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हृदये में है जो वेदना,
तू चैन से ना बैठना।
है माँ फिर से क़ैद में,
फिर भी है सब मौन में।
भुला दे दुश्मन कौन है,
बस, याद कर तू कौन है।
संशय को त्याग कर,
तूँ सिंह सा दहाड़ कर ।
उठा खड़ग और वार कर,
तू तो बस प्रभार कर ।
माँ को फिर आज़ाद कर ।
-Jeet
#BharatMataKiJai @TheAnuragOffice

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