दीवाना

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दीवाना

दीवाना

@vczz

#उसकादीवाना

दिल्ली, भारत Katılım Ekim 2009
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दीवाना
दीवाना@vczz·
ज़रूरी तो नहीं कि दौलत ही अमीरी का पैमाना हो.... कुछ लोगों के पास दोस्त भी होते हैं .... #उसकादीवाना
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Uljhi Diary
Uljhi Diary@UljhiDiary·
लहज़ा ज़रा सा बदला तो हम उठ खड़े हुए तेरी तरफ़ से पहला इशारा है आख़िरी - Hammad Ghaznavi
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शिविना ❣️
शिविना ❣️@ShivinaSaksena·
राधा : जानते हो न माधव जिस दिन से तुम ,मेरी रूह में बसे उस दिन से तुम्हें पाने के लिए, तुम तक पहुँचने के लिए तुम्हारे भक्तों ने मेरा नाम पुकारा और उन्हें मुझमें ही तुम मिल गए बोलो राधे राधे माधव ❤️🙏
शिविना ❣️ tweet media
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Harish Kumar
Harish Kumar@H_kumar1·
अश्क पीते हैं शेर कहते हैं हम सुखन के नशे में रहते हैं जिनका वादा था हम नशीनी का जाने अब किस जहाँ में रहते हैं इक सुकूँ को तलाश करने को लोग कितने ही दर्द सहते हैं वक़्त बारिश का है मु'अय्यन पर अश्क बिन मौसमों के बहते हैं ~ हरीश कुमार ✍🏻
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Rupam Tyagi🕊
Rupam Tyagi🕊@rupam__tyagi·
दे आया अपनी जान भी दरबार-ए-इश्क़ में फिर भी न बन सका ख़बर अख़बार-ए-इश्क़ में #अशरफ़_शाद
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جون سی जौनसी
या-रब ये मक़ाम-ए-इश्क़ है क्या गो दीदा-ओ-दिल नाकाम नहीं तस्कीन है और तस्कीन नहीं आराम है और आराम नहीं! #जिगर_मुरादाबादी
جون سی जौनसी tweet media
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Harish Kumar
Harish Kumar@H_kumar1·
तू आज़मा ले चाराग़र बुला के मेरे यार को असर जो इक नज़र में है कहाँ तेरी दवा में है ~ हरीश कुमार #DoctorsDay
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दीवाना
दीवाना@vczz·
हाथ मेरा भी जो पहुँचा तो मैं समझूँगा ख़ूब ये अँगूठा तू किसी और को दिखलाया कर गर तू आता नहीं है आलम-ए-बेदारी में ख़्वाब में तू कभी ऐ राहत-ए-जाँ आया कर ऐ सबा औरों की तुर्बत पे गुल-अफ़्शानी चंद जानिब-ए-गोर-ए-ग़रीबाँ भी कभी आया कर मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
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दीवाना
दीवाना@vczz·
हम भी ऐ जान-ए-मन इतने तो नहीं नाकारा कभी कुछ काम तू हम को भी तो फ़रमाया कर तुझ को खा जाएगा ऐ 'मुसहफ़ी' ये ग़म इक रोज़ दिल के जाने का तू इतना भी न ग़म खाया कर मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
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दीवाना
दीवाना@vczz·
इस क़दर भी तो मिरी जान न तरसाया कर मिल के तन्हा तू गले से कभी लग जाया कर देख कर हम को न पर्दे में तू छुप जाया कर हम तो अपने हैं मियाँ ग़ैर से शरमाया कर ये बुरी ख़ू है दिला तुझ में ख़ुदा की सौगंद देख उस बुत को तू हैरान न रह जाया कर मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
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दीवाना
दीवाना@vczz·
हाथ पकड़ ले अब भी तेरा हो सकता हूँ मैं भीड़ बहुत है इस मेले में खो सकता हूँ मैं पीछे छूटे साथी मुझ को याद आ जाते हैं वर्ना दौड़ में सब से आगे हो सकता हूँ मैं कब समझेंगे जिन की ख़ातिर फूल बिछाता हूँ राहगुज़र में काँटे भी तो बो सकता हूँ मैं आलम ख़ुर्शीद
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दीवाना
दीवाना@vczz·
दे ख़ुदा और जगह सीना ओ पहलू के सिवा कि बुरे वक़्त में हो जाए ठिकाना दिल का मेरी आग़ोश से क्या ही वो तड़प कर निकले उन का जाना था इलाही कि ये जाना दिल का निगह-ए-शर्म को बे-ताब किया काम किया रंग लाया तिरी आँखों में समाना दिल का दाग़ देहलवी
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दीवाना
दीवाना@vczz·
अच्छी सूरत पे ग़ज़ब टूट के आना दिल का याद आता है हमें हाए ज़माना दिल का तुम भी मुँह चूम लो बे-साख़्ता प्यार आ जाए मैं सुनाऊँ जो कभी दिल से फ़साना दिल का निगह-ए-यार ने की ख़ाना-ख़राबी ऐसी न ठिकाना है जिगर का न ठिकाना दिल का दाग़ देहलवी
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दीवाना
दीवाना@vczz·
मैं ख़ुश-नसीब हूँ मुझ को किसी का प्यार मिला बड़ा हसीन मिरे दिल का राज़दार मिला है दिल में प्यार ज़बाँ चुप झुकी झुकी नज़रें अजब अदा से कोई आज पहली बार मिला किसी को पा के मिरे दिल का हाल मत पूछो के जैसे सारे ज़माने से इख़्तियार मिला असद भोपाली
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दीवाना
दीवाना@vczz·
अगर हमारे ही दिल में ठिकाना चाहिए था तो फिर तुझे ज़रा पहले बताना चाहिए था चलो हमी सही सारी बुराइयों का सबब मगर तुझे भी ज़रा सा निभाना चाहिए था अगर नसीब में तारीकियाँ ही लिक्खी थीं तो फिर चराग़ हवा में जलाना चाहिए था शकील जमाली
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दीवाना
दीवाना@vczz·
मोहब्बतों को छुपाते हो बुज़दिलों की तरह ये इश्तिहार गली में लगाना चाहिए था जहाँ उसूल ख़ता में शुमार होते हों वहाँ वक़ार नहीं सर बचाना चाहिए था लगा के बैठ गए दिल को रोग चाहत का ये उम्र वो थी कि खाना कमाना चाहिए था शकील जमाली
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दीवाना
दीवाना@vczz·
किसी ने पूरे किए आज प्यार के वादे मेरी वफ़ा का सिला मुझ को शानदार मिला मेरे चमन का हर इक फूल मुस्कुराने लगा वो क्या मिला कि मुझे मौसम-ए-बहार मिला असद भोपाली
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