राहुल सिंह รีทวีตแล้ว
राहुल सिंह
2.7K posts

राहुल सिंह รีทวีตแล้ว

FIR NO. 0214 थाना लंका कमिशनरेट वाराणसी, सर बार बार अनुरोध के बाद भी मेरा बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराये बगैर पुलिस द्वारा फाइनल रिपोर्ट लगा दी जिसमे दोषी को क्लीन चिट दी गयी कृपया इसे संज्ञान में लें।@narendramodi @PMOIndia @myogiadityanath @cmyogi17 @CMOfficeUP
हिन्दी

कृपया संज्ञान ले।
Manjaree Mishra@M51695Mishra
FIR NO. 0214 थाना लंका कमिशनरेट वाराणसी, सर बार बार अनुरोध के बाद भी मेरा बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराये बगैर पुलिस द्वारा फाइनल रिपोर्ट लगा दी जिसमे दोषी को क्लीन चिट दी गयी कृपया इसे संज्ञान में लें।@narendramodi @PMOIndia @myogiadityanath @cmyogi17 @CMOfficeUP
हिन्दी
राहुल सिंह รีทวีตแล้ว

रमजान के महीने में, अली और अजहर ने, पाँचवी के एक छात्र को दुष्कर्म के बाद, 40 बार पेट में सरिया घोंपा और कुएँ में फेंक दिया।
अली-अजहर ने कहा है रोजे में बीवी संबंध नहीं बना रही थी तो उन्होंने सोचा कि बच्चे को अगवा कर के, सेक्स का सेक्स हो जाएगा और फिरौती के पैसे भी मिल जाएँगे। घटना कानपुर की है।
क्या जाहिल कौम है! रमजान चल रहा है और छोटे बच्चों का रेप कर रहे हैं। ये सेक्सुअली विकृत लोग हैं, इन्हें सड़कों पर खड़े कर के पत्थरों से मारा जाना चाहिए। लेकिन मारेगा कौन? अधिकतर तो स्वयं ही इसी तरह की इच्छा रखने वाले हैं।
हिन्दी

माताजी एमपी से पति बेटे के साथ कुंभ में आई हैं। ग्रुप में करीब 25 लोग थे और मां जी गुम हो गई। संगम पर ही रो रही थी। हमारा कर्तव्य था कि पूछा जाए क्या हुआ। हमने वही किया।
मां जी ने एक पर्ची में बेटे का नंबर लिख रखा था। हमने बेटे को फोन लगाया। वह भी कन्फ्यूज। हमने कहा आप भूले बिसरे केंद्र पर आइए। हम मां जी को लेकर वहां गए। कुछ देर बाद मां जी अपने परिवार से मिल गई।
एक सलाह आप सभी को है, आपके साथ कोई बुजुर्ग आ रहे तो उन्हें एक पर्ची में अपना नंबर जरूर लिखकर दे दें। मां जी के पास नंबर था इसलिए सहूलियत हुई।
#MahaKumbhMela2025

हिन्दी

*** अमलेश सोनकर का मचान ***
मेरे घर से आधा किमी की दूरी पर है अमलेश का खेत। दूर से मैने देखा तो सफेद चांदी सा कुछ जमा था खेत में। थोड़ा पास गया तो एक बच्चे ने बताया - "रेक्सहवा कोंहड़ा है। इसकी मिठाई बनती है।" ज्यादा पास जाने पर अमलेश मिले। वे खेत से खाये हुये कूष्माण्ड अलग कर रहे थे। जो सड़ गये थे, वे एक कोने पर फैंक दिये थे। जो थोड़ा खाये गये थे, उन्हें खड़ंजे वाली सड़क किनारे जमा कर रहे थे वे। बाकी बचे रेक्सहवा कोंहड़ा खेत में जमा कर दिये थे। थोड़ा खाये गये कोंंहड़े आज बाजार ले जाये जायेंगे। बाकी जो जमा हैं वे दो महीने में जरूरत अनुसार बिकेंगे।
अमलेश ने बताया कि सारे रेक्सहवा कोंहड़े उनके अपने खेत के नहीं हैं। आसपास के खेती करने वालों से उन्होने खरीदे भी हैं। मंडी में भेजने का काम वे करेंगे। खेती के लिये आसपास किसानों से उन्होने जमीन पट्टे पर ली है। वे खेती करते हैं और बाजार से सम्पर्क में भी रहते हैं। अब वे गेंहू और मटर की खेती करने जा रहे हैं।
नीलगाय (घणरोज) से फसल बचाने के लिये उन्होने झटका देने वाली बाड़ भी लगाई है। इस समय वे खेत में काम कर रहे हैं इसलिये झटका मशीन बंद की है। अन्यथा मशीन के झटके से जंगली और आवारा पशु उनके खेत की ओर नहीं आते।
निगरानी और खेती की सुविधा के लिये उन्होने अपने मचान पर सभी सुविधायें रखी हैं। मैं उनके मचान पर चढ़ गया। ऊपर उनके साथ और उनके द्वारा कुछ फोटो भी खींचे-खिंचवाये। मचान पर एक दस लीटर की साफ पानी की बोतल, गैस स्टोव और बरतन भी थे। बिस्तर पर पुआल के ऊपर चादर बिछी थी। रोशनी का भी इंतजाम था। अमलेश ने बताया कि इस समय तो नहीं, कभी और आऊं तो वे चाय भी पिला सकते हैं। यहीं वे अपना खाना भी बनाते हैं।
मैने पूछा - क्या बनाते हैं? खिचड़ी?
"नहीं खिचड़ी नहीं, सब कुछ बना लेते हैं।
अमलेश का मचान मुझे अपने वाले से ज्यादा कम्फर्टेबल लगा। ज्यादा सुविधा युक्त। ज्यादा कोजी! मेरा वाला तो मेरे घर में ही है, अन्यथा मैं भी चाय बनाने की और बिजली के कनेक्शन की सुविधा जुटाता। मैं काम से कम चावल-मटर-गोभी वाली तहरी/पुलाव तो बना ही लेता!
नये दौर के किसान हैं अमलेश। अपनी जमीन नहीं है तो पट्टे पर ले कर खेती कर रहे हैं। बाजार की भी जानकारी रखते हैं। निश्चय ही खेती उनके लिये सबसिस्टेंस का जरीया नहीं, एक कमर्शियल वेंचर है। वे, अमलेश सोनकर बाजारोन्मुख किसान हैं और जमीन की मिल्कियत वाले निठल्ले बाभन ठाकुर जमीन का किराया ले कर ही खुश हैं। मैं सोच रहा था कि आगे जमीन भी अमलेश जैसे की होगी। सरकार ने तो कृषि सुधार आधे अधूरे मन से किये होंगे, सुधार को लॉजिकल सीमा पर तो अमलेश जैसे लोग ही ले जायेंगे।
अमलेश का मैने फोन नम्बर ले लिया है। भविष्य में उनसे सम्पर्क रहेगा। उनकी आगे की खेती, आगे के वेंचर समझता रहूंगा उनसे। कभी हो सका तो उनके मचान पर रात भी गुजारूंगा। अमलेश ने कहा - "आप गर्मी में आये होते! रात मचान पर गुजारने का असली मजा तो गर्मियों में ही है।"
अगली गर्मी की एक रात अमलेश के मचान पर गुजरेगी। :lol:
#भ्रमणज्ञान #ज्ञानमचान #गांवदेहात

हिन्दी

*** और मचान कमीशंड हो गया ***
मैने खेत में एक मचान बनवाने की सोची थी, पर फिर इरादा बदल कर घर की चारदीवारी से सटा मचान बनवाने का निर्णय लिया। उस मचान से खेत, उसके आगे रेलवे स्टेशन का लेवल क्रॉसिंग का इलाका और गांव नजर आते।
इस बारे में कल एक पोस्ट लिखी थी। दिन में मचान बन गया था। शाम के समय रामसेवक (हमारे माली जी) आये तो उनका कहना था कि चौघड़िया की बजाय एक बांस की सीढ़ी होनी चाहिये। राजा, जिसने मचान बनाया था का भी यही विचार था। दोनो एक सीढ़ी बनाने में जुट गये। रात ढलने पर भी वे काम करते रहे। जब आठ बजे रात में मैने जा कर देखा तो सीढ़ी लग गई थी मचान के साथ। उसपर से मचान पर चढ़ कर मैने मचान की खटिया पर बैठ और लेट कर बनावट का लोड टेस्ट लिया। वहां बैठ कर रेलवे यार्ड का चित्र भी खींचा। स्टेशन की सभी लाइटें जल रही थींं। ऐसा दृष्य मैने पहली बार देखा, जबकि यहां रहते हुये मुझे 9 साल हो रहे हैंं।
मचान ने मेरा परिदृष्य बदल दिया!
*****
पांड़े जी की ये पहचान। घर के पीछे बना मचान।
*****
आज सवेरे पत्नीजी के साथ जल्दी ही गया। सूर्योदय हुआ ही था। मैं मचान पर चढ़ा। पत्नीजी ने मेरा फोटो खींचा। मचान पर बैठा ही था कि सवेरे प्रयाग की ओर जाती मेमू ट्रेन सामने से गुजरी। मैने उसका दस सेकेंड का वीडियो रिकार्ड किया। इस तरह का दृष्य पहले नहीं ले पाया था!
करीब अस्सी फुट लम्बाई का मोटा बांस, मूंज की रस्सी और कुछ तार तथा एक खटिया ले कर राजा, अशोक और रामसेवक ने मेरे लिये मचान की कल्पना सार्थक कर दी! बचपन की साध उनहत्तर साल की उम्र में पूरी हुई!
सवेरे सुभाष दुबे जी मिलने आये। उन्होने पढ़ा था मचान के बारे में तो सीधे मचान देखने गये। फिर जब बात करने बैठे तो चाय पीते हुये उन्होने एक नारा गढ़ा – पांड़े जी की ये पहचान। घर के पीछे बना मचान। … उनके अनुसार अगर मैं परधानी का चुनाव लड़ूं तो यह नारा काम आयेगा। मेरी पत्नीजी ने कहा – तब तो चुनाव चिन्ह भी मचान मिलना चाहिये!
एक अदना का मचान कितनी खुशी, कितना आनंद देता है! जिंदगी की सार्थकता इस ‘मचानियत’ को जीवंत रखने में निहित है।
पांड़े जी की ये पहचान। घर के पीछे बना मचान। 😆
#ज्ञानमचान #गांवदेहात #घरपरिसर
[चित्र - रात में मचान बनने का कोलाज, सवेरे मैं मचान पर।]


हिन्दी
राहुल सिंह รีทวีตแล้ว

पूरे दिन एक ही बात दिमाग में घूम रही है कि हुतात्मा तुकाराम जी ने आत्मसमर्पण का नाटक करने वाले कसाब के पास जाने पर जब उसे AK47 ले कर उठते देखा होगा, तो उनके मन में क्या चल रहा होगा?
फिर कसाब ने बंदूक से गोली दागने का मन बनाया और तुकाराम जी ने उसकी नाल कस कर पकड़ ली और गोली को सीने पर सहते रहे ताकि किसी और की जान न जाए। जिसे गोली न लगी हो, या जिसने गोली चलाने के बाद निशाने को क्षत-विक्षत होते न देखा हो, वो शायद गोली लगने की पीड़ा को नहीं जान सकता।
तुकाराम जी भारतीय सेना के पूर्व जवान भी थे जो बाद में ASI बन कर मुंबई पुलिस को सेवाएँ दे रहे थे। उन्हें उस गोली के मायने पता रहे होंगे। और तब कसाब 40 से ज़्यादा गोली दागता चला गया, और तुकाराम ने एक हाथ से बंदूक की नाल और दूसरे से कसाब का कॉलर पकड़े रखा।
ये कहानी सुबह दोबारा पढ़ी तब से दिमाग में वही चल रहा है। आखिर क्या सोचा होगा इस महावीर ने? क्या उसे यह अहसास भी होगा कि उनके इस दुस्साहसिक कार्य से हिन्दुओं का कितना भला होने वाला है? क्या वो जानते होंगे कि इस वीरोचित कृत्य ने कितनी लाशें बिछने से बचा ली होंगी?
दूसरी बात का तो उन्हें भान रहा होगा कि सारी गोलियाँ वही झेल लेंगे तो उनकी मृत्यु तो निश्चित ही होगी, पर कई लोग बच जाएँगे। क्या उनके सामने परिजनों के चेहरे याद नहीं आए होंगे?
पुलिस हमेशा गाली सुनती है इस देश में। अधिकतर संदर्भ में वह सही भी होता है। लेकिन एक तुकाराम ओंबले उसी पुलिस की वर्दी को इतना ऊँचा बना देती है कि वो पूरे देश में पूज्य हो जाती है।
मैं नहीं जानता कि तुकाराम जी के परिवार को मरणोपरांत दिए अशोक चक्र या सीएनजी पम्प से हमने क्या क्षतिपूर्ति की है, लेकिन जब तक तुकाराम जैसे महापुरुष जीवित हैं, यह भारतभूमि सुरक्षित है।
कुछ कार्य वीर करते हैं, कुछ दैवीय शक्तियाँ मदद करती हैं। वरना आँधियाँ तो बहुत आईं हैं, फिर भी सनातन भी बचा हुआ है, भारत भी।
प्रणाम आपको, आपके परिजनों को और मुंबई पुलिस को जिनका उपकार सैकड़ों सालों तक यह धरती याद रखेगी।
हिन्दी
राहुल सिंह รีทวีตแล้ว

I strongly condemn the barbaric violence against Hindus, Christians, and other minorities who are getting attacked and looted by mobs in Bangladesh, which remains in a total state of chaos.
It would have never happened on my watch. Kamala and Joe have ignored Hindus across the world and in America. They have been a disaster from Israel to Ukraine to our own Southern Border, but we will Make America Strong Again and bring back Peace through Strength!
We will also protect Hindu Americans against the anti-religion agenda of the radical left. We will fight for your freedom. Under my administration, we will also strengthen our great partnership with India and my good friend, Prime Minister Modi.
Kamala Harris will destroy your small businesses with more regulations and higher taxes. By contrast, I cut taxes, cut regulations, unleashed American energy, and built the greatest economy in history. We will do it again, bigger and better than ever before—and we will Make America Great Again.
Also, Happy Diwali to All. I hope the Festival of Lights leads to the Victory of Good over Evil!
English

#जय_मां_भगवती
18वीं शताब्दी के शुरुआत की बात है, शेरपुर + रेवतीपुर गांव (जिला गाजीपुर, यूपी) के ऊपर 25 हजार की मालगुजारी अंग्रेजी सरकार ने थोपी थी।
उस समय भयंकर सूखा पड़ा था, 25 हजार की रकम उन दिनों में कितनी बड़ी होगी इसका अंदाजा आप लगा सकते हैं।
एक तो प्राकृतिक आपदा और ऊपर से इतना लगान, गांव के लोग इस विपत्ति से बहुत परेशान थे क्योंकि उनको पता था कि लगान ना देने की सूरत में अंग्रेज पूरे गांव पर अत्याचार करेंगे।
फिर होता है मैया का चमत्कार
मां भगवती एक बूढ़ी महिला का वेश लेकर चुपचाप 25 हजार रुपए अंग्रेजों के लगान ऑफिस में जमाकर कर आती हैं।
कुछ दिनों बाद जब क्षेत्र में ये खबर फैली तो सभी आश्चर्य चकित थे, क्योंकि ना तो सामूहिक चंदा लगा था, ना ही किसी को इस बात की खबर थी।
कुछ लोगों ने उसी दिन की रात को उसी वेशभूषा वाली एक वृद्ध महिला को रेवतीपुर गांव के बीच स्थित देवी मां के मंदिर में जाते देख लिया था।
लोग समझ गए कि ये चमत्कार मैया का ही है।
आज भी देवी का इतना माहात्म्य है कि रेवतीपुर गांव में इनके मंदिर से अधिक ऊंचाई का मकान कोई नहीं बनवाता है, मां के आशीर्वाद से पूरा गांव सुविधा सम्पन्न है और हाल ही में भारत के सबसे बड़े गांव गहमर को पीछे छोड़कर रेवतीपुर को सबसे बड़े गांव (आबादी और मतदाता में) होने का गौरव प्राप्त हुआ है ।
मां इसी तरह अपने भक्तों पर अपना आशीर्वाद बनाएं रखिए।

हिन्दी
राहुल सिंह รีทวีตแล้ว
राहुल सिंह รีทวีตแล้ว
राहुल सिंह รีทวีตแล้ว

It is time to relaunch the #NoBindiNoBusiness campaign. It is simple really, if you want Hindu money, learn to respect Hindu customs, traditions, heritage and icons!
English

@avanindra43 @PMOIndia बाणसागर एक परियोजना है, उक्त परियोजना से उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बांध आपस में जुड़े हुए हैं।
हिन्दी

माननीय @PMOIndia महोदय जिस तरह स्व अटल जी ने नदियों को एकात्म करने के लिए योजना तैयार की थी ,जिसपर आपने अमल भी किया है।उसी तरह बांधो के संदर्भ में कोई प्रयास होना चाहिए।
हिन्दी
राहुल सिंह รีทวีตแล้ว
राहुल सिंह รีทวีตแล้ว






