Le Comedy

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@vyangPrayog

This is a satire account. We create jokes on political, social and several other situations. Please Don’t take seriously 😃. If you follow, we follow back. 🤝

धरती 🌏 Katılım Haziran 2011
1.7K Takip Edilen987 Takipçiler
Sabitlenmiş Tweet
Le Comedy
Le Comedy@vyangPrayog·
कभी जीवन में नहीं सोचा था कि ट्विटर चलाने जाऊँगा, लेकिन चौदह साल पुरानी खटारा कार को रंगा पुता कर नई रेस में दौड़ा दिया है। देखें कहाँ तक जाती है 😂। #MyXAnniversary
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Le Comedy
Le Comedy@vyangPrayog·
पुलकित भाई, जिस प्रकार से लौंडे ने उड़ता तीर पकड़ा है, वो मारा तुम्हारे पिछवाड़े में ही है। बात साफ़ सी है, ये आर्ट साइड पढ़े मास कॉम वगैरह की पढ़ाई करने वाले चूतियों को ही चुल्ल मचती है अगर कोई देसी टेक्नोलॉजी पीछे रह जाए तो। करने धरने का एक काम नहीं, बकैती के पूरे नंबर। और जिनकी खुद की कमाई यूट्यूब के वीडियो बना के निकल रही हो वो दूसरों को पेआउट का ताना मारते बहुत गंदे लगते हैं । समझो इस बात को। 😀
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Pulkit Tyagi
Pulkit Tyagi@pulkitnpc·
पालने तक ना जा मुन्ना, निजी मत हो ना तो जहाँ से निकला है वहीं बाड़ दूँगा। अब सुन, मैं बक$दी करने तेरी टाइमलाइन पर नहीं आया था। मेरे ट्वीट में कहीं तेरा जिक्र नहीं था, तू खुद आया सूँघता हुआ पर तेरा पेआउट यहाँ से नहीं निकला पाएगा, तो कहीं और जाकर अपनी ये सड़ेली🍑दे। अब निकल।
Pulkit Tyagi tweet media
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Le Comedy
Le Comedy@vyangPrayog·
अखिलेश २०१२ में जीता था। जीत का वर्ष बातों बातों में ग़लत लिख दिया।
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Le Comedy
Le Comedy@vyangPrayog·
जब २०१७ में ये आदमी चुनाव जीता था, और मुख्यमंत्री बना था तो मैं अत्यधिक प्रसन्न हुआ था। क्यूंकि इसके क्रेडेंशियल्स इतने अच्छे बताए गए थे। सैनिक स्कूल का पढ़ा हुआ, ऑस्ट्रेलिया से टेक्नोलॉजी में मास्टर्स इत्यादि के कारण मेरी उम्मीद बढ़ गई थी। पूर्ण बहुमत से सपा को जिताने का श्रेय भी मुलायम सिंह ने इसी को दिया। मेरा एक मित्र सैनिक स्कूल का पढ़ा हुआ था और जिस प्रकार से वह अपने स्कूल की प्रशंसा करता था, मुझे लगता था वही सब संस्कार इसके भीतर भी होंगे। फिर जब इसकी अपने चाचा और पिता से अनबन हुई तब भी मुझे यही लगा कि बालक कुछ अच्छा करना चाहता है और बाप चाचा आड़े आ रहे हैं, गुंडई दिखा रहे हैं। लेकिन फिर समय बीता। उम्मीद को धराशाई होते हमने अपनी आँखों से देखा। प्रदेश जस का तस बना रहा। ले दे कर एक आगरा एक्सप्रेसवे और लखनऊ में सारा विकास चमकता रहा। उसके अलावा जो चमका वो सैफ़ई था। बाक़ी पूरा प्रदेश नाली के ढेर में वैसे ही पड़ा रहा पहले की भांति। फिर भाजपा आई। योगी आदित्यनाथ को सत्ता मिल गई, जबकि मुझे नहीं पता चुनाव में पूर्ण बहुमत दिलाने में उनका कितना योगदान रहा होगा। तो मुझे कोई उम्मीद ही नहीं थी योगी आदित्यनाथ से। कारण स्पष्ट था कि मैंने उनका कोई काम नहीं देखा, अपितु भड़काऊ भाषण के मुकदमे जरूर सुने थे। २०१० के बरेली में हुए दंगों के समय भी योगी को शाहजहांपुर बॉर्डर पर रोक दिया गया था जब वे आना चाहते थे, और मैं भी यही सोचता था कि ये आदमी क्या करने आ रहा है, अभी क्या समस्या कम है। इन सबके बाद भी योगी का कार्य एकदम अलग रहा। पूरे प्रदेश का समग्र विकास हुआ। केवल लखनऊ या गोरखपुर नहीं चमकाए गए। हर जिले को पूरा समय बिजली मिली, सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद मिली, और वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट जैसी योजनाओं का लाभ मिला। विकास के नाम पर योगी दोबारा चुनाव जीत गए। उसके बाद शुरू हुआ जाति का खेल। जो २०२४ में भली भांति आजमाया गया (आरक्षण समाप्त होने के झूठ के नाम पर)। एक वर्ग को बरगला लिया गया और पूरे प्रदेश में भाजपा का भारी नुक़सान हुआ। वही स्क्रिप्ट अब २०२७ के चुनाव के लिए लिखी गई है। बस मोहरे बदल कर जनरल कास्ट कर दिया गया है। और इसका उद्देश्य सामान्य वर्ग के वोट काटना मात्र नहीं है। इसका उद्देश्य ये है कि सामान्य वर्ग को हाथ से फिसलता देख कर भाजपा कोई कदम उठाए और उस कदम को आधार बना कर पुनः उसी वर्ग को बरगलाया जाए जिसे आरक्षण समाप्त होने का भय दिखाया था। क्यूंकि एक ही झूठ दो बार नहीं चलता, इसलिए इस बार एक नए झूठ की तलाश है। उस चुनाव में मोहन भागवत ने कुछ बयानवीर बन कर झूठ के फैलने में सहायता की थी, तो इस बार अजीत भारती जैसे क्रांतिवीर ये काम करने में विपक्ष की भरपूर सहायता कर रहे हैं।
पंडित जगन्नाथ@pandit_jag

विचारों में परिपक्वता साफ साफ नजर आ रही है । यही एक कुशल राजनीतिज्ञ की पहचान है । बाकी इस पोस्ट के लिए मुझे सपाई, धर्मविरोधी बोल सकते हो। लेकिन आईने में देखो, तुम्हारी खुद की विश्वसनीयता अब संदेह के दायरे में आ चुकी है ।

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Le Comedy@vyangPrayog·
Naah, that’s a speculation, nicely curated and circulated by opposition to put a rift in the party. There are some insiders involved in it. And by insiders I mean some who have jumped the ships multiple times and today happen to hold a very strong position in state politics. They seek to obtain a promotion which can only happen if Yogi goes from the state, either by becoming a prime minister or losing the position of chief minister.
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kuldeep S.
kuldeep S.@kuldeepShuklaUk·
@vyangPrayog BJP top leadership wants Yogi to leave, they love puppets not a strong leader.If you look at current CM list although they say they have give chance to new people or any other excuse but basically they are just puppet dancing on orders.
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Le Comedy
Le Comedy@vyangPrayog·
2017 के विधानसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार नहीं थे। लेकिन सपा से तंग प्रदेश ने भाजपा को पूर्ण बहुमत का विश्वास मत दिया। इसमें कोई जातीय समीकरण नहीं था। विशुद्ध रूप से भ्रष्टाचार, तुष्टिकरण और गुंडागर्दी से तंग प्रदेश का भाजपा और मोदी पर विश्वास था। अपेक्षा के अनुरूप योगी का कार्य भी एकदम अलग रहा। पूरे प्रदेश का समग्र विकास हुआ। केवल लखनऊ या गोरखपुर नहीं चमकाए गए। हर जिले को पूरा समय बिजली मिली, सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद मिली, और वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट जैसी योजनाओं का लाभ मिला। विकास के ही नाम पर योगी दोबारा चुनाव जीत कर फिर से आए। प्रदेश भाजपा के हाथ एक ऐसी यूएसपी लग गई थी जिसका तोड़ विरोधियों के पास दूर दूर तक नहीं दिख रहा था। उसके बाद शुरू हुआ जाति का खेल। इस खेल को 2024 के लोकसभा चुनाव में भली भांति आजमाया गया। आरक्षण समाप्त होने के झूठ के नाम पर एक वर्ग को बरगला लिया गया और पूरे प्रदेश में भाजपा का भारी नुक़सान हुआ। वही स्क्रिप्ट अब 2027 के चुनाव के लिए लिखी गई है। बस मोहरे बदल कर जनरल कास्ट कर दिया गया है, और इसका उद्देश्य सामान्य वर्ग के वोट काटना मात्र नहीं है। इसका उद्देश्य ये है कि सामान्य वर्ग के हाथ से फिसलने की भ्रान्ति हो और भाजपा कोई कदम उठाए। फिर इस कदम को आधार बना कर पुनः उसी वर्ग को बरगलाया जाए जिसे आरक्षण समाप्त होने का भय दिखाया था। क्यूंकि एक ही झूठ दो बार नहीं चलता, इसलिए इस बार एक नए झूठ की तलाश है। UGC का मुद्दा ऐसा ही एक मुद्दा हाथ लग गया। पूरी नोटिफिकेशन में ऐसा कोई भयानक प्रावधान नहीं था कि जिसे आधार बना कर अजीत भारती जैसे सोशल मीडिया क्रांतिवीर इतने विक्षुब्ध हो जाएं। थोड़ी बहुत रेडंडेंट बाते जरूर थीं जिन्हे आराम से हटवाया जा सकता था, लेकिन इतना शोर मचाने की आवश्यकता ही नहीं थी। अब चूंकि UGC के मुद्दे की बात सर्वोच्च न्यायलय के कारण ठन्डे बस्ते में चली ही जानी थी, इसलिए अब संघ से लेकर बुद्ध, अंबेडकर, गाँधी सबको निशाना देकर भाजपा से कुछ करवाने का प्रयास किया जाएगा। जहाँ 2024 के चुनाव में मोहन भागवत के आरक्षण को दिए बयान को आधार बना कर माहैल भड़काया गया था वहीँ इस बार इस बार अजीत भारती जैसे क्रांतिवीर भूले भटके ही सही लेकिन ये काम करने में विपक्ष की भरपूर सहायता कर रहे हैं। सवर्णो का नाम लेकर पार्टियां बनाई जा रही हैं, शंकराचार्य का नाम लेकर ब्राम्हण समुदाय के नाम का बिल फाड़ा जा रहा है, और ये सब इसलिए किया जा रहा है जिससे भाजपा कुछ ऐसा करे कि दलित समुदाय को फिर से विशवास दिलाया जा सके कि भाजपा केवल सवर्णों की पार्टी है। यदि कोई विद्वान ये आ कर कहे कि UGC का मुद्दा और सवर्णों को लेकर भाजपा का विरोध देशव्यापी है और उत्तर प्रदेश के चुनाव का इससे कोई लेना देना नहीं है तो अपनी विद्वत्ता अपने पास रखे। उत्तर प्रदेश और बिहार को छोड़ कर पूरे देश में ये सवर्ण दलित की नौटंकी अब कहीं नहीं चलती है। ये नाटक शुरू ही उत्तर प्रदेश के चुनाव के कारण हुआ था और उसी के साथ समाप्त भी हो जाएगा। या यूँ कहिये कि यदि नाटक सफल हुआ तो 29 के चुनाव में फिर से दोहराया जाएगा।
AjiHaan@AjiHaaan

कल 2019 के फ़ोटो दिखा के बताया गया कि ज़मीन पे नाराज़गी है और आर्गेनिक सपोर्ट ग़ायब है 🤣 फिर एक ने फ़ेक AI वीडियो को हाईलाइट करते बताया कि देखो क्या स्पीच है.. फिर सबने जंतर मंतर पर योगी जी के ख़िलाफ़ चल रहे खेल को पॉजिटिव प्रचार करके बताया गया कि ये देखिए भीड़.. अब फिर आज ये बताया जाएगा कि कुछ लोग योगी जी को हराना चाहते हैं.. योगी जी के ख़िलाफ़ पोलिटिकल पार्टी ख़ुद बना रहे हैं और फिर ब्लेम बाकियों पे डाला जा रहा है 🤣

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Le Comedy
Le Comedy@vyangPrayog·
जवान आदमी के पास भाषण सुनने का टाइम ही कहाँ है। भाषण सुनते हैं बुढ़वे और हमारे जैसे अधेड़, जिनकी पीड़ा अभी भी इस बात में है इतने दिन हो गए साला हम विकसित काहे नहीं हुए। मोदी जी भी जानते हैं, इसीलिए जैसी जगह वैसा भाषण। परीक्षा पर चर्चा करने जाते हैं तब कोई नेहरू इंदिरा नहीं करते। किसी टेक्नोलॉजी के फंक्शन में जाते हैं वहां भी किसी और की कोई और बात नहीं करते। मोदी बहुत पहुंचे हुए राजनैतिक खिलाड़ी हैं। दिलीप मंडल जैसे जाने कितने खूंखार कुकुर पकड़ कर उनको टेम कर चुके हैं और अपना पालतू बना चुके हैं। किससे सलाह लेनी है और किसको किस पर छोड़ना है सब जानते हैं।
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Exx Cricketer
Exx Cricketer@old_cricketer·
मैं 2011-12 के आसपास टीवी डिबेट्स बहुत देखता था। तब मुझे एक बात जो खटकती थी कि उन डिबेट्स में कोई भी मतलब की बात भी हो रही हो तो भी कांग्रेस प्रवक्ता मोदी को टारगेट करने लगते थे जबकि मोदी तब भाजपा के घोषित प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी भी नहीं थे। कांग्रेस प्रवक्ताओं की हर बात में मोदी मोदी होता था और अपनी सफलताओं असफलताओं या विजन से ज्यादा वो मोदी और सांप्रदायिकता की बात करते थे और गुजरात दंगों 2002 की भी। बहुत से कांग्रेस विरोधियों ने जो मोदी को अच्छे से जानते भी नहीं थे, उन्होंने भी फिर मोदी को अपने हीरो की तरह ट्रीट करना शुरू कर दिया। पिछले कुछ समय से नरेंद्र मोदी के भाषणों में भी सेम पैटर्न देख रहा हूं। (वैसे भी भाजपा का मतलब मोदी ही है इस समय केवल तो बाकियों की बात भी क्या करना?) अपने कामों सफलताओं को गिनाने की जगह वो केवल नेहरू ने ये किया , वो किया या कांग्रेस मेरी कब्र खोदना चाहती है, मुझे गाली दी पर अटक के रह जाते हैं। मोदी के पास गिनाने को बहुत सफलताएं हो सकती हैं पर वो जब नेहरू और कांग्रेस को अपने भाषणों में ले आते हैं तो उनका प्रभाव कम हो जाता है। वैसे भी 2000 के बाद की जन्मी पीढ़ी को न आपातकाल की पड़ी है न नेहरू की। उसे बस मोदी का ओवर पी आर और रोना धोना दिखता है और नेहरू का नाम सुनकर उनके बारे में जानने की उत्सुकता भी। जो भाजपा के लिये अच्छी नहीं। विशेष - यहां केवल अपने मन की बात लिख रहा हूँ। जो समझ आ रहा।कोई सलाह नहीं दे रहा। सलाह के लिये उनके पास आलरेडी दिलीप मंडल हैं जो इसी काम की तनख्वाह लेते हैं। भाजपा जीते या हारे मुझे फर्क नहीं पड़ता।
Exx Cricketer tweet media
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Le Comedy
Le Comedy@vyangPrayog·
मुझे लगता है कि मोटा भाई को Youth Congress का प्रदर्शन होने वाला है इसकी खबर लग गई होगी। सोच रहे होंगे कि जब कोई खुद ही अपनी गोटी पिटवाने आ रहा है तो पैसा काहे बदलें... #AISummit
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Le Comedy
Le Comedy@vyangPrayog·
कोई मेरे भी करवा दे। वैसे तो भगवान का दिया सब कुछ है, दौलत है, शोहरत है, किसी भी बैंक पर हाथ रख दूं तो एनआरई के नाम पर लोन देने से मना नहीं करेगा। लेकिन मुफ्त में समय बर्बाद करने से मुझे बहुत पीड़ा हो रही है, और एलन मस्क ने जो महीना बोल के धोखे से मुझसे साल भर का प्रीमियम ऐंठ लिया तो पीड़ा का कोई अंत भी जल्दी नजर नहीं होता दिख रहा 😞।
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Exx Cricketer
Exx Cricketer@old_cricketer·
वैसे ये आदमी मुझे खास पसंद नहीं पर अगर आप इसके 500 वेरिफाइड फॉलोअर्स करवा दोगे तो उसके बाद आने वाले पे आउट से ये मेरा पिछला 50 हजार रुपए का उधार चुका देगा। इसलिए इसके 500 वेरिफाइड फॉलोवर्स करवा दें प्लीज।
Varun Pandey@varpa2010

कोई मेरे 500 वेरिफाइड फॉलोअर्स करवा दो.. 😑 कब तक 150 पे अटका रहूंगा

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Le Comedy
Le Comedy@vyangPrayog·
@khuchrep भाई दस पंद्रह हज़ार का तो कनाडा में भी नहीं पड़ता ये, पीपीपी एडजस्ट कर दो फिर भी 😂
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खुचरेंप
खुचरेंप@khuchrep·
इस पोस्टर की कीमत लगभग 10 से 15 हजार रुपए तक होगी, और आज पूरे मेरठ में ऐसे सैकड़ों पोस्टर लगे होंगे। जो लोग गरीबों की सरकार बोल कर आए थे, आज वही लोग गरीबों को लूट रहे हैं। उड़ा लो साहब, चमका लो छवि, हम लोग तो टैक्स भर ही रहे हैं।
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Le Comedy
Le Comedy@vyangPrayog·
@pandit_jag पता नहीं कौन सी परिपक्वता दिखी यहाँ पर 😂😂😂
Le Comedy@vyangPrayog

जब २०१७ में ये आदमी चुनाव जीता था, और मुख्यमंत्री बना था तो मैं अत्यधिक प्रसन्न हुआ था। क्यूंकि इसके क्रेडेंशियल्स इतने अच्छे बताए गए थे। सैनिक स्कूल का पढ़ा हुआ, ऑस्ट्रेलिया से टेक्नोलॉजी में मास्टर्स इत्यादि के कारण मेरी उम्मीद बढ़ गई थी। पूर्ण बहुमत से सपा को जिताने का श्रेय भी मुलायम सिंह ने इसी को दिया। मेरा एक मित्र सैनिक स्कूल का पढ़ा हुआ था और जिस प्रकार से वह अपने स्कूल की प्रशंसा करता था, मुझे लगता था वही सब संस्कार इसके भीतर भी होंगे। फिर जब इसकी अपने चाचा और पिता से अनबन हुई तब भी मुझे यही लगा कि बालक कुछ अच्छा करना चाहता है और बाप चाचा आड़े आ रहे हैं, गुंडई दिखा रहे हैं। लेकिन फिर समय बीता। उम्मीद को धराशाई होते हमने अपनी आँखों से देखा। प्रदेश जस का तस बना रहा। ले दे कर एक आगरा एक्सप्रेसवे और लखनऊ में सारा विकास चमकता रहा। उसके अलावा जो चमका वो सैफ़ई था। बाक़ी पूरा प्रदेश नाली के ढेर में वैसे ही पड़ा रहा पहले की भांति। फिर भाजपा आई। योगी आदित्यनाथ को सत्ता मिल गई, जबकि मुझे नहीं पता चुनाव में पूर्ण बहुमत दिलाने में उनका कितना योगदान रहा होगा। तो मुझे कोई उम्मीद ही नहीं थी योगी आदित्यनाथ से। कारण स्पष्ट था कि मैंने उनका कोई काम नहीं देखा, अपितु भड़काऊ भाषण के मुकदमे जरूर सुने थे। २०१० के बरेली में हुए दंगों के समय भी योगी को शाहजहांपुर बॉर्डर पर रोक दिया गया था जब वे आना चाहते थे, और मैं भी यही सोचता था कि ये आदमी क्या करने आ रहा है, अभी क्या समस्या कम है। इन सबके बाद भी योगी का कार्य एकदम अलग रहा। पूरे प्रदेश का समग्र विकास हुआ। केवल लखनऊ या गोरखपुर नहीं चमकाए गए। हर जिले को पूरा समय बिजली मिली, सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद मिली, और वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट जैसी योजनाओं का लाभ मिला। विकास के नाम पर योगी दोबारा चुनाव जीत गए। उसके बाद शुरू हुआ जाति का खेल। जो २०२४ में भली भांति आजमाया गया (आरक्षण समाप्त होने के झूठ के नाम पर)। एक वर्ग को बरगला लिया गया और पूरे प्रदेश में भाजपा का भारी नुक़सान हुआ। वही स्क्रिप्ट अब २०२७ के चुनाव के लिए लिखी गई है। बस मोहरे बदल कर जनरल कास्ट कर दिया गया है। और इसका उद्देश्य सामान्य वर्ग के वोट काटना मात्र नहीं है। इसका उद्देश्य ये है कि सामान्य वर्ग को हाथ से फिसलता देख कर भाजपा कोई कदम उठाए और उस कदम को आधार बना कर पुनः उसी वर्ग को बरगलाया जाए जिसे आरक्षण समाप्त होने का भय दिखाया था। क्यूंकि एक ही झूठ दो बार नहीं चलता, इसलिए इस बार एक नए झूठ की तलाश है। उस चुनाव में मोहन भागवत ने कुछ बयानवीर बन कर झूठ के फैलने में सहायता की थी, तो इस बार अजीत भारती जैसे क्रांतिवीर ये काम करने में विपक्ष की भरपूर सहायता कर रहे हैं।

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पंडित जगन्नाथ
विचारों में परिपक्वता साफ साफ नजर आ रही है । यही एक कुशल राजनीतिज्ञ की पहचान है । बाकी इस पोस्ट के लिए मुझे सपाई, धर्मविरोधी बोल सकते हो। लेकिन आईने में देखो, तुम्हारी खुद की विश्वसनीयता अब संदेह के दायरे में आ चुकी है ।
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Le Comedy
Le Comedy@vyangPrayog·
@ajeetbharti नंगापन शब्द अत्यधिक गुस्से को दिखाता है। विरोध अपनी जगह है और नंगापन अपनी जगह। ये दर्शाता है कि यूथ कांग्रेस के मर्द पराठों का भविष्य अब बहुत बुरा होने वाला है।
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Ajeet Bharti
Ajeet Bharti@ajeetbharti·
No amount of paid tweets will ever bring back the organic trust Modi enjoyed till January 14, 2026. Use of words like ‘nanga’ is not something Modi used like this in his speeches. This is a desperate attempt to get ‘discussed’. Two interviews, PTI & ANI, came and went away undiscussed, speak volumes about the diminishing aura as core supporters feel betrayed on the chosen silence over UGC. To top that silence, doubling down on ‘shoshit, vanchit, peedit’ and ‘Ambedkar, My Dad’ narrative, is not going to help BJP. This is inviting hate to appease someone. From ‘56 inch ka seena’ to ‘mujhe bolne nahi diya sansad me’, this victimhood will only play negatively among your own support base. Rest, no money can defeat organic narrative.
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Manish Singh
Manish Singh@RebornManish·
नंगे से खुदा डरे!! बरसों पहले नग्न महिलाओं ने, भारतीय सेना की एक रेजिमेंट के दफ्तर के सामने, नग्न प्रदर्शन किया था। आरोप था कि आर्मी ने उनके साथ यौन दुर्व्यवहार किया है। यदि किया हो, तो किसी रेजिमेंट के कुछ लोगो ने किया होगा। पर तख्ती हमारी आर्मी के नाम की लगी थी। यह दिल तोड़ने वाली तस्वीर थी। ●● लेकिन दिल तब और टूटा जब उसी नॉर्थ ईस्ट के मणिपुर में महिलाओं को नग्न कर परेड कराई गई। इस बार दोषी सेना नही थी, आम लोग थे। जो बलशाली थे। वे साबित कर रहे थे। उनमें से किसी पर क्या कार्यवाही हुई, किसी को नहीं पता, क्योकि मणिपुर भारत के न्यूज नक्शे में विलुप्त है। लेकिन इससे साबित यह होता है कि नग्नता, एक सन्देश है। कमजोर नंगा होकर सन्देश देता है। और ताकतवर नंगा करके.. ●● पिछली बार एक सशक्त नेत्री ने विपक्ष के लोगों को चुनौती देकर कहा था- एक एक को नंगा करूंगी। अमेठी की जनता ने उन्हें कपड़े पिन्हा कर, सिली सोल भेज दिया। पर नंगे होकर प्रदर्शन करने की रवायत नई नही है। बरसो पहले जब मंडल कमीशन लागू हुआ था, आरक्षण के विरुद्ध हमारे भैया लोगो ने, (मने हम स्कूल में थे, भैया लोग कॉलेज में) मेरे शहर में अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया था। वह मेरे लिए ऐसे दृश्य का साक्षी होने का पहला सौभाग्य था। फिर ऐसे दृश्य आते रहे। कभी खबर बनते, कभी नही। पर इस बार खबर जोरदार बनी है। इंटरनेशनल AI समिट में लोग अधनंगा प्रदर्शन करने चले गए। पर तब प्रदर्शन एक्प्रेशन ऑफ थॉट था, अब देशद्रोह है। ●● दोस्तों, सत्य नग्न होता है। जब हम पैदा हुए, तब सत्य थे। फिर हम सब पर झूठ का आवरण चढ़ता गया। मेरे बचपन के फोटो बताते है कि पैदा होते ही मुझे नैपी और झबला पहना दिया गया था। तब ही मैनें समझ लिया था, कि इस सामाजिक सनक की वजह से, रोटी और मकान के साथ साथ कपड़ा भी बेवजह, मेरे जीवन की तीन मूलभूत आवश्यकताओं में एक बन जाना है। गरीब की आधी कमाई इन कपड़ो में खर्च हो जाती है। अब इस गरीब देश मे यदि नग्नता एक्सप्रेशन बन जाये, तो वस्त्रों पर व्यर्थ जाने वाली, जीडीपी का बड़ा हिस्सा बचाया जा सकता है। इससे फिस्कल डेफिसिट कम होगा, और अर्थव्यवस्था सुधरेगी। नेताओ और राजनीतिज्ञों ने इसमे लीड ले ली है। ●● राजनीति नंगई की प्रतियोगिता बन चुकी है। नग्न झूठ, नग्न थेथरई, और नग्न चरनचुम्बकता राजनीतिक उत्थान के प्रूवन टूल बन चुके है। जो जितना बड़ा नंगा, उतने ऊंचे आसन पर आसीन है। इस दौर में आप आसन की ऊँचाई नापकर बेझिझक समझ लें, की अगले कि नंगाईयत का लेवल क्या है? दरअसल राजा के नंगे होने की कहानी पुरानी हुई। अब तो जो नंगा है, वह राजा है। पार्टी खम ठोककर बोल रही है - "अभी तो ये अंगड़ाई है, 2047 तक नंगाई है" ●● तो इस क्रम में कांग्रेस के एस्पायरिंग पॉलिटीशियन भी नंगे होकर AI समिट में पहुँच गये। चिल्ला रहे है- पीएम इज कंप्रोजमाइज्ड!! जानो मानो बहुत बड़ा खुलासा कर रहे हैं। अबे, क्या वहां आयी जनता को यह बात नही पता?? या आये हुए विदेशियों को नही पाया? व्हाट ए वेस्ट ऑफ टाइम एंड ऑपर्चुनिटी!! ●● ऑपर्चुनिटी से याद आया। जगह एकदम ठीक चुनी इन्होंने। अगर जंतर मंतर पे प्रदर्शन करते, सड़क पर उतरते, चौराहे जाम करते- तो कोई कैमरा कवर करने न आता। कमीज खोकर घर पहुचने पे घरवाली शक अलग करती। तो ये वहां पहुँच गए, जहां कैमरा पहले से था। उसकी आंख में चिमटी फिट करके ऐसा प्रदर्शन किया कि पूरे देश मे बात पहुँच गयी। बीवी को भी पता है कि पति 5 दिन से कही रंगरलियां मना नही रहा। विरोध के चक्कर में जेल गया है। प्रदर्शनकारियों की जमानत नही हुई। 5 दिन की रिमांड हुई है। तो इन पंक्तियों के लिखे जाने के वक्त पुलिस नंगा करके राजनीतिक पूछताछ कर रही होगी। ●● अभी रिमांड खिंचने वाली भी है। क्योकि अदालत भी वही हम्माम है, जहां ऊंची कुर्सी पर बैठे साहबान भी.. समझ गए? अये, शब्बास!! कहावतों का यही फायदा है। लेकिन सत्ता से दूर बैठे कांग्रेसियो पर एक और कहावत भी फिट है। बेचारे, नहाएंगे क्या, और निचोड़ेंगे क्या? कभी जब सत्ता में थे, तो लोगो को लगता था कि इन्होंने बहुत निचोड़ा है। 12 साल में समझ गए निचोड़ना तो यह होता है। कांग्रेसी तो निरे पप्पू थे। ●● बहरहाल, AI समिट से दुनिया को संदेश जा चुका है। यहां पक्ष नंगा है, विपक्ष नंगा है। मीडिया नंगा है, यूनिवर्सिटी नंगी है छात्र-इन्वेस्टर वेस्टर-रिसर्चर नंगे है। यत्र तत्र सर्वत्र- नंगई का बोलबाला है। वस्तुतः नंगई को 21 वीं सदी में विश्व को, हमारे नायाब योगदान के रूप में गिना जाएगा।खासकर जब इस्लाम से हम भयंकर खतरा झेल रहे हैं, तो खुदा के बंदों को डराने का यह तरीका खूब है। क्योकि यह तो कहावत वे भी जानते हैं। नंगे से खुदा भी डरता है! ❤️😋
Manish Singh tweet media
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Le Comedy
Le Comedy@vyangPrayog·
@rahuldev2 हमारी रीच तो कभी रीच बनी ही नहीं 😂। अपने फॉलोअर्स से किसी और को फॉलो करने की माँग क्या ही करें, हमारी अपनी बात हमारे फॉलोअर्स तक नहीं पहुँचती।
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राहुल देव 🇮🇳 | राष्ट्र प्रथम
वो #FF की परंपरा क्या समाप्त हो गई? यदि आपको हमारे पोस्ट अच्छे लगते हैं तो इसे रीपोस्ट करके अपने फॉलोअर्स को हमें फॉलो करने के लिए कहें। हमारी रीच कॉन्ग्रेस की नैतिकता की भांति पाताल को छू रही है!!!
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Le Comedy
Le Comedy@vyangPrayog·
ये बात आशुतोष जी को तब से पता थी जब से ये ख़ुद पत्रकारिता करने उतरे थे, लेकिन कह आज पाए हैं। इनकी बात बिल्कुल ठीक है, लेकिन ख़राब बात ये है कि ये स्वयं को पढ़ीस वाली केटेगरी में सोच रहे हैं, जबकि है ये भी नाख्वांदा अहमक़ ।।😃😃।।
ashutosh@ashutosh83B

पत्रकारिता में बहुत सारे ऐसे लोग आ गये हैं जिनका पढ़ने लिखने से कोई लेना देना नहीं है । बस सूचना के आगे सोचना नहीं ।

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Le Comedy
Le Comedy@vyangPrayog·
गरीबों को ही ज्यादातर मेरी बातें अच्छी लगती हैं। आईफ़ोन वाले अमीर दूसरे नंबर पर हैं 😃।
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Le Comedy
Le Comedy@vyangPrayog·
Ekta ji, wild income inequality is not only in India. It is worldwide. It is not a fair criticism. This wild income inequality exists at every level. If you have a maid at your home, and you pay her some money, it will always be very less compared to what you make. Your maid can’t earn the same amount as you make. You create the inequality right from your home.
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ekta bhargava
ekta bhargava@ektabhargava11·
@aravind @DerrickEvans4WV Aravind please just accept that there are wild income inequality in India. No need to bristle at even fair criticism. Dont need to comment and give oxygen to such comments tbh
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Derrick Evans
Derrick Evans@DerrickEvans4WV·
🚨Hillary Clinton visits the Ambani family’s 27-story, $2B home in India, while millions there survive on just a few dollars a day.x.com/ViralVideos/st…
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Le Comedy
Le Comedy@vyangPrayog·
@old_cricketer आप कह रहे हैं तो ठीक ही होगा, क्यूंकि इधर तो कोई चाइनीज़ अख़बार आता नहीं तो इसीलिए मैंने देखा भी नहीं 😁।
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Exx Cricketer
Exx Cricketer@old_cricketer·
@vyangPrayog दोबारा से बता दूं। चीन के कई अखबारों में ये खबर थी। भले ही किसी पाकिस्तानी हैंडल ने ट्विटर पर खबर दी हो। ट्विटर पूरी दुनिया नहीं है।
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Exx Cricketer
Exx Cricketer@old_cricketer·
सुनो भाई। मुझे मत बताओ कि ए आई समिट में यूथ कांग्रेस ने क्या प्रदर्शन किया और उससे देश की छवि पर क्या प्रभाव पड़ेगा। ए आई समिट की छवि पर धब्बा तभी लग गया था जब चीन की मीडिया ने गलगोटिया यूनिवर्सिटी का फ्राड पूरी दुनिया में वायरल कर दिया था जिससे थू थू हुई थी। दूसरा ए आई समिट में ऐसा कोई प्रदर्शन न हो पाये , इसे रोकने की जिम्मेदारी किसकी थी? भारत सरकार की , गृह मंत्रालय की थी या कांग्रेसी ट्रॉलर्स की? शुद्ध हिन्दी में ये सरकार की, प्रशासन की विफलता थी कि ऐसा प्रदर्शन हुआ और सरकार प्रशासन को न इसकी पूर्व जानकारी थी, न कुछ कर पाये। अब लीपा पोती कर रहे हैं। तो कुल मिलाकर इसमें जितनी दोषी यूथ कांग्रेस है , उससे ज्यादा दोषी ये सरकार का प्रशासन है जिसके समय ये हो पाना संभव हुआ। तो भाई ये बकैती तो बंद ही करो अब कि यूथ कांग्रेस ने विश्व पटल पर देश का नाम खराब किया। तुम्हारा प्रशासनिक तंत्र क्या कर रहा था तब? कोई पूर्व सूचना नहीं थी? और सूचना थी भी तो क्या सिर्फ अपने पॉलिटिकल लाभ के लिये ये होने दिया? वैसे आपका रिकॉर्ड तो ऐसा ही कुछ सजेस्ट करता है।
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