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@kppmch

Doctor | writter | poetry | columnist |

New Delhi, India Присоединился Şubat 2017
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The Jaipur Dialogues
The Jaipur Dialogues@JaipurDialogues·
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शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ठीक ही कहते थे ये म्लेच्छ राम मंदिर नहीं rss का कार्यालय बना रहे है
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Mayank
Mayank@hereismayank·
We planned a Hanuman Jayanti event at our Russian medical university, but had to reprint all the invitations. We used a swastika, not realizing it could be seen as a Nazi symbol here. A small mistake, but a big reminder. Culture matters.
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Short To Mid Term
Short To Mid Term@ShortTermStock1·
आज बहुत सारे स्टॉक्स डिस्काउंट मे है लेकिन समझने की बात है ये है की ये डिस्काउंट होता क्या है?? ज़ब कोई फंडामेन्टल स्टॉक्स ऑल टाइम हाई बनाता है और वहां से गिरने लगता है जिसके बाद दोनों क़े बीच, मतलब गिरते प्राइस और ऑल टाइम हाई प्राइस क़े बीच का जो गैप है उसको डिस्काउंट ( Discount ) कहा जाता है, ऐसा इस लिए कहा जाता है क्यों की फंडामेन्टल स्ट्रांग कंपनी अपना पिछला ऑल टाइम हाई अचीव कर सकती है. वर्तमान मे इसके अच्छे उदाहरण है - #HDFCBANK, #BAJAJFIN, #VBL, #CDSL AND SO MANY STOCKS ✅ अगर आप कों डिस्काउंट कंपनी की लिस्ट चाहिए तो कमेंट बॉक्स मे LIST लिख दे हम आप कों DM कर देंगे ✅
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At the end of the day you are bihari not gujarti
Anil Agarwal@AnilAgarwal_Ved

This morning, I was reading Chapter 15 of the Bhagavad Gita. One thought stayed with me. “Have courage. Stay humble. Do your duty without attachment.” Life tested this. Some years ago, Shri Jaiprakash Gaur, who built Jaypee Group, came to meet me in London. He had built an empire over his lifetime with hard work and vision. He reached out more than once. He wrote to me. His only wish was simple that what he had built should go into safe hands and be taken forward with the right intent. He even wrote me letters in Hindi, in his own words, expressing his trust. At that time, we could not proceed. Recently, the asset went into a public auction by CoC in the IBC process. Many strong bidders participated. Suddenly, the sentiment and wishes of Jaiprakash Gaur ji came rushing back to me. One by one, everyone dropped out of the bidding. Finally, we were declared the highest bidder publicly. It was a transparent process. We were informed in writing that we had won. But life is never so simple. After some days, the decision was changed. Don’t want to go into the details. That is for the right forum. But I want to share something from my heart. We have no attachment to this asset. If it comes, it is God’s grace. If it goes, that is also his wish. But one thing we believe strongly. When something is promised in dharma, it should not be taken back. In our scriptures also, we see this again and again. Truth, commitment, and fairness are above everything. So, what should one do? Gita gives a simple answer - do your duty, with courage, but without anger or attachment. That is what we will do. We will place the facts in the right way. We will follow the right path. Rest, I leave to God.

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ये मराठी दिन रात बिहार को गाली देते है आज ये बिहार के लिए ज्ञान दे रहे है भगवान बुद्ध विष्णु भगवान के दसवें अवतार होने के कारण हिंदू और बुद्ध दोनों के पूजनीय है
Ramdas Athawale@RamdasAthawale

राम मंदिर बनने का सबने किया स्वागत, अब महाबोधि महाविहार बौद्धों को सौंपने का भी होना चाहिए स्वागत अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर का निर्माण भारत के करोड़ों लोगों की आस्था और विश्वास से जुड़ा विषय था। जब यह सपना साकार हुआ, तब पूरे देश ने उसका स्वागत किया। अलग-अलग विचारधाराओं और धर्मों के लोगों ने भी इसे सकारात्मक दृष्टि से स्वीकार किया, क्योंकि यह करोड़ों हिंदुओं की आस्था और पहचान से जुड़ा प्रश्न था। यह भारत की लोकतांत्रिक परंपरा और धार्मिक सह-अस्तित्व की भावना का प्रतीक भी बना। उसी प्रकार बिहार के बोधगया स्थित महाबोधि महाविहार पूरी दुनिया के बौद्ध अनुयायियों के लिए सबसे पवित्र तीर्थस्थल है। यहीं भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई और यहीं से शांति, करुणा और समता का संदेश पूरी दुनिया में फैला। इसलिए यह स्वाभाविक है कि इस पवित्र स्थल के प्रबंधन में बौद्ध समाज की निर्णायक भूमिका हो। यदि राम मंदिर के निर्माण को हिंदू समाज की आस्था के सम्मान के रूप में स्वीकार किया गया, तो महाबोधि महाविहार का प्रबंधन बौद्धों के हाथों में देने की मांग भी उसी सम्मान और समानता की भावना से देखी जानी चाहिए। इस विषय का एक महत्वपूर्ण पहलू संवैधानिक अधिकारों से भी जुड़ा है। भारत का संविधान अनुच्छेद 25 और अनुच्छेद 26 के तहत प्रत्येक धर्म को अपनी आस्था का पालन करने और अपने धार्मिक संस्थानों का प्रबंधन करने की स्वतंत्रता देता है। अनुच्छेद 25 नागरिकों को धर्म की स्वतंत्रता प्रदान करता है, जबकि अनुच्छेद 26 धार्मिक संप्रदायों को अपने धार्मिक मामलों का संचालन और संस्थाओं का प्रबंधन करने का अधिकार देता है। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि जब महाबोधि महाविहार बौद्ध धर्म का सबसे महत्वपूर्ण स्थल है, तो उसके प्रबंधन में बौद्ध समाज को पूर्ण अधिकार क्यों नहीं दिया जाना चाहिए। वर्तमान में बोधगया मंदिर अधिनियम 1949 के तहत महाबोधि महाविहार के संचालन के लिए एक प्रबंधन समिति बनाई गई है, जिसमें हिंदू और बौद्ध दोनों समुदायों की भागीदारी का प्रावधान है और जिला अधिकारी (DM) को अध्यक्ष बनाया जाता है। समय के साथ यह बहस तेज हुई है कि दुनिया के सबसे पवित्र बौद्ध स्थल के प्रबंधन में बौद्धों की निर्णायक भूमिका होनी चाहिए। जब अन्य धर्मों के प्रमुख धार्मिक स्थलों का संचालन उनके अपने समुदायों के हाथों में होता है जैसे सिखों के लिए गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी या मुसलमानों के लिए वक्फ बोर्ड तो महाबोधि महाविहार के मामले में भी समान सिद्धांत लागू होने चाहिए। आज आवश्यकता इस बात की है कि इस मुद्दे को किसी विवाद या टकराव के रूप में नहीं, बल्कि संवैधानिक समानता और धार्मिक सम्मान के दृष्टिकोण से देखा जाए। जिस प्रकार देश ने राम मंदिर के निर्माण को सकारात्मक रूप से स्वीकार किया, उसी प्रकार यदि महाबोधि महाविहार का प्रबंधन बौद्ध समाज को सौंपा जाता है, तो उसका भी स्वागत होना चाहिए। यह कदम न केवल बौद्ध समाज के विश्वास को मजबूत करेगा, बल्कि भारत की धार्मिक स्वतंत्रता और समावेशी लोकतांत्रिक परंपरा को भी और सशक्त बनाएगा। भारत की असली ताकत उसकी विविधता और परस्पर सम्मान में है। जब हम एक-दूसरे की आस्था और अधिकारों का सम्मान करते हैं, तभी संविधान की भावना मजबूत होती है। इसलिए महाबोधि महाविहार के प्रश्न का समाधान भी उसी संवैधानिक भावना समान अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता और न्याय के आधार पर होना चाहिए।

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जल्दी जल्दी खाइए फिर शंकराचार्य पर बयान भी तो देना है ये सब कलियुग के कालनेमी है
Rajat Sharma@RajatSharmaLive

जामा मस्जिद की इफ्तार में पहुंचना अब जैसे रमज़ान की एक खूबसूरत परंपरा बन गया है। हर बार यहाँ आकर अच्छा लगता है... #Ramadan2026 #JamaMasjid #Iftar #Delhi

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Kailash@kppmch·
लास्ट में जै भीम जै मीम कहना भूल गए
Chandra Shekhar Aazad@BhimArmyChief

दिल्ली के उत्तम नगर में दलित युवक तरुण कुमार की हत्या बेहद दुखद, दंडनीय और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना है। हम शोकसंतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट करते हैं। प्रकृति से प्रार्थना है कि शोकसंतप्त परिवार को यह असहनीय दुख सहने की शक्ति प्रदान करे। हम @DelhiGovDigital से मांग करते हैं कि इस मामले के सभी आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय दिलाया जाए। साथ ही परिवार को सुरक्षा और उचित मुआवजा भी दिया जाए। @gupta_rekha @DelhiPolice

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Hanuman Das
Hanuman Das@kutumbofshankar·
So a Kattar Hindu, most likely a Trad, told me today that Hanuman ji is not Ishvara, and that Sugriva and Bali are stronger than him. May Maruti give me budhi.
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Acharya Prashant
Acharya Prashant@Advait_Prashant·
ईरानी महिलाएँ
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@druditatyagi दुखद! पुरी शंकराचार्य जी महाराज ठीक ही कहते है राजनीतिक किसी के सगे नहीं होते है
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डॉ उदिता त्यागी
हर हर महादेव प्रेस विज्ञप्ति 28 फरवरी 2026 महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी जी की योगी आदित्यनाथ को खुली चुनौती “मै आज मर कर ही मानूंगा” यति नरसिंहानन्द गिरी को कल एक्स मुस्लिम सलीम वास्तविक पर हुये जानलेवा हमले के बाद उन्हे अस्पताल देखने जाने से गाजियाबाद पुलिस ने बर्बरता पूर्वक रोका जिहाद्वियों के द्वारा कल हुये एक नृशंस हमले में एक्स मुस्लिम सलीम वास्तविक की स्थिति गंभीर है और वह दिल्ली के जीटीवी हाॅस्पिटल में एडमिट है। एक्स मुस्लिम सलीम वास्तविक यति नरसिंहानन्द गिरी जी के शिष्य है। आज सुबह जब महामण्डलेश्वर यति नरसिंहानन्द गिरी जी उनसे मिलने के लिए शिवशक्ति धाम डासना से निकल रहे थे, तब बबर्तापूर्वक पुलिस के द्वारा उन्हे रोक लिया गया जिससे महामण्डलेश्वर यति नरसिंहानन्द गिरी महाराज जी बिफर गये और उन्होने गाजियाबाद पुलिस प्रशासन को खुली चुनौती देते हुये कहा कि आज केवल उनका कत्ल करके ही उन्हे गाजियाबाद पुलिस रोक सकती है। उन्होंने कहा की “योगी सुन आज तेरी पुलिस को मुझे मारना पड़ेगा मैं सलीम भाई को देखने जाऊंगा पूरी ताकत लगा दे। अगर मे अपने बाप की औलाद हॅू, अगर मैं अपने गुरू का चेला यति नरसिंहानन्द गिरी हूँ तो आज मेरा कत्ल करके तू मुझे रोक सकता है। नही तो मैं सलीम भाई से मिलने जाऊंगा मैं तेरी तरह नहीं हॅू मुसीबत में पड़े अपने साथियों को छोड़ दॅू, जा रोक ले आज तेरे यह लोग मेरा कत्ल करेंगें, जब रूकूगा और कत्ल भी ऐसी नही कर पाओगे जितने सामने पड़ेगे सबको मार दूंगा। मैं तेरी तरह नकली हिन्दूवादी नहीे हॅू ना मुझे मुख्यमंत्री बनना है और ना प्रधानमंत्री बनना और तुने आज अपना मुकद्दर फोड़ा है आज बिना मतलव मुझे छेड़ कर।मतलव मैं अपने मरते हुये साथी को भी देखने ना जाऊ तेरे से हजार गुना बड़ा सनातन का काम किया सलीम भाई ने मै सलीम भाई से या तो आज मिलने जाऊंगा या मैं आज इस मन्दिर मे मारा जाऊंगा।” @myogiadityanath महाराज ये अमानवीय है
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Nupur J Sharma
Nupur J Sharma@UnSubtleDesi·
Sahil Wastik has been hacked by Jihadis. He left Islam to call out the barbaric cult. The barbaric cult hacked him to prove they’re not what he says they are. Mohammad Zubair dog-whistled against him several times. No. I won’t blur this image. Look at it. Don’t look away
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