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अदब्धानि वरुणस्य व्रतानि Politics | Culture | Astrology (Views are personal)









शुभेन्दु अधिकारी के शपथग्रहण की कुंडली का विश्लेषण पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने 9 मई 2026 को कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में प्रातः 11:31 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। शपथग्रहण के समय की कुंडली कर्क लग्न की है। ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी को श्रवण नक्षत्र शुक्ल योग में शुभ मुहूर्त है। कर्क लग्न की इस कुंडली में लग्न में लग्नेश चन्द्रमा सप्तम भाव में हैं और पूर्ण व अतिमित्र दृष्टि से लग्न को देख रहे हैं, जिससे लग्न बहुत बलवान हो गया है और लग्न की पूर्ण रक्षा यानि सरकार की पूर्ण रक्षा व बल में बहुत वृद्धि हो गई है। धनेश सूर्य दशम भाव में उच्च के हैं व तृतीयेश व व्ययेश बुध सूर्य में अस्त होकर दशम में ही हैं। इसलिए सूर्य ने 2,3,12 भावों को नियन्त्रण में ले लिया है। सुखेश व आयेश शुक्र आय भाव में स्वगृही हैं। इसलिए बंगाल को बहुत सुख समृद्धि मिलने वाली है। धनेश आयेश दोनों का उच्च व स्वगृही होना राज्य के धनलाभ, आय वृद्धि की दृष्टि से बहुत शुभ हो गया है। बंगाल को केन्द्र से भी बड़ा बजट, योजनाएं और उद्योगों की भरमार मिलने वाली है। बंगाल को चारों तरफ से फायदा ही फायदा होगा। पूरा विश्लेषण यूट्यूब पर यहाँ देखें youtu.be/PnHFMJOACYM पंचमेश व दशमेश राजयोगकारक मंगल नवम भाव में सप्तमेश व अष्टमेश शनि के साथ हैं। केन्द्रेश त्रिकोणेश का यह मिलन अच्छा है। पर दोनों विरोधी ग्रह होने से धर्मक्षेत्र में भयानक घमासान होने वाला है। मंगल का बल शनि से ज्यादा है, इसलिए पुलिस कार्यवाही, एनकाउंटर की भरमार देखने को मिलेगी। शनि के न्यायालय मार्ग की बजाय सरकार अपने राजदण्ड का प्रयोग करके योगीजी की तरह पूरे बंगाल में अपराध का कठोरता से सफाया करेगी और उनपर नियंत्रण स्थापित करेगी। शिक्षा के क्षेत्र में भी बंगाल में प्रगति होगी, विश्वविद्यालयों की स्थिति सुधारी जाएगी और बंगाल की यूनिवर्सिटीज देश में अच्छा नाम कमाएंगी। बंगाल से विभिन्न विषयों में बहुत अच्छा साहित्य निकलकर आएगा। बंगाल की खोई हुई साहित्य विरासत को वापिस उभारने और जीवित करने में बंगाल सरकार काम करेगी। षष्ठेश व धर्मेश गुरु द्वादश में हैं, और पूर्ण मित्रदृष्टि से षष्ठ भाव को देख रहे हैं, इसलिए शत्रुओं का धर्म द्वारा अच्छे से निग्रह हो जाएगा। धर्म के शत्रु धर्म की नजर से बच नहीं पा रहे हैं। सरकार की तरफ से बहुत बड़ी कार्यवाही हिन्दू विरोधियों को, अपराधी, गुंडों को झेलनी पड़ेगी, अपराधियों के लिए छिपना नामुमकिन हो जाएगा। इस चक्कर में अनेक हिंसक घटनाएं, हत्याएं देखने को मिल सकती हैं, क्योंकि अपराधी बुझने से पहले फड़फड़ाने की कोशिश करेंगे। दंगों के भी षड्यन्त्र होंगे पर हिन्दुत्व को दबा नहीं पाएंगे। अष्टमेश राहु अष्टम में ही स्वगृही हैं। दशमांश में लग्नेश मंगल अष्टम में स्वगृही है, इसलिए सरकार में गुस्सा ज्यादा होगा, अपराध सहने का कहीं कोई प्रश्न नहीं उठता। साथ में ही षष्ठेश भी मृत्यु भाव में पड़ गया है बुध। तो आप देख सकते हैं लग्नेश यानी स्वयं सरकार और शत्रु दोनों मृत्यु भाव में बैठ गए हैं युद्ध करने, यहां आर पार का युद्ध दोनों शत्रुओं में हो रहा है। पर खेल क्या हो गया? ये मृत्यु का घर लग्नेश का सरकार का खुद का ही है। तो शत्रु अपने शत्रु के घर में ही फंस गया। जैसे कोई सियार शेर की मांद में घुसा हो युद्ध करने तो जीत किसकी होगी ? तो मृत्युस्थान में स्वगृही लग्नेश कभी खुदकी हानि नहीं करता है बल्कि रक्षा करता है और वहां शत्रु मृत्यु के मुंह में पड़ा है। पर इसमें भी देखो मंगल बुध दोनों ही सूर्य में अस्त हैं। कालचक्र में मेष लग्न की कुंडली में सूर्य पंचमेश हैं, जो बुद्धि के कारक हैं, तो सूर्य मंगल बुध के नियंत्रण होकर 1,3,5,6,8 इन 5 भावों के नियंत्रक हो गए हैं, और स्वयं धर्म भाव में बैठे हैं चन्द्र केतु के साथ, चन्द्र भी सुखेश है, तो यहां त्रिकोणेश केन्द्रेश युति करके सूर्य चन्द्र भी राजयोग बना रहे हैं, साथ में धर्म की ध्वज केतु बैठे हैं। तो यह मंगल के लिए शुभ है अपने मित्र शुभ ग्रह सूर्य में अस्त होना, पर अशुभ, मेष लग्न में पापी बुध का शुभ सूर्य में अस्त होना, यह पाप की पराजय है। तो शत्रुओं का तो नाश निश्चित है। ध्यान देने वाली बात है कि आज श्रवण नक्षत्र में शपथ ग्रहण हुआ है जो राज्याभिषेक का सबसे मुख्य नक्षत्र है। विजयादशमी को दशमी तिथि का श्रवण नक्षत्र से संयोग जब होता है उसी को विजय मुहूर्त्त कहा जाता है और उसी कारण विजयादशमी का इतना महत्त्व है। यह राज्याभिषेक, युद्ध, विजय के लिए सबसे शुभ नक्षत्र इसलिए ही होता है। यह नक्षत्र स्वयं भगवान विष्णु का है, वे इसके देवता हैं, इसलिए यह पालक है, जनता का, बंगाल का सरकार बहुत ही प्यारे तरीके से पालन करेगी, मरहम लगाएगी, घाव भरेगी, दवा देगी, सुरक्षा करेगी। यह बंगाल के लिए बहुत शुभ हो गया। इस नक्षत्र का महत्त्व इतना है कि इसमें थोड़े से काम का भी बड़ा भारी शुभ परिणाम मिलता है। वामन भगवान का प्रादुर्भाव इसी नक्षत्र में हुआ था और उन्होंने 3 पग में ही 3 लोग नाप लिए थे। इसलिए आप मानकर चलिए कि बंगाल की भूमि का भी विस्तार अवश्य होगा, इस पर बहुत संजीदगी से काम होगा, व सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित कर दिया जाएगा। अभी चन्द्र का प्रभाव 47 दिन तक रहेगा, 25 जून से मङ्गल का प्रभाव शुरू होगा जो 6 अक्टूबर 2026 तक रहेगा, इस बीच आक्रामकता से अपराधियों पर कार्यवाही की जाएगी। इसके बाद 29 जून 2027 तक कुछ रहस्यमयी व घातक घटनाएं घटने की संभावना है, जिनका असर दीर्घकालिक होगा। @MuditUpdates #SuvenduAdhikari #ShubhenduAdhikari #शुभेंदु



शुभेन्दु अधिकारी के शपथग्रहण की कुंडली का विश्लेषण पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने 9 मई 2026 को कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में प्रातः 11:31 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। शपथग्रहण के समय की कुंडली कर्क लग्न की है। ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी को श्रवण नक्षत्र शुक्ल योग में शुभ मुहूर्त है। कर्क लग्न की इस कुंडली में लग्न में लग्नेश चन्द्रमा सप्तम भाव में हैं और पूर्ण व अतिमित्र दृष्टि से लग्न को देख रहे हैं, जिससे लग्न बहुत बलवान हो गया है और लग्न की पूर्ण रक्षा यानि सरकार की पूर्ण रक्षा व बल में बहुत वृद्धि हो गई है। धनेश सूर्य दशम भाव में उच्च के हैं व तृतीयेश व व्ययेश बुध सूर्य में अस्त होकर दशम में ही हैं। इसलिए सूर्य ने 2,3,12 भावों को नियन्त्रण में ले लिया है। सुखेश व आयेश शुक्र आय भाव में स्वगृही हैं। इसलिए बंगाल को बहुत सुख समृद्धि मिलने वाली है। धनेश आयेश दोनों का उच्च व स्वगृही होना राज्य के धनलाभ, आय वृद्धि की दृष्टि से बहुत शुभ हो गया है। बंगाल को केन्द्र से भी बड़ा बजट, योजनाएं और उद्योगों की भरमार मिलने वाली है। बंगाल को चारों तरफ से फायदा ही फायदा होगा। पूरा विश्लेषण यूट्यूब पर यहाँ देखें youtu.be/PnHFMJOACYM पंचमेश व दशमेश राजयोगकारक मंगल नवम भाव में सप्तमेश व अष्टमेश शनि के साथ हैं। केन्द्रेश त्रिकोणेश का यह मिलन अच्छा है। पर दोनों विरोधी ग्रह होने से धर्मक्षेत्र में भयानक घमासान होने वाला है। मंगल का बल शनि से ज्यादा है, इसलिए पुलिस कार्यवाही, एनकाउंटर की भरमार देखने को मिलेगी। शनि के न्यायालय मार्ग की बजाय सरकार अपने राजदण्ड का प्रयोग करके योगीजी की तरह पूरे बंगाल में अपराध का कठोरता से सफाया करेगी और उनपर नियंत्रण स्थापित करेगी। शिक्षा के क्षेत्र में भी बंगाल में प्रगति होगी, विश्वविद्यालयों की स्थिति सुधारी जाएगी और बंगाल की यूनिवर्सिटीज देश में अच्छा नाम कमाएंगी। बंगाल से विभिन्न विषयों में बहुत अच्छा साहित्य निकलकर आएगा। बंगाल की खोई हुई साहित्य विरासत को वापिस उभारने और जीवित करने में बंगाल सरकार काम करेगी। षष्ठेश व धर्मेश गुरु द्वादश में हैं, और पूर्ण मित्रदृष्टि से षष्ठ भाव को देख रहे हैं, इसलिए शत्रुओं का धर्म द्वारा अच्छे से निग्रह हो जाएगा। धर्म के शत्रु धर्म की नजर से बच नहीं पा रहे हैं। सरकार की तरफ से बहुत बड़ी कार्यवाही हिन्दू विरोधियों को, अपराधी, गुंडों को झेलनी पड़ेगी, अपराधियों के लिए छिपना नामुमकिन हो जाएगा। इस चक्कर में अनेक हिंसक घटनाएं, हत्याएं देखने को मिल सकती हैं, क्योंकि अपराधी बुझने से पहले फड़फड़ाने की कोशिश करेंगे। दंगों के भी षड्यन्त्र होंगे पर हिन्दुत्व को दबा नहीं पाएंगे। अष्टमेश राहु अष्टम में ही स्वगृही हैं। दशमांश में लग्नेश मंगल अष्टम में स्वगृही है, इसलिए सरकार में गुस्सा ज्यादा होगा, अपराध सहने का कहीं कोई प्रश्न नहीं उठता। साथ में ही षष्ठेश भी मृत्यु भाव में पड़ गया है बुध। तो आप देख सकते हैं लग्नेश यानी स्वयं सरकार और शत्रु दोनों मृत्यु भाव में बैठ गए हैं युद्ध करने, यहां आर पार का युद्ध दोनों शत्रुओं में हो रहा है। पर खेल क्या हो गया? ये मृत्यु का घर लग्नेश का सरकार का खुद का ही है। तो शत्रु अपने शत्रु के घर में ही फंस गया। जैसे कोई सियार शेर की मांद में घुसा हो युद्ध करने तो जीत किसकी होगी ? तो मृत्युस्थान में स्वगृही लग्नेश कभी खुदकी हानि नहीं करता है बल्कि रक्षा करता है और वहां शत्रु मृत्यु के मुंह में पड़ा है। पर इसमें भी देखो मंगल बुध दोनों ही सूर्य में अस्त हैं। कालचक्र में मेष लग्न की कुंडली में सूर्य पंचमेश हैं, जो बुद्धि के कारक हैं, तो सूर्य मंगल बुध के नियंत्रण होकर 1,3,5,6,8 इन 5 भावों के नियंत्रक हो गए हैं, और स्वयं धर्म भाव में बैठे हैं चन्द्र केतु के साथ, चन्द्र भी सुखेश है, तो यहां त्रिकोणेश केन्द्रेश युति करके सूर्य चन्द्र भी राजयोग बना रहे हैं, साथ में धर्म की ध्वज केतु बैठे हैं। तो यह मंगल के लिए शुभ है अपने मित्र शुभ ग्रह सूर्य में अस्त होना, पर अशुभ, मेष लग्न में पापी बुध का शुभ सूर्य में अस्त होना, यह पाप की पराजय है। तो शत्रुओं का तो नाश निश्चित है। ध्यान देने वाली बात है कि आज श्रवण नक्षत्र में शपथ ग्रहण हुआ है जो राज्याभिषेक का सबसे मुख्य नक्षत्र है। विजयादशमी को दशमी तिथि का श्रवण नक्षत्र से संयोग जब होता है उसी को विजय मुहूर्त्त कहा जाता है और उसी कारण विजयादशमी का इतना महत्त्व है। यह राज्याभिषेक, युद्ध, विजय के लिए सबसे शुभ नक्षत्र इसलिए ही होता है। यह नक्षत्र स्वयं भगवान विष्णु का है, वे इसके देवता हैं, इसलिए यह पालक है, जनता का, बंगाल का सरकार बहुत ही प्यारे तरीके से पालन करेगी, मरहम लगाएगी, घाव भरेगी, दवा देगी, सुरक्षा करेगी। यह बंगाल के लिए बहुत शुभ हो गया। इस नक्षत्र का महत्त्व इतना है कि इसमें थोड़े से काम का भी बड़ा भारी शुभ परिणाम मिलता है। वामन भगवान का प्रादुर्भाव इसी नक्षत्र में हुआ था और उन्होंने 3 पग में ही 3 लोग नाप लिए थे। इसलिए आप मानकर चलिए कि बंगाल की भूमि का भी विस्तार अवश्य होगा, इस पर बहुत संजीदगी से काम होगा, व सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित कर दिया जाएगा। अभी चन्द्र का प्रभाव 47 दिन तक रहेगा, 25 जून से मङ्गल का प्रभाव शुरू होगा जो 6 अक्टूबर 2026 तक रहेगा, इस बीच आक्रामकता से अपराधियों पर कार्यवाही की जाएगी। इसके बाद 29 जून 2027 तक कुछ रहस्यमयी व घातक घटनाएं घटने की संभावना है, जिनका असर दीर्घकालिक होगा। @MuditUpdates #SuvenduAdhikari #ShubhenduAdhikari #शुभेंदु




शुभेन्दु अधिकारी के शपथग्रहण की कुंडली का विश्लेषण पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने 9 मई 2026 को कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में प्रातः 11:31 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। शपथग्रहण के समय की कुंडली कर्क लग्न की है। ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी को श्रवण नक्षत्र शुक्ल योग में शुभ मुहूर्त है। कर्क लग्न की इस कुंडली में लग्न में लग्नेश चन्द्रमा सप्तम भाव में हैं और पूर्ण व अतिमित्र दृष्टि से लग्न को देख रहे हैं, जिससे लग्न बहुत बलवान हो गया है और लग्न की पूर्ण रक्षा यानि सरकार की पूर्ण रक्षा व बल में बहुत वृद्धि हो गई है। धनेश सूर्य दशम भाव में उच्च के हैं व तृतीयेश व व्ययेश बुध सूर्य में अस्त होकर दशम में ही हैं। इसलिए सूर्य ने 2,3,12 भावों को नियन्त्रण में ले लिया है। सुखेश व आयेश शुक्र आय भाव में स्वगृही हैं। इसलिए बंगाल को बहुत सुख समृद्धि मिलने वाली है। धनेश आयेश दोनों का उच्च व स्वगृही होना राज्य के धनलाभ, आय वृद्धि की दृष्टि से बहुत शुभ हो गया है। बंगाल को केन्द्र से भी बड़ा बजट, योजनाएं और उद्योगों की भरमार मिलने वाली है। बंगाल को चारों तरफ से फायदा ही फायदा होगा। पूरा विश्लेषण यूट्यूब पर यहाँ देखें youtu.be/PnHFMJOACYM पंचमेश व दशमेश राजयोगकारक मंगल नवम भाव में सप्तमेश व अष्टमेश शनि के साथ हैं। केन्द्रेश त्रिकोणेश का यह मिलन अच्छा है। पर दोनों विरोधी ग्रह होने से धर्मक्षेत्र में भयानक घमासान होने वाला है। मंगल का बल शनि से ज्यादा है, इसलिए पुलिस कार्यवाही, एनकाउंटर की भरमार देखने को मिलेगी। शनि के न्यायालय मार्ग की बजाय सरकार अपने राजदण्ड का प्रयोग करके योगीजी की तरह पूरे बंगाल में अपराध का कठोरता से सफाया करेगी और उनपर नियंत्रण स्थापित करेगी। शिक्षा के क्षेत्र में भी बंगाल में प्रगति होगी, विश्वविद्यालयों की स्थिति सुधारी जाएगी और बंगाल की यूनिवर्सिटीज देश में अच्छा नाम कमाएंगी। बंगाल से विभिन्न विषयों में बहुत अच्छा साहित्य निकलकर आएगा। बंगाल की खोई हुई साहित्य विरासत को वापिस उभारने और जीवित करने में बंगाल सरकार काम करेगी। षष्ठेश व धर्मेश गुरु द्वादश में हैं, और पूर्ण मित्रदृष्टि से षष्ठ भाव को देख रहे हैं, इसलिए शत्रुओं का धर्म द्वारा अच्छे से निग्रह हो जाएगा। धर्म के शत्रु धर्म की नजर से बच नहीं पा रहे हैं। सरकार की तरफ से बहुत बड़ी कार्यवाही हिन्दू विरोधियों को, अपराधी, गुंडों को झेलनी पड़ेगी, अपराधियों के लिए छिपना नामुमकिन हो जाएगा। इस चक्कर में अनेक हिंसक घटनाएं, हत्याएं देखने को मिल सकती हैं, क्योंकि अपराधी बुझने से पहले फड़फड़ाने की कोशिश करेंगे। दंगों के भी षड्यन्त्र होंगे पर हिन्दुत्व को दबा नहीं पाएंगे। अष्टमेश राहु अष्टम में ही स्वगृही हैं। दशमांश में लग्नेश मंगल अष्टम में स्वगृही है, इसलिए सरकार में गुस्सा ज्यादा होगा, अपराध सहने का कहीं कोई प्रश्न नहीं उठता। साथ में ही षष्ठेश भी मृत्यु भाव में पड़ गया है बुध। तो आप देख सकते हैं लग्नेश यानी स्वयं सरकार और शत्रु दोनों मृत्यु भाव में बैठ गए हैं युद्ध करने, यहां आर पार का युद्ध दोनों शत्रुओं में हो रहा है। पर खेल क्या हो गया? ये मृत्यु का घर लग्नेश का सरकार का खुद का ही है। तो शत्रु अपने शत्रु के घर में ही फंस गया। जैसे कोई सियार शेर की मांद में घुसा हो युद्ध करने तो जीत किसकी होगी ? तो मृत्युस्थान में स्वगृही लग्नेश कभी खुदकी हानि नहीं करता है बल्कि रक्षा करता है और वहां शत्रु मृत्यु के मुंह में पड़ा है। पर इसमें भी देखो मंगल बुध दोनों ही सूर्य में अस्त हैं। कालचक्र में मेष लग्न की कुंडली में सूर्य पंचमेश हैं, जो बुद्धि के कारक हैं, तो सूर्य मंगल बुध के नियंत्रण होकर 1,3,5,6,8 इन 5 भावों के नियंत्रक हो गए हैं, और स्वयं धर्म भाव में बैठे हैं चन्द्र केतु के साथ, चन्द्र भी सुखेश है, तो यहां त्रिकोणेश केन्द्रेश युति करके सूर्य चन्द्र भी राजयोग बना रहे हैं, साथ में धर्म की ध्वज केतु बैठे हैं। तो यह मंगल के लिए शुभ है अपने मित्र शुभ ग्रह सूर्य में अस्त होना, पर अशुभ, मेष लग्न में पापी बुध का शुभ सूर्य में अस्त होना, यह पाप की पराजय है। तो शत्रुओं का तो नाश निश्चित है। ध्यान देने वाली बात है कि आज श्रवण नक्षत्र में शपथ ग्रहण हुआ है जो राज्याभिषेक का सबसे मुख्य नक्षत्र है। विजयादशमी को दशमी तिथि का श्रवण नक्षत्र से संयोग जब होता है उसी को विजय मुहूर्त्त कहा जाता है और उसी कारण विजयादशमी का इतना महत्त्व है। यह राज्याभिषेक, युद्ध, विजय के लिए सबसे शुभ नक्षत्र इसलिए ही होता है। यह नक्षत्र स्वयं भगवान विष्णु का है, वे इसके देवता हैं, इसलिए यह पालक है, जनता का, बंगाल का सरकार बहुत ही प्यारे तरीके से पालन करेगी, मरहम लगाएगी, घाव भरेगी, दवा देगी, सुरक्षा करेगी। यह बंगाल के लिए बहुत शुभ हो गया। इस नक्षत्र का महत्त्व इतना है कि इसमें थोड़े से काम का भी बड़ा भारी शुभ परिणाम मिलता है। वामन भगवान का प्रादुर्भाव इसी नक्षत्र में हुआ था और उन्होंने 3 पग में ही 3 लोग नाप लिए थे। इसलिए आप मानकर चलिए कि बंगाल की भूमि का भी विस्तार अवश्य होगा, इस पर बहुत संजीदगी से काम होगा, व सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित कर दिया जाएगा। अभी चन्द्र का प्रभाव 47 दिन तक रहेगा, 25 जून से मङ्गल का प्रभाव शुरू होगा जो 6 अक्टूबर 2026 तक रहेगा, इस बीच आक्रामकता से अपराधियों पर कार्यवाही की जाएगी। इसके बाद 29 जून 2027 तक कुछ रहस्यमयी व घातक घटनाएं घटने की संभावना है, जिनका असर दीर्घकालिक होगा। @MuditUpdates #SuvenduAdhikari #ShubhenduAdhikari #शुभेंदु

शुभेन्दु अधिकारी के शपथग्रहण की कुंडली का विश्लेषण पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने 9 मई 2026 को कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में प्रातः 11:31 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। शपथग्रहण के समय की कुंडली कर्क लग्न की है। ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी को श्रवण नक्षत्र शुक्ल योग में शुभ मुहूर्त है। कर्क लग्न की इस कुंडली में लग्न में लग्नेश चन्द्रमा सप्तम भाव में हैं और पूर्ण व अतिमित्र दृष्टि से लग्न को देख रहे हैं, जिससे लग्न बहुत बलवान हो गया है और लग्न की पूर्ण रक्षा यानि सरकार की पूर्ण रक्षा व बल में बहुत वृद्धि हो गई है। धनेश सूर्य दशम भाव में उच्च के हैं व तृतीयेश व व्ययेश बुध सूर्य में अस्त होकर दशम में ही हैं। इसलिए सूर्य ने 2,3,12 भावों को नियन्त्रण में ले लिया है। सुखेश व आयेश शुक्र आय भाव में स्वगृही हैं। इसलिए बंगाल को बहुत सुख समृद्धि मिलने वाली है। धनेश आयेश दोनों का उच्च व स्वगृही होना राज्य के धनलाभ, आय वृद्धि की दृष्टि से बहुत शुभ हो गया है। बंगाल को केन्द्र से भी बड़ा बजट, योजनाएं और उद्योगों की भरमार मिलने वाली है। बंगाल को चारों तरफ से फायदा ही फायदा होगा। पूरा विश्लेषण यूट्यूब पर यहाँ देखें youtu.be/PnHFMJOACYM पंचमेश व दशमेश राजयोगकारक मंगल नवम भाव में सप्तमेश व अष्टमेश शनि के साथ हैं। केन्द्रेश त्रिकोणेश का यह मिलन अच्छा है। पर दोनों विरोधी ग्रह होने से धर्मक्षेत्र में भयानक घमासान होने वाला है। मंगल का बल शनि से ज्यादा है, इसलिए पुलिस कार्यवाही, एनकाउंटर की भरमार देखने को मिलेगी। शनि के न्यायालय मार्ग की बजाय सरकार अपने राजदण्ड का प्रयोग करके योगीजी की तरह पूरे बंगाल में अपराध का कठोरता से सफाया करेगी और उनपर नियंत्रण स्थापित करेगी। शिक्षा के क्षेत्र में भी बंगाल में प्रगति होगी, विश्वविद्यालयों की स्थिति सुधारी जाएगी और बंगाल की यूनिवर्सिटीज देश में अच्छा नाम कमाएंगी। बंगाल से विभिन्न विषयों में बहुत अच्छा साहित्य निकलकर आएगा। बंगाल की खोई हुई साहित्य विरासत को वापिस उभारने और जीवित करने में बंगाल सरकार काम करेगी। षष्ठेश व धर्मेश गुरु द्वादश में हैं, और पूर्ण मित्रदृष्टि से षष्ठ भाव को देख रहे हैं, इसलिए शत्रुओं का धर्म द्वारा अच्छे से निग्रह हो जाएगा। धर्म के शत्रु धर्म की नजर से बच नहीं पा रहे हैं। सरकार की तरफ से बहुत बड़ी कार्यवाही हिन्दू विरोधियों को, अपराधी, गुंडों को झेलनी पड़ेगी, अपराधियों के लिए छिपना नामुमकिन हो जाएगा। इस चक्कर में अनेक हिंसक घटनाएं, हत्याएं देखने को मिल सकती हैं, क्योंकि अपराधी बुझने से पहले फड़फड़ाने की कोशिश करेंगे। दंगों के भी षड्यन्त्र होंगे पर हिन्दुत्व को दबा नहीं पाएंगे। अष्टमेश राहु अष्टम में ही स्वगृही हैं। दशमांश में लग्नेश मंगल अष्टम में स्वगृही है, इसलिए सरकार में गुस्सा ज्यादा होगा, अपराध सहने का कहीं कोई प्रश्न नहीं उठता। साथ में ही षष्ठेश भी मृत्यु भाव में पड़ गया है बुध। तो आप देख सकते हैं लग्नेश यानी स्वयं सरकार और शत्रु दोनों मृत्यु भाव में बैठ गए हैं युद्ध करने, यहां आर पार का युद्ध दोनों शत्रुओं में हो रहा है। पर खेल क्या हो गया? ये मृत्यु का घर लग्नेश का सरकार का खुद का ही है। तो शत्रु अपने शत्रु के घर में ही फंस गया। जैसे कोई सियार शेर की मांद में घुसा हो युद्ध करने तो जीत किसकी होगी ? तो मृत्युस्थान में स्वगृही लग्नेश कभी खुदकी हानि नहीं करता है बल्कि रक्षा करता है और वहां शत्रु मृत्यु के मुंह में पड़ा है। पर इसमें भी देखो मंगल बुध दोनों ही सूर्य में अस्त हैं। कालचक्र में मेष लग्न की कुंडली में सूर्य पंचमेश हैं, जो बुद्धि के कारक हैं, तो सूर्य मंगल बुध के नियंत्रण होकर 1,3,5,6,8 इन 5 भावों के नियंत्रक हो गए हैं, और स्वयं धर्म भाव में बैठे हैं चन्द्र केतु के साथ, चन्द्र भी सुखेश है, तो यहां त्रिकोणेश केन्द्रेश युति करके सूर्य चन्द्र भी राजयोग बना रहे हैं, साथ में धर्म की ध्वज केतु बैठे हैं। तो यह मंगल के लिए शुभ है अपने मित्र शुभ ग्रह सूर्य में अस्त होना, पर अशुभ, मेष लग्न में पापी बुध का शुभ सूर्य में अस्त होना, यह पाप की पराजय है। तो शत्रुओं का तो नाश निश्चित है। ध्यान देने वाली बात है कि आज श्रवण नक्षत्र में शपथ ग्रहण हुआ है जो राज्याभिषेक का सबसे मुख्य नक्षत्र है। विजयादशमी को दशमी तिथि का श्रवण नक्षत्र से संयोग जब होता है उसी को विजय मुहूर्त्त कहा जाता है और उसी कारण विजयादशमी का इतना महत्त्व है। यह राज्याभिषेक, युद्ध, विजय के लिए सबसे शुभ नक्षत्र इसलिए ही होता है। यह नक्षत्र स्वयं भगवान विष्णु का है, वे इसके देवता हैं, इसलिए यह पालक है, जनता का, बंगाल का सरकार बहुत ही प्यारे तरीके से पालन करेगी, मरहम लगाएगी, घाव भरेगी, दवा देगी, सुरक्षा करेगी। यह बंगाल के लिए बहुत शुभ हो गया। इस नक्षत्र का महत्त्व इतना है कि इसमें थोड़े से काम का भी बड़ा भारी शुभ परिणाम मिलता है। वामन भगवान का प्रादुर्भाव इसी नक्षत्र में हुआ था और उन्होंने 3 पग में ही 3 लोग नाप लिए थे। इसलिए आप मानकर चलिए कि बंगाल की भूमि का भी विस्तार अवश्य होगा, इस पर बहुत संजीदगी से काम होगा, व सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित कर दिया जाएगा। अभी चन्द्र का प्रभाव 47 दिन तक रहेगा, 25 जून से मङ्गल का प्रभाव शुरू होगा जो 6 अक्टूबर 2026 तक रहेगा, इस बीच आक्रामकता से अपराधियों पर कार्यवाही की जाएगी। इसके बाद 29 जून 2027 तक कुछ रहस्यमयी व घातक घटनाएं घटने की संभावना है, जिनका असर दीर्घकालिक होगा। @MuditUpdates #SuvenduAdhikari #ShubhenduAdhikari #शुभेंदु


शुभेन्दु अधिकारी के शपथग्रहण की कुंडली का विश्लेषण पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने 9 मई 2026 को कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में प्रातः 11:31 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। शपथग्रहण के समय की कुंडली कर्क लग्न की है। ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी को श्रवण नक्षत्र शुक्ल योग में शुभ मुहूर्त है। कर्क लग्न की इस कुंडली में लग्न में लग्नेश चन्द्रमा सप्तम भाव में हैं और पूर्ण व अतिमित्र दृष्टि से लग्न को देख रहे हैं, जिससे लग्न बहुत बलवान हो गया है और लग्न की पूर्ण रक्षा यानि सरकार की पूर्ण रक्षा व बल में बहुत वृद्धि हो गई है। धनेश सूर्य दशम भाव में उच्च के हैं व तृतीयेश व व्ययेश बुध सूर्य में अस्त होकर दशम में ही हैं। इसलिए सूर्य ने 2,3,12 भावों को नियन्त्रण में ले लिया है। सुखेश व आयेश शुक्र आय भाव में स्वगृही हैं। इसलिए बंगाल को बहुत सुख समृद्धि मिलने वाली है। धनेश आयेश दोनों का उच्च व स्वगृही होना राज्य के धनलाभ, आय वृद्धि की दृष्टि से बहुत शुभ हो गया है। बंगाल को केन्द्र से भी बड़ा बजट, योजनाएं और उद्योगों की भरमार मिलने वाली है। बंगाल को चारों तरफ से फायदा ही फायदा होगा। पूरा विश्लेषण यूट्यूब पर यहाँ देखें youtu.be/PnHFMJOACYM पंचमेश व दशमेश राजयोगकारक मंगल नवम भाव में सप्तमेश व अष्टमेश शनि के साथ हैं। केन्द्रेश त्रिकोणेश का यह मिलन अच्छा है। पर दोनों विरोधी ग्रह होने से धर्मक्षेत्र में भयानक घमासान होने वाला है। मंगल का बल शनि से ज्यादा है, इसलिए पुलिस कार्यवाही, एनकाउंटर की भरमार देखने को मिलेगी। शनि के न्यायालय मार्ग की बजाय सरकार अपने राजदण्ड का प्रयोग करके योगीजी की तरह पूरे बंगाल में अपराध का कठोरता से सफाया करेगी और उनपर नियंत्रण स्थापित करेगी। शिक्षा के क्षेत्र में भी बंगाल में प्रगति होगी, विश्वविद्यालयों की स्थिति सुधारी जाएगी और बंगाल की यूनिवर्सिटीज देश में अच्छा नाम कमाएंगी। बंगाल से विभिन्न विषयों में बहुत अच्छा साहित्य निकलकर आएगा। बंगाल की खोई हुई साहित्य विरासत को वापिस उभारने और जीवित करने में बंगाल सरकार काम करेगी। षष्ठेश व धर्मेश गुरु द्वादश में हैं, और पूर्ण मित्रदृष्टि से षष्ठ भाव को देख रहे हैं, इसलिए शत्रुओं का धर्म द्वारा अच्छे से निग्रह हो जाएगा। धर्म के शत्रु धर्म की नजर से बच नहीं पा रहे हैं। सरकार की तरफ से बहुत बड़ी कार्यवाही हिन्दू विरोधियों को, अपराधी, गुंडों को झेलनी पड़ेगी, अपराधियों के लिए छिपना नामुमकिन हो जाएगा। इस चक्कर में अनेक हिंसक घटनाएं, हत्याएं देखने को मिल सकती हैं, क्योंकि अपराधी बुझने से पहले फड़फड़ाने की कोशिश करेंगे। दंगों के भी षड्यन्त्र होंगे पर हिन्दुत्व को दबा नहीं पाएंगे। अष्टमेश राहु अष्टम में ही स्वगृही हैं। दशमांश में लग्नेश मंगल अष्टम में स्वगृही है, इसलिए सरकार में गुस्सा ज्यादा होगा, अपराध सहने का कहीं कोई प्रश्न नहीं उठता। साथ में ही षष्ठेश भी मृत्यु भाव में पड़ गया है बुध। तो आप देख सकते हैं लग्नेश यानी स्वयं सरकार और शत्रु दोनों मृत्यु भाव में बैठ गए हैं युद्ध करने, यहां आर पार का युद्ध दोनों शत्रुओं में हो रहा है। पर खेल क्या हो गया? ये मृत्यु का घर लग्नेश का सरकार का खुद का ही है। तो शत्रु अपने शत्रु के घर में ही फंस गया। जैसे कोई सियार शेर की मांद में घुसा हो युद्ध करने तो जीत किसकी होगी ? तो मृत्युस्थान में स्वगृही लग्नेश कभी खुदकी हानि नहीं करता है बल्कि रक्षा करता है और वहां शत्रु मृत्यु के मुंह में पड़ा है। पर इसमें भी देखो मंगल बुध दोनों ही सूर्य में अस्त हैं। कालचक्र में मेष लग्न की कुंडली में सूर्य पंचमेश हैं, जो बुद्धि के कारक हैं, तो सूर्य मंगल बुध के नियंत्रण होकर 1,3,5,6,8 इन 5 भावों के नियंत्रक हो गए हैं, और स्वयं धर्म भाव में बैठे हैं चन्द्र केतु के साथ, चन्द्र भी सुखेश है, तो यहां त्रिकोणेश केन्द्रेश युति करके सूर्य चन्द्र भी राजयोग बना रहे हैं, साथ में धर्म की ध्वज केतु बैठे हैं। तो यह मंगल के लिए शुभ है अपने मित्र शुभ ग्रह सूर्य में अस्त होना, पर अशुभ, मेष लग्न में पापी बुध का शुभ सूर्य में अस्त होना, यह पाप की पराजय है। तो शत्रुओं का तो नाश निश्चित है। ध्यान देने वाली बात है कि आज श्रवण नक्षत्र में शपथ ग्रहण हुआ है जो राज्याभिषेक का सबसे मुख्य नक्षत्र है। विजयादशमी को दशमी तिथि का श्रवण नक्षत्र से संयोग जब होता है उसी को विजय मुहूर्त्त कहा जाता है और उसी कारण विजयादशमी का इतना महत्त्व है। यह राज्याभिषेक, युद्ध, विजय के लिए सबसे शुभ नक्षत्र इसलिए ही होता है। यह नक्षत्र स्वयं भगवान विष्णु का है, वे इसके देवता हैं, इसलिए यह पालक है, जनता का, बंगाल का सरकार बहुत ही प्यारे तरीके से पालन करेगी, मरहम लगाएगी, घाव भरेगी, दवा देगी, सुरक्षा करेगी। यह बंगाल के लिए बहुत शुभ हो गया। इस नक्षत्र का महत्त्व इतना है कि इसमें थोड़े से काम का भी बड़ा भारी शुभ परिणाम मिलता है। वामन भगवान का प्रादुर्भाव इसी नक्षत्र में हुआ था और उन्होंने 3 पग में ही 3 लोग नाप लिए थे। इसलिए आप मानकर चलिए कि बंगाल की भूमि का भी विस्तार अवश्य होगा, इस पर बहुत संजीदगी से काम होगा, व सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित कर दिया जाएगा। अभी चन्द्र का प्रभाव 47 दिन तक रहेगा, 25 जून से मङ्गल का प्रभाव शुरू होगा जो 6 अक्टूबर 2026 तक रहेगा, इस बीच आक्रामकता से अपराधियों पर कार्यवाही की जाएगी। इसके बाद 29 जून 2027 तक कुछ रहस्यमयी व घातक घटनाएं घटने की संभावना है, जिनका असर दीर्घकालिक होगा। @MuditUpdates #SuvenduAdhikari #ShubhenduAdhikari #शुभेंदु



शुभेन्दु अधिकारी के शपथग्रहण की कुंडली का विश्लेषण पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने 9 मई 2026 को कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में प्रातः 11:31 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। शपथग्रहण के समय की कुंडली कर्क लग्न की है। ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी को श्रवण नक्षत्र शुक्ल योग में शुभ मुहूर्त है। कर्क लग्न की इस कुंडली में लग्न में लग्नेश चन्द्रमा सप्तम भाव में हैं और पूर्ण व अतिमित्र दृष्टि से लग्न को देख रहे हैं, जिससे लग्न बहुत बलवान हो गया है और लग्न की पूर्ण रक्षा यानि सरकार की पूर्ण रक्षा व बल में बहुत वृद्धि हो गई है। धनेश सूर्य दशम भाव में उच्च के हैं व तृतीयेश व व्ययेश बुध सूर्य में अस्त होकर दशम में ही हैं। इसलिए सूर्य ने 2,3,12 भावों को नियन्त्रण में ले लिया है। सुखेश व आयेश शुक्र आय भाव में स्वगृही हैं। इसलिए बंगाल को बहुत सुख समृद्धि मिलने वाली है। धनेश आयेश दोनों का उच्च व स्वगृही होना राज्य के धनलाभ, आय वृद्धि की दृष्टि से बहुत शुभ हो गया है। बंगाल को केन्द्र से भी बड़ा बजट, योजनाएं और उद्योगों की भरमार मिलने वाली है। बंगाल को चारों तरफ से फायदा ही फायदा होगा। पूरा विश्लेषण यूट्यूब पर यहाँ देखें youtu.be/PnHFMJOACYM पंचमेश व दशमेश राजयोगकारक मंगल नवम भाव में सप्तमेश व अष्टमेश शनि के साथ हैं। केन्द्रेश त्रिकोणेश का यह मिलन अच्छा है। पर दोनों विरोधी ग्रह होने से धर्मक्षेत्र में भयानक घमासान होने वाला है। मंगल का बल शनि से ज्यादा है, इसलिए पुलिस कार्यवाही, एनकाउंटर की भरमार देखने को मिलेगी। शनि के न्यायालय मार्ग की बजाय सरकार अपने राजदण्ड का प्रयोग करके योगीजी की तरह पूरे बंगाल में अपराध का कठोरता से सफाया करेगी और उनपर नियंत्रण स्थापित करेगी। शिक्षा के क्षेत्र में भी बंगाल में प्रगति होगी, विश्वविद्यालयों की स्थिति सुधारी जाएगी और बंगाल की यूनिवर्सिटीज देश में अच्छा नाम कमाएंगी। बंगाल से विभिन्न विषयों में बहुत अच्छा साहित्य निकलकर आएगा। बंगाल की खोई हुई साहित्य विरासत को वापिस उभारने और जीवित करने में बंगाल सरकार काम करेगी। षष्ठेश व धर्मेश गुरु द्वादश में हैं, और पूर्ण मित्रदृष्टि से षष्ठ भाव को देख रहे हैं, इसलिए शत्रुओं का धर्म द्वारा अच्छे से निग्रह हो जाएगा। धर्म के शत्रु धर्म की नजर से बच नहीं पा रहे हैं। सरकार की तरफ से बहुत बड़ी कार्यवाही हिन्दू विरोधियों को, अपराधी, गुंडों को झेलनी पड़ेगी, अपराधियों के लिए छिपना नामुमकिन हो जाएगा। इस चक्कर में अनेक हिंसक घटनाएं, हत्याएं देखने को मिल सकती हैं, क्योंकि अपराधी बुझने से पहले फड़फड़ाने की कोशिश करेंगे। दंगों के भी षड्यन्त्र होंगे पर हिन्दुत्व को दबा नहीं पाएंगे। अष्टमेश राहु अष्टम में ही स्वगृही हैं। दशमांश में लग्नेश मंगल अष्टम में स्वगृही है, इसलिए सरकार में गुस्सा ज्यादा होगा, अपराध सहने का कहीं कोई प्रश्न नहीं उठता। साथ में ही षष्ठेश भी मृत्यु भाव में पड़ गया है बुध। तो आप देख सकते हैं लग्नेश यानी स्वयं सरकार और शत्रु दोनों मृत्यु भाव में बैठ गए हैं युद्ध करने, यहां आर पार का युद्ध दोनों शत्रुओं में हो रहा है। पर खेल क्या हो गया? ये मृत्यु का घर लग्नेश का सरकार का खुद का ही है। तो शत्रु अपने शत्रु के घर में ही फंस गया। जैसे कोई सियार शेर की मांद में घुसा हो युद्ध करने तो जीत किसकी होगी ? तो मृत्युस्थान में स्वगृही लग्नेश कभी खुदकी हानि नहीं करता है बल्कि रक्षा करता है और वहां शत्रु मृत्यु के मुंह में पड़ा है। पर इसमें भी देखो मंगल बुध दोनों ही सूर्य में अस्त हैं। कालचक्र में मेष लग्न की कुंडली में सूर्य पंचमेश हैं, जो बुद्धि के कारक हैं, तो सूर्य मंगल बुध के नियंत्रण होकर 1,3,5,6,8 इन 5 भावों के नियंत्रक हो गए हैं, और स्वयं धर्म भाव में बैठे हैं चन्द्र केतु के साथ, चन्द्र भी सुखेश है, तो यहां त्रिकोणेश केन्द्रेश युति करके सूर्य चन्द्र भी राजयोग बना रहे हैं, साथ में धर्म की ध्वज केतु बैठे हैं। तो यह मंगल के लिए शुभ है अपने मित्र शुभ ग्रह सूर्य में अस्त होना, पर अशुभ, मेष लग्न में पापी बुध का शुभ सूर्य में अस्त होना, यह पाप की पराजय है। तो शत्रुओं का तो नाश निश्चित है। ध्यान देने वाली बात है कि आज श्रवण नक्षत्र में शपथ ग्रहण हुआ है जो राज्याभिषेक का सबसे मुख्य नक्षत्र है। विजयादशमी को दशमी तिथि का श्रवण नक्षत्र से संयोग जब होता है उसी को विजय मुहूर्त्त कहा जाता है और उसी कारण विजयादशमी का इतना महत्त्व है। यह राज्याभिषेक, युद्ध, विजय के लिए सबसे शुभ नक्षत्र इसलिए ही होता है। यह नक्षत्र स्वयं भगवान विष्णु का है, वे इसके देवता हैं, इसलिए यह पालक है, जनता का, बंगाल का सरकार बहुत ही प्यारे तरीके से पालन करेगी, मरहम लगाएगी, घाव भरेगी, दवा देगी, सुरक्षा करेगी। यह बंगाल के लिए बहुत शुभ हो गया। इस नक्षत्र का महत्त्व इतना है कि इसमें थोड़े से काम का भी बड़ा भारी शुभ परिणाम मिलता है। वामन भगवान का प्रादुर्भाव इसी नक्षत्र में हुआ था और उन्होंने 3 पग में ही 3 लोग नाप लिए थे। इसलिए आप मानकर चलिए कि बंगाल की भूमि का भी विस्तार अवश्य होगा, इस पर बहुत संजीदगी से काम होगा, व सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित कर दिया जाएगा। अभी चन्द्र का प्रभाव 47 दिन तक रहेगा, 25 जून से मङ्गल का प्रभाव शुरू होगा जो 6 अक्टूबर 2026 तक रहेगा, इस बीच आक्रामकता से अपराधियों पर कार्यवाही की जाएगी। इसके बाद 29 जून 2027 तक कुछ रहस्यमयी व घातक घटनाएं घटने की संभावना है, जिनका असर दीर्घकालिक होगा। @MuditUpdates #SuvenduAdhikari #ShubhenduAdhikari #शुभेंदु

Suvendu Oath as CM @ West Bengal ! At 11:32 AM, Kolkata

शुभेन्दु अधिकारी के शपथग्रहण की कुंडली का विश्लेषण पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने 9 मई 2026 को कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में प्रातः 11:31 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। शपथग्रहण के समय की कुंडली कर्क लग्न की है। ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी को श्रवण नक्षत्र शुक्ल योग में शुभ मुहूर्त है। कर्क लग्न की इस कुंडली में लग्न में लग्नेश चन्द्रमा सप्तम भाव में हैं और पूर्ण व अतिमित्र दृष्टि से लग्न को देख रहे हैं, जिससे लग्न बहुत बलवान हो गया है और लग्न की पूर्ण रक्षा यानि सरकार की पूर्ण रक्षा व बल में बहुत वृद्धि हो गई है। धनेश सूर्य दशम भाव में उच्च के हैं व तृतीयेश व व्ययेश बुध सूर्य में अस्त होकर दशम में ही हैं। इसलिए सूर्य ने 2,3,12 भावों को नियन्त्रण में ले लिया है। सुखेश व आयेश शुक्र आय भाव में स्वगृही हैं। इसलिए बंगाल को बहुत सुख समृद्धि मिलने वाली है। धनेश आयेश दोनों का उच्च व स्वगृही होना राज्य के धनलाभ, आय वृद्धि की दृष्टि से बहुत शुभ हो गया है। बंगाल को केन्द्र से भी बड़ा बजट, योजनाएं और उद्योगों की भरमार मिलने वाली है। बंगाल को चारों तरफ से फायदा ही फायदा होगा। पूरा विश्लेषण यूट्यूब पर यहाँ देखें youtu.be/PnHFMJOACYM पंचमेश व दशमेश राजयोगकारक मंगल नवम भाव में सप्तमेश व अष्टमेश शनि के साथ हैं। केन्द्रेश त्रिकोणेश का यह मिलन अच्छा है। पर दोनों विरोधी ग्रह होने से धर्मक्षेत्र में भयानक घमासान होने वाला है। मंगल का बल शनि से ज्यादा है, इसलिए पुलिस कार्यवाही, एनकाउंटर की भरमार देखने को मिलेगी। शनि के न्यायालय मार्ग की बजाय सरकार अपने राजदण्ड का प्रयोग करके योगीजी की तरह पूरे बंगाल में अपराध का कठोरता से सफाया करेगी और उनपर नियंत्रण स्थापित करेगी। शिक्षा के क्षेत्र में भी बंगाल में प्रगति होगी, विश्वविद्यालयों की स्थिति सुधारी जाएगी और बंगाल की यूनिवर्सिटीज देश में अच्छा नाम कमाएंगी। बंगाल से विभिन्न विषयों में बहुत अच्छा साहित्य निकलकर आएगा। बंगाल की खोई हुई साहित्य विरासत को वापिस उभारने और जीवित करने में बंगाल सरकार काम करेगी। षष्ठेश व धर्मेश गुरु द्वादश में हैं, और पूर्ण मित्रदृष्टि से षष्ठ भाव को देख रहे हैं, इसलिए शत्रुओं का धर्म द्वारा अच्छे से निग्रह हो जाएगा। धर्म के शत्रु धर्म की नजर से बच नहीं पा रहे हैं। सरकार की तरफ से बहुत बड़ी कार्यवाही हिन्दू विरोधियों को, अपराधी, गुंडों को झेलनी पड़ेगी, अपराधियों के लिए छिपना नामुमकिन हो जाएगा। इस चक्कर में अनेक हिंसक घटनाएं, हत्याएं देखने को मिल सकती हैं, क्योंकि अपराधी बुझने से पहले फड़फड़ाने की कोशिश करेंगे। दंगों के भी षड्यन्त्र होंगे पर हिन्दुत्व को दबा नहीं पाएंगे। अष्टमेश राहु अष्टम में ही स्वगृही हैं। दशमांश में लग्नेश मंगल अष्टम में स्वगृही है, इसलिए सरकार में गुस्सा ज्यादा होगा, अपराध सहने का कहीं कोई प्रश्न नहीं उठता। साथ में ही षष्ठेश भी मृत्यु भाव में पड़ गया है बुध। तो आप देख सकते हैं लग्नेश यानी स्वयं सरकार और शत्रु दोनों मृत्यु भाव में बैठ गए हैं युद्ध करने, यहां आर पार का युद्ध दोनों शत्रुओं में हो रहा है। पर खेल क्या हो गया? ये मृत्यु का घर लग्नेश का सरकार का खुद का ही है। तो शत्रु अपने शत्रु के घर में ही फंस गया। जैसे कोई सियार शेर की मांद में घुसा हो युद्ध करने तो जीत किसकी होगी ? तो मृत्युस्थान में स्वगृही लग्नेश कभी खुदकी हानि नहीं करता है बल्कि रक्षा करता है और वहां शत्रु मृत्यु के मुंह में पड़ा है। पर इसमें भी देखो मंगल बुध दोनों ही सूर्य में अस्त हैं। कालचक्र में मेष लग्न की कुंडली में सूर्य पंचमेश हैं, जो बुद्धि के कारक हैं, तो सूर्य मंगल बुध के नियंत्रण होकर 1,3,5,6,8 इन 5 भावों के नियंत्रक हो गए हैं, और स्वयं धर्म भाव में बैठे हैं चन्द्र केतु के साथ, चन्द्र भी सुखेश है, तो यहां त्रिकोणेश केन्द्रेश युति करके सूर्य चन्द्र भी राजयोग बना रहे हैं, साथ में धर्म की ध्वज केतु बैठे हैं। तो यह मंगल के लिए शुभ है अपने मित्र शुभ ग्रह सूर्य में अस्त होना, पर अशुभ, मेष लग्न में पापी बुध का शुभ सूर्य में अस्त होना, यह पाप की पराजय है। तो शत्रुओं का तो नाश निश्चित है। ध्यान देने वाली बात है कि आज श्रवण नक्षत्र में शपथ ग्रहण हुआ है जो राज्याभिषेक का सबसे मुख्य नक्षत्र है। विजयादशमी को दशमी तिथि का श्रवण नक्षत्र से संयोग जब होता है उसी को विजय मुहूर्त्त कहा जाता है और उसी कारण विजयादशमी का इतना महत्त्व है। यह राज्याभिषेक, युद्ध, विजय के लिए सबसे शुभ नक्षत्र इसलिए ही होता है। यह नक्षत्र स्वयं भगवान विष्णु का है, वे इसके देवता हैं, इसलिए यह पालक है, जनता का, बंगाल का सरकार बहुत ही प्यारे तरीके से पालन करेगी, मरहम लगाएगी, घाव भरेगी, दवा देगी, सुरक्षा करेगी। यह बंगाल के लिए बहुत शुभ हो गया। इस नक्षत्र का महत्त्व इतना है कि इसमें थोड़े से काम का भी बड़ा भारी शुभ परिणाम मिलता है। वामन भगवान का प्रादुर्भाव इसी नक्षत्र में हुआ था और उन्होंने 3 पग में ही 3 लोग नाप लिए थे। इसलिए आप मानकर चलिए कि बंगाल की भूमि का भी विस्तार अवश्य होगा, इस पर बहुत संजीदगी से काम होगा, व सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित कर दिया जाएगा। अभी चन्द्र का प्रभाव 47 दिन तक रहेगा, 25 जून से मङ्गल का प्रभाव शुरू होगा जो 6 अक्टूबर 2026 तक रहेगा, इस बीच आक्रामकता से अपराधियों पर कार्यवाही की जाएगी। इसके बाद 29 जून 2027 तक कुछ रहस्यमयी व घातक घटनाएं घटने की संभावना है, जिनका असर दीर्घकालिक होगा। @MuditUpdates #SuvenduAdhikari #ShubhenduAdhikari #शुभेंदु




शुभेन्दु अधिकारी के शपथग्रहण की कुंडली का विश्लेषण पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने 9 मई 2026 को कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में प्रातः 11:31 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। शपथग्रहण के समय की कुंडली कर्क लग्न की है। ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी को श्रवण नक्षत्र शुक्ल योग में शुभ मुहूर्त है। कर्क लग्न की इस कुंडली में लग्न में लग्नेश चन्द्रमा सप्तम भाव में हैं और पूर्ण व अतिमित्र दृष्टि से लग्न को देख रहे हैं, जिससे लग्न बहुत बलवान हो गया है और लग्न की पूर्ण रक्षा यानि सरकार की पूर्ण रक्षा व बल में बहुत वृद्धि हो गई है। धनेश सूर्य दशम भाव में उच्च के हैं व तृतीयेश व व्ययेश बुध सूर्य में अस्त होकर दशम में ही हैं। इसलिए सूर्य ने 2,3,12 भावों को नियन्त्रण में ले लिया है। सुखेश व आयेश शुक्र आय भाव में स्वगृही हैं। इसलिए बंगाल को बहुत सुख समृद्धि मिलने वाली है। धनेश आयेश दोनों का उच्च व स्वगृही होना राज्य के धनलाभ, आय वृद्धि की दृष्टि से बहुत शुभ हो गया है। बंगाल को केन्द्र से भी बड़ा बजट, योजनाएं और उद्योगों की भरमार मिलने वाली है। बंगाल को चारों तरफ से फायदा ही फायदा होगा। पूरा विश्लेषण यूट्यूब पर यहाँ देखें youtu.be/PnHFMJOACYM पंचमेश व दशमेश राजयोगकारक मंगल नवम भाव में सप्तमेश व अष्टमेश शनि के साथ हैं। केन्द्रेश त्रिकोणेश का यह मिलन अच्छा है। पर दोनों विरोधी ग्रह होने से धर्मक्षेत्र में भयानक घमासान होने वाला है। मंगल का बल शनि से ज्यादा है, इसलिए पुलिस कार्यवाही, एनकाउंटर की भरमार देखने को मिलेगी। शनि के न्यायालय मार्ग की बजाय सरकार अपने राजदण्ड का प्रयोग करके योगीजी की तरह पूरे बंगाल में अपराध का कठोरता से सफाया करेगी और उनपर नियंत्रण स्थापित करेगी। शिक्षा के क्षेत्र में भी बंगाल में प्रगति होगी, विश्वविद्यालयों की स्थिति सुधारी जाएगी और बंगाल की यूनिवर्सिटीज देश में अच्छा नाम कमाएंगी। बंगाल से विभिन्न विषयों में बहुत अच्छा साहित्य निकलकर आएगा। बंगाल की खोई हुई साहित्य विरासत को वापिस उभारने और जीवित करने में बंगाल सरकार काम करेगी। षष्ठेश व धर्मेश गुरु द्वादश में हैं, और पूर्ण मित्रदृष्टि से षष्ठ भाव को देख रहे हैं, इसलिए शत्रुओं का धर्म द्वारा अच्छे से निग्रह हो जाएगा। धर्म के शत्रु धर्म की नजर से बच नहीं पा रहे हैं। सरकार की तरफ से बहुत बड़ी कार्यवाही हिन्दू विरोधियों को, अपराधी, गुंडों को झेलनी पड़ेगी, अपराधियों के लिए छिपना नामुमकिन हो जाएगा। इस चक्कर में अनेक हिंसक घटनाएं, हत्याएं देखने को मिल सकती हैं, क्योंकि अपराधी बुझने से पहले फड़फड़ाने की कोशिश करेंगे। दंगों के भी षड्यन्त्र होंगे पर हिन्दुत्व को दबा नहीं पाएंगे। अष्टमेश राहु अष्टम में ही स्वगृही हैं। दशमांश में लग्नेश मंगल अष्टम में स्वगृही है, इसलिए सरकार में गुस्सा ज्यादा होगा, अपराध सहने का कहीं कोई प्रश्न नहीं उठता। साथ में ही षष्ठेश भी मृत्यु भाव में पड़ गया है बुध। तो आप देख सकते हैं लग्नेश यानी स्वयं सरकार और शत्रु दोनों मृत्यु भाव में बैठ गए हैं युद्ध करने, यहां आर पार का युद्ध दोनों शत्रुओं में हो रहा है। पर खेल क्या हो गया? ये मृत्यु का घर लग्नेश का सरकार का खुद का ही है। तो शत्रु अपने शत्रु के घर में ही फंस गया। जैसे कोई सियार शेर की मांद में घुसा हो युद्ध करने तो जीत किसकी होगी ? तो मृत्युस्थान में स्वगृही लग्नेश कभी खुदकी हानि नहीं करता है बल्कि रक्षा करता है और वहां शत्रु मृत्यु के मुंह में पड़ा है। पर इसमें भी देखो मंगल बुध दोनों ही सूर्य में अस्त हैं। कालचक्र में मेष लग्न की कुंडली में सूर्य पंचमेश हैं, जो बुद्धि के कारक हैं, तो सूर्य मंगल बुध के नियंत्रण होकर 1,3,5,6,8 इन 5 भावों के नियंत्रक हो गए हैं, और स्वयं धर्म भाव में बैठे हैं चन्द्र केतु के साथ, चन्द्र भी सुखेश है, तो यहां त्रिकोणेश केन्द्रेश युति करके सूर्य चन्द्र भी राजयोग बना रहे हैं, साथ में धर्म की ध्वज केतु बैठे हैं। तो यह मंगल के लिए शुभ है अपने मित्र शुभ ग्रह सूर्य में अस्त होना, पर अशुभ, मेष लग्न में पापी बुध का शुभ सूर्य में अस्त होना, यह पाप की पराजय है। तो शत्रुओं का तो नाश निश्चित है। ध्यान देने वाली बात है कि आज श्रवण नक्षत्र में शपथ ग्रहण हुआ है जो राज्याभिषेक का सबसे मुख्य नक्षत्र है। विजयादशमी को दशमी तिथि का श्रवण नक्षत्र से संयोग जब होता है उसी को विजय मुहूर्त्त कहा जाता है और उसी कारण विजयादशमी का इतना महत्त्व है। यह राज्याभिषेक, युद्ध, विजय के लिए सबसे शुभ नक्षत्र इसलिए ही होता है। यह नक्षत्र स्वयं भगवान विष्णु का है, वे इसके देवता हैं, इसलिए यह पालक है, जनता का, बंगाल का सरकार बहुत ही प्यारे तरीके से पालन करेगी, मरहम लगाएगी, घाव भरेगी, दवा देगी, सुरक्षा करेगी। यह बंगाल के लिए बहुत शुभ हो गया। इस नक्षत्र का महत्त्व इतना है कि इसमें थोड़े से काम का भी बड़ा भारी शुभ परिणाम मिलता है। वामन भगवान का प्रादुर्भाव इसी नक्षत्र में हुआ था और उन्होंने 3 पग में ही 3 लोग नाप लिए थे। इसलिए आप मानकर चलिए कि बंगाल की भूमि का भी विस्तार अवश्य होगा, इस पर बहुत संजीदगी से काम होगा, व सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित कर दिया जाएगा। अभी चन्द्र का प्रभाव 47 दिन तक रहेगा, 25 जून से मङ्गल का प्रभाव शुरू होगा जो 6 अक्टूबर 2026 तक रहेगा, इस बीच आक्रामकता से अपराधियों पर कार्यवाही की जाएगी। इसके बाद 29 जून 2027 तक कुछ रहस्यमयी व घातक घटनाएं घटने की संभावना है, जिनका असर दीर्घकालिक होगा। @MuditUpdates #SuvenduAdhikari #ShubhenduAdhikari #शुभेंदु




शुभेन्दु अधिकारी के शपथग्रहण की कुंडली का विश्लेषण पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने 9 मई 2026 को कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में प्रातः 11:31 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। शपथग्रहण के समय की कुंडली कर्क लग्न की है। ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी को श्रवण नक्षत्र शुक्ल योग में शुभ मुहूर्त है। कर्क लग्न की इस कुंडली में लग्न में लग्नेश चन्द्रमा सप्तम भाव में हैं और पूर्ण व अतिमित्र दृष्टि से लग्न को देख रहे हैं, जिससे लग्न बहुत बलवान हो गया है और लग्न की पूर्ण रक्षा यानि सरकार की पूर्ण रक्षा व बल में बहुत वृद्धि हो गई है। धनेश सूर्य दशम भाव में उच्च के हैं व तृतीयेश व व्ययेश बुध सूर्य में अस्त होकर दशम में ही हैं। इसलिए सूर्य ने 2,3,12 भावों को नियन्त्रण में ले लिया है। सुखेश व आयेश शुक्र आय भाव में स्वगृही हैं। इसलिए बंगाल को बहुत सुख समृद्धि मिलने वाली है। धनेश आयेश दोनों का उच्च व स्वगृही होना राज्य के धनलाभ, आय वृद्धि की दृष्टि से बहुत शुभ हो गया है। बंगाल को केन्द्र से भी बड़ा बजट, योजनाएं और उद्योगों की भरमार मिलने वाली है। बंगाल को चारों तरफ से फायदा ही फायदा होगा। पूरा विश्लेषण यूट्यूब पर यहाँ देखें youtu.be/PnHFMJOACYM पंचमेश व दशमेश राजयोगकारक मंगल नवम भाव में सप्तमेश व अष्टमेश शनि के साथ हैं। केन्द्रेश त्रिकोणेश का यह मिलन अच्छा है। पर दोनों विरोधी ग्रह होने से धर्मक्षेत्र में भयानक घमासान होने वाला है। मंगल का बल शनि से ज्यादा है, इसलिए पुलिस कार्यवाही, एनकाउंटर की भरमार देखने को मिलेगी। शनि के न्यायालय मार्ग की बजाय सरकार अपने राजदण्ड का प्रयोग करके योगीजी की तरह पूरे बंगाल में अपराध का कठोरता से सफाया करेगी और उनपर नियंत्रण स्थापित करेगी। शिक्षा के क्षेत्र में भी बंगाल में प्रगति होगी, विश्वविद्यालयों की स्थिति सुधारी जाएगी और बंगाल की यूनिवर्सिटीज देश में अच्छा नाम कमाएंगी। बंगाल से विभिन्न विषयों में बहुत अच्छा साहित्य निकलकर आएगा। बंगाल की खोई हुई साहित्य विरासत को वापिस उभारने और जीवित करने में बंगाल सरकार काम करेगी। षष्ठेश व धर्मेश गुरु द्वादश में हैं, और पूर्ण मित्रदृष्टि से षष्ठ भाव को देख रहे हैं, इसलिए शत्रुओं का धर्म द्वारा अच्छे से निग्रह हो जाएगा। धर्म के शत्रु धर्म की नजर से बच नहीं पा रहे हैं। सरकार की तरफ से बहुत बड़ी कार्यवाही हिन्दू विरोधियों को, अपराधी, गुंडों को झेलनी पड़ेगी, अपराधियों के लिए छिपना नामुमकिन हो जाएगा। इस चक्कर में अनेक हिंसक घटनाएं, हत्याएं देखने को मिल सकती हैं, क्योंकि अपराधी बुझने से पहले फड़फड़ाने की कोशिश करेंगे। दंगों के भी षड्यन्त्र होंगे पर हिन्दुत्व को दबा नहीं पाएंगे। अष्टमेश राहु अष्टम में ही स्वगृही हैं। दशमांश में लग्नेश मंगल अष्टम में स्वगृही है, इसलिए सरकार में गुस्सा ज्यादा होगा, अपराध सहने का कहीं कोई प्रश्न नहीं उठता। साथ में ही षष्ठेश भी मृत्यु भाव में पड़ गया है बुध। तो आप देख सकते हैं लग्नेश यानी स्वयं सरकार और शत्रु दोनों मृत्यु भाव में बैठ गए हैं युद्ध करने, यहां आर पार का युद्ध दोनों शत्रुओं में हो रहा है। पर खेल क्या हो गया? ये मृत्यु का घर लग्नेश का सरकार का खुद का ही है। तो शत्रु अपने शत्रु के घर में ही फंस गया। जैसे कोई सियार शेर की मांद में घुसा हो युद्ध करने तो जीत किसकी होगी ? तो मृत्युस्थान में स्वगृही लग्नेश कभी खुदकी हानि नहीं करता है बल्कि रक्षा करता है और वहां शत्रु मृत्यु के मुंह में पड़ा है। पर इसमें भी देखो मंगल बुध दोनों ही सूर्य में अस्त हैं। कालचक्र में मेष लग्न की कुंडली में सूर्य पंचमेश हैं, जो बुद्धि के कारक हैं, तो सूर्य मंगल बुध के नियंत्रण होकर 1,3,5,6,8 इन 5 भावों के नियंत्रक हो गए हैं, और स्वयं धर्म भाव में बैठे हैं चन्द्र केतु के साथ, चन्द्र भी सुखेश है, तो यहां त्रिकोणेश केन्द्रेश युति करके सूर्य चन्द्र भी राजयोग बना रहे हैं, साथ में धर्म की ध्वज केतु बैठे हैं। तो यह मंगल के लिए शुभ है अपने मित्र शुभ ग्रह सूर्य में अस्त होना, पर अशुभ, मेष लग्न में पापी बुध का शुभ सूर्य में अस्त होना, यह पाप की पराजय है। तो शत्रुओं का तो नाश निश्चित है। ध्यान देने वाली बात है कि आज श्रवण नक्षत्र में शपथ ग्रहण हुआ है जो राज्याभिषेक का सबसे मुख्य नक्षत्र है। विजयादशमी को दशमी तिथि का श्रवण नक्षत्र से संयोग जब होता है उसी को विजय मुहूर्त्त कहा जाता है और उसी कारण विजयादशमी का इतना महत्त्व है। यह राज्याभिषेक, युद्ध, विजय के लिए सबसे शुभ नक्षत्र इसलिए ही होता है। यह नक्षत्र स्वयं भगवान विष्णु का है, वे इसके देवता हैं, इसलिए यह पालक है, जनता का, बंगाल का सरकार बहुत ही प्यारे तरीके से पालन करेगी, मरहम लगाएगी, घाव भरेगी, दवा देगी, सुरक्षा करेगी। यह बंगाल के लिए बहुत शुभ हो गया। इस नक्षत्र का महत्त्व इतना है कि इसमें थोड़े से काम का भी बड़ा भारी शुभ परिणाम मिलता है। वामन भगवान का प्रादुर्भाव इसी नक्षत्र में हुआ था और उन्होंने 3 पग में ही 3 लोग नाप लिए थे। इसलिए आप मानकर चलिए कि बंगाल की भूमि का भी विस्तार अवश्य होगा, इस पर बहुत संजीदगी से काम होगा, व सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित कर दिया जाएगा। अभी चन्द्र का प्रभाव 47 दिन तक रहेगा, 25 जून से मङ्गल का प्रभाव शुरू होगा जो 6 अक्टूबर 2026 तक रहेगा, इस बीच आक्रामकता से अपराधियों पर कार्यवाही की जाएगी। इसके बाद 29 जून 2027 तक कुछ रहस्यमयी व घातक घटनाएं घटने की संभावना है, जिनका असर दीर्घकालिक होगा। @MuditUpdates #SuvenduAdhikari #ShubhenduAdhikari #शुभेंदु


@bharaniastro06 Unrelated but what is your opinion on the muhurta for suvendu adhikaris swearing in ceremony












कुछ दिन पहले अपना अलग राष्ट्र मांग रहा था अब हिन्दू राष्ट्र पर आ गया। यह सोशल मीडिया के मुद्दों के अनुसार रंग बदलने वाला गिरगिट है।