और चिन्तन करें। 👉 पूरा वीडियो यहाँ देखें: youtu.be/rZHY8RpdWak
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ऋषि का कार्य अभी अधूरा है l डॉ. दीप्ति विद्यार्थी जी youtu.be/GAtNB6Y5uOc
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हमारा काम है धर्मयोद्धा तैयार करना l मलेच्छ बढ़ते जा रहे हैं youtu.be/qhPm8dpomho
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