Mohammad Imran Raza Qadri 🇮🇳

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Mohammad Imran Raza Qadri 🇮🇳

Mohammad Imran Raza Qadri 🇮🇳

@ImranGifted

Shagird E @SaleemRazaNoori | Full Stack Web and Mobile App Developer. Builds Beautiful and Powerful Stuffs. (+Web Security)

Uttar Pradesh, India เข้าร่วม Kasım 2017
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Ishq🏵️
Ishq🏵️@___Ishq_·
चिप्स के एक टुकड़े को लैब में माइक्रोस्कोप से देखा गया जिसमें ये छोटे छोट कीटे नज़र आये, तो क्या हम कुछ भी सोचें समझे खा लेते जो हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाता... तो जवाब हां ही होगा......
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Mohammad Imran Raza Qadri 🇮🇳
@adil_1462 ये आरज़ू भी बड़ी चीज़ है मगर हमदम, विसाल-ए-यार फ़क़त आरज़ू की बात नहीं।
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𝗔𝗱𝗶𝗹
𝗔𝗱𝗶𝗹@adil_1462·
مَنَـــم مَحْــــوِ خَیَـــالِ اُو نَمِـی دَانَــم کُجَـــا رَفْتَــم شُـدَــم غَـــرْقِ وِصَـــالِ اُو نَمِـــی دَانَــم کُجَــا رَفْتَــم
𝗔𝗱𝗶𝗹 tweet media
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Mohammad Saleem Raza
Mohammad Saleem Raza@SaleemRazaNoori·
@ImranGifted @adil_1462 भले ही छाँव न दे आसरा तो देता है ये आरज़ू का शजर है ख़िज़ाँ-रसीदा सही
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𝗔𝗱𝗶𝗹
𝗔𝗱𝗶𝗹@adil_1462·
@SaleemRazaNoori हज़रत आपके लिए एक शेर अर्ज़ किया है’ जनाब अमीर मीरायी कहते हैं: जो तुझे भूल गया तुझ पे भी लाज़िम है ऐ अमीर, ख़ाक डाल, आग लगा, नाम ले याद न कर। 😁🤣
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Mohammad Saleem Raza
Mohammad Saleem Raza@SaleemRazaNoori·
@ImranGifted @adil_1462 कल तक तो आश्ना थे मगर आज ग़ैर हो दो दिन में ये मिज़ाज है आगे की ख़ैर हो
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Mohammad Imran Raza Qadri 🇮🇳
@SaleemRazaNoori @adil_1462 वाह जनाब, नहीं शिकवा मुझे कुछ बेवफ़ाई का तिरी हरगिज़, गिला तब हो अगर तू ने किसी से भी निभाई हो।
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Mohammad Saleem Raza
Mohammad Saleem Raza@SaleemRazaNoori·
@ImranGifted @adil_1462 शाद' ग़ैर-मुमकिन है शिकवा-ए-बुताँ मुझ से मैं ने जिस से उल्फ़त की उस को बा-वफ़ा पाया
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Mohammad Saleem Raza
Mohammad Saleem Raza@SaleemRazaNoori·
@ImranGifted @adil_1462 हासिल इतना था इस कहानी से हम रहे जीते सख़्त-जानी से
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Mohammad Saleem Raza
Mohammad Saleem Raza@SaleemRazaNoori·
@adil_1462 इश्क़ में हम ने ये कमाई की दिल दिया ग़म से आश्नाई की
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Mohammad Imran Raza Qadri 🇮🇳
@Firojkh74200536 निमंत्रण → खास तौर पर भोजन समारोह वाला न्योता। आमंत्रण → बिना भोजन के दबाव के न्योता।
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Mohammad Imran Raza Qadri 🇮🇳
@adil_1462 @SaleemRazaNoori aise dost kaha milenge 😂 mere paas dosto ki bahut kami h aapke paas ho toh bata do whatsapp par chat kr liya karenge aur maine gulab ka fool wala itra mangaya usme se bahut khushboo aa rahi h aapko photo bhej raha itra ka aur aap smell krke khud kahoge wah
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Mohammad Saleem Raza
Mohammad Saleem Raza@SaleemRazaNoori·
आप सबको ईद मुबारक हो
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MOHAMMAD SAIFULLAH
MOHAMMAD SAIFULLAH@Allah_Ki_Talwar·
*ईद की नमाज़ का तरीक़ा (आसान अंदाज़ में)* *नीयत:* नीयत की मैंने दो रकअ़त नमाज़ ईदुल फितर की, वाजिब, ज़ायद छह (6) तकबीरों के साथ, वास्ते अल्लाह तआला के, पीछे इस इमाम के, मुंह मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़, अल्लाहु अकबर। *पहली रकअ़त:* अल्लाहु अकबर कहकर, हाथ बांध लें और सना पढ़ें। फिर इमाम साहब 3 बार तकबीर कहेंगे: 1️⃣ अल्लाहु अकबर — हाथ छोड़ दें 2️⃣ अल्लाहु अकबर — हाथ छोड़ दें 3️⃣ अल्लाहु अकबर — हाथ बांध लें 📖 इसके बाद इमाम साहब क़िरअत करेंगे। ➡️ फिर रुकूअ़ और सज्दा करके पहली रकअ़त पूरी करें। *दूसरी रकअ़त:* 📖 इमाम साहब क़िरअत करेंगे। इसके बाद 3 तकबीर होंगी: 1️⃣ अल्लाहु अकबर — हाथ छोड़ दें 2️⃣ अल्लाहु अकबर — हाथ छोड़ दें 3️⃣ अल्लाहु अकबर — हाथ छोड़ दें ➡️ फिर चौथी बार “अल्लाहु अकबर” कहकर सीधे रुकूअ़ में चले जाएं। ➡️ इसके बाद सज्दा, क़ायदा (तशह्हुद) और सलाम फेर लें। *सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी, चेयरमैन : ग़ौसे आज़म फाउंडेशन* #Eid
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Mohammad Imran Raza Qadri 🇮🇳
@jd_justdial kya koi bhi mere number se listing kr skata h mujhe kpan masala se related calls aate the jbki mera isse koi lena dena nhi, mera listing sirf zedfry h please number se ye listing hata dijiye maine call bhi kiya tha sunday ko
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Mohammad Imran Raza Qadri 🇮🇳
12 March - They said no you need to update signature first, so come back later with application 13 March I receieve call that I need to do some other process even signature update failed
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Mohammad Imran Raza Qadri 🇮🇳
@MyIndusIndBank is the worst bank I have very schedule still I managed to take leave and went to bank to remove debit freeze my account. 2nd Feb - Visit to bank they made me wait for 1 hour and lastly told go and write down the application. I then left the bank and then
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Mohammad Saleem Raza
Mohammad Saleem Raza@SaleemRazaNoori·
एक पेड़ से दस लाख माचिस की तीलियाँ बन सकती हैं, लेकिन एक माचिस की तीली दस लाख पेड़ों को जला सकती है। सबक यह है कि एक नकारात्मक सोच सारी सकारात्मक सोचों को राख में बदल सकती है। इसलिए अपने विचारों की हिफाज़त कीजिए।
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Mohammad Imran Raza Qadri 🇮🇳
Are didi! Ye koi nayi baat nhi koi bhi open source model aap apne device par download karke Run kar sakte h Jaise GPTOSS ko ollama k thru laptop par use karna kaafi common h isi tarah dusre models bhi Size aur capacity k hisaab dekhkar run hota h Hum bahut peeche h duniya har mahine aur hafte me naye models launch kar rahi h aur hum 2035 or 2047 ki baat kar rahe h viksit bharat denge karke. Ye waade bemisaal h Bahut bahut peeche h hum humare paas koi model nhi h. Aaj se 2 saal pahle maine ye baat kahi thi mujhe funding chahiye main model banana chahta tha par koi aage nhi aaya. Aur aaj tak india kuch nhi kar paya...
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Meenu kumari
Meenu kumari@meenukumaricute·
क्या सच में...?? भारत का AI बिना इंटरनेट के काम करेगा .. Sarvam AI ने Sarvam Edge मॉडल को फोन और लैपटॉप के लिए लॉन्च किया है... ये हमारे डिवाइस पर ही काम करेगा और डेटा को इंटरनेट या क्लाउड पर अपलोड नहीं होने देगा...! इससे एक तो बिना इंटरनेट के AI चलाना संभव होगा और लोगों का डेटा भी सुरक्षित रह पाएगा..!!! अगर ये संभव हुआ तो इंडिया के लिए बहुत बड़ी जीत होगी।।
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MOHAMMAD SAIFULLAH
MOHAMMAD SAIFULLAH@Allah_Ki_Talwar·
*बाअल से एप्स्टीन तक: जब समाज ‘मॉडर्न बुत’ के आगे झुक जाता है* * *मसला बुत के साथ, नैतिक पतन का भी है : सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी* ग़ौसे आज़म फाउंडेशन के चेयरमैन व चीफ़ क़ाज़ी हज़रत मौलाना सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी साहब ने अपने बयान में कहा कि क़ुरआन के पारा 23, सूरा साफ़्फ़ात में वर्णित “ बाअल ” बुत का प्रसंग, आज के दौर में भी पूरी तरह प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि हज़रत इलियास अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम से पूछा था “ क्या तुम पैदा करने वाले अल्लाह को छोड़कर बाअल को पुकारते हो? ” यह सवाल हर उस समाज से है जो नैतिकता छोड़कर बाहरी चमक - दमक के पीछे भागता है। उन्होंने कहा कि लेबनान के शहर Baalbek का नाम भी प्राचीन “ बाअल ” से जोड़ा जाता है, जो उस समय वर्षा और उर्वरता का देवता माना जाता था। मगर क़ुरआन ने स्पष्ट कर दिया कि असली पालनहार केवल अल्लाह है। सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी ने कहा कि आज " पत्थर के बुत " अधिक हैं, लेकिन “ मॉडर्न बुत ” अधिक ख़तरनाक हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित Jeffrey Epstein प्रकरण का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तथाकथित उच्च वर्ग, धन और शक्ति के प्रभाव में जब नैतिक सीमाएं तोड़ता है, तो समाज के सामने गंभीर प्रश्न खड़े हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि जिन दस्तावेज़ों को मीडिया में “ Epstein files ” के नाम से जाना गया, उन्होंने यह दिखाया कि दौलत और प्रभाव के पीछे छिपी अनैतिक गतिविधियां किस तरह सामने आती हैं। यह घटना इस बात का प्रतीक है कि जब इंसान धन, शक्ति और वासना को सर्वोच्च मान लेता है, तो वही उसके लिए बुत बन जाते हैं। सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी ने स्पष्ट किया कि यह किसी व्यक्ति विशेष पर टिप्पणी नहीं, बल्कि एक सामाजिक चेतावनी है “ जब समाज अल्लाह के भय और नैतिक मूल्यों को छोड़ देता है, तो बाहरी तरक्की के बावजूद भीतर से खोखला हो जाता है।‌ ” उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे इतिहास और समकालीन घटनाओं से सबक़ लें, साजिशी धारणाओं से बचें और तौहीद के सिद्धांत को अपने जीवन में उतारें। अंत में उन्होंने कहा, “ वक़्त आ गया है कि हम अपने दिलों के बुत तोड़ें। चाहे वे बाअल के हों या आधुनिक दौर के। असली आज़ादी अल्लाह की बंदगी और नैतिक जीवन में है। ”
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Mohammad Saleem Raza
Mohammad Saleem Raza@SaleemRazaNoori·
एक शख़्स के चार बेटे थे। उसने फ़ैसला किया कि वह अपने बेटों को एक सबक सिखाने के लिए दूर दराज़ इलाक़े में मौजूद नाशपाती के एक दरख़्त को देखने भेजेगा। बारी-बारी चारों बेटों का सफ़र शुरू हुआ। पहला बेटा सर्दी के मौसम में गया, दूसरा बहार में, तीसरा गर्मी में और सबसे छोटा ख़िज़ाँ के मौसम में रवाना हुआ। जब सब अपना सफ़र मुकम्मल करके लौट आए तो बाप ने उन्हें तलब किया और दरख़्त का अहवाल पूछा। पहला बेटा, जिसने सर्दी में दरख़्त देखा था, कहने लगा: “वो दरख़्त बहुत बदसूरत, टेढ़ा और झुका हुआ था।” दूसरे ने फ़ौरन इख़्तिलाफ़ किया: “नहीं! वो तो हरा-भरा और सब्ज़ पत्तों से ढका हुआ था।” तीसरा बोला: “मुझे आप दोनों से इत्तिफ़ाक़ नहीं। वो दरख़्त तो फूलों से लदा हुआ था और उसकी ख़ुशबू दूर-दूर तक फैली हुई थी, वो एक निहायत हसीन मंज़र था।” सबसे छोटे बेटे ने अपनी राय दी: “वो दरख़्त तो फलों के बोझ से ज़मीन की तरफ़ झुका हुआ था और बहुत दिलकश नज़र आता था।” वो आदमी मुस्कुराया और बोला: “तुम में से कोई भी ग़लत नहीं कह रहा, तुम सब अपनी-अपनी जगह दुरुस्त हो।” बात जारी रखते हुए बाप ने समझाया: “तुम किसी भी दरख़्त या इंसान को सिर्फ़ एक मौसम या एक हालत में देखकर उसके बारे में हत्मी फ़ैसला नहीं कर सकते। इंसान कभी किसी कैफ़ियत में होता है और कभी किसी में। जिस तरह दरख़्त कभी बेरौनक होता है, कभी फूलों से महकता है और कभी फलों से लदा होता है, बिल्कुल उसी तरह इंसान भी मुख़्तलिफ़ हालात से गुज़रता है। अगर तुम किसी को सिर्फ़ ग़ुस्से या परेशानी की हालत में देखते हो, तो इसका ये मतलब हरगिज़ नहीं कि वो इंसान बुरा है। कभी जल्दबाज़ी में फ़ैसला मत करो, बल्कि हालात को अच्छी तरह परख लिया करो।”
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Mohammad Imran Raza Qadri 🇮🇳 รีทวีตแล้ว
MOHAMMAD SAIFULLAH
MOHAMMAD SAIFULLAH@Allah_Ki_Talwar·
भारत में इतनी ज़मीन है कि दस भारत और बस सकता है 😂
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