wallah
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@profapm @mssirsa @ArvindKejriwal @AtishiAAP This bastard is an anti national, puppet of Mossad and CIA kind of agencies , cunningly destroying Indian economy and industrial/ defence power of India.
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Manjinder Singh Sirsa (@mssirsa)!
जम्बो जेट, 7 हेलिकॉप्टर, 21 फाइटर प्लेन और 7000 कमांडो के साथ यह कौन-सा मेडिटेशन हो रहा है?👇
क्या जम्बो जेट, 7 हेलिकॉप्टर, 21 फाइटर प्लेन और 7000 कमांडो के बिना मेडिटेशन नहीें हो सकता?
देश का पैसा लूट रहा है मोदी!
@ArvindKejriwal @AtishiAAP @AamAadmiParty

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ब्राह्मणों ने राजा से शिकायत की कि चार्वाक जनता को धर्म के खिलाफ भड़काता है और यह राज्य-सत्ता के खिलाफ है, वह परोक्ष रूप से सत्ता हथियाना चाहता है।
राजा ने चार्वाक को पकड़ बुलवाया और कहा 'तुम जनता को धर्म के खिलाफ भड़काते हो, क्या यह सच है?'
उसने कहा, 'बिलकुल नहीं'।
ब्राह्मणों ने कहा, 'यह प्रचार करता है कि पुनर्जन्म नहीं होता, यह प्रचार धर्म-विरुद्ध है'।
राजा के पूछने पर चार्वाक ने कहा, 'मैं तो पुनर्जन्म में विश्वास करता हूँ, ये ब्राह्मण ही विश्वास नहीं करते और ये ही धर्म-विरोधी हैं'।
राजा ने पूछा, 'कैसे?'
उसने कहा, 'यदि ये पुनर्जन्म में विश्वास करते हैं तो मुझे सौ स्वर्ण मुद्राएं दें, मैं इन्हें अगले जन्म में वापस करने का वायदा करता हूँ।'
राजा ने ब्राह्मणों की तरफ देखा, उनके चेहरे उतरे हुए थे !
- यह है धर्मों का पाखंड!
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भगतसिंह की फांसी को लेकर दशकों से ये भ्रम फैलाया जा रहा है कि गांधी चाहते तो भगतसिंह की जान बच सकती थी.
इस तथ्य की पुष्टि करने के लिए किसी गोडसे या किसी कांग्रेसी को पढ़ने के बजाय भगतसिंह और उनके बारे में लिखा साहित्य पढ़ा जाना ज़रूरी है.
जब भगतसिंह ने सांडर्स को मारकर लालाजी की मौत का बदला लेने के बाद, असेंबली में बम फेंकने का निर्णय लिया तब चंद्रशेखर आज़ाद ने प्लान तैयार किया कि किस तरह और किन रास्तों से बम विस्फोट करने के बाद निकालकर भागा जा सकता है. उन्होंने ये प्लान भगतसिंह को बताया और पर भगतसिंह ने इस अमल करने से साफ़ इंकार कर दिया.
भगतसिंह गिरफ्तार होना चाहते थे.
इस मुद्दे पर आज़ाद से भगतसिंह की गर्मागर्म बहस भी हो गई.
भगतसिंह का कहना था "ये बम हम किसी की जान लेने के लिए नहीं फेंकने वाले हैं.
हमारा मकसद है लोगों को जगाना और उस मकसद को मैं गिरफ्तार होकर ज़्यादा बेहतर तरीके से पूरा कर सकता हूँ.
केस चलेगा,
जिरह होगी.
उस जिरह में हमें अपनी बात रखकर देशवासियों तक पहुँचाने का मौका मिलेगा."
पर आज़ाद का कहना था कि केस का मतलब होगा मौत की सजा.
भगतसिंह ने जो कहा वो उनके जैसा कोई वीर ही कह सकता था. वो बोले:
"मैं जान देने के लिए ही गिरफ्तार होना चाहता हूँ. मैं ज़िंदा रहकर आज़ादी के आंदोलन में उतना योगदान नहीं दे पा सकूंगा जितना मरकर दे सकता हूँ. मैं तो चाहता हूँ मुझे फांसी की सजा हो और मैं हँसते हँसते मौत को गले लगा लूँ.
मेरी मौत कई भगतसिंह पैदा कर देगी."
दोनों महान क्रांतिकारियों के बीच बहुत बहस हुई. लेकिन भगतसिंह अपनी ज़िद के पक्के थे. आज़ाद को उनके आगे हार माननी पड़ी.
फिर वही हुआ जो भगतसिंह चाहते थे.
उनकी 116 दिन की भूख हड़ताल और उसके बाद फांसी ने पूरे देश को झकझोर दिया.
भगतसिंह की शहादत ने आज़ादी के आंदोलन की पुख्ता ज़मीन तैयार कर दी. उसके बाद तो देश आज़ादी से कम पर मानने को तैयार ही नहीं हुआ.
भगतसिंह के ट्रायल और भूख हड़ताल के दौरान कांग्रेस के सारे नेता भगतसिंह और उनके साथियों के बचाव के लिए प्रयासरत रहे.
63 दिन की भूख हड़ताल के बाद असेंबली केस में भगतसिंह के साथी जतींद्र नाथ दास के निधन के विरोध में मोहम्मद_आलम और गोपीचंद_भार्गव ने पंजाब असेंबली से इस्तीफा दे दिया.
इन क्रांतिकारीयों के साथ जेल में अमानवीय व्यवहार के विरोध में मोतीलाल_नेहरू ने सेंट्रल असेंबली में प्रस्ताव पास कराया.
जवाहरलाल नेहरू ने भगतसिंह को राजनैतिक कैदी का दर्ज़ा दिलवाने के लिए प्रयास किये. वो भगतसिंह से मिलने जेल भी गए.
कांग्रेस ने भगत सिंह की भूख हड़ताल समाप्त कराने के लिए प्रस्ताव पास किया और भगत सिंह के पिता और कांग्रेस के निवेदन पर भगतसिंह ने 116 दिन के बाद अपनी भूख हड़ताल समाप्त की.
जवाहरलाल नेहरू और जिन्ना ने सार्वजनिक रूप से भगतसिंह की सराहना और समर्थन किया.
सभी की डिटेल में ना जाते हुए हम सिर्फ गांधी के प्रयास को समझने की कोशिश करते हैं.
ये सही है कि अपने हिंसा विरोधी सिद्धांतों के चलते गांधी जी खून का बदला खून से लेने के खिलाफ थे. लेकिन भगतसिंह और उनके साथियों को बचाने के लिए किये जा रहे कांग्रेस के प्रयासों में उन्होंने कभी बाधा नहीं डाली.
अगर वो नहीं चाहते तो कांग्रेस इतनी प्रो-एक्टिव होकर भगतसिंह और उनके साथियों के समर्थन में नहीं खड़ी होती.
प्रिवी कौंसिल में कांग्रेस द्वारा दायर भगतसिंह और उनके साथियों की फांसी की सजा की माफ़ी की अपील निरस्त होने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष प. मदनमोहन मालवीय ने इरविन के सामने दया याचिका दायर की.
एक अपील गांधीजी को भेजी गई.
इरविन ने अपने नोट्स में लिखा है-
"While returning Gandhiji asked me if he could talk about the case of Bhagat Singh, because newspapers had come out with the news of his slated hanging on March 24th. It would be a very unfortunate day because on that day the new president of the Congress had to reach Karachi and there would be a lot of hot discussion. I explained to him that I had given a very careful thought to it but I did not find any basis to convince myself to commute the sentence. It appeared he found my reasoning weighty".
इस सारी बहस में मुख्य बात ये है कि भगतसिंह चाहते थे कि उन्हें फांसी हो. अगर उन्हें बचना ही होता तो वो चंद्रशेखर आज़ाद की योजना को स्वीकार कर सकते थे.
सनद रहे कि चंद्रशेखर ऐसी योजनाएं बनाने में माहिर थे और जीवन पर्यन्त कभी अंग्रेज़ों के हाथ नहीं लगे.
■ सबसे बड़ी बात:
भगतसिंह या चंद्रशेखर आज़ाद या सुभाषचन्द्र_बोस की तस्वीरें लगाकर खुद को राष्ट्रभक्त साबित करने की कोशिश करने वाले संघी परिवार ने कभी आवाज क्यों नही उठाई?
RamChandra Shukla
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🇮🇱🇪🇺 Israel is now trying to instigate internal unrest in Europe in every possible way
They even put up a billboard in Tel Aviv, "Free Europe".
The aim is to provoke inter-religious conflict at any cost.
Citizens of Europe should be cautious and not fall for Mossad orchestrated provocations.
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Suhas Subramanyam has been double-dipping with AIPAC & Hindutva donors. Electing him would put Indian-American & Muslim civil liberties at risk both in America and abroad. Watch this video and make a plan for election day! #NoHindutva #CeasefireNow
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