ทวีตที่ปักหมุด

शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति समर्थ है, उसे भंडारे जैसे आयोजनों में भोजन करने के बजाय वहां 'दान' या 'सेवा' करनी चाहिए
यदि भंडारा भगवान के प्रसाद के रूप में श्रद्धा से ग्रहण किया जा रहा है, तो वह अमृत समान है। लेकिन केवल "मुफ्त भोजन" की नियत से जाना पुण्य के लिए बाधक माना गया है
Dhairya 🇮🇳@Cinemaa__
भंडारें का खाना अवाईड करना चाहिए, पुण्य नष्ट करता है। केवल अति आवश्यक हो या जो जरूरतमंद लोग हो उन्हें ही भंडारे के भोजन की अनुमति होती है। जिव्हा स्वाद के लिए भोजन ग्रहण करने से बचें
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