Rachit vishwakarma ⭐
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Rachit vishwakarma ⭐
@vishwarachit
Call it good or bad, whatever I am is fine in my eyes, what about people, people's job is to find evil, I am an Indian, this is my identity.
India Katılım Nisan 2015
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3 घंटे पहले ही किसी ने ये वीडियो इंस्टा पर पोस्ट किया है
यह वीडियो पंजाब के होशियारपुर का बताया जा रहा है, जिसमें एक सो रहे बेगुनाह कुत्ते को एक शख्स ने बेवजह गोली मार दी।
बेजुबान जानवर ने किसी का क्या बिगाड़ा था?
ये केवल हिंसा नहीं है, यह हमारे समाज की गिरती संवेदनाओं की तस्वीर है।
अगर अब भी हम चुप रहे, तो अगला निशाना कौन होगा?
हम मांग करते हैं:
इस अपराधी की पहचान की जाए
इसे तुरंत गिरफ़्तार किया जाए
इस पर सख़्त से सख़्त कानूनी कार्रवाई की जाए
📢 Animal cruelty is a crime under Section 428 and 429 of the IPC and the Prevention of Cruelty to Animals Act.
👇🏻 इस पोस्ट को इतना शेयर करो कि ये हर जगह पहुंचे। अगर आप इसे पहचानते हैं या कोई जानकारी है तो तुरंत पुलिस या Animal Welfare Authorities को सूचित करें।
@ManekaGandhiBJP @PetaIndia @AnimalWelfareBo @FIAPOIndia @PeopleForAnimals @RashiSanon @WeAreTheVoicels @CompassionIndia @HumaneSocietyIN @ResQCT
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मर्जर और स्कूल से जुड़ी एक कहानी सुनाता हूं। अमेठी के नारायणपुर में एक जूनियर प्राइमरी स्कूल है। 2010 में खुला। दो अध्यापकों की नियुक्ति हुई। शुरुआत में 40-50 बच्चे आते लेकिन कुछ वक्त के बाद यह संख्या गिरने लगी। 2021 में छात्रों की संख्या गिरकर 19 हो गई। इसमें भी 10 वो थे जिनका सिर्फ नाम लिखा था, स्कूल कहीं और जाते थे। स्कूल में 5-6 बच्चे ही आते थे।
उस वक्त स्कूल एक मात्र टीचर ममता जी थीं। एक साल पहले यानी 2020 में स्कूल के प्रिंसिपल रिटायर हो गए थे। अब ममता जी के सामने चुनौती थी कि परिस्थितियों को बदला जाए या फिर जैसा चल रहा वैसे चलने दिया जाए। ममता जी ने तय किया कि चीजें बदलते हैं।
एक चीज और, यह ममता जी के ससुराल में स्कूल था। स्कूल भी ऐसी जगह जहां बरसात में 2 फिट पानी से होकर पहुंचना पड़ता था। ममता मैडम गांव में घर घर गई। अपील की कि अपने बच्चों को भेजिए। लोग कहते कि अरे स्कूल गांव के किनारे है, साफ सफाई नहीं हैं, कौन भेजे।
फिलहाल लोगों को मैडम पर भरोसा हुआ। कुछ एडमिशन बढ़ा। मैडम ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान दिया। अपना पैसा लगाकर स्कूल को सुधारा। प्रैक्टिकल शिक्षा पर ज्यादा ध्यान दिया।
नतीजा क्या हुआ? नतीजा यह हुआ कि अगले दो साल में बच्चों की संख्या 100 के पास पहुंच गई। लड़के इतने होनहार कि कॉन्वेंट के बच्चे भी प्रतिस्पर्धा न कर पाएं। जेंडर इक्वालिटी, सोशल जस्टिस, दहेज जैसे मुद्दों पर बच्चे डिबेट करते हैं।
यह जो लिख रहा हूं इसे मैंने अपनी आंखों से देखा है। स्कूल में कई घंटे बिताए हैं। इस बदलाव को महसूस किया है। इसलिए भी आज लगता है कि अगर किसी स्कूल में 2-4 साल में बच्चों की संख्या कम हुई है तो उसे किसी दूसरे स्कूल में न मर्ज किया जाए। कुछ और वक्त दिया जाए। वहां के इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारा जाए, क्या पता स्कूल बदल जाए।




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गोरखपुर की पंखुड़ी त्रिपाठी की शिक्षा के लिए
UP के सबसे बड़े नेता @yadavakhilesh ने मदद का हाथ बढ़ाया,
सत्ता के दबाव में पंखुड़ी के परिवार ने मदद लेने से इनकार कर दिया,
और अखिलेश यादव के खिलाफ खराब बयान भी दिया,
यहीं कोई PDA परिवार होता,
तो सत्ता के दबाव में अखिलेश यादव से मदद लेने से इनकार भले ही कर देता,
लेकिन अखिलेश यादव को अपशब्द किसी भी कीमत पर नहीं कहता,
यही सत्य है,

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एक राजा था, उसकी बीवी का नाम तुम्हारी था..
राजा ने एक दिन गुस्से में आकर तुम्हारी को छत से नीचे धकेल दिया, और वहाँ से गुजरता हुआ एक हाथी ने इतेफाक से तुम्हारी के ऊपर पांव रख दिया,
फलस्वरूप तुम्हारी मर गयी...
अब बताओ Sonu तुम्हारी किसने मारी?
राजा ने या हाथी ने...?😀😀
Sonu@SonuNigamSingh
राहुल गांधी जैसा विक्षिप्त आदमी अगर प्रधानमंत्री होता तो देश भर के लोग बंकर में छिपे होते हैं और ये आदमी विदेश जाने वाली फ्लाइट में बैठ कर फरार हो चुका होता। इसलिए इटालियन ब्रीड का आदमी कभी प्रधानमंत्री नहीं होगा कभी भारत में।
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