हिंदू धर्म इस्लाम से पहले आया था, सभी इसी धर्म में पैदा हुए हैं।
इस्लाम महज़ 1500 साल पहले ही आया।
कश्मीर में भी 600 साल पहले कोई मुसलमान नहीं था… सभी कश्मीरी पंडित थे।
: गुलाम नबी आजाद , DPAP अध्यक्ष
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर उन असंख्य हस्त शिल्पियों को नमन जिन्होंने हमारी स्वतंत्रता की कहानी बुनी और आज भी राष्ट्रनिर्माण के अग्रणी प्रतीक हैं।
धीरे धीरे मूर्तियोंं और फव्वारों से सजती दिल्ली हमारे सनतराशों की कला और मेहनत का ही परिणाम है।
The New York Times actually has the nerve to support calls for genocide! If ever there was a time to cancel that publication, it is now.
You can read their articles for free anyway using removepaywall.com.
Chaired the 13th meeting of the Court of Guru Gobind Singh Indraprastha University (GGSIPU). Advised them to strive towards making GGSIPU, a favored destination for students/scholars from not only India but abroad as well, by raising academic standards and reverse brain drain.
@NikhilaHenry@BBCIndia@bbcworldservice I think here journalist not doing their work perfectly. After approximately more than 2 years not watch any news channel only read online.
I think AI robot better for News.
I m waiting..
Realy I am not believe any one journalist because they always partiality to support govt.
बीजेपी नेता @naqvimukhtar ने ज्ञानवापी मामले पर बयान दिया, उन्होंने कहा कि "विदेशी आक्रमणकारियों की करतूतों की जिम्मेदारी भारत के मुसलमानों की नहीं है"
#ATDigital#GyanvapiCase#Varanasi
@KashifArsalaan#Islam ka darja uncha hai Aap log apne Imaan ki hifazat kro..
#Islam se hum hain.
Kafir kl bhi tha aaj bhi hai..
Hamare pass Islam hai..
Hadis padho suno imman taza ho jata hai
#Umar#Yusuf
Ki zindagi dekho...
Pahle bhi aaye the mitane wo khud mit gye Islam aur buland hua
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फ़र्स्ट क्लास सिटिज़न राहुल गांधी ने सरकारी घर छोड़ दिया लेकिन उनके विरोधी आई टी सेल से आग्रह है कि आडवाणी जी पर घर छोड़ने का दबाव न बनाएं। थर्ड क्लास सिटिज़न पर अपनी शाही संपत्ति जनता के नाम करने का दबाव न बनाएं। सरकारी बंगले के लिए सत्ता के गुलाम बने लोगों को न ललकारें।
आप सभी, जो मेरे मित्र, शुभचिंतक, सहकर्मी, सहयात्री, दर्शक, पाठक, फ़ैन, परिचित, अपरिचित, ज़िला और गाँव-ज्वार के लोग,रिश्तेदार-नातेदार, सार्वजनिक जीवन की हस्तियाँ, गुमनाम शहरी हैं, ने मेरे चारों तरफ़ संबल और संवेदना की एक ऐसी दीवार बना दी कि लगा ही नहीं कि सर से माँ का साया उठा है।आपके ज़रिए उसी का प्यार छन कर मुझ तक आया है।मैं क़िस्मत वाला हूँ कि मेरी ज़िंदगी में आप सभी शामिल हैं। मैं हमेशा महसूस करता हूँ और इस बात का ऋणी रहूँगा कि जीवन के एक लंबे दौर तक अलग-अलग देश, राज्य, इलाक़ा और भाषा के लोगों का प्यार मिला है। मैं जानता हूँ कि इस प्यार में कितना बल है। इसलिए चाहता हूँ कि यही प्यार सबको मिले। बहुतों को इसकी ज़रूरत है। मेरी माँ के लिए प्रार्थना करने वाले हर शख़्स के हम क़र्ज़दार हैं। हम भी और हमारा विस्तृत परिवार भी। व्यक्तिगत रूप से जवाब देने की असमर्थता आप समझते ही हैं। आप सभी का दिल से आभार।
द केरला स्टोरी देखने के लिए कल राष्ट्रीय छुट्टी घोषित हो ताकि लोग द कर्नाटका स्टोरी देखकर निकलें। शोध का विषय यह है कि कर्नाटका की जनता को पता कैसे चल गया कि नफ़रती डिबेट वाले ऐंकर नहीं लफ़ंदर है। दस साल के शासन के बाद नरेंद्र मोदी की बीजेपी उत्तर भारत की राष्ट्रीय पार्टी बन कर रह गई है। इसकी जगह मोदी के मास्टर स्ट्रोक पर बहस हो। बस अगली फ़िल्म का नाम बता दो ।
कर्नाटका के नतीजों का राष्ट्रीय राजनीति पर ज़ीरो असर होगा। पूछिए कैसे? इसके बाद भी प्रधानमंत्री 1. नौ साल में पहली बार प्रेस कांफ्रेंस नहीं करेंगे 2. अदाणी मामले में सवालों के जवाब नहीं देंगे 3.अदाणी मामले में जेपीसी की माँग पर हाँ नहीं करेंगे 4. कृषि क़ानूनों को रद्द करते समय के वादों को पूरा नहीं करेंगे। 5. बेरोज़गारी, महंगाई पर बात नहीं करेंगे। 6. जनता 90-95 रुपया लीटर पेट्रोल ख़रीदती रहेगी। 7. एंटी मुस्लिम मुद्दा जारी रहेगा। 8. गोदी मीडिया भांड बना रहेगा।
बस इतना बता दीजिए कि 2000 के नोट में जो चिप लगी थी, उसका क्या करना है? निकाल कर गोदी मीडिया के मालिक को दे देना है या अपने पास रख लेना है? बेहतर है घर में अनाज से लेकर तसला, बेलन, पर्दा, टेबल-कुर्सी, पुराने कपड़े जो भी हैं, खुद ही वापस कर आइये, वरना एक दिन घर आकर ले जाएँगे। ये मास्टर स्ट्रोक है या हीट स्ट्रोक है भाई लोग?
“इसके साथ पूरा अत्याधुनिक स्वयं जलनिकासी प्रणाली भी बनाई है। बारिश आती है तो कितनी भी बारिश हो तो आधे घंटे में मैट डिस्टर्ब करे बगैर आगे का खेल बारिश रूकते ही हम शुरू कर सकते हैं।” अमित शाह का यह बयान है।
एक दिन बारिश आ गई। हल्ला मचा।
पोछा लगाने का कपड़ा कहाँ है, नहीं मिल रहा तो देखो स्पॉन्ज है क्या ?
देरी हो क्यों हो रही है? पोछा क्यों नहीं लग रहा?
सर हम स्वयं जलनिकासी प्रणाली खोज रहे हैं।
#IPL2023Final