लव जिहाद का शिकार हुई हिन्दू बेटियां, मुस्लिम युवकों ने हिन्दू नाम बताकर झूठे प्रेमजाल में फंसाया, दुष्कर्म किया, जबरन इस्लाम कुबूल करवाया
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छह दशकों के वामपंथी उग्रवाद की समाप्ति के बाद नये युग का आरंभ।
धरती पर आज सुबह की किरणे नई आभा लेकर आई हैं। वामपंथी लाल आतंकी हिंसा का जो घनघोर अंधकार छ दशकों से फ़ैला हुआ था, उसकी समाप्ति की औपचारिक घोषणा हो चुकी है। अधिकांश नक्सलवादियों ने हथियार डाल दिए हैं। एक मई को जब पूरी दुनिया मजदूर दिवस मनाती है, तब भारत में वामपंथी लाल अंधकार का अंत हो चुका है। शांति के कपोत अब खुले आसमान में निर्भय उड़ान भर रहे हैं। मोदी सरकार के दृढ़ संकल्प और छत्तीसगढ़ सरकार की अथक मेहनत ने राष्ट्र की देह में पल रहे इस बुरे नासूर की शल्य चिकित्सा कर दी गई है। यह मात्र एक राजनीतिक विजय नहीं, बल्कि लाखों जनजातीय परिवारों की मुक्ति, हजारों जवानों के सर्वोच्च बलिदान का फल और एक राष्ट्र की सामूहिक आस्था की जीत है। इसे इतिहास कभी भुला नहीं सकता।
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अहिंसा और संयम, ये भगवान महावीर के उपदेश के दो महत्वपूर्ण हिस्से हैं
- पूजनीय सरसंघचालक जी
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वीरों की धरती, सेवा की परंपरा...
महेन्द्रवाड़ी ने 19 स्वतंत्रता सेनानियों के साथ अंग्रेजों के विरुद्ध संग्राम में उल्लेखनीय योगदान दिया।
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श्री महावीर जयंती
महावीर स्वामी की शिक्षाओं के तीन प्रमुख बिन्दु सम्यक दर्शन, सम्यक् ज्ञान एवं सम्यक् चरित्र हैं जो कर्म-बन्धन को विनष्ट कर पूर्णत्व प्रदान करते हैं। सम्यक् दर्शन के बिना सम्यक् ज्ञान तथा सम्यक् ज्ञान के बिना सम्यक् चरित्र प्राप्त नहीं होता।
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"अहिंसा का आचरण जो स्वामी महावीर जी का आदर्श है, उन्होंने केवल उपदेश ही नहीं दिया, स्वयं जीकर भी बताया है"
-डॉ. मोहन भागवत जी, सरसंघचालक - रा.स्व. संघ
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#नित्य_प्रेरणा
"आपकी आत्मा से परे कोई भी शत्रु नहीं है। असली शत्रु आपके भीतर रहते हैं, वो शत्रु हैं क्रोध, घमंड, लालच, आसक्ति और नफरत।"
-भगवान महावीर
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संघ का कार्य समाज को समरस, समर्थ एवं सशक्त बनाने के लिए चल रहा है – दत्तात्रेय होसबाले जी
संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जिला कांगड़ा द्वारा आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने कार्य की 100 वर्षों की यात्रा को पूर्ण किया है। इन सौ वर्षों में संघ ने सेवा एवं समर्पण भाव से देश सेवा एवं राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया। स्वतन्त्रता सेनानी एवं संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी ने भारत को स्वतंत्र एवं शक्तिशाली बनाने के लिए 1925 में विजयादशमी के दिन संघ कार्य प्रारम्भ किया। देश भक्ति से ओत प्रोत एवं समाज का भला करने वाले व्यक्ति संघ की नित्य शाखा से निर्माण हो रहे हैं। संघ का कार्य हिन्दू समाज को संगठित, सशक्त एवं समर्थ बनाने के लिए चल रहा है!
गोष्ठी का शुभारम्भ वन्दे मातरम के साथ हुआ। सरकार्यवाह जी ने कहा कि संघ सामान्य व्यक्ति के व्यक्तिगत चरित्र एवं राष्ट्रीय चरित्र दोनों को ठीक करने की दृष्टि से कार्य कर रहा है। समाज की उन्नति के लिए समाज का संगठन करना, सामूहिक प्रयास करना, सबको साथ लेकर चलना, यह भी अति आवश्यक है। देश के सर्वांगीण विकास में सभी का योगदान होना चाहिए। संघ सभी प्रकार के भेदभाव को समाप्त कर समाज के लिए कार्य करता है। संघ केवल एक संगठन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आंदोलन है और संघ कार्यकर्ताओं के लिए एक जीवन शैली है। वर्तमान में अपना भारत देश दुनिया में अग्रणी देशों में से एक है। संघ कार्य का लक्ष्य भारत को समरस, समर्थ एवं समर्थ बनाना है। भारत दुनिया को जीवन जीने की शैली बता रहा है। अन्य देश भारत का अनुसरण कर रहे है।
कार्यक्रम में प्रमुख जनों ने सामाजिक, आर्थिक राजनैतिक, सेवा कार्य एवं देश दुनिया की वर्तमान परिस्थिति, शिक्षा नीति, संस्कार, संघ में महिलाओं की सहभागिता को लेकर प्रश्न रखे। जिनका सरकार्यवाह जी ने उत्तर दिया।
सरकार्यवाह जी ने कहा कि आज देश में एक लाख से अधिक सेवा कार्य चल रहे है। एक लाख से अधिक स्थानों पर शाखा, मिलन, संघ मंडली चल रही हैं। संघ के स्वयंसेवक समाज जीवन में अनेक क्षेत्रों, गतिविधियों में समाज के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं।
गोष्ठी में सेवानिवृत सेना अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय के आचार्य, व्यापार मंडल के अध्यक्ष, प्रसिद्ध गायक, खिलाड़ी, समाचार पत्रों के मुख्य संपादक, जन प्रतिनिधि, अनेक संस्थाओं के पदाधिकारी एवं साधु-संतों ने भाग लिया। इस अवसर पर मंच पर प्रान्त संघचालक डॉ. वीर सिंह रांगड़ा, सह प्रान्त संघचालक अशोक शर्मा जी, विभाग संघचालक भूषण रैना जी, जिला संघचालक प्रदीप कुमार जी उपस्थित रहे।
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samvad.in/Encyc/2026/3/3…
100 वर्षों से युवाओं को राष्ट्र कार्य के लिए प्रेरित कर रहा है संघ
– दत्तात्रेय होसबाले जी
संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त सामुदायिक भवन में आयोजित युवा एकत्रीकरण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने युवाओं से संवाद के दौरान कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गत 100 वर्षों से युवाओं को राष्ट्र कार्य के लिए प्रेरित कर रहा है। संघ में सभी स्वयंसेवक हैं, संघ का कार्य व्यक्ति निर्माण, समाज परिवर्तन और राष्ट्र को परम वैभव तक ले जाना है।
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समाज में एकता रहे, परस्पर सहयोग रहे, राष्ट्र के लिए कार्य करने की भावना से संकल्प लेकर कार्य करें। संघ ने समाज परिवर्तन का जो मार्ग बताया है, उसमें सभी जुड़कर परस्पर सहयोग से इस कार्य को संपन्न करें, यशस्वी बनाएं, यही उद्देश्य है। धर्मशाला (28 मार्च)
- देव भूमि मैत्री संघ द्वारा आयोजित धर्म सम्मेलन
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जो बलशाली होकर कमजोर लोगो की सहायता करता है वही वास्तविक मनुष्य कहलाता है, शक्ति के अहंकार में कमजोर का शोषण करने वाला पशु की श्रेणी में आता है।
- स्वामी दयानंद सरस्वती
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भारत एक सभ्यता मूलक संस्कृति आधारित अध्यात्म प्रेरित देश है – दत्तात्रेय होसबाले जी
पंचनद शोध संस्थान द्वारा भारतीय नैरेटिव पर विशेष व्याख्यान 27 मार्च को चंडीगढ़ में आयोजित हुआ
चंडीगढ़। भारतीय चिंतन, संस्कृति और समकालीन वैश्विक परिप्रेक्ष्य पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण बौद्धिक संवाद के रूप में पंचनद रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा 27 मार्च 2026, एन.आई.टी.टी.टी.आर. ऑडिटोरियम, चंडीगढ़ में एक विशेष व्याख्यान का रहा। कार्यक्रम का विषय “वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारतीय विमर्श” था, जो वर्तमान समय में भारतीय विचारधारा की भूमिका और उसके वैश्विक प्रभाव को समझने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि युद्ध की कहानी रम्य होती है, लेकिन युद्ध प्रत्यक्ष करना अच्छा नहीं लगता है। जो युद्ध शुरू करता है, वही युद्ध बंद करने की बात करता है, यह भी देखने को आज के दिन में मिलता है। रामायण से पूरा विश्व विचार शुद्धि और आचरण शुद्धि सीख सकता है। रामायण पुस्तकों में नहीं है, धर्म आचरण में है। भारत की संस्कृति और सभ्यता में उपलब्ध है। ताक़तवर देश होने के बावजूद भारत ने कभी किसी देश पर आक्रमण नहीं किया।
उन्होंने कहा कि भारत केवल एक मिलिट्री स्टेट नहीं है, भारत एक सभ्यता मूलक संस्कृति आधारित अध्यात्म प्रेरित देश है। दुनिया में इसको ही स्थापित करने के लिए हमारा प्रयास है। लेकिन ये प्रयास अपने कुटुंब से और अपने समाज से ही प्रारंभ होगा।
व्याख्यान में सम्बोधन के बाद उपस्थित जनों के प्रश्नों का उत्तर दिए। एक प्रश्न के उत्तर में सरकार्यवाह जी ने कहा कि शायद प्रश्न में इन दिनों सोशल मीडिया पर चल रही अफवाह के बारे में पूछा गया है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में अफवाह नहीं फैलाना चाहिए। भारतीय विमर्श में विरोधी है, तो भी अफवाह नहीं फैलायी जाती। उन्होंने कहा कि भारतीय परम्परा में शास्त्रार्थ के बाद गले मिलने की परम्परा रही है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय विश्वविद्यालय पंजाब, बठिंडा के कुलाधिपति प्रो. (डॉ.) जगबीर सिंह ने की। प्रो. जगबीर सिंह मध्यकालीन पंजाबी साहित्य, लोक साहित्य एवं साहित्यिक आलोचना के क्षेत्र के प्रतिष्ठित विद्वान हैं। कार्यक्रम में पंचनद के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर ब्रज किशोर कुठियाला भी उपस्थित रहे।
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