Arvind Pandey(भारतीय संविधान के अनुसार खरबपति)
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Arvind Pandey(भारतीय संविधान के अनुसार खरबपति)
@agsarvind
Brahman

राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में कई नक्सल फ्रंटल ऑर्गनाइजेशन शामिल रहे। --संसद में गृहमंत्री अमित शाह

एक लोकसभा सीट है. रोटेशन के हिसाब से इस बार एससी (दलित) रिजर्व है. सीट पर मुस्लिम आबादी 50 परसेंट से ज्यादा हो चुकी है. 1950 के नियम से इस सीट से एससी का ही कोई जीतेगा, बेशक वह हिंदू हो या सिख या बौद्ध. अब आइए कांग्रेस के प्लान पर. मुसलमान एससी लिस्ट में शामिल हो जाते हैं. अब बताइए कि वह मुस्लिम बहुल लोकसभा सीट किसके पास जाएगी? बताइए.

मतलब ना केवल जातिवादी, @ajeetbharti हिन्दू द्रोही भी है, जिसे राम मंदिर बनने से फर्क़ नहीं पड़ता. अब जिसे राम मंदिर बनने से फर्क़ ही ना पड़े, उसे क्या पता होगा 1400 साल के हिन्दू उत्पीड़न का.. @Vishnu_Jain1 @wesupportvishnu




अच्छा मंडल साहब, लोकसभा में SC rotation से तो मुस्लिमों को रोक लोगे, लेकिन ST सीट पर कैसे रोकोगे? ST में तो मुस्लिम शामिल हैं! J&K में जो ST2 आरक्षण भाजपा ने दिया, उसका फायदा सबसे ज़्यादा मुस्लिम ही ले रहे हैं! अच्छा वो छोड़ो, म्यूनिसिपल और ग्राम पंचायत में तो OBC आरक्षण भी है, तो वहां मुस्लिमों को कैसे रोकोगे? OBC में भी तो मुस्लिम शामिल हैं! और महाराष्ट्र में तो ये शुभ काम देवेंद्र फडणवीस जी ने ही किया है 😂 आधी जानकारी से कबतक लोगों को मूर्ख बनाओगे??


Aur laao UGC.







एक आदमी एक मुर्गा खरीदकर लाया। एक दिन वह मुर्गे को मारना चाहता था, इसलिए उसने मुर्गे को मारने का बहाना सोचा और मुर्गे से कहा, "तुम कल से बाँग नहीं दोगे, नहीं तो मैं तुम्हें मार डालूँगा.. मुर्गे ने कहा, "ठीक है सर, जो भी आप चाहते हैं, वैसा ही होगा!" सुबह, जैसे ही मुर्गे के बाँग देने का समय हुआ, मालिक ने देखा कि मुर्गा बाँग नहीं दे रहा है, लेकिन हमेशा की तरह अपने पंख फड़फड़ा रहा है। मालिक ने अगला आदेश जारी किया कि कल से तुम अपने पंख भी नहीं फड़फड़ाओगे, नहीं तो मैं तुम्हारा वध कर दूँगा। अगली सुबह, बाँग के समय, मुर्गे ने आज्ञा का पालन करते हुए अपने पंख नहीं फड़फड़ाए, लेकिन आदत से मजबूर होकर अपनी गर्दन लंबी कर ली और उसे उठाया। मालिक ने परेशान होकर अगला आदेश जारी कर दिया कि कल से गर्दन भी नहीं हिलनी चाहिए। अगले दिन मुर्गा चुपचाप मुर्गी बनकर सहमा रहा और कुछ नहीं किया। मालिक ने सोचा, यह तो बात नहीं बनी। इस बार मालिक ने कुछ ऐसा सोचा जो वास्तव में मुर्गे के लिए नामुमकिन था। मालिक ने कहा कि कल से तुम्हें अंडे देने होंगे, नहीं तो मैं तुम्हारा वध कर दूँगा। अब मुर्गे को अपनी मौत साफ दिखाई देने लगी और वह बहुत रोया। मालिक ने पूछा, "क्या बात है? मौत के डर से रो रहे हो?" मुर्गा कहने लगा, "नहीं, मैं इसलिए रो रहा हूँ कि अंडे न देने पर मरने से बेहतर है कि बाँग देकर मरता। बाँग मेरी पहचान और अस्मिता थी। मैंने सब कुछ त्याग दिया और तुम्हारी हर बात मानी, लेकिन जिसका इरादा ही मारने का हो, उसके आगे समर्पण करने से बेहतर संघर्ष करना होता है। तभी जान बचाई जा सकती है, जो मैं नहीं कर सका।" #UGC_काला_कानून_वापस_लो












