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@Manusingnco

Jai jai shree ram

Bharat เข้าร่วม Aralık 2017
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Anil Bhakar
Anil Bhakar@Anilbhakar96·
Little boy enjoying bath
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Maryam Fatima 🎀
Maryam Fatima 🎀@MaryamF12389·
Focus and read it fast
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Anil Bhakar
Anil Bhakar@Anilbhakar96·
Be the reason for someone's laughter, everyone makes them cry.
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Ashutosh Mishra
Ashutosh Mishra@Ashutos95698794·
Why was he so fat?
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Khushi Rajput 🇮🇳🩷
Khushi Rajput 🇮🇳🩷@KhushiRajp57943·
मेरी तमन्ना अब सिर्फ एक ख्वाहिश नहीं रही तुम्हारे साथ वो मेरी सबसे बड़ी खुशी बन गई है तुम मिले तो ऐसा लगा जैसे मुकम्मल हो गई ज़िंदगी ♥️🌹 अब हर दुआ में बस तुम्हारा ही नाम शामिल है Good night all friends Khushi_R✍️
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KL Nagpal
KL Nagpal@KlTitu·
Radhe Radhe ji 🙏 Good morning have a great day ahead all x mats 🌹
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राजेन्द्र शर्मा
🕉️ श्रीरामदूताय नमः🙏 धन्य है प्रभु आपकी कृपा🙏 ताहि राखि कपीस पहिं आए। समाचार सब ताहि सुनाए।। कह सुग्रीव सुनहु रघुराई। आवा मिलन दसानन भाई।। कह प्रभु सखा बूझिऐ काहा। कहइ कपीस सुनहु नरनाहा।। जानि न जाइ निसाचर माया। कामरूप केहि कारन आया।। भेद हमार लेन सठ आवा। राखिअ बाँधि मोहि अस भावा।। सखा नीति तुम्ह नीकि बिचारी। मम पन सरनागत भयहारी।। सुनि प्रभु बचन हरष हनुमाना। सरनागत बच्छल भगवाना।। 🚩जय सियाराम🚩 🚩जय श्रीबालाजी महाराज🚩 #जय_श्रीराम #जय_बजरंगबली 🙏🙏
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Om
Om@RahulSi01423678·
अजब हाल हैं मदरसों में पढ़ने वाले मासूमों के.... कैसे धार्मिक गुरु इन मासूमो को इस तरह निर्ममता से पीट रहे हैं- दया भी नही आ रही जालिमो को. जल्दी से जल्दी मदरसा संचालक सहित धर्म गुरु पर मुकदमा दर्ज हो @saharanpurpol @SaharanpurDm @CMO
🇮🇳Rahul Singh🇮🇳@RahulSi86132882

*"ये किसी थाने का थर्ड डिग्री ट्रीटमेंट नहीं है.. एक मदरसे में छात्र की नॉर्मल पिटाई है.."* मदरसा है उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के गंगोह का.. वीडियो में दिख रहे हैं तीन लोग.. दो हाफिज हैं, एक मासूम बच्चा है.. पहले बच्चे को पेट के बल लिटा कर डंडे से पीट रहे हैं.. फिर उसके दोनों पैर उठवाकर तलवों पर डंडे चला रहे हैं.. जैसा अक्सर फिल्मों में हमने थानों की हवालात में अपराधियों के साथ होते देखा है.. अजब हाल हैं मदरसों में पढ़ने वाले मासूमों के.... कैसे धार्मिक गुरु इन मासूमो को इस तरह निर्ममता से पीट रहे हैं- दया भी नही आ रही जालिमो को. जल्दी से जल्दी मदरसा संचालक सहित धर्म गुरु पर मुकदमा दर्ज हो

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Manav
Manav@Manav520·
पत्थर के भीतर भी जीवन है, भगवान हर जीव का भोजन देता है। मनुष्य बस अपने कर्म में लगे, व्यर्थ चिंता में क्यों खुद को झोंको । जो बीत गया, वह बीत गया, कल की फिक्र में समय न खो। हर पल भगवान का धन्यवाद करो, वही हमारी राहों में उजाला करता है। जय श्री राम 🙏 #कर्महीजीवन #भगवानकीकृपा
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Chandramani chaubey
Chandramani chaubey@CChaubey12·
यह जापान की अजीबोगरीब रेस्तरां मेनू है l कौन - कौन ट्राई करना चाहता है....😜 एक जापानी रेस्तरां ने अपने मेनू में "थप्पड़ मारना" भी शामिल कर लिया है। एक थप्पड़ की कीमत 500 येन है, और अधिकतम पाँच थप्पड़ मारे जा सकते हैं। थप्पड़ मारने वाले वेटर को चुनने के लिए 100 येन अतिरिक्त देने होंगे। पहले यह सेवा मुफ़्त थी, लेकिन बढ़ती मांग के कारण इसे सशुल्क कर दिया गया। दर्शक इसका खूब आनंद उठा रहे थे और महिला ग्राहकों ने कई थप्पड़ खाने का अनुरोध किया। जापान में: 500 येन = 1 थप्पड़ इंडिया में: 1 गलती = 5 थप्पड़ + फ्री लेक्चर 😎😂
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Jaya
Jaya@Jaya__Kishori__·
चलो आज स्वस्थ बने… निरोगी भव: स्वस्थ तन – शांत मन का आधार शुद्ध और सात्विक सेवा जैसा अन्न वैसा मन कहा जाता है जैसा अन्न वैसा मन यह केवल कहावत नहीं बल्कि सच है। पुरातन संस्कृति में भोजन और आहार-व्यवहार पर काफी ध्यान दिया जाता था। इससे उस दौर के लोग स्वस्थ, सुखी, संस्कारित और संयमित होते थे। उनमें एकता, सद्भावना, अपनापन, पारिवारिक सामंजस्य था। इस सबका मूल कारण था कि लोगों के खानपान में सात्विकता, शुद्धता और पवित्रता थी। इस बात को विज्ञान और वैज्ञानिकों ने भी स्वीकार कर लिया है कि सात्विक आहार वाले व्यक्ति ज्यादा सकारात्मक, ऊर्जावान, ज्ञानी, आध्यात्मिक, शक्तिप्तशाली और मानसिक रूप से स्वस्थ रहते हैं। यही नहीं उनका रोग प्रतिरोधक कर भी काफी मजबूत होता है मन की अवस्था व भावना का भी गहरा प्रभाव भोजन बनाते हैं और ग्रहण करते हैं तो उस समय भी कुछ नियमों का पालन करना चाहिए, ताकि भोजन संपूर्ण रीति तन और मन का पोषण कर सके। जैसी हमारी स्थिति होती है वैसी ही हमारी कृति बनती है। यदि कोई व्यक्ति क्रोध में भोजन बनाता है तो क्रोध में बनाया गया भोजन कभी स्वादिष्ट और सात्विक नहीं हो सकता है। क्योंकि क्रोधी व्यक्ति की भावना भी उसमें प्रवेश कर जाती है और खाने वाले पर उसका सूक्ष्म प्रभाव पड़ता है। वैसे ही अलग अलग विकारों वश व्यक्ति के विकार भी उस भोजन में सूक्ष्मता से मिश्रित हो ही जाते हैं और फिर वह विकार भोजन ग्रहण करने वाले व्यक्ति को भी असर करते हैं हंमेशा अच्छी भावना के साथ बनाएं भोजन हम जब भी भोजन बनाएं या उसे ग्रहण करें तो उस समय शुद्ध और सात्विक भासना होनी चाहिए। जिससे हमारे मन पर उसका सकारात्मक प्रभाव पड़े। क्योंकि जब हम किसी मंदिर या देवी देवताओं के लिए चढ़ावा चढ़ाने के लिए प्रसाद बनाते हैं तो उस समय साफ-सफाई और सात्विकता का बहुत ध्यान रखते हैं। इसलिए वह बनायी हुई सामग्री प्रसाद बन जाती है, जिसे लोग भाव और भावना से खाते हैं। मांस, मदिरा, मछली और अन्य मांसाहारी भोजन मनुष्य के लिए नहीं है। इससे मन में आसुरी विचारों का उदय होता है, इसलिए आज व्यक्ति तेजी से हिंसात्मक होता जा रहा है, परिवारों में कलह और तनाव बढ़ रहा है ध्यान के साथ बनाएं और खाएं भोजन जब भी हम भोजन बनाएं और खाएं तो सबसे पहले परमात्मा को अर्पण करें। शुद्ध और सात्विक भोजन ही ग्रहण करें। आसुरी स्वभाव वाले व्यक्तियों के हाथों से बने हुए भोजन से परहेज करना चाहिए। इससे काफी हद तक मनुष्य की मनोदशा बदल जाएगी। व्यक्ति सकारात्मक हो जाएगा। इस तरह के परहेज से सामाजिक समस्याओं से काफी हद तक निजात मिल सकती है
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Jitendra Upadhyay
Jitendra Upadhyay@Jitendr08357253·
बच्चों को उनकी शरारत के साथ ही बढ़ने दीजिये कोई पाबंदी न लगाएं जमीन से जोड़ें ,अपनो से जोड़े ,सारे इमोशन जीने दीजिये ,अनुशासन के नाम पर उन्हें पालतू मत बनाएं
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Manu
Manu@Manusingnco·
@Anilbhakar96 Bahut hi Shandar video hai ❤️
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Khushi Rajput 🇮🇳🩷
Khushi Rajput 🇮🇳🩷@KhushiRajp57943·
चाँदनी रात में कुछ ख़्वाब यूँ जगमगाते हैं जैसे तेरी यादों के दिए दिल में मुस्कुराते हैं खामोशी में भी तेरी बातें सुकून दे जाती हैं 🌙 Good night all Khushi_R✍️
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Jaya
Jaya@Jaya__Kishori__·
शुद्ध का अर्थ है, स्वभाव में होना अशुद्ध का अर्थ है, प्रभाव में होना यह विचार अध्यात्म और मनोविज्ञान की एक बहुत ही गहरी और सुंदर समझ को दर्शाता है। यहाँ 'शुद्धता' को किसी धार्मिक कर्मकांड से नहीं, बल्कि आपकी चेतना की स्थिति (State of Consciousness) से जोड़ा गया है आइए इसे विस्तार से समझते हैं 1. शुद्ध का अर्थ है: स्वभाव में होना (Being in your Nature) 'स्वभाव' शब्द दो शब्दों से बना है— स्व + भाव, यानी 'अपना भाव' या 'अपने होने का ढंग' मूल स्वरूप: जब आप वैसे ही होते हैं जैसे आप वास्तव में हैं—बिना किसी दिखावे, बिना किसी डर और बिना किसी बाहरी अपेक्षा के—तब आप 'शुद्ध' हैं उदाहरण: जैसे पानी का स्वभाव शीतल होना है अगर पानी शीतल है, तो वह अपने स्वभाव में है आंतरिक शांति: जब आपके विचार और कर्म आपकी अंतरात्मा से निकलते हैं, न कि दूसरों को प्रभावित करने के लिए, तब आप अपनी शुद्धतम अवस्था में होते हैं। यहाँ शुद्धता का अर्थ 'मिलावटहीन' होना है 2. अशुद्ध का अर्थ है: प्रभाव में होना (Being under Influence) 'अशुद्धता' का अर्थ यहाँ गंदगी से नहीं, बल्कि पर-भाव (दूसरों के भाव) से है। बाहरी नियंत्रण: जब आपके सुख, दुख, क्रोध या निर्णय दूसरों के व्यवहार पर निर्भर करने लगते हैं, तो आप 'अशुद्ध' हो जाते हैं। क्योंकि अब आप 'आप' नहीं रहे, बल्कि किसी और की कठपुतली बन गए हैं। कंडीशनिंग (Conditioning): समाज, शिक्षा, विज्ञापन और दूसरों की राय जब आपकी मौलिकता को ढंक लेती है, तो वह 'प्रभाव' है। उदाहरण: यदि किसी ने आपकी आलोचना की और आप घंटों दुखी रहे, तो आप उस व्यक्ति के 'प्रभाव' में हैं। आपकी शांति आपकी अपनी नहीं रही, वह बाहरी परिस्थिति की गुलाम हो गई। यही अशुद्धता है निष्कर्ष यह विचार हमें आत्म-जागरूकता की ओर ले जाता है जब तक आप दूसरों के कहे अनुसार खुद को आंकते हैं, आप 'प्रभाव' में हैं। जिस दिन आप अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर जीना शुरू करते हैं, आप अपने 'स्वभाव' में लौट आते हैं संक्षेप में कहें तो, स्वयं का मालिक होना ही शुद्धता है, और परिस्थितियों का गुलाम होना अशुद्धता है
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