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शार्क टैंक पैनल:
पियुष बंसल ➡️ हिजाब की अनुमति है, लेकिन बिंदी और कलवा की नहीं।
नमिता थापर ➡️ नमाज़ सेहत के लिए अच्छी है।
वही नमिता थापर ने सीज़न 1 में एक ऐसे स्टार्टअप को फंड किया था जिसका मकसद महिलाओं के मासिक धर्म और हिंदू धर्म से जुड़े वर्जनाओं के बारे में जागरूकता फैलाना था। शार्क टैंक इंडिया सीज़न 1 (एपिसोड 6, दिसंबर 2021 के आसपास प्रसारित) में, संस्थापक अदिति गुप्ता और तुहिन पॉल ने मेनस्ट्रूपीडिया का प्रस्ताव रखा। नमिता थापर एकमात्र शार्क थीं जिन्होंने निवेश किया। उन्होंने 20% इक्विटी के लिए ₹50 लाख की पेशकश की। इससे वह इस उद्यम में भागीदार बन गईं।
इस सामग्री में सांस्कृतिक और धार्मिक वर्जनाओं को स्पष्ट रूप से संबोधित किया गया है, जिनमें हिंदू परंपराओं में प्रचलित वर्जनाएं भी शामिल हैं। मासिक धर्म के दौरान मंदिरों में प्रवेश करने, प्रार्थना करने या पवित्र वस्तुओं को छूने पर प्रतिबंध (जिसे एक गलत धारणा के रूप में दर्शाया गया है जो महिलाओं को "अशुद्ध" या "गंदा" महसूस कराती है)। जागरूक पूंजीपति... उनमें समस्याओं को हल करने की क्षमता है, लेकिन देश और सभ्यता के लिए दूरदृष्टि का अभाव है।
शार्क टैंक कार्यक्रम में हिजाब पहने एक मुस्लिम लड़की सना आई थी जो मुस्लिम फैशन हाउस चलाती है यानी मिडेस्ट फैशन
मुस्लिम महिलाओं द्वारा पहने जा रहे बुर्के अबाया और मुस्लिम महिलाओं के लिए कई तरह के फैशन वस्त्र थे
यह लड़की स्टेज पर आते ही सबसे पहले कहीं कि मैं क्या पहनना चाहती हूं वह मैं तय करूंगी ब्ला ब्ला ब्ला और सभी सार्क टैंक के जज अपराध बोध से ग्रसित तालियां बजाने लगे नमिता @namitathapar तो इस पर आफरीन हो गई यह आपका पंच मुझे बहुत अच्छा लगा जो आपने यह कहा कि मैं क्या पहनना चाहूंगी यह मेरा हक है और यह मैं तो करूंगी
सभी शार्क @peyushbansal ने इस लड़की को फंडिंग भी दिए
लेकिन अब कल्पना करिए कि कोई हिंदू महिला कभी घुंघट में आती तब यही सभी सार्क उसका मजाक उड़ाते कि दुनिया इतने आगे जा चुकी है और तुम अभी भी यह पिछड़ेपन की निशानी घूंघट और परदे में हो
अफसोस हम हिंदू अभी भी स्टॉकहोम सिंड्रोम से ग्रसित होते जा रहे हैं



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कॉर्पोरेट जिहाद अब व्यापक बन गया है..
टीसीएस के बाद अब लेंसकार्ट @Lenskart_com @lenskart
भी सवालों के घेरे में
हिजाब, पगड़ी की अनुमति है लेकिन कलावा, बिंदी की नहीं।
सिन्दूर दिखाई नहीं देना चाहिए


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@middle_East_up किसी समय कश्मीर से भी हिन्दूऔ को ऐसे ही मार मार भगाया था आज अल्ला ने कश्मीर का बदला गजा से ले लिया तुम्हारे अल्ला के यहा देर है अंधेर नही
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जनगणना आयुक्त ने कहा है कि सेंसस के आंकड़े 2027 में ही आने शुरू हो जाएंगे।
लेकिन अब मोदी सरकार अनुच्छेद 334(A) में ये कहते हुए संशोधन करना चाहती है कि जातिगत जनगणना के परिणाम कुछ वर्षों तक उपलब्ध नहीं हो पाएंगे।
साफ है कि मोदी सरकार बड़े पैमाने पर झूठ बोल रही है और भ्रम फैला रही है।
सरकार का असली छिपा हुआ एजेंडा है कि जातिगत जनगणना न करवाई जाए और OBC की महिलाओं को आरक्षण से वंचित रखा जाए।
ऐसे में OBC वर्ग की महिलाओं को लोकसभा में प्रतिनिधित्व का मौका नहीं मिलेगा। अगर लोकतंत्र में इतने बड़े वर्ग को आरक्षण से वंचित रखा जाएगा, तो सीधे तौर पर लोकतंत्र की हत्या है।
मैं याद दिला दूं कि जब श्री राजीव गांधी जी ने 73वां और 74वां संविधान संशोधन किया था, तब उसमें OBC के आरक्षण का प्रावधान रखा था। इसलिए ये कोई नई परंपरा नहीं है।
: @INCOBCDept के चेयरमैन @DrJaihind जी
📍 दिल्ली
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@BhagsinghKanbar कैसे बेवकूफ बना रही है एक तरफ तो कहती इस्लाम मे कोई भेदभाव जातपात नही होता नही दुसरी तरफ गुर्जरो का वोट पाने के लिए गुर्जर समाज से जोड दिया पहले कोई फतवा तो लाऔ की इस्लाम मे जाति होती है या नही
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@IPSinghSp चाइना भारत दो साल बाद आजाद हुआ था लेकिन भारत से बाहर GDP से भी पिछे था लेकिन आज भारत से ज्यादा विकास कर रहा है क्योकि वहां कांग्रेस जैसी पार्टी ने 65 साल से सरकार मे नही थी अगर आजादी के बाद भारत मे भी कोई राष्ट्रवादी सरकार भारत मे बनती तो आज भारत भी चाइना जैसा विकास करता
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वर्तमान लोकसभा सीटों के अनुपात में ही विभिन्न राज्यों में सीटों को बढ़ाना उचित कदम नहीं होगा। जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण और देश की आर्थिक प्रगति में अधिक योगदान दिया है, उन्हें केंद्र में राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम करके दंडित नहीं किया जा सकता।
डेलिमिटेशन करते समय जनसंख्या के अलावा अन्य फैक्टर को भी ध्यान में रखा ही जाना चाहिए।
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@Zubair99778 अबे फेक्ट गघे हो तूम यह मुमकिन ही नही क्योकि आटो मंदिर तक नही जाता कटरा तक जायेगा और कटरा से मंदिर तक जाने आने विद हेलीकॉप्टर सहित भी लौटा फेरी 7 -8 घंटे लगेगें तो यह आटो वाला कटरा मे इसका 7- 8 घंटे क्यो इंतजार करेगा यह क्या कोई भी इंतजार नही करेगा वैसे पेड दिखावे का विडिओ है
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@govindprataps12 एक तरफ तो लग रहा गरीब तो इस चूतिया से पूछो नोटबंदी मे बैंक की लाइन मे बिना पैसो के लगा ही क्यो
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@yadavakhilesh अभी बाराबंकी मे एक लडकी लव जिहाद मे फंस कर छत पर से बच्चे के साथ कूदने वाली थी जिसे लोगो ने बचाया तब मूहं सील गया था की जिहादी वोटर नाराज ना हो जाये
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@_YogendraYadav पर कोई मादरछोद विदेशी मां की नाजायज औलाद तो कह रहा था जिसकी जितनी संख्या उसकी उतनी हिस्सेदारी
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लीजिए, कई दिन के सस्पेंस के बाद पर्दा उठ गया। नारी वंदन के मुखौटे के पीछे दरअसल संसद का स्वरूप बदलने का खेल है। यह महिलाओं के प्रतिनिधित्व का नहीं, लोकसभा और विधानसभाओं के पुनर्गठन का प्रस्ताव है।
लोकसभा की संख्या 547 से बढ़ाकर 815 करने का तर्क हो सकता है, लेकिन असली बदलाव सीटों के राज्यवार बंटवारे में है। 1971 की जनगणना के अनुपात को हटाने का मतलब है कि हिंदी और गैर-हिंदी भाषी प्रदेशों के बीच नाजुक संघीय संतुलन बिगड़ जाएगा।
यह सिर्फ एक संशोधन नहीं, चुनावी लोकतंत्र का देश-काल-पात्र बदलने का एक बड़ा खेल है।
#Federalism #WomenReservation #IndianPolitics

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@NewsSChaudhary पर कोई मादरछोद तो कह रहा था जिसकी जितनी संख्या उसकी उतनी हिस्सेदारी
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भाजपा सरकार का हर विधेयक विभाजनकारी क्यों होता है?
मौजूदा लोकसभा सीटें 543 हैं -
कर्नाटक - 28
मध्य प्रदेश - 29
राजस्थान - 25
गुजरात - 25
उत्तर प्रदेश - 80
इनके विधेयक के अनुसार अब 850 सीटें होंगी, तब की स्थिति -
कर्नाटक - 41
मध्य प्रदेश - 52
राजस्थान - 50
गुजरात - 43
उत्तर प्रदेश - 143
दक्षिण भारत के सभी राज्यों की सीटें घटेंगी। उत्तर भारत की सीटों में भारी बढ़ोतरी होगी। संसद के बहुमत के लिए दक्षिण के राज्य अप्रासंगिक हो जाएंगे।
दक्षिण के लोगों का तर्क है कि हमने जनसंख्या नियंत्रण सफलता पूर्वक लागू किया। शिक्षा और आर्थिक विकास पर फोकस किया। हमें उसकी सजा क्यों दी जा रही है?
यह विधेयक देश की एकता के लिए खतरा है।
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@Ramraajya अंधभक्त के घर गैस नही और इसके यहा गैस का भन्डार है इनके बाप ने गैस का अवैध भन्डार कर रखा होगा या जैसे जिहादी चूतिया वैसे ही उनकी लौडिंया चूत तिया मदरसा वाली जो है वैसे हर अंधभक्त इन्डैकशन लेकर कर आराम से बैठा
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@Aloksharmaaicc @Pawankhera अबे गघे खुलासे करना और किसी के दस्तावेज से छेडछाड करेके नकली दस्तावेज तैयार करवाने मे फर्क होता है जो पवन खेडा ने हेरफेर करके हिमंता के नकली दस्तावेज तैयार करके उसका गलत ईस्तेमाल करा
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हाल के दिनों में @Pawankhera जी द्वारा Himanta Biswa Sarma एवं उनके परिवार से जुड़े जिन गंभीर प्रश्नों और तथ्यों को प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सार्वजनिक किया गया है, वे केवल राजनीतिक आरोप नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक जवाबदेही की मांग हैं।
लोकतंत्र की मूल भावना यही है कि सत्ता में बैठी सरकार जनता और विपक्ष दोनों के प्रति जवाबदेह रहे। विपक्ष का दायित्व है कि वह सवाल उठाए, और सरकार का कर्तव्य है कि वह उन सवालों का तथ्यों के साथ उत्तर दे। किंतु दुर्भाग्यपूर्ण है कि अब तक उठाए गए किसी भी प्रश्न का स्पष्ट और संतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया है।
इसके विपरीत, बार-बार यह देखने को मिला है कि प्रश्नों का उत्तर देने के बजाय सत्ता के प्रभाव का उपयोग किया जा रहा है, कभी जांच एजेंसियों का सहारा, कभी प्रशासनिक दबाव, तो कभी पुलिस व्यवस्था में हस्तक्षेप की बातें। यह प्रवृत्ति न केवल चिंताजनक है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत भी है।
Indian National Congress का इतिहास इस बात का साक्षी है कि उसने सत्य और लोकतंत्र की रक्षा के लिए हर संघर्ष लड़ा है। यह वही पार्टी है जिसने अंग्रेजों की सत्ता के सामने कभी घुटने नहीं टेके, और आज भी किसी भी प्रकार के दबाव या डर के आगे झुकने वाली नहीं है।
पूरी कांग्रेस पार्टी और उसका प्रत्येक कार्यकर्ता, Pawan Khera के साथ मजबूती से खड़ा है। हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि यह लड़ाई व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सत्य, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की लड़ाई है।
हम सत्ता से केवल इतना ही अपेक्षित करते हैं कि जो सवाल पूछे गए हैं, उनके उत्तर दिए जाएं। लोकतंत्र में संवाद और जवाबदेही ही सबसे बड़ी ताकत होती है, और हम इसी संवैधानिक मार्ग पर चलते हुए, पूरी मजबूती और धैर्य के साथ इस संघर्ष को अंतिम दम तक जारी रखेंगे।
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कांग्रेस मीडिया अध्यक्ष @Pawankhera जी द्वारा असम के मुख्यमंत्री के बारे में सबूतों के साथ किए गए खुलासे के बाद जिस तरह से उन्हें परेशान किया जा रहा है वह बेहद निंदनीय है ।
हम सब पवन खेड़ा जी के साथ खड़े हैं ।
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