ये जो सियासतदां नजर आते हैं
इनमें अक्सर बेईमान नजर आते हैं
इनके वायदों का भरम रखते हैं और सो जाते हैं
वरना गरीब तो हर वक्त परेशान नजर आते हैं
सियासत शहर से जंगल तलक है
जहां भी रहना वहां बेदार रहना है
अब ऐसे रहनुमा को जमामे मुल्क सोंपीये
जो हर इंसान को अपनी तरह इंसान समझते हों !