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अदब्धानि वरुणस्य व्रतानि Politics | Culture | Astrology (Views are personal)

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साध्वी ऋतम्भरा जी ने अपने जीवन में एक प्रतिज्ञा की कि मैं अनाथ बच्चों की सेवा करके मदर टेरेसा नाम के बुलबुले को फोड़ दूंगी। अनाथ बच्चों का धर्मान्तरण रोकना मेरे जीवन का लक्ष्य होगा, मैं वात्सल्य ग्राम की स्थापना करूंगी। मदर टेरेसा अनाथों की आड़ में ज़बरन धर्मपरिवर्तन, गर्भपात, महिलाधिकारों का हनन, तानाशाही, अपराधियों का समर्थन कर उनसे पैसा लेना जैसे कृत्य करती थी। जियानलुइगी नुज़ी नाम की पत्रकार ने तो खुलासा किया था कि वेटिकन के एक बैंक में मदर टेरेसा ने चैरिटी के नाम पर अरबों डॉलर इकट्ठे कर रखे थे। परन्तु अरबों डॉलर होने पर भी ग़रीबों का इलाज न कराकर उन्हें पीड़ा सहन करने को कहती थी, पर जब खुद बीमार पड़ी सबसे उच्च अस्पताल में इलाज कराया। दुनिया भर से दान वसूलने के बावजूद टेरेसा के संस्थानों की हालत दयनीय थी। धर्मान्तरणकारी मदर टेरेसा को पश्चिम ने 1979 में नोबल से पुरस्कृत किया, और 1980 में उसे भारतरत्न दे दिया गया। मदर टेरेसा के इस पाखण्ड को उसके जीवित रहते साध्वी ऋतम्भरा ने अप्रैल 1995 में इंदौर की सभा में एक्सपोज़ कर दिया और उसे जादू के नाम पर धर्मान्तरण करने वाली घोषित कर दिया। उस समय चर्च की भारतीय शाखा खान्ग्रेस का शासन मप्र में था, जिसे अपनी मदर टेरेसा का अपमान सहन नहीं हुआ और साध्वी ऋतम्भरा समेत 169 हिन्दुओं को जेल में ठूंस दिया। इसी मदर टेरेसा के इतने कुकृत्य होने के उपरान्त भी पोप ने उसे सन्त घोषित कर दिया और भारत में स्कूलों में जबरन उसे वात्सल्य की मूर्ति के रूप में पढ़ाया जाता रहा। मदर टेरेसा की छत्रछाया में भारत की हिन्दू विरोधी वामपंथी शक्तियां भी फलती फूलती रहीं इसलिए वर्तमान के सभी वामपंथी अपने आपको मदर टेरेसा का कर्जदार मानते हैं। तब साध्वी ऋतम्भरा ने प्रतिज्ञा की कि पन्ना धाय के देश में एक कपटी स्त्री वात्सल्य की मूर्ति के रूप में स्थापित की जाए यह एक बहुत बड़ा षड्यन्त्र है और उन्होंने हिन्दुत्व की रेखा इस क्षेत्र में बड़ी करने की ठान ली, जिसमें सपा, कांग्रेस आदि सब रोड़े अटकाते रहे। पर उन्होंने अपने आपको इस एक असहाय बच्चों व महिलाओं की सुरक्षा के कार्य में पूर्णतः झोंक दिया। उसी का परिणाम निकला वात्सल्य ग्राम। ये कैसा हिन्दू समाज है जो साध्वी ऋतम्भरा को न्यून करने की कोशिश कर रहा है, जिस साध्वी के प्रयास से मदर टेरेसा का प्रोजेक्ट न्यून हो गया, अनाथों के क्षेत्र में मिशनरियों के कथित अहसान से हिन्दू समाज को मुक्ति मिली। पर हिन्दू समाज इतना कृतघ्न है कि उनके एक सामान्य से बयान, जिसमें वे हिन्दू समाज के ही संघर्ष को, अपमान को याद कर रही हैं, उसके आधार पर उनके जाति, लिंग, चरित्र का ऐसा वीभत्स चीरहरण करने लगा। हर प्रकार से कैसे भी साध्वी ऋतम्भरा जिस एक छोटी पर हिन्दुत्व के प्रति समर्पित बालिका को उसके गुरु स्वामी परमानंद गिरिजी ने ऐसे दिव्य संकल्पों को पूरा कर देने वाली बना दिया, उस भगवती का चीरहरण निकृष्ट नराधमों ने किया। यहां हिन्दू समाज का चरित्र भी दिख जाता है कि कैसे वेटिकन मदर टेरेसा जैसी कपटी को भी अपने लाभ के लिए सन्त घोषित कर देता है और कैसे कुछ हिन्दू एक परमवात्सल्यमयी माता का भी चरित्रहनन करते हैं। क्या यह भगवती के उपासकों का देश है? वही खोखला अहं, वही ईर्ष्या, सम्मिलित होकर कार्य करने की शक्ति का अभाव, गुलाम जाति का स्वभाव है, परन्तु हमें इसे उखाड़ फेंकने की चेष्टा करनी चाहिए। यही terrible jealousy हमारे समाज की प्रधान characteristic है। कौन हैं मां साध्वी ऋतम्भरा ? अनुसूया, विश्ववारा, सती ब्रह्मवादिनियों को तो मैंने नहीं देखा, पर यह हमारा सौभाग्य है कि हमारे समय में मां साध्वी ऋतम्भरा विराजमान हैं। उनकी वाणी के एक एक शब्द से करुणा टपकती है। शब्द प्रतिशब्द ऐसा लगता है कि अभी वे भावोद्रेक से रो पड़ेंगी। हृदय के भावतल में ही वे सदा आसीन रहती हैं। एक एक शब्द वे हृदय से बोलती हैं, करुणा से ओतप्रोत होकर बोलती हैं। कैसा भी रागद्वेष हानिलाभ यशोपयश का भाव उन्हें छू भी नहीं गया है। विवेकानंद का वो भावनाओं से भरा हृदय यदि किसी स्त्री में होता, तो वे शायद ऋतम्भरा ही होतीं, जिसे अपने समाज के अनाथों और असहायों की चिंता थी, तीव्र धार्मिक स्वाभिमान के साथ, शेर के समान। ऋत से तो वे लबालब भरी हुई ही हैं, करुणा से भी आप्लावित हो रही हैं। पुराने समय में जो माँ आनंदमयी जैसी माताओं का वर्णन मिलता है, वह मैं मां ऋतम्भरा में ही देखता हूँ। ऐसी साध्वी की वाणी निष्फल भी नहीं जाती। मेरे नानाजी ने बताया था कि राममन्दिर के लिए एक एक रुपया झोली फैलाकर इकट्ठा किया करती थीं साध्वी ऋतम्भरा जी गली गली धूप में घूम घूमकर, यह कहकर कि इतने हिन्दू एक एक रुपया दे दें तो भव्य मन्दिर निर्माण को इतने करोड़ रुपए हो जाएंगे... आज जैसे आसान समय में नहीं बल्कि उस समय जब हिंदुत्व एक अपराध समझा जाता था, और "परिंदा भी पर नहीं मार सकता" कहकर धमकाने वाले शासन करते थे... तभी मां ऋतम्भरा के आगे तो पूरा इतिहास डोल गया होगा, बोलीं, कितना अपमान सहकर यहां पहुंचे हैं। कभी महसूस नहीं कर पाओगे, कि कितने कष्ट के बाद उनके मुंह से ये बोल फूटा होगा, अनुभव नहीं किया ना वह इतिहास। "स्त्रियाःसमस्तास्तव देविभेदाः।" कहा है, कठिन है बहुत। पर कोई कोई विभूति होती है जिसमें जगन्माता के दर्शन हो जाते हैं, मुझे मां साध्वी ऋतम्भरा में दर्शन होते हैं। उनके मुखमण्डल पर सिर्फ भोलापन ही दिखता है, सभी के लिए वात्सल्य ही दिखता है। उनके गुरुदेव स्वामी श्री परमानंद गिरिजी महाराज बहुत बड़े वेदान्ती ब्रह्मवादी महात्मा हैं। वेदान्त के ऐसे ज्ञाता भी दुर्लभ ही हैं। उनका अद्वैत जीवंत अद्वैत है, क्षुद्र हृदय वालों जैसा नहीं कि सिद्धांत में कुछ और व्यवहार में उससे उलट। @MuditUpdates #sadhviritambhara
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@PunyaPrakop_ सूर्यसिद्धान्त अनुसार सप्तमी तिथि प्रातः 09:35 तक ही थी।
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शुभेन्दु अधिकारी के शपथग्रहण की कुंडली का विश्लेषण पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने 9 मई 2026 को कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में प्रातः 11:31 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। शपथग्रहण के समय की कुंडली कर्क लग्न की है। ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी को श्रवण नक्षत्र शुक्ल योग में शुभ मुहूर्त है। कर्क लग्न की इस कुंडली में लग्न में लग्नेश चन्द्रमा सप्तम भाव में हैं और पूर्ण व अतिमित्र दृष्टि से लग्न को देख रहे हैं, जिससे लग्न बहुत बलवान हो गया है और लग्न की पूर्ण रक्षा यानि सरकार की पूर्ण रक्षा व बल में बहुत वृद्धि हो गई है। धनेश सूर्य दशम भाव में उच्च के हैं व तृतीयेश व व्ययेश बुध सूर्य में अस्त होकर दशम में ही हैं। इसलिए सूर्य ने 2,3,12 भावों को नियन्त्रण में ले लिया है। सुखेश व आयेश शुक्र आय भाव में स्वगृही हैं। इसलिए बंगाल को बहुत सुख समृद्धि मिलने वाली है। धनेश आयेश दोनों का उच्च व स्वगृही होना राज्य के धनलाभ, आय वृद्धि की दृष्टि से बहुत शुभ हो गया है। बंगाल को केन्द्र से भी बड़ा बजट, योजनाएं और उद्योगों की भरमार मिलने वाली है। बंगाल को चारों तरफ से फायदा ही फायदा होगा। पूरा विश्लेषण यूट्यूब पर यहाँ देखें youtu.be/PnHFMJOACYM पंचमेश व दशमेश राजयोगकारक मंगल नवम भाव में सप्तमेश व अष्टमेश शनि के साथ हैं। केन्द्रेश त्रिकोणेश का यह मिलन अच्छा है। पर दोनों विरोधी ग्रह होने से धर्मक्षेत्र में भयानक घमासान होने वाला है। मंगल का बल शनि से ज्यादा है, इसलिए पुलिस कार्यवाही, एनकाउंटर की भरमार देखने को मिलेगी। शनि के न्यायालय मार्ग की बजाय सरकार अपने राजदण्ड का प्रयोग करके योगीजी की तरह पूरे बंगाल में अपराध का कठोरता से सफाया करेगी और उनपर नियंत्रण स्थापित करेगी। शिक्षा के क्षेत्र में भी बंगाल में प्रगति होगी, विश्वविद्यालयों की स्थिति सुधारी जाएगी और बंगाल की यूनिवर्सिटीज देश में अच्छा नाम कमाएंगी। बंगाल से विभिन्न विषयों में बहुत अच्छा साहित्य निकलकर आएगा। बंगाल की खोई हुई साहित्य विरासत को वापिस उभारने और जीवित करने में बंगाल सरकार काम करेगी। षष्ठेश व धर्मेश गुरु द्वादश में हैं, और पूर्ण मित्रदृष्टि से षष्ठ भाव को देख रहे हैं, इसलिए शत्रुओं का धर्म द्वारा अच्छे से निग्रह हो जाएगा। धर्म के शत्रु धर्म की नजर से बच नहीं पा रहे हैं। सरकार की तरफ से बहुत बड़ी कार्यवाही हिन्दू विरोधियों को, अपराधी, गुंडों को झेलनी पड़ेगी, अपराधियों के लिए छिपना नामुमकिन हो जाएगा। इस चक्कर में अनेक हिंसक घटनाएं, हत्याएं देखने को मिल सकती हैं, क्योंकि अपराधी बुझने से पहले फड़फड़ाने की कोशिश करेंगे। दंगों के भी षड्यन्त्र होंगे पर हिन्दुत्व को दबा नहीं पाएंगे। अष्टमेश राहु अष्टम में ही स्वगृही हैं। दशमांश में लग्नेश मंगल अष्टम में स्वगृही है, इसलिए सरकार में गुस्सा ज्यादा होगा, अपराध सहने का कहीं कोई प्रश्न नहीं उठता। साथ में ही षष्ठेश भी मृत्यु भाव में पड़ गया है बुध। तो आप देख सकते हैं लग्नेश यानी स्वयं सरकार और शत्रु दोनों मृत्यु भाव में बैठ गए हैं युद्ध करने, यहां आर पार का युद्ध दोनों शत्रुओं में हो रहा है। पर खेल क्या हो गया? ये मृत्यु का घर लग्नेश का सरकार का खुद का ही है। तो शत्रु अपने शत्रु के घर में ही फंस गया। जैसे कोई सियार शेर की मांद में घुसा हो युद्ध करने तो जीत किसकी होगी ? तो मृत्युस्थान में स्वगृही लग्नेश कभी खुदकी हानि नहीं करता है बल्कि रक्षा करता है और वहां शत्रु मृत्यु के मुंह में पड़ा है। पर इसमें भी देखो मंगल बुध दोनों ही सूर्य में अस्त हैं। कालचक्र में मेष लग्न की कुंडली में सूर्य पंचमेश हैं, जो बुद्धि के कारक हैं, तो सूर्य मंगल बुध के नियंत्रण होकर 1,3,5,6,8 इन 5 भावों के नियंत्रक हो गए हैं, और स्वयं धर्म भाव में बैठे हैं चन्द्र केतु के साथ, चन्द्र भी सुखेश है, तो यहां त्रिकोणेश केन्द्रेश युति करके सूर्य चन्द्र भी राजयोग बना रहे हैं, साथ में धर्म की ध्वज केतु बैठे हैं। तो यह मंगल के लिए शुभ है अपने मित्र शुभ ग्रह सूर्य में अस्त होना, पर अशुभ, मेष लग्न में पापी बुध का शुभ सूर्य में अस्त होना, यह पाप की पराजय है। तो शत्रुओं का तो नाश निश्चित है। ध्यान देने वाली बात है कि आज श्रवण नक्षत्र में शपथ ग्रहण हुआ है जो राज्याभिषेक का सबसे मुख्य नक्षत्र है। विजयादशमी को दशमी तिथि का श्रवण नक्षत्र से संयोग जब होता है उसी को विजय मुहूर्त्त कहा जाता है और उसी कारण विजयादशमी का इतना महत्त्व है। यह राज्याभिषेक, युद्ध, विजय के लिए सबसे शुभ नक्षत्र इसलिए ही होता है। यह नक्षत्र स्वयं भगवान विष्णु का है, वे इसके देवता हैं, इसलिए यह पालक है, जनता का, बंगाल का सरकार बहुत ही प्यारे तरीके से पालन करेगी, मरहम लगाएगी, घाव भरेगी, दवा देगी, सुरक्षा करेगी। यह बंगाल के लिए बहुत शुभ हो गया। इस नक्षत्र का महत्त्व इतना है कि इसमें थोड़े से काम का भी बड़ा भारी शुभ परिणाम मिलता है। वामन भगवान का प्रादुर्भाव इसी नक्षत्र में हुआ था और उन्होंने 3 पग में ही 3 लोग नाप लिए थे। इसलिए आप मानकर चलिए कि बंगाल की भूमि का भी विस्तार अवश्य होगा, इस पर बहुत संजीदगी से काम होगा, व सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित कर दिया जाएगा। अभी चन्द्र का प्रभाव 47 दिन तक रहेगा, 25 जून से मङ्गल का प्रभाव शुरू होगा जो 6 अक्टूबर 2026 तक रहेगा, इस बीच आक्रामकता से अपराधियों पर कार्यवाही की जाएगी। इसके बाद 29 जून 2027 तक कुछ रहस्यमयी व घातक घटनाएं घटने की संभावना है, जिनका असर दीर्घकालिक होगा। @MuditUpdates #SuvenduAdhikari #ShubhenduAdhikari #शुभेंदु
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शुभेन्दु अधिकारी के शपथग्रहण की कुंडली का विश्लेषण पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने 9 मई 2026 को कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में प्रातः 11:31 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। शपथग्रहण के समय की कुंडली कर्क लग्न की है। ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी को श्रवण नक्षत्र शुक्ल योग में शुभ मुहूर्त है। कर्क लग्न की इस कुंडली में लग्न में लग्नेश चन्द्रमा सप्तम भाव में हैं और पूर्ण व अतिमित्र दृष्टि से लग्न को देख रहे हैं, जिससे लग्न बहुत बलवान हो गया है और लग्न की पूर्ण रक्षा यानि सरकार की पूर्ण रक्षा व बल में बहुत वृद्धि हो गई है। धनेश सूर्य दशम भाव में उच्च के हैं व तृतीयेश व व्ययेश बुध सूर्य में अस्त होकर दशम में ही हैं। इसलिए सूर्य ने 2,3,12 भावों को नियन्त्रण में ले लिया है। सुखेश व आयेश शुक्र आय भाव में स्वगृही हैं। इसलिए बंगाल को बहुत सुख समृद्धि मिलने वाली है। धनेश आयेश दोनों का उच्च व स्वगृही होना राज्य के धनलाभ, आय वृद्धि की दृष्टि से बहुत शुभ हो गया है। बंगाल को केन्द्र से भी बड़ा बजट, योजनाएं और उद्योगों की भरमार मिलने वाली है। बंगाल को चारों तरफ से फायदा ही फायदा होगा। पूरा विश्लेषण यूट्यूब पर यहाँ देखें youtu.be/PnHFMJOACYM पंचमेश व दशमेश राजयोगकारक मंगल नवम भाव में सप्तमेश व अष्टमेश शनि के साथ हैं। केन्द्रेश त्रिकोणेश का यह मिलन अच्छा है। पर दोनों विरोधी ग्रह होने से धर्मक्षेत्र में भयानक घमासान होने वाला है। मंगल का बल शनि से ज्यादा है, इसलिए पुलिस कार्यवाही, एनकाउंटर की भरमार देखने को मिलेगी। शनि के न्यायालय मार्ग की बजाय सरकार अपने राजदण्ड का प्रयोग करके योगीजी की तरह पूरे बंगाल में अपराध का कठोरता से सफाया करेगी और उनपर नियंत्रण स्थापित करेगी। शिक्षा के क्षेत्र में भी बंगाल में प्रगति होगी, विश्वविद्यालयों की स्थिति सुधारी जाएगी और बंगाल की यूनिवर्सिटीज देश में अच्छा नाम कमाएंगी। बंगाल से विभिन्न विषयों में बहुत अच्छा साहित्य निकलकर आएगा। बंगाल की खोई हुई साहित्य विरासत को वापिस उभारने और जीवित करने में बंगाल सरकार काम करेगी। षष्ठेश व धर्मेश गुरु द्वादश में हैं, और पूर्ण मित्रदृष्टि से षष्ठ भाव को देख रहे हैं, इसलिए शत्रुओं का धर्म द्वारा अच्छे से निग्रह हो जाएगा। धर्म के शत्रु धर्म की नजर से बच नहीं पा रहे हैं। सरकार की तरफ से बहुत बड़ी कार्यवाही हिन्दू विरोधियों को, अपराधी, गुंडों को झेलनी पड़ेगी, अपराधियों के लिए छिपना नामुमकिन हो जाएगा। इस चक्कर में अनेक हिंसक घटनाएं, हत्याएं देखने को मिल सकती हैं, क्योंकि अपराधी बुझने से पहले फड़फड़ाने की कोशिश करेंगे। दंगों के भी षड्यन्त्र होंगे पर हिन्दुत्व को दबा नहीं पाएंगे। अष्टमेश राहु अष्टम में ही स्वगृही हैं। दशमांश में लग्नेश मंगल अष्टम में स्वगृही है, इसलिए सरकार में गुस्सा ज्यादा होगा, अपराध सहने का कहीं कोई प्रश्न नहीं उठता। साथ में ही षष्ठेश भी मृत्यु भाव में पड़ गया है बुध। तो आप देख सकते हैं लग्नेश यानी स्वयं सरकार और शत्रु दोनों मृत्यु भाव में बैठ गए हैं युद्ध करने, यहां आर पार का युद्ध दोनों शत्रुओं में हो रहा है। पर खेल क्या हो गया? ये मृत्यु का घर लग्नेश का सरकार का खुद का ही है। तो शत्रु अपने शत्रु के घर में ही फंस गया। जैसे कोई सियार शेर की मांद में घुसा हो युद्ध करने तो जीत किसकी होगी ? तो मृत्युस्थान में स्वगृही लग्नेश कभी खुदकी हानि नहीं करता है बल्कि रक्षा करता है और वहां शत्रु मृत्यु के मुंह में पड़ा है। पर इसमें भी देखो मंगल बुध दोनों ही सूर्य में अस्त हैं। कालचक्र में मेष लग्न की कुंडली में सूर्य पंचमेश हैं, जो बुद्धि के कारक हैं, तो सूर्य मंगल बुध के नियंत्रण होकर 1,3,5,6,8 इन 5 भावों के नियंत्रक हो गए हैं, और स्वयं धर्म भाव में बैठे हैं चन्द्र केतु के साथ, चन्द्र भी सुखेश है, तो यहां त्रिकोणेश केन्द्रेश युति करके सूर्य चन्द्र भी राजयोग बना रहे हैं, साथ में धर्म की ध्वज केतु बैठे हैं। तो यह मंगल के लिए शुभ है अपने मित्र शुभ ग्रह सूर्य में अस्त होना, पर अशुभ, मेष लग्न में पापी बुध का शुभ सूर्य में अस्त होना, यह पाप की पराजय है। तो शत्रुओं का तो नाश निश्चित है। ध्यान देने वाली बात है कि आज श्रवण नक्षत्र में शपथ ग्रहण हुआ है जो राज्याभिषेक का सबसे मुख्य नक्षत्र है। विजयादशमी को दशमी तिथि का श्रवण नक्षत्र से संयोग जब होता है उसी को विजय मुहूर्त्त कहा जाता है और उसी कारण विजयादशमी का इतना महत्त्व है। यह राज्याभिषेक, युद्ध, विजय के लिए सबसे शुभ नक्षत्र इसलिए ही होता है। यह नक्षत्र स्वयं भगवान विष्णु का है, वे इसके देवता हैं, इसलिए यह पालक है, जनता का, बंगाल का सरकार बहुत ही प्यारे तरीके से पालन करेगी, मरहम लगाएगी, घाव भरेगी, दवा देगी, सुरक्षा करेगी। यह बंगाल के लिए बहुत शुभ हो गया। इस नक्षत्र का महत्त्व इतना है कि इसमें थोड़े से काम का भी बड़ा भारी शुभ परिणाम मिलता है। वामन भगवान का प्रादुर्भाव इसी नक्षत्र में हुआ था और उन्होंने 3 पग में ही 3 लोग नाप लिए थे। इसलिए आप मानकर चलिए कि बंगाल की भूमि का भी विस्तार अवश्य होगा, इस पर बहुत संजीदगी से काम होगा, व सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित कर दिया जाएगा। अभी चन्द्र का प्रभाव 47 दिन तक रहेगा, 25 जून से मङ्गल का प्रभाव शुरू होगा जो 6 अक्टूबर 2026 तक रहेगा, इस बीच आक्रामकता से अपराधियों पर कार्यवाही की जाएगी। इसके बाद 29 जून 2027 तक कुछ रहस्यमयी व घातक घटनाएं घटने की संभावना है, जिनका असर दीर्घकालिक होगा। @MuditUpdates #SuvenduAdhikari #ShubhenduAdhikari #शुभेंदु

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Shraavan nakshatra being chosen for an oath ceremony is very auspicious because it's the nakshtra of Shri Hari Vishnu. He sustains the world hence any karya commenced on this nakshatra reaches its goal and also restores what has been broken. Moon in Capricorn brings stability. Financial prosperity is coming to Bengal.
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शुभेन्दु अधिकारी के शपथग्रहण की कुंडली का विश्लेषण पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने 9 मई 2026 को कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में प्रातः 11:31 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। शपथग्रहण के समय की कुंडली कर्क लग्न की है। ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी को श्रवण नक्षत्र शुक्ल योग में शुभ मुहूर्त है। कर्क लग्न की इस कुंडली में लग्न में लग्नेश चन्द्रमा सप्तम भाव में हैं और पूर्ण व अतिमित्र दृष्टि से लग्न को देख रहे हैं, जिससे लग्न बहुत बलवान हो गया है और लग्न की पूर्ण रक्षा यानि सरकार की पूर्ण रक्षा व बल में बहुत वृद्धि हो गई है। धनेश सूर्य दशम भाव में उच्च के हैं व तृतीयेश व व्ययेश बुध सूर्य में अस्त होकर दशम में ही हैं। इसलिए सूर्य ने 2,3,12 भावों को नियन्त्रण में ले लिया है। सुखेश व आयेश शुक्र आय भाव में स्वगृही हैं। इसलिए बंगाल को बहुत सुख समृद्धि मिलने वाली है। धनेश आयेश दोनों का उच्च व स्वगृही होना राज्य के धनलाभ, आय वृद्धि की दृष्टि से बहुत शुभ हो गया है। बंगाल को केन्द्र से भी बड़ा बजट, योजनाएं और उद्योगों की भरमार मिलने वाली है। बंगाल को चारों तरफ से फायदा ही फायदा होगा। पूरा विश्लेषण यूट्यूब पर यहाँ देखें youtu.be/PnHFMJOACYM पंचमेश व दशमेश राजयोगकारक मंगल नवम भाव में सप्तमेश व अष्टमेश शनि के साथ हैं। केन्द्रेश त्रिकोणेश का यह मिलन अच्छा है। पर दोनों विरोधी ग्रह होने से धर्मक्षेत्र में भयानक घमासान होने वाला है। मंगल का बल शनि से ज्यादा है, इसलिए पुलिस कार्यवाही, एनकाउंटर की भरमार देखने को मिलेगी। शनि के न्यायालय मार्ग की बजाय सरकार अपने राजदण्ड का प्रयोग करके योगीजी की तरह पूरे बंगाल में अपराध का कठोरता से सफाया करेगी और उनपर नियंत्रण स्थापित करेगी। शिक्षा के क्षेत्र में भी बंगाल में प्रगति होगी, विश्वविद्यालयों की स्थिति सुधारी जाएगी और बंगाल की यूनिवर्सिटीज देश में अच्छा नाम कमाएंगी। बंगाल से विभिन्न विषयों में बहुत अच्छा साहित्य निकलकर आएगा। बंगाल की खोई हुई साहित्य विरासत को वापिस उभारने और जीवित करने में बंगाल सरकार काम करेगी। षष्ठेश व धर्मेश गुरु द्वादश में हैं, और पूर्ण मित्रदृष्टि से षष्ठ भाव को देख रहे हैं, इसलिए शत्रुओं का धर्म द्वारा अच्छे से निग्रह हो जाएगा। धर्म के शत्रु धर्म की नजर से बच नहीं पा रहे हैं। सरकार की तरफ से बहुत बड़ी कार्यवाही हिन्दू विरोधियों को, अपराधी, गुंडों को झेलनी पड़ेगी, अपराधियों के लिए छिपना नामुमकिन हो जाएगा। इस चक्कर में अनेक हिंसक घटनाएं, हत्याएं देखने को मिल सकती हैं, क्योंकि अपराधी बुझने से पहले फड़फड़ाने की कोशिश करेंगे। दंगों के भी षड्यन्त्र होंगे पर हिन्दुत्व को दबा नहीं पाएंगे। अष्टमेश राहु अष्टम में ही स्वगृही हैं। दशमांश में लग्नेश मंगल अष्टम में स्वगृही है, इसलिए सरकार में गुस्सा ज्यादा होगा, अपराध सहने का कहीं कोई प्रश्न नहीं उठता। साथ में ही षष्ठेश भी मृत्यु भाव में पड़ गया है बुध। तो आप देख सकते हैं लग्नेश यानी स्वयं सरकार और शत्रु दोनों मृत्यु भाव में बैठ गए हैं युद्ध करने, यहां आर पार का युद्ध दोनों शत्रुओं में हो रहा है। पर खेल क्या हो गया? ये मृत्यु का घर लग्नेश का सरकार का खुद का ही है। तो शत्रु अपने शत्रु के घर में ही फंस गया। जैसे कोई सियार शेर की मांद में घुसा हो युद्ध करने तो जीत किसकी होगी ? तो मृत्युस्थान में स्वगृही लग्नेश कभी खुदकी हानि नहीं करता है बल्कि रक्षा करता है और वहां शत्रु मृत्यु के मुंह में पड़ा है। पर इसमें भी देखो मंगल बुध दोनों ही सूर्य में अस्त हैं। कालचक्र में मेष लग्न की कुंडली में सूर्य पंचमेश हैं, जो बुद्धि के कारक हैं, तो सूर्य मंगल बुध के नियंत्रण होकर 1,3,5,6,8 इन 5 भावों के नियंत्रक हो गए हैं, और स्वयं धर्म भाव में बैठे हैं चन्द्र केतु के साथ, चन्द्र भी सुखेश है, तो यहां त्रिकोणेश केन्द्रेश युति करके सूर्य चन्द्र भी राजयोग बना रहे हैं, साथ में धर्म की ध्वज केतु बैठे हैं। तो यह मंगल के लिए शुभ है अपने मित्र शुभ ग्रह सूर्य में अस्त होना, पर अशुभ, मेष लग्न में पापी बुध का शुभ सूर्य में अस्त होना, यह पाप की पराजय है। तो शत्रुओं का तो नाश निश्चित है। ध्यान देने वाली बात है कि आज श्रवण नक्षत्र में शपथ ग्रहण हुआ है जो राज्याभिषेक का सबसे मुख्य नक्षत्र है। विजयादशमी को दशमी तिथि का श्रवण नक्षत्र से संयोग जब होता है उसी को विजय मुहूर्त्त कहा जाता है और उसी कारण विजयादशमी का इतना महत्त्व है। यह राज्याभिषेक, युद्ध, विजय के लिए सबसे शुभ नक्षत्र इसलिए ही होता है। यह नक्षत्र स्वयं भगवान विष्णु का है, वे इसके देवता हैं, इसलिए यह पालक है, जनता का, बंगाल का सरकार बहुत ही प्यारे तरीके से पालन करेगी, मरहम लगाएगी, घाव भरेगी, दवा देगी, सुरक्षा करेगी। यह बंगाल के लिए बहुत शुभ हो गया। इस नक्षत्र का महत्त्व इतना है कि इसमें थोड़े से काम का भी बड़ा भारी शुभ परिणाम मिलता है। वामन भगवान का प्रादुर्भाव इसी नक्षत्र में हुआ था और उन्होंने 3 पग में ही 3 लोग नाप लिए थे। इसलिए आप मानकर चलिए कि बंगाल की भूमि का भी विस्तार अवश्य होगा, इस पर बहुत संजीदगी से काम होगा, व सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित कर दिया जाएगा। अभी चन्द्र का प्रभाव 47 दिन तक रहेगा, 25 जून से मङ्गल का प्रभाव शुरू होगा जो 6 अक्टूबर 2026 तक रहेगा, इस बीच आक्रामकता से अपराधियों पर कार्यवाही की जाएगी। इसके बाद 29 जून 2027 तक कुछ रहस्यमयी व घातक घटनाएं घटने की संभावना है, जिनका असर दीर्घकालिक होगा। @MuditUpdates #SuvenduAdhikari #ShubhenduAdhikari #शुभेंदु

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𝐏𝐚𝐧𝐤𝐚𝐣 𝐊𝐚𝐬𝐡𝐲𝐚𝐩
𝐎𝐚𝐭𝐡-𝐭𝐚𝐤𝐢𝐧𝐠 𝐭𝐢𝐦𝐞 𝐨𝐟 𝐭𝐡𝐞 𝐂𝐡𝐢𝐞𝐟 𝐌𝐢𝐧𝐢𝐬𝐭𝐞𝐫 𝐒𝐫𝐢 𝐒𝐮𝐯𝐞𝐧𝐝𝐮 𝐀𝐝𝐡𝐢𝐤𝐚𝐫𝐢 𝐰𝐚𝐬 𝟏𝟏:𝟑𝟐 𝐀𝐌 𝐈𝐒𝐓. Karka Lagna in D1, with Kumbha Lagna in D9 and Vrishchik Lagna in D10. Water signs are excellent for governance and public service. ☑️ 👉 All the fast-moving planets are placed in Kendras, indicating that the government will be ready to bring changes whenever needed for betterment rather than functioning rigidly. 👉 In Dashamsha, Venus and Saturn are debilitated, which indicates slow progress, but durable and long-lasting progress. 👉 The 4th and 11th lord Venus being debilitated in D10 suggests that the opposition may struggle to show real strength, but restoring internal security and civic peace will not be easy at all. 👉 The 7th and 8th lord Saturn is also debilitated in D10, indicating that foreign relations, diplomacy, treaties, and strategic alliances may not remain smooth for the state. Legal and administrative resolutions will continue throughout the tenure. 👉 The Sun is placed in the 10th house with Digbala and is exalted there. The way Bengal has been perceived so far as a poor and broken state will gradually change, and Bengal is likely to gain respect over the coming five years. 👉 The 2nd and 3rd lords placed together in the 10th house indicate that this newly formed cabinet in Bengal will work their heart out. 👉 Shravana Nakshatra makes the government durable and capable of completing its full tenure. 👉 The period of 2027–28 is going to be highly challenging for Bengal. 👉 Until Rahu exits Shatabhisha Nakshatra in August 2026, violence and unrest will have to be managed very strictly. This government may send notorious goons to Patal Lok, just as the deity of Shravana Nakshatra, Vamana Avatar, sent Bali Maharaj to Patal Lok. Jai Jai Shree Ram. 🚩 #westbengal #kolkata #Jyotish
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शुभेन्दु अधिकारी के शपथग्रहण की कुंडली का विश्लेषण पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने 9 मई 2026 को कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में प्रातः 11:31 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। शपथग्रहण के समय की कुंडली कर्क लग्न की है। ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी को श्रवण नक्षत्र शुक्ल योग में शुभ मुहूर्त है। कर्क लग्न की इस कुंडली में लग्न में लग्नेश चन्द्रमा सप्तम भाव में हैं और पूर्ण व अतिमित्र दृष्टि से लग्न को देख रहे हैं, जिससे लग्न बहुत बलवान हो गया है और लग्न की पूर्ण रक्षा यानि सरकार की पूर्ण रक्षा व बल में बहुत वृद्धि हो गई है। धनेश सूर्य दशम भाव में उच्च के हैं व तृतीयेश व व्ययेश बुध सूर्य में अस्त होकर दशम में ही हैं। इसलिए सूर्य ने 2,3,12 भावों को नियन्त्रण में ले लिया है। सुखेश व आयेश शुक्र आय भाव में स्वगृही हैं। इसलिए बंगाल को बहुत सुख समृद्धि मिलने वाली है। धनेश आयेश दोनों का उच्च व स्वगृही होना राज्य के धनलाभ, आय वृद्धि की दृष्टि से बहुत शुभ हो गया है। बंगाल को केन्द्र से भी बड़ा बजट, योजनाएं और उद्योगों की भरमार मिलने वाली है। बंगाल को चारों तरफ से फायदा ही फायदा होगा। पूरा विश्लेषण यूट्यूब पर यहाँ देखें youtu.be/PnHFMJOACYM पंचमेश व दशमेश राजयोगकारक मंगल नवम भाव में सप्तमेश व अष्टमेश शनि के साथ हैं। केन्द्रेश त्रिकोणेश का यह मिलन अच्छा है। पर दोनों विरोधी ग्रह होने से धर्मक्षेत्र में भयानक घमासान होने वाला है। मंगल का बल शनि से ज्यादा है, इसलिए पुलिस कार्यवाही, एनकाउंटर की भरमार देखने को मिलेगी। शनि के न्यायालय मार्ग की बजाय सरकार अपने राजदण्ड का प्रयोग करके योगीजी की तरह पूरे बंगाल में अपराध का कठोरता से सफाया करेगी और उनपर नियंत्रण स्थापित करेगी। शिक्षा के क्षेत्र में भी बंगाल में प्रगति होगी, विश्वविद्यालयों की स्थिति सुधारी जाएगी और बंगाल की यूनिवर्सिटीज देश में अच्छा नाम कमाएंगी। बंगाल से विभिन्न विषयों में बहुत अच्छा साहित्य निकलकर आएगा। बंगाल की खोई हुई साहित्य विरासत को वापिस उभारने और जीवित करने में बंगाल सरकार काम करेगी। षष्ठेश व धर्मेश गुरु द्वादश में हैं, और पूर्ण मित्रदृष्टि से षष्ठ भाव को देख रहे हैं, इसलिए शत्रुओं का धर्म द्वारा अच्छे से निग्रह हो जाएगा। धर्म के शत्रु धर्म की नजर से बच नहीं पा रहे हैं। सरकार की तरफ से बहुत बड़ी कार्यवाही हिन्दू विरोधियों को, अपराधी, गुंडों को झेलनी पड़ेगी, अपराधियों के लिए छिपना नामुमकिन हो जाएगा। इस चक्कर में अनेक हिंसक घटनाएं, हत्याएं देखने को मिल सकती हैं, क्योंकि अपराधी बुझने से पहले फड़फड़ाने की कोशिश करेंगे। दंगों के भी षड्यन्त्र होंगे पर हिन्दुत्व को दबा नहीं पाएंगे। अष्टमेश राहु अष्टम में ही स्वगृही हैं। दशमांश में लग्नेश मंगल अष्टम में स्वगृही है, इसलिए सरकार में गुस्सा ज्यादा होगा, अपराध सहने का कहीं कोई प्रश्न नहीं उठता। साथ में ही षष्ठेश भी मृत्यु भाव में पड़ गया है बुध। तो आप देख सकते हैं लग्नेश यानी स्वयं सरकार और शत्रु दोनों मृत्यु भाव में बैठ गए हैं युद्ध करने, यहां आर पार का युद्ध दोनों शत्रुओं में हो रहा है। पर खेल क्या हो गया? ये मृत्यु का घर लग्नेश का सरकार का खुद का ही है। तो शत्रु अपने शत्रु के घर में ही फंस गया। जैसे कोई सियार शेर की मांद में घुसा हो युद्ध करने तो जीत किसकी होगी ? तो मृत्युस्थान में स्वगृही लग्नेश कभी खुदकी हानि नहीं करता है बल्कि रक्षा करता है और वहां शत्रु मृत्यु के मुंह में पड़ा है। पर इसमें भी देखो मंगल बुध दोनों ही सूर्य में अस्त हैं। कालचक्र में मेष लग्न की कुंडली में सूर्य पंचमेश हैं, जो बुद्धि के कारक हैं, तो सूर्य मंगल बुध के नियंत्रण होकर 1,3,5,6,8 इन 5 भावों के नियंत्रक हो गए हैं, और स्वयं धर्म भाव में बैठे हैं चन्द्र केतु के साथ, चन्द्र भी सुखेश है, तो यहां त्रिकोणेश केन्द्रेश युति करके सूर्य चन्द्र भी राजयोग बना रहे हैं, साथ में धर्म की ध्वज केतु बैठे हैं। तो यह मंगल के लिए शुभ है अपने मित्र शुभ ग्रह सूर्य में अस्त होना, पर अशुभ, मेष लग्न में पापी बुध का शुभ सूर्य में अस्त होना, यह पाप की पराजय है। तो शत्रुओं का तो नाश निश्चित है। ध्यान देने वाली बात है कि आज श्रवण नक्षत्र में शपथ ग्रहण हुआ है जो राज्याभिषेक का सबसे मुख्य नक्षत्र है। विजयादशमी को दशमी तिथि का श्रवण नक्षत्र से संयोग जब होता है उसी को विजय मुहूर्त्त कहा जाता है और उसी कारण विजयादशमी का इतना महत्त्व है। यह राज्याभिषेक, युद्ध, विजय के लिए सबसे शुभ नक्षत्र इसलिए ही होता है। यह नक्षत्र स्वयं भगवान विष्णु का है, वे इसके देवता हैं, इसलिए यह पालक है, जनता का, बंगाल का सरकार बहुत ही प्यारे तरीके से पालन करेगी, मरहम लगाएगी, घाव भरेगी, दवा देगी, सुरक्षा करेगी। यह बंगाल के लिए बहुत शुभ हो गया। इस नक्षत्र का महत्त्व इतना है कि इसमें थोड़े से काम का भी बड़ा भारी शुभ परिणाम मिलता है। वामन भगवान का प्रादुर्भाव इसी नक्षत्र में हुआ था और उन्होंने 3 पग में ही 3 लोग नाप लिए थे। इसलिए आप मानकर चलिए कि बंगाल की भूमि का भी विस्तार अवश्य होगा, इस पर बहुत संजीदगी से काम होगा, व सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित कर दिया जाएगा। अभी चन्द्र का प्रभाव 47 दिन तक रहेगा, 25 जून से मङ्गल का प्रभाव शुरू होगा जो 6 अक्टूबर 2026 तक रहेगा, इस बीच आक्रामकता से अपराधियों पर कार्यवाही की जाएगी। इसके बाद 29 जून 2027 तक कुछ रहस्यमयी व घातक घटनाएं घटने की संभावना है, जिनका असर दीर्घकालिक होगा। @MuditUpdates #SuvenduAdhikari #ShubhenduAdhikari #शुभेंदु

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A mercurial government in WB. Conflict, strife, and a constant state of agitation. They could have chosen better. But this is what we got. Fixed Lagna Navamsha is the only saving grace.
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शुभेन्दु अधिकारी के शपथग्रहण की कुंडली का विश्लेषण पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने 9 मई 2026 को कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में प्रातः 11:31 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। शपथग्रहण के समय की कुंडली कर्क लग्न की है। ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी को श्रवण नक्षत्र शुक्ल योग में शुभ मुहूर्त है। कर्क लग्न की इस कुंडली में लग्न में लग्नेश चन्द्रमा सप्तम भाव में हैं और पूर्ण व अतिमित्र दृष्टि से लग्न को देख रहे हैं, जिससे लग्न बहुत बलवान हो गया है और लग्न की पूर्ण रक्षा यानि सरकार की पूर्ण रक्षा व बल में बहुत वृद्धि हो गई है। धनेश सूर्य दशम भाव में उच्च के हैं व तृतीयेश व व्ययेश बुध सूर्य में अस्त होकर दशम में ही हैं। इसलिए सूर्य ने 2,3,12 भावों को नियन्त्रण में ले लिया है। सुखेश व आयेश शुक्र आय भाव में स्वगृही हैं। इसलिए बंगाल को बहुत सुख समृद्धि मिलने वाली है। धनेश आयेश दोनों का उच्च व स्वगृही होना राज्य के धनलाभ, आय वृद्धि की दृष्टि से बहुत शुभ हो गया है। बंगाल को केन्द्र से भी बड़ा बजट, योजनाएं और उद्योगों की भरमार मिलने वाली है। बंगाल को चारों तरफ से फायदा ही फायदा होगा। पूरा विश्लेषण यूट्यूब पर यहाँ देखें youtu.be/PnHFMJOACYM पंचमेश व दशमेश राजयोगकारक मंगल नवम भाव में सप्तमेश व अष्टमेश शनि के साथ हैं। केन्द्रेश त्रिकोणेश का यह मिलन अच्छा है। पर दोनों विरोधी ग्रह होने से धर्मक्षेत्र में भयानक घमासान होने वाला है। मंगल का बल शनि से ज्यादा है, इसलिए पुलिस कार्यवाही, एनकाउंटर की भरमार देखने को मिलेगी। शनि के न्यायालय मार्ग की बजाय सरकार अपने राजदण्ड का प्रयोग करके योगीजी की तरह पूरे बंगाल में अपराध का कठोरता से सफाया करेगी और उनपर नियंत्रण स्थापित करेगी। शिक्षा के क्षेत्र में भी बंगाल में प्रगति होगी, विश्वविद्यालयों की स्थिति सुधारी जाएगी और बंगाल की यूनिवर्सिटीज देश में अच्छा नाम कमाएंगी। बंगाल से विभिन्न विषयों में बहुत अच्छा साहित्य निकलकर आएगा। बंगाल की खोई हुई साहित्य विरासत को वापिस उभारने और जीवित करने में बंगाल सरकार काम करेगी। षष्ठेश व धर्मेश गुरु द्वादश में हैं, और पूर्ण मित्रदृष्टि से षष्ठ भाव को देख रहे हैं, इसलिए शत्रुओं का धर्म द्वारा अच्छे से निग्रह हो जाएगा। धर्म के शत्रु धर्म की नजर से बच नहीं पा रहे हैं। सरकार की तरफ से बहुत बड़ी कार्यवाही हिन्दू विरोधियों को, अपराधी, गुंडों को झेलनी पड़ेगी, अपराधियों के लिए छिपना नामुमकिन हो जाएगा। इस चक्कर में अनेक हिंसक घटनाएं, हत्याएं देखने को मिल सकती हैं, क्योंकि अपराधी बुझने से पहले फड़फड़ाने की कोशिश करेंगे। दंगों के भी षड्यन्त्र होंगे पर हिन्दुत्व को दबा नहीं पाएंगे। अष्टमेश राहु अष्टम में ही स्वगृही हैं। दशमांश में लग्नेश मंगल अष्टम में स्वगृही है, इसलिए सरकार में गुस्सा ज्यादा होगा, अपराध सहने का कहीं कोई प्रश्न नहीं उठता। साथ में ही षष्ठेश भी मृत्यु भाव में पड़ गया है बुध। तो आप देख सकते हैं लग्नेश यानी स्वयं सरकार और शत्रु दोनों मृत्यु भाव में बैठ गए हैं युद्ध करने, यहां आर पार का युद्ध दोनों शत्रुओं में हो रहा है। पर खेल क्या हो गया? ये मृत्यु का घर लग्नेश का सरकार का खुद का ही है। तो शत्रु अपने शत्रु के घर में ही फंस गया। जैसे कोई सियार शेर की मांद में घुसा हो युद्ध करने तो जीत किसकी होगी ? तो मृत्युस्थान में स्वगृही लग्नेश कभी खुदकी हानि नहीं करता है बल्कि रक्षा करता है और वहां शत्रु मृत्यु के मुंह में पड़ा है। पर इसमें भी देखो मंगल बुध दोनों ही सूर्य में अस्त हैं। कालचक्र में मेष लग्न की कुंडली में सूर्य पंचमेश हैं, जो बुद्धि के कारक हैं, तो सूर्य मंगल बुध के नियंत्रण होकर 1,3,5,6,8 इन 5 भावों के नियंत्रक हो गए हैं, और स्वयं धर्म भाव में बैठे हैं चन्द्र केतु के साथ, चन्द्र भी सुखेश है, तो यहां त्रिकोणेश केन्द्रेश युति करके सूर्य चन्द्र भी राजयोग बना रहे हैं, साथ में धर्म की ध्वज केतु बैठे हैं। तो यह मंगल के लिए शुभ है अपने मित्र शुभ ग्रह सूर्य में अस्त होना, पर अशुभ, मेष लग्न में पापी बुध का शुभ सूर्य में अस्त होना, यह पाप की पराजय है। तो शत्रुओं का तो नाश निश्चित है। ध्यान देने वाली बात है कि आज श्रवण नक्षत्र में शपथ ग्रहण हुआ है जो राज्याभिषेक का सबसे मुख्य नक्षत्र है। विजयादशमी को दशमी तिथि का श्रवण नक्षत्र से संयोग जब होता है उसी को विजय मुहूर्त्त कहा जाता है और उसी कारण विजयादशमी का इतना महत्त्व है। यह राज्याभिषेक, युद्ध, विजय के लिए सबसे शुभ नक्षत्र इसलिए ही होता है। यह नक्षत्र स्वयं भगवान विष्णु का है, वे इसके देवता हैं, इसलिए यह पालक है, जनता का, बंगाल का सरकार बहुत ही प्यारे तरीके से पालन करेगी, मरहम लगाएगी, घाव भरेगी, दवा देगी, सुरक्षा करेगी। यह बंगाल के लिए बहुत शुभ हो गया। इस नक्षत्र का महत्त्व इतना है कि इसमें थोड़े से काम का भी बड़ा भारी शुभ परिणाम मिलता है। वामन भगवान का प्रादुर्भाव इसी नक्षत्र में हुआ था और उन्होंने 3 पग में ही 3 लोग नाप लिए थे। इसलिए आप मानकर चलिए कि बंगाल की भूमि का भी विस्तार अवश्य होगा, इस पर बहुत संजीदगी से काम होगा, व सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित कर दिया जाएगा। अभी चन्द्र का प्रभाव 47 दिन तक रहेगा, 25 जून से मङ्गल का प्रभाव शुरू होगा जो 6 अक्टूबर 2026 तक रहेगा, इस बीच आक्रामकता से अपराधियों पर कार्यवाही की जाएगी। इसके बाद 29 जून 2027 तक कुछ रहस्यमयी व घातक घटनाएं घटने की संभावना है, जिनका असर दीर्घकालिक होगा। @MuditUpdates #SuvenduAdhikari #ShubhenduAdhikari #शुभेंदु

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शुभेन्दु अधिकारी के शपथग्रहण की कुंडली का विश्लेषण पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने 9 मई 2026 को कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में प्रातः 11:31 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। शपथग्रहण के समय की कुंडली कर्क लग्न की है। ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी को श्रवण नक्षत्र शुक्ल योग में शुभ मुहूर्त है। कर्क लग्न की इस कुंडली में लग्न में लग्नेश चन्द्रमा सप्तम भाव में हैं और पूर्ण व अतिमित्र दृष्टि से लग्न को देख रहे हैं, जिससे लग्न बहुत बलवान हो गया है और लग्न की पूर्ण रक्षा यानि सरकार की पूर्ण रक्षा व बल में बहुत वृद्धि हो गई है। धनेश सूर्य दशम भाव में उच्च के हैं व तृतीयेश व व्ययेश बुध सूर्य में अस्त होकर दशम में ही हैं। इसलिए सूर्य ने 2,3,12 भावों को नियन्त्रण में ले लिया है। सुखेश व आयेश शुक्र आय भाव में स्वगृही हैं। इसलिए बंगाल को बहुत सुख समृद्धि मिलने वाली है। धनेश आयेश दोनों का उच्च व स्वगृही होना राज्य के धनलाभ, आय वृद्धि की दृष्टि से बहुत शुभ हो गया है। बंगाल को केन्द्र से भी बड़ा बजट, योजनाएं और उद्योगों की भरमार मिलने वाली है। बंगाल को चारों तरफ से फायदा ही फायदा होगा। पूरा विश्लेषण यूट्यूब पर यहाँ देखें youtu.be/PnHFMJOACYM पंचमेश व दशमेश राजयोगकारक मंगल नवम भाव में सप्तमेश व अष्टमेश शनि के साथ हैं। केन्द्रेश त्रिकोणेश का यह मिलन अच्छा है। पर दोनों विरोधी ग्रह होने से धर्मक्षेत्र में भयानक घमासान होने वाला है। मंगल का बल शनि से ज्यादा है, इसलिए पुलिस कार्यवाही, एनकाउंटर की भरमार देखने को मिलेगी। शनि के न्यायालय मार्ग की बजाय सरकार अपने राजदण्ड का प्रयोग करके योगीजी की तरह पूरे बंगाल में अपराध का कठोरता से सफाया करेगी और उनपर नियंत्रण स्थापित करेगी। शिक्षा के क्षेत्र में भी बंगाल में प्रगति होगी, विश्वविद्यालयों की स्थिति सुधारी जाएगी और बंगाल की यूनिवर्सिटीज देश में अच्छा नाम कमाएंगी। बंगाल से विभिन्न विषयों में बहुत अच्छा साहित्य निकलकर आएगा। बंगाल की खोई हुई साहित्य विरासत को वापिस उभारने और जीवित करने में बंगाल सरकार काम करेगी। षष्ठेश व धर्मेश गुरु द्वादश में हैं, और पूर्ण मित्रदृष्टि से षष्ठ भाव को देख रहे हैं, इसलिए शत्रुओं का धर्म द्वारा अच्छे से निग्रह हो जाएगा। धर्म के शत्रु धर्म की नजर से बच नहीं पा रहे हैं। सरकार की तरफ से बहुत बड़ी कार्यवाही हिन्दू विरोधियों को, अपराधी, गुंडों को झेलनी पड़ेगी, अपराधियों के लिए छिपना नामुमकिन हो जाएगा। इस चक्कर में अनेक हिंसक घटनाएं, हत्याएं देखने को मिल सकती हैं, क्योंकि अपराधी बुझने से पहले फड़फड़ाने की कोशिश करेंगे। दंगों के भी षड्यन्त्र होंगे पर हिन्दुत्व को दबा नहीं पाएंगे। अष्टमेश राहु अष्टम में ही स्वगृही हैं। दशमांश में लग्नेश मंगल अष्टम में स्वगृही है, इसलिए सरकार में गुस्सा ज्यादा होगा, अपराध सहने का कहीं कोई प्रश्न नहीं उठता। साथ में ही षष्ठेश भी मृत्यु भाव में पड़ गया है बुध। तो आप देख सकते हैं लग्नेश यानी स्वयं सरकार और शत्रु दोनों मृत्यु भाव में बैठ गए हैं युद्ध करने, यहां आर पार का युद्ध दोनों शत्रुओं में हो रहा है। पर खेल क्या हो गया? ये मृत्यु का घर लग्नेश का सरकार का खुद का ही है। तो शत्रु अपने शत्रु के घर में ही फंस गया। जैसे कोई सियार शेर की मांद में घुसा हो युद्ध करने तो जीत किसकी होगी ? तो मृत्युस्थान में स्वगृही लग्नेश कभी खुदकी हानि नहीं करता है बल्कि रक्षा करता है और वहां शत्रु मृत्यु के मुंह में पड़ा है। पर इसमें भी देखो मंगल बुध दोनों ही सूर्य में अस्त हैं। कालचक्र में मेष लग्न की कुंडली में सूर्य पंचमेश हैं, जो बुद्धि के कारक हैं, तो सूर्य मंगल बुध के नियंत्रण होकर 1,3,5,6,8 इन 5 भावों के नियंत्रक हो गए हैं, और स्वयं धर्म भाव में बैठे हैं चन्द्र केतु के साथ, चन्द्र भी सुखेश है, तो यहां त्रिकोणेश केन्द्रेश युति करके सूर्य चन्द्र भी राजयोग बना रहे हैं, साथ में धर्म की ध्वज केतु बैठे हैं। तो यह मंगल के लिए शुभ है अपने मित्र शुभ ग्रह सूर्य में अस्त होना, पर अशुभ, मेष लग्न में पापी बुध का शुभ सूर्य में अस्त होना, यह पाप की पराजय है। तो शत्रुओं का तो नाश निश्चित है। ध्यान देने वाली बात है कि आज श्रवण नक्षत्र में शपथ ग्रहण हुआ है जो राज्याभिषेक का सबसे मुख्य नक्षत्र है। विजयादशमी को दशमी तिथि का श्रवण नक्षत्र से संयोग जब होता है उसी को विजय मुहूर्त्त कहा जाता है और उसी कारण विजयादशमी का इतना महत्त्व है। यह राज्याभिषेक, युद्ध, विजय के लिए सबसे शुभ नक्षत्र इसलिए ही होता है। यह नक्षत्र स्वयं भगवान विष्णु का है, वे इसके देवता हैं, इसलिए यह पालक है, जनता का, बंगाल का सरकार बहुत ही प्यारे तरीके से पालन करेगी, मरहम लगाएगी, घाव भरेगी, दवा देगी, सुरक्षा करेगी। यह बंगाल के लिए बहुत शुभ हो गया। इस नक्षत्र का महत्त्व इतना है कि इसमें थोड़े से काम का भी बड़ा भारी शुभ परिणाम मिलता है। वामन भगवान का प्रादुर्भाव इसी नक्षत्र में हुआ था और उन्होंने 3 पग में ही 3 लोग नाप लिए थे। इसलिए आप मानकर चलिए कि बंगाल की भूमि का भी विस्तार अवश्य होगा, इस पर बहुत संजीदगी से काम होगा, व सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित कर दिया जाएगा। अभी चन्द्र का प्रभाव 47 दिन तक रहेगा, 25 जून से मङ्गल का प्रभाव शुरू होगा जो 6 अक्टूबर 2026 तक रहेगा, इस बीच आक्रामकता से अपराधियों पर कार्यवाही की जाएगी। इसके बाद 29 जून 2027 तक कुछ रहस्यमयी व घातक घटनाएं घटने की संभावना है, जिनका असर दीर्घकालिक होगा। @MuditUpdates #SuvenduAdhikari #ShubhenduAdhikari #शुभेंदु

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𝐏𝐚𝐧𝐤𝐚𝐣 𝐊𝐚𝐬𝐡𝐲𝐚𝐩
𝗢𝗔𝗧𝗛 𝗧𝗔𝗞𝗜𝗡𝗚 𝗖𝗛𝗔𝗥𝗧 𝗢𝗙 𝗦𝗨𝗩𝗘𝗡𝗗𝗨 𝗔𝗗𝗛𝗜𝗞𝗔𝗥𝗜 𝗝𝗜 ☑️ 9th May 2026, 11:00 AM, Kolkata Lagna – Cancer (Karka) Rashi – Capricorn (Makar) Nakshatra – Shravana Tithi – Krishna Saptami Yoga – Shukla : Karana – Bava 👉 Lagna lord Moon in Shravana, which is a very firm nakshatra. Hence, the Government will remain firm and there is very little possibility of it being replaced. 👉 6 out of 9 planets are either in Chara Rashis or travel-related signs. This indicates that the party and the new cabinet of Bengal will be highly dynamic and task-oriented. 👉 Till October, violence and various challenges may continue, as Ketu crossing the Mrityu Sphuta degrees can create chaos and instability. 👉 6th and 7th lord Saturn is conjunct Mars in the Lagna chart, and in Dashamansha it is debilitated. This indicates that the ruling party should avoid adding too many outsiders over the next 5 years, as that may create imbalance and internal disturbances. 👉 Various planets in Shravana, Uttar Bhadrapada, Punarvasu, and Satabhisha indicate that from day one, the Government will focus on development. 👉 Tithi lord and Nakshatra lord both are Saturn, and Saturn itself is placed in Saturn’s nakshatra. Hence, Saturn becomes extremely important for the next 5 years of tenure. Slowly, the Government may try to move away from excessive freebies, especially since Saturn, the 8th lord, is debilitated in D10. 👉 Whatever promises were made regarding Government job posts being filled up are likely to be fulfilled. However, the main focus appears to be on establishing trade, encouraging MSMEs, small-scale businesses, and supporting the public through various schemes. 👉 In 2027–28, when Saturn moves into Bharani, there could be a highly challenging period both for the Government and for the CM. 👉 The best part of the chart is that the Government is likely to complete its full tenure and ensure that money reaches the right hands through finance-generating industries and economic expansion. I just wish the oath-taking of Sri Suvendu Adhikari happens after 12 PM, as that Leo rising horoscope appears much stronger and more positive. #WestBengalNewCM #suvenduadhikari #westbengal2026
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शुभेन्दु अधिकारी के शपथग्रहण की कुंडली का विश्लेषण पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने 9 मई 2026 को कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में प्रातः 11:31 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। शपथग्रहण के समय की कुंडली कर्क लग्न की है। ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी को श्रवण नक्षत्र शुक्ल योग में शुभ मुहूर्त है। कर्क लग्न की इस कुंडली में लग्न में लग्नेश चन्द्रमा सप्तम भाव में हैं और पूर्ण व अतिमित्र दृष्टि से लग्न को देख रहे हैं, जिससे लग्न बहुत बलवान हो गया है और लग्न की पूर्ण रक्षा यानि सरकार की पूर्ण रक्षा व बल में बहुत वृद्धि हो गई है। धनेश सूर्य दशम भाव में उच्च के हैं व तृतीयेश व व्ययेश बुध सूर्य में अस्त होकर दशम में ही हैं। इसलिए सूर्य ने 2,3,12 भावों को नियन्त्रण में ले लिया है। सुखेश व आयेश शुक्र आय भाव में स्वगृही हैं। इसलिए बंगाल को बहुत सुख समृद्धि मिलने वाली है। धनेश आयेश दोनों का उच्च व स्वगृही होना राज्य के धनलाभ, आय वृद्धि की दृष्टि से बहुत शुभ हो गया है। बंगाल को केन्द्र से भी बड़ा बजट, योजनाएं और उद्योगों की भरमार मिलने वाली है। बंगाल को चारों तरफ से फायदा ही फायदा होगा। पूरा विश्लेषण यूट्यूब पर यहाँ देखें youtu.be/PnHFMJOACYM पंचमेश व दशमेश राजयोगकारक मंगल नवम भाव में सप्तमेश व अष्टमेश शनि के साथ हैं। केन्द्रेश त्रिकोणेश का यह मिलन अच्छा है। पर दोनों विरोधी ग्रह होने से धर्मक्षेत्र में भयानक घमासान होने वाला है। मंगल का बल शनि से ज्यादा है, इसलिए पुलिस कार्यवाही, एनकाउंटर की भरमार देखने को मिलेगी। शनि के न्यायालय मार्ग की बजाय सरकार अपने राजदण्ड का प्रयोग करके योगीजी की तरह पूरे बंगाल में अपराध का कठोरता से सफाया करेगी और उनपर नियंत्रण स्थापित करेगी। शिक्षा के क्षेत्र में भी बंगाल में प्रगति होगी, विश्वविद्यालयों की स्थिति सुधारी जाएगी और बंगाल की यूनिवर्सिटीज देश में अच्छा नाम कमाएंगी। बंगाल से विभिन्न विषयों में बहुत अच्छा साहित्य निकलकर आएगा। बंगाल की खोई हुई साहित्य विरासत को वापिस उभारने और जीवित करने में बंगाल सरकार काम करेगी। षष्ठेश व धर्मेश गुरु द्वादश में हैं, और पूर्ण मित्रदृष्टि से षष्ठ भाव को देख रहे हैं, इसलिए शत्रुओं का धर्म द्वारा अच्छे से निग्रह हो जाएगा। धर्म के शत्रु धर्म की नजर से बच नहीं पा रहे हैं। सरकार की तरफ से बहुत बड़ी कार्यवाही हिन्दू विरोधियों को, अपराधी, गुंडों को झेलनी पड़ेगी, अपराधियों के लिए छिपना नामुमकिन हो जाएगा। इस चक्कर में अनेक हिंसक घटनाएं, हत्याएं देखने को मिल सकती हैं, क्योंकि अपराधी बुझने से पहले फड़फड़ाने की कोशिश करेंगे। दंगों के भी षड्यन्त्र होंगे पर हिन्दुत्व को दबा नहीं पाएंगे। अष्टमेश राहु अष्टम में ही स्वगृही हैं। दशमांश में लग्नेश मंगल अष्टम में स्वगृही है, इसलिए सरकार में गुस्सा ज्यादा होगा, अपराध सहने का कहीं कोई प्रश्न नहीं उठता। साथ में ही षष्ठेश भी मृत्यु भाव में पड़ गया है बुध। तो आप देख सकते हैं लग्नेश यानी स्वयं सरकार और शत्रु दोनों मृत्यु भाव में बैठ गए हैं युद्ध करने, यहां आर पार का युद्ध दोनों शत्रुओं में हो रहा है। पर खेल क्या हो गया? ये मृत्यु का घर लग्नेश का सरकार का खुद का ही है। तो शत्रु अपने शत्रु के घर में ही फंस गया। जैसे कोई सियार शेर की मांद में घुसा हो युद्ध करने तो जीत किसकी होगी ? तो मृत्युस्थान में स्वगृही लग्नेश कभी खुदकी हानि नहीं करता है बल्कि रक्षा करता है और वहां शत्रु मृत्यु के मुंह में पड़ा है। पर इसमें भी देखो मंगल बुध दोनों ही सूर्य में अस्त हैं। कालचक्र में मेष लग्न की कुंडली में सूर्य पंचमेश हैं, जो बुद्धि के कारक हैं, तो सूर्य मंगल बुध के नियंत्रण होकर 1,3,5,6,8 इन 5 भावों के नियंत्रक हो गए हैं, और स्वयं धर्म भाव में बैठे हैं चन्द्र केतु के साथ, चन्द्र भी सुखेश है, तो यहां त्रिकोणेश केन्द्रेश युति करके सूर्य चन्द्र भी राजयोग बना रहे हैं, साथ में धर्म की ध्वज केतु बैठे हैं। तो यह मंगल के लिए शुभ है अपने मित्र शुभ ग्रह सूर्य में अस्त होना, पर अशुभ, मेष लग्न में पापी बुध का शुभ सूर्य में अस्त होना, यह पाप की पराजय है। तो शत्रुओं का तो नाश निश्चित है। ध्यान देने वाली बात है कि आज श्रवण नक्षत्र में शपथ ग्रहण हुआ है जो राज्याभिषेक का सबसे मुख्य नक्षत्र है। विजयादशमी को दशमी तिथि का श्रवण नक्षत्र से संयोग जब होता है उसी को विजय मुहूर्त्त कहा जाता है और उसी कारण विजयादशमी का इतना महत्त्व है। यह राज्याभिषेक, युद्ध, विजय के लिए सबसे शुभ नक्षत्र इसलिए ही होता है। यह नक्षत्र स्वयं भगवान विष्णु का है, वे इसके देवता हैं, इसलिए यह पालक है, जनता का, बंगाल का सरकार बहुत ही प्यारे तरीके से पालन करेगी, मरहम लगाएगी, घाव भरेगी, दवा देगी, सुरक्षा करेगी। यह बंगाल के लिए बहुत शुभ हो गया। इस नक्षत्र का महत्त्व इतना है कि इसमें थोड़े से काम का भी बड़ा भारी शुभ परिणाम मिलता है। वामन भगवान का प्रादुर्भाव इसी नक्षत्र में हुआ था और उन्होंने 3 पग में ही 3 लोग नाप लिए थे। इसलिए आप मानकर चलिए कि बंगाल की भूमि का भी विस्तार अवश्य होगा, इस पर बहुत संजीदगी से काम होगा, व सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित कर दिया जाएगा। अभी चन्द्र का प्रभाव 47 दिन तक रहेगा, 25 जून से मङ्गल का प्रभाव शुरू होगा जो 6 अक्टूबर 2026 तक रहेगा, इस बीच आक्रामकता से अपराधियों पर कार्यवाही की जाएगी। इसके बाद 29 जून 2027 तक कुछ रहस्यमयी व घातक घटनाएं घटने की संभावना है, जिनका असर दीर्घकालिक होगा। @MuditUpdates #SuvenduAdhikari #ShubhenduAdhikari #शुभेंदु

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Navroop Singh
Navroop Singh@TheNavroopSingh·
West Bengal Oath Taking Chart: Lagna Lord in 7th in Shravana Nakshatra (Swa Nakshatra), Budh aditya yog in 10th. Exalted Suyra 2nd Lord in 10th house (good finances) & implementation of rule of law. Signifies a strong government. 4th Lord Shukra also well placed, wealth will reign on Womenfolk in Bengal. 9th Lord Jupiter in 12th House in Punarvasu Nakshatra (swa nakshatra) marks a cultural renessance and revival in Bengal. Saturn-Mars in 9th means strong focus on Dharma, Rituals and reinstating the cultural ethos of bengal. But it would mean lead to religious clashes. Rahu in 8th is a classic sign of conspiracies, terror plots. Overall a very good chart and auspicious for West Bengal !
Navroop Singh@TheNavroopSingh

Suvendu Oath as CM @ West Bengal ! At 11:32 AM, Kolkata

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Mudit
Mudit@MuditUpdates·
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शुभेन्दु अधिकारी के शपथग्रहण की कुंडली का विश्लेषण पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने 9 मई 2026 को कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में प्रातः 11:31 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। शपथग्रहण के समय की कुंडली कर्क लग्न की है। ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी को श्रवण नक्षत्र शुक्ल योग में शुभ मुहूर्त है। कर्क लग्न की इस कुंडली में लग्न में लग्नेश चन्द्रमा सप्तम भाव में हैं और पूर्ण व अतिमित्र दृष्टि से लग्न को देख रहे हैं, जिससे लग्न बहुत बलवान हो गया है और लग्न की पूर्ण रक्षा यानि सरकार की पूर्ण रक्षा व बल में बहुत वृद्धि हो गई है। धनेश सूर्य दशम भाव में उच्च के हैं व तृतीयेश व व्ययेश बुध सूर्य में अस्त होकर दशम में ही हैं। इसलिए सूर्य ने 2,3,12 भावों को नियन्त्रण में ले लिया है। सुखेश व आयेश शुक्र आय भाव में स्वगृही हैं। इसलिए बंगाल को बहुत सुख समृद्धि मिलने वाली है। धनेश आयेश दोनों का उच्च व स्वगृही होना राज्य के धनलाभ, आय वृद्धि की दृष्टि से बहुत शुभ हो गया है। बंगाल को केन्द्र से भी बड़ा बजट, योजनाएं और उद्योगों की भरमार मिलने वाली है। बंगाल को चारों तरफ से फायदा ही फायदा होगा। पूरा विश्लेषण यूट्यूब पर यहाँ देखें youtu.be/PnHFMJOACYM पंचमेश व दशमेश राजयोगकारक मंगल नवम भाव में सप्तमेश व अष्टमेश शनि के साथ हैं। केन्द्रेश त्रिकोणेश का यह मिलन अच्छा है। पर दोनों विरोधी ग्रह होने से धर्मक्षेत्र में भयानक घमासान होने वाला है। मंगल का बल शनि से ज्यादा है, इसलिए पुलिस कार्यवाही, एनकाउंटर की भरमार देखने को मिलेगी। शनि के न्यायालय मार्ग की बजाय सरकार अपने राजदण्ड का प्रयोग करके योगीजी की तरह पूरे बंगाल में अपराध का कठोरता से सफाया करेगी और उनपर नियंत्रण स्थापित करेगी। शिक्षा के क्षेत्र में भी बंगाल में प्रगति होगी, विश्वविद्यालयों की स्थिति सुधारी जाएगी और बंगाल की यूनिवर्सिटीज देश में अच्छा नाम कमाएंगी। बंगाल से विभिन्न विषयों में बहुत अच्छा साहित्य निकलकर आएगा। बंगाल की खोई हुई साहित्य विरासत को वापिस उभारने और जीवित करने में बंगाल सरकार काम करेगी। षष्ठेश व धर्मेश गुरु द्वादश में हैं, और पूर्ण मित्रदृष्टि से षष्ठ भाव को देख रहे हैं, इसलिए शत्रुओं का धर्म द्वारा अच्छे से निग्रह हो जाएगा। धर्म के शत्रु धर्म की नजर से बच नहीं पा रहे हैं। सरकार की तरफ से बहुत बड़ी कार्यवाही हिन्दू विरोधियों को, अपराधी, गुंडों को झेलनी पड़ेगी, अपराधियों के लिए छिपना नामुमकिन हो जाएगा। इस चक्कर में अनेक हिंसक घटनाएं, हत्याएं देखने को मिल सकती हैं, क्योंकि अपराधी बुझने से पहले फड़फड़ाने की कोशिश करेंगे। दंगों के भी षड्यन्त्र होंगे पर हिन्दुत्व को दबा नहीं पाएंगे। अष्टमेश राहु अष्टम में ही स्वगृही हैं। दशमांश में लग्नेश मंगल अष्टम में स्वगृही है, इसलिए सरकार में गुस्सा ज्यादा होगा, अपराध सहने का कहीं कोई प्रश्न नहीं उठता। साथ में ही षष्ठेश भी मृत्यु भाव में पड़ गया है बुध। तो आप देख सकते हैं लग्नेश यानी स्वयं सरकार और शत्रु दोनों मृत्यु भाव में बैठ गए हैं युद्ध करने, यहां आर पार का युद्ध दोनों शत्रुओं में हो रहा है। पर खेल क्या हो गया? ये मृत्यु का घर लग्नेश का सरकार का खुद का ही है। तो शत्रु अपने शत्रु के घर में ही फंस गया। जैसे कोई सियार शेर की मांद में घुसा हो युद्ध करने तो जीत किसकी होगी ? तो मृत्युस्थान में स्वगृही लग्नेश कभी खुदकी हानि नहीं करता है बल्कि रक्षा करता है और वहां शत्रु मृत्यु के मुंह में पड़ा है। पर इसमें भी देखो मंगल बुध दोनों ही सूर्य में अस्त हैं। कालचक्र में मेष लग्न की कुंडली में सूर्य पंचमेश हैं, जो बुद्धि के कारक हैं, तो सूर्य मंगल बुध के नियंत्रण होकर 1,3,5,6,8 इन 5 भावों के नियंत्रक हो गए हैं, और स्वयं धर्म भाव में बैठे हैं चन्द्र केतु के साथ, चन्द्र भी सुखेश है, तो यहां त्रिकोणेश केन्द्रेश युति करके सूर्य चन्द्र भी राजयोग बना रहे हैं, साथ में धर्म की ध्वज केतु बैठे हैं। तो यह मंगल के लिए शुभ है अपने मित्र शुभ ग्रह सूर्य में अस्त होना, पर अशुभ, मेष लग्न में पापी बुध का शुभ सूर्य में अस्त होना, यह पाप की पराजय है। तो शत्रुओं का तो नाश निश्चित है। ध्यान देने वाली बात है कि आज श्रवण नक्षत्र में शपथ ग्रहण हुआ है जो राज्याभिषेक का सबसे मुख्य नक्षत्र है। विजयादशमी को दशमी तिथि का श्रवण नक्षत्र से संयोग जब होता है उसी को विजय मुहूर्त्त कहा जाता है और उसी कारण विजयादशमी का इतना महत्त्व है। यह राज्याभिषेक, युद्ध, विजय के लिए सबसे शुभ नक्षत्र इसलिए ही होता है। यह नक्षत्र स्वयं भगवान विष्णु का है, वे इसके देवता हैं, इसलिए यह पालक है, जनता का, बंगाल का सरकार बहुत ही प्यारे तरीके से पालन करेगी, मरहम लगाएगी, घाव भरेगी, दवा देगी, सुरक्षा करेगी। यह बंगाल के लिए बहुत शुभ हो गया। इस नक्षत्र का महत्त्व इतना है कि इसमें थोड़े से काम का भी बड़ा भारी शुभ परिणाम मिलता है। वामन भगवान का प्रादुर्भाव इसी नक्षत्र में हुआ था और उन्होंने 3 पग में ही 3 लोग नाप लिए थे। इसलिए आप मानकर चलिए कि बंगाल की भूमि का भी विस्तार अवश्य होगा, इस पर बहुत संजीदगी से काम होगा, व सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित कर दिया जाएगा। अभी चन्द्र का प्रभाव 47 दिन तक रहेगा, 25 जून से मङ्गल का प्रभाव शुरू होगा जो 6 अक्टूबर 2026 तक रहेगा, इस बीच आक्रामकता से अपराधियों पर कार्यवाही की जाएगी। इसके बाद 29 जून 2027 तक कुछ रहस्यमयी व घातक घटनाएं घटने की संभावना है, जिनका असर दीर्घकालिक होगा। @MuditUpdates #SuvenduAdhikari #ShubhenduAdhikari #शुभेंदु

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PunyaPrakop
PunyaPrakop@PunyaPrakop_·
ॐ गं गणपतये नमः I'll provide with some of the very important technical points of the chart and then straight away give concluding points of interpretations based on the overall chart (Based on D1 with support of D9 and D10). Jyotish configurations (only very important ones) 1) Lagna is cancer. Lagnesh is Moon (Chandra). Moon is in Shravan Nakshatra in 7th Bhav. Lagna is in the hora of Moon. Lagnesh moon having highest Ashtak Varg bala strength of 7. 2) Lagna is in the Nakshatra of Ashlesha (coiled serpent). 3) The Oath time is perfectly placed in "Vijay Muhurt". 4) 2nd Bhavesh Sun is exalted in the 10th with Mercury. 5) Mars is PYK (परम योग कारक) being 5th & 10th Bhavesh. 6) Mars is also the AK (आत्म कारक) placed in the 9th with Vargottam strength and close to the Boarder of Jala Tatva and Agni Tatva (गंडांत). 7) In Dashamansha Varg (D10), Mars is in 10th bhava being D10 Lagnesh. 8) No Graha shifts in Bhava Chalit. 9) Nodes in 2nd-8th axis. 11th Bhavesh Rahu is placed in own 8th Bhav. 10) Prabal Shatru Shani is in Bhagya Bhav. 11) 6th Bhavesh Guru (enemies) is placed in 12th in own Punarvasu Nakshatra which is significant. 6th Bhav is aspected by Shani placed in the 9th. 12) Shukra, Bhavesh of 11th (Also Badhakesh) is sitting in own 11th Bhav. 13) Navamansha (D9) has Fixed sign lagna - Kumbha and 4 Grahas placed in Fixed signs (Guru, Shani, Surya and Shukra). 14) 8th Bhav is D9 has Exalted Mercury. 15) 10th Bhav of D10 has direct influence of Mars, Guru and Moon. 16) 6th Bhav and 12th Bhav (Covert and overt enemies) are almost similar from Lagna and Moon Lagna. Conclusions based on above and few more aspects not mentioned above: Note: Always consider "Will" meaning most likely or likely. 1. The Government will complete her full tenure. 2. Will come back with full majority in the 2nd term as well. 3. Will be totally dedicated to the people of the state and will become very popular amongst masses. 4. Will face formidable obstacles from a Lady opponent (Shukra as Badhaka in the 11th in own Rashi). This shows Mamta as the constant troublemaker. However, ultimate it'll benefit the Government as it is also the 11th Bhav of Laabh (Gains) 5. Will go after Law and Order deterministically. Action will be pronounced and visible from July onwards. Won't relent in action at least until 2029. 6. All the chances of UCC law implemented between 2026 Dec to Jan 2027 (In the start of 8th Bhaesh Rahu's compressed Vimshottari Dasha period). 7. We'll witness the sending back of the illegal Bangladeshis and progress of securing the boarders from 2027 Mid through 2029. First time in our history, we'll be able to see the real action and results against Bangladeshi illegal migrants. 8. The CM is going to gain immense popularity and goodwill of people. Same stands true for entire BJP government. 9. Enemies are going to get the test of poisonous snake (Ashlesha) for the first time from WB government in past 50 years history. 10. AGGRESSIVELY going after the Jehadi goons and securing the boarders using all security forces will be the inner core desire of the government (Mars AK and PYK and powerfully placed in D10). 11. The only caution for the CM and cabinet ministers is to not get too emotional on some issues. 12. First time Hindus will feel freedom for Hindutva in the state. For the first time in past 70 years, the enemy lot is going to get isolated and chased out. (6th Bhavesh Guru in 12th) 14. The state will look like staunch Hindutva state and go back to the traditions. (Shani-Mars in the 9th) For instance - Rong Dhanu will be changed back to Ram Dhanu. 15. The Government will also work for Industries and investments (local and Foreign). It'll improve the funding and financial condition of the state. Both the 2nd and 11th Bhavesh are strong, slowly, the funding start improving. All in all, it is a very auspicious chart! Weaknesses are much less in comparison to the strengths. I am quite happy to analyse the historic Oath chart. Hindus of our country will have joy to watch पश्चिम बंग प्रदेश in this term. हर हर महादेव जय माँ काली
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Mudit
Mudit@MuditUpdates·
Mudit@MuditUpdates

शुभेन्दु अधिकारी के शपथग्रहण की कुंडली का विश्लेषण पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने 9 मई 2026 को कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में प्रातः 11:31 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। शपथग्रहण के समय की कुंडली कर्क लग्न की है। ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी को श्रवण नक्षत्र शुक्ल योग में शुभ मुहूर्त है। कर्क लग्न की इस कुंडली में लग्न में लग्नेश चन्द्रमा सप्तम भाव में हैं और पूर्ण व अतिमित्र दृष्टि से लग्न को देख रहे हैं, जिससे लग्न बहुत बलवान हो गया है और लग्न की पूर्ण रक्षा यानि सरकार की पूर्ण रक्षा व बल में बहुत वृद्धि हो गई है। धनेश सूर्य दशम भाव में उच्च के हैं व तृतीयेश व व्ययेश बुध सूर्य में अस्त होकर दशम में ही हैं। इसलिए सूर्य ने 2,3,12 भावों को नियन्त्रण में ले लिया है। सुखेश व आयेश शुक्र आय भाव में स्वगृही हैं। इसलिए बंगाल को बहुत सुख समृद्धि मिलने वाली है। धनेश आयेश दोनों का उच्च व स्वगृही होना राज्य के धनलाभ, आय वृद्धि की दृष्टि से बहुत शुभ हो गया है। बंगाल को केन्द्र से भी बड़ा बजट, योजनाएं और उद्योगों की भरमार मिलने वाली है। बंगाल को चारों तरफ से फायदा ही फायदा होगा। पूरा विश्लेषण यूट्यूब पर यहाँ देखें youtu.be/PnHFMJOACYM पंचमेश व दशमेश राजयोगकारक मंगल नवम भाव में सप्तमेश व अष्टमेश शनि के साथ हैं। केन्द्रेश त्रिकोणेश का यह मिलन अच्छा है। पर दोनों विरोधी ग्रह होने से धर्मक्षेत्र में भयानक घमासान होने वाला है। मंगल का बल शनि से ज्यादा है, इसलिए पुलिस कार्यवाही, एनकाउंटर की भरमार देखने को मिलेगी। शनि के न्यायालय मार्ग की बजाय सरकार अपने राजदण्ड का प्रयोग करके योगीजी की तरह पूरे बंगाल में अपराध का कठोरता से सफाया करेगी और उनपर नियंत्रण स्थापित करेगी। शिक्षा के क्षेत्र में भी बंगाल में प्रगति होगी, विश्वविद्यालयों की स्थिति सुधारी जाएगी और बंगाल की यूनिवर्सिटीज देश में अच्छा नाम कमाएंगी। बंगाल से विभिन्न विषयों में बहुत अच्छा साहित्य निकलकर आएगा। बंगाल की खोई हुई साहित्य विरासत को वापिस उभारने और जीवित करने में बंगाल सरकार काम करेगी। षष्ठेश व धर्मेश गुरु द्वादश में हैं, और पूर्ण मित्रदृष्टि से षष्ठ भाव को देख रहे हैं, इसलिए शत्रुओं का धर्म द्वारा अच्छे से निग्रह हो जाएगा। धर्म के शत्रु धर्म की नजर से बच नहीं पा रहे हैं। सरकार की तरफ से बहुत बड़ी कार्यवाही हिन्दू विरोधियों को, अपराधी, गुंडों को झेलनी पड़ेगी, अपराधियों के लिए छिपना नामुमकिन हो जाएगा। इस चक्कर में अनेक हिंसक घटनाएं, हत्याएं देखने को मिल सकती हैं, क्योंकि अपराधी बुझने से पहले फड़फड़ाने की कोशिश करेंगे। दंगों के भी षड्यन्त्र होंगे पर हिन्दुत्व को दबा नहीं पाएंगे। अष्टमेश राहु अष्टम में ही स्वगृही हैं। दशमांश में लग्नेश मंगल अष्टम में स्वगृही है, इसलिए सरकार में गुस्सा ज्यादा होगा, अपराध सहने का कहीं कोई प्रश्न नहीं उठता। साथ में ही षष्ठेश भी मृत्यु भाव में पड़ गया है बुध। तो आप देख सकते हैं लग्नेश यानी स्वयं सरकार और शत्रु दोनों मृत्यु भाव में बैठ गए हैं युद्ध करने, यहां आर पार का युद्ध दोनों शत्रुओं में हो रहा है। पर खेल क्या हो गया? ये मृत्यु का घर लग्नेश का सरकार का खुद का ही है। तो शत्रु अपने शत्रु के घर में ही फंस गया। जैसे कोई सियार शेर की मांद में घुसा हो युद्ध करने तो जीत किसकी होगी ? तो मृत्युस्थान में स्वगृही लग्नेश कभी खुदकी हानि नहीं करता है बल्कि रक्षा करता है और वहां शत्रु मृत्यु के मुंह में पड़ा है। पर इसमें भी देखो मंगल बुध दोनों ही सूर्य में अस्त हैं। कालचक्र में मेष लग्न की कुंडली में सूर्य पंचमेश हैं, जो बुद्धि के कारक हैं, तो सूर्य मंगल बुध के नियंत्रण होकर 1,3,5,6,8 इन 5 भावों के नियंत्रक हो गए हैं, और स्वयं धर्म भाव में बैठे हैं चन्द्र केतु के साथ, चन्द्र भी सुखेश है, तो यहां त्रिकोणेश केन्द्रेश युति करके सूर्य चन्द्र भी राजयोग बना रहे हैं, साथ में धर्म की ध्वज केतु बैठे हैं। तो यह मंगल के लिए शुभ है अपने मित्र शुभ ग्रह सूर्य में अस्त होना, पर अशुभ, मेष लग्न में पापी बुध का शुभ सूर्य में अस्त होना, यह पाप की पराजय है। तो शत्रुओं का तो नाश निश्चित है। ध्यान देने वाली बात है कि आज श्रवण नक्षत्र में शपथ ग्रहण हुआ है जो राज्याभिषेक का सबसे मुख्य नक्षत्र है। विजयादशमी को दशमी तिथि का श्रवण नक्षत्र से संयोग जब होता है उसी को विजय मुहूर्त्त कहा जाता है और उसी कारण विजयादशमी का इतना महत्त्व है। यह राज्याभिषेक, युद्ध, विजय के लिए सबसे शुभ नक्षत्र इसलिए ही होता है। यह नक्षत्र स्वयं भगवान विष्णु का है, वे इसके देवता हैं, इसलिए यह पालक है, जनता का, बंगाल का सरकार बहुत ही प्यारे तरीके से पालन करेगी, मरहम लगाएगी, घाव भरेगी, दवा देगी, सुरक्षा करेगी। यह बंगाल के लिए बहुत शुभ हो गया। इस नक्षत्र का महत्त्व इतना है कि इसमें थोड़े से काम का भी बड़ा भारी शुभ परिणाम मिलता है। वामन भगवान का प्रादुर्भाव इसी नक्षत्र में हुआ था और उन्होंने 3 पग में ही 3 लोग नाप लिए थे। इसलिए आप मानकर चलिए कि बंगाल की भूमि का भी विस्तार अवश्य होगा, इस पर बहुत संजीदगी से काम होगा, व सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित कर दिया जाएगा। अभी चन्द्र का प्रभाव 47 दिन तक रहेगा, 25 जून से मङ्गल का प्रभाव शुरू होगा जो 6 अक्टूबर 2026 तक रहेगा, इस बीच आक्रामकता से अपराधियों पर कार्यवाही की जाएगी। इसके बाद 29 जून 2027 तक कुछ रहस्यमयी व घातक घटनाएं घटने की संभावना है, जिनका असर दीर्घकालिक होगा। @MuditUpdates #SuvenduAdhikari #ShubhenduAdhikari #शुभेंदु

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PVR Narasimha Rao
PVR Narasimha Rao@homam108·
Initial Impressions on @SuvenduWB ji's historic oathtaking as the first BJP Chief Minister of West Bengal Like I used to do on videos in my youtube channel (pvr108), I'll first give the readings and then astrological analysis which uninterested people can skip. READINGS Suvendu's government will be bold & dynamic. They'll be PR/communication savvy & maintain a very favorable image of a capable & rational administration. There will be deep-rooted focus is on governance, popularity and dharma. They will start with a media blitzkrieg of positive PR till early Aug 2026. Then the focus will be on destroying enemies and enemies will be greatly weakened, particularly during Aug 2026-Mar 2027. The government will last full term. However, there can be an assassination attempt on the leader or a key minister (possibly during Nov 2027-Jun 2028). Some big agreements relating to economic growth can come during Mar-Nov 2027. Feb 2029-Dec 2030 will be the golden period in terms of governance and achievements. ASTROLOGICAL REASONING Data: 2026 May 9, 11:32 am IST, Kolkata, India There is a powerful Budh-Aditya yoga given by exalted Sun & 3rd lord (communications) Mercury (logic), in the 10th house (executive leadership) in Aries (bold & aggressive). Arudha lagna (image) is also there. Suvendu's government will be bold & dynamic. They'll be PR/communication savvy & maintain a very favorable image of a capable & rational administration. Lagna lord Moon is in 7th in Sravana nakshatra owned by Vishnu. There will be great focus on dharma and balance. Exalted Sun in the 10th house. Atma Karaka is Mars. He owns 5th and 10th houses and occupies the 9th house. Hence there will be deep-rooted focus is on governance (10th), popularity (5th) and dharma (9th). The 6th lord (enemies) is in 12th house (loss) aspected by yogakaraka Mars (aggression). Enemies will be greatly weakened, particularly in Jupiter's Dwisaptati sama dasa (Aug 2026-Mar 2027). BTW, Dwisaptati sama dasa applies because lagna lord is in 7th and it dominates over Vimsottari dasa because its controlling planet Rahu is in own house. Initial Mercury dasa till Aug 2026 suggests they will start with a media blitzkrieg of positive PR. As the 8th lord Rahu is in the 8th house, the government will last full term. However, as the other 8th lord Saturn afflicts the 10th lord Mars (thankfully, there is 12.5 deg between them), who is in Sarpa drekkana in deep gandanta, there can be an assassination attempt on the leader or a key minister. This can be during Saturn dasa (Nov 2027-Jun 2028). Dasas of exalted Sun in 10th, lagna lord Moon in a quadrant & yogakaraka in a trine come in the last one-third of the term (Feb 2029-Dec 2030). That will be the golden period in terms of governance and achievements. As Venus is the 11th lord in 11th, some big agreements relating to economic growth can come during Venus dasa Mar-Nov 2027. Navamsa chart is also pretty strong - 9th lord Mars in lagna, raja yoga between lagna/10th lord Jupiter and 5th lord Moon, exalted Mercury etc. They picked a pretty good muhurta.
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Mudit
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शुभेन्दु अधिकारी के शपथग्रहण की कुंडली का विश्लेषण पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने 9 मई 2026 को कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में प्रातः 11:31 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। शपथग्रहण के समय की कुंडली कर्क लग्न की है। ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी को श्रवण नक्षत्र शुक्ल योग में शुभ मुहूर्त है। कर्क लग्न की इस कुंडली में लग्न में लग्नेश चन्द्रमा सप्तम भाव में हैं और पूर्ण व अतिमित्र दृष्टि से लग्न को देख रहे हैं, जिससे लग्न बहुत बलवान हो गया है और लग्न की पूर्ण रक्षा यानि सरकार की पूर्ण रक्षा व बल में बहुत वृद्धि हो गई है। धनेश सूर्य दशम भाव में उच्च के हैं व तृतीयेश व व्ययेश बुध सूर्य में अस्त होकर दशम में ही हैं। इसलिए सूर्य ने 2,3,12 भावों को नियन्त्रण में ले लिया है। सुखेश व आयेश शुक्र आय भाव में स्वगृही हैं। इसलिए बंगाल को बहुत सुख समृद्धि मिलने वाली है। धनेश आयेश दोनों का उच्च व स्वगृही होना राज्य के धनलाभ, आय वृद्धि की दृष्टि से बहुत शुभ हो गया है। बंगाल को केन्द्र से भी बड़ा बजट, योजनाएं और उद्योगों की भरमार मिलने वाली है। बंगाल को चारों तरफ से फायदा ही फायदा होगा। पूरा विश्लेषण यूट्यूब पर यहाँ देखें youtu.be/PnHFMJOACYM पंचमेश व दशमेश राजयोगकारक मंगल नवम भाव में सप्तमेश व अष्टमेश शनि के साथ हैं। केन्द्रेश त्रिकोणेश का यह मिलन अच्छा है। पर दोनों विरोधी ग्रह होने से धर्मक्षेत्र में भयानक घमासान होने वाला है। मंगल का बल शनि से ज्यादा है, इसलिए पुलिस कार्यवाही, एनकाउंटर की भरमार देखने को मिलेगी। शनि के न्यायालय मार्ग की बजाय सरकार अपने राजदण्ड का प्रयोग करके योगीजी की तरह पूरे बंगाल में अपराध का कठोरता से सफाया करेगी और उनपर नियंत्रण स्थापित करेगी। शिक्षा के क्षेत्र में भी बंगाल में प्रगति होगी, विश्वविद्यालयों की स्थिति सुधारी जाएगी और बंगाल की यूनिवर्सिटीज देश में अच्छा नाम कमाएंगी। बंगाल से विभिन्न विषयों में बहुत अच्छा साहित्य निकलकर आएगा। बंगाल की खोई हुई साहित्य विरासत को वापिस उभारने और जीवित करने में बंगाल सरकार काम करेगी। षष्ठेश व धर्मेश गुरु द्वादश में हैं, और पूर्ण मित्रदृष्टि से षष्ठ भाव को देख रहे हैं, इसलिए शत्रुओं का धर्म द्वारा अच्छे से निग्रह हो जाएगा। धर्म के शत्रु धर्म की नजर से बच नहीं पा रहे हैं। सरकार की तरफ से बहुत बड़ी कार्यवाही हिन्दू विरोधियों को, अपराधी, गुंडों को झेलनी पड़ेगी, अपराधियों के लिए छिपना नामुमकिन हो जाएगा। इस चक्कर में अनेक हिंसक घटनाएं, हत्याएं देखने को मिल सकती हैं, क्योंकि अपराधी बुझने से पहले फड़फड़ाने की कोशिश करेंगे। दंगों के भी षड्यन्त्र होंगे पर हिन्दुत्व को दबा नहीं पाएंगे। अष्टमेश राहु अष्टम में ही स्वगृही हैं। दशमांश में लग्नेश मंगल अष्टम में स्वगृही है, इसलिए सरकार में गुस्सा ज्यादा होगा, अपराध सहने का कहीं कोई प्रश्न नहीं उठता। साथ में ही षष्ठेश भी मृत्यु भाव में पड़ गया है बुध। तो आप देख सकते हैं लग्नेश यानी स्वयं सरकार और शत्रु दोनों मृत्यु भाव में बैठ गए हैं युद्ध करने, यहां आर पार का युद्ध दोनों शत्रुओं में हो रहा है। पर खेल क्या हो गया? ये मृत्यु का घर लग्नेश का सरकार का खुद का ही है। तो शत्रु अपने शत्रु के घर में ही फंस गया। जैसे कोई सियार शेर की मांद में घुसा हो युद्ध करने तो जीत किसकी होगी ? तो मृत्युस्थान में स्वगृही लग्नेश कभी खुदकी हानि नहीं करता है बल्कि रक्षा करता है और वहां शत्रु मृत्यु के मुंह में पड़ा है। पर इसमें भी देखो मंगल बुध दोनों ही सूर्य में अस्त हैं। कालचक्र में मेष लग्न की कुंडली में सूर्य पंचमेश हैं, जो बुद्धि के कारक हैं, तो सूर्य मंगल बुध के नियंत्रण होकर 1,3,5,6,8 इन 5 भावों के नियंत्रक हो गए हैं, और स्वयं धर्म भाव में बैठे हैं चन्द्र केतु के साथ, चन्द्र भी सुखेश है, तो यहां त्रिकोणेश केन्द्रेश युति करके सूर्य चन्द्र भी राजयोग बना रहे हैं, साथ में धर्म की ध्वज केतु बैठे हैं। तो यह मंगल के लिए शुभ है अपने मित्र शुभ ग्रह सूर्य में अस्त होना, पर अशुभ, मेष लग्न में पापी बुध का शुभ सूर्य में अस्त होना, यह पाप की पराजय है। तो शत्रुओं का तो नाश निश्चित है। ध्यान देने वाली बात है कि आज श्रवण नक्षत्र में शपथ ग्रहण हुआ है जो राज्याभिषेक का सबसे मुख्य नक्षत्र है। विजयादशमी को दशमी तिथि का श्रवण नक्षत्र से संयोग जब होता है उसी को विजय मुहूर्त्त कहा जाता है और उसी कारण विजयादशमी का इतना महत्त्व है। यह राज्याभिषेक, युद्ध, विजय के लिए सबसे शुभ नक्षत्र इसलिए ही होता है। यह नक्षत्र स्वयं भगवान विष्णु का है, वे इसके देवता हैं, इसलिए यह पालक है, जनता का, बंगाल का सरकार बहुत ही प्यारे तरीके से पालन करेगी, मरहम लगाएगी, घाव भरेगी, दवा देगी, सुरक्षा करेगी। यह बंगाल के लिए बहुत शुभ हो गया। इस नक्षत्र का महत्त्व इतना है कि इसमें थोड़े से काम का भी बड़ा भारी शुभ परिणाम मिलता है। वामन भगवान का प्रादुर्भाव इसी नक्षत्र में हुआ था और उन्होंने 3 पग में ही 3 लोग नाप लिए थे। इसलिए आप मानकर चलिए कि बंगाल की भूमि का भी विस्तार अवश्य होगा, इस पर बहुत संजीदगी से काम होगा, व सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित कर दिया जाएगा। अभी चन्द्र का प्रभाव 47 दिन तक रहेगा, 25 जून से मङ्गल का प्रभाव शुरू होगा जो 6 अक्टूबर 2026 तक रहेगा, इस बीच आक्रामकता से अपराधियों पर कार्यवाही की जाएगी। इसके बाद 29 जून 2027 तक कुछ रहस्यमयी व घातक घटनाएं घटने की संभावना है, जिनका असर दीर्घकालिक होगा। @MuditUpdates #SuvenduAdhikari #ShubhenduAdhikari #शुभेंदु

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Bharani Astrology🪷🌙𓃰
Suvendu Adhikari’s oath-taking chart indicates that from 2026 to 2030, he will contribute wholeheartedly to the revival of West Bengal. The people of West Bengal are unlikely to have major complaints about him during this period because the aspect of Moon suggests strong emotions and deep concern in his mind regarding Bengal. Additionally, Jupiter is placed in the 12th house, which indicates divine blessings upon him, and suggests that he will place great importance on dharma (righteousness and spiritual values). In the area of career and action, an exalted Sun with Mercury indicates that many new companies may enter West Bengal, leading to a significant increase in employment opportunities. However, there is also a strong possibility of considerable government intervention in those companies. Overall, according to this interpretation, until 2030, residents of West Bengal are unlikely to have major complaints about Suvendu Adhikari.
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@bharaniastro06 Unrelated but what is your opinion on the muhurta for suvendu adhikaris swearing in ceremony

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Mudit
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दलित आदिवासी महिला राष्ट्रपति हैं, सर्वोच्च पद। जाति देखकर नहीं काम के आधार पर बनाया है, बेशक वोट दिया हो पर पार्टी को वह वोट दिलवाया किसकी मेहनत ने? शुभेंदु अधिकारी की ने। अगर कोई दलित नेता बंगाल बीजेपी में ये मेहनत किए होते तो वे बन जाते, सिंपल! केवल नाम के लिए काम को नहीं छोड़ा जा सकता न। और शुभेंदु अधिकारी भद्रलोक से नहीं आते, सारे ब्राह्मण भद्रलोक नहीं हैं, केवल कोलकाता के इलीट को भद्रलोक कहते। इसलिए यह तर्क बेकार है कि भाजपा ने दलित सीएम नहीं बनाया।
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Kranti Kumar
Kranti Kumar@KraantiKumar·
BJP ने भद्रलोक सुवेन्दु अधिकारी को मुख्यमंत्री बना ही दिया. बंगाल में भद्रलोक समाज की 10% आबादी है. बंगाल में भाजपा ने दलित और आदिवासी बहुल सीटों पर अच्छा प्रदर्शन किया. बंगाल में SC-ST समाज की आबादी 30-35 से ज्यादा है. SC ST वोटें के दम पर बीजेपी ने कम से कम 100 सीटें जीती. इसके बावजूद बीजेपी ने दलित मुख्यमंत्री नही बनाया. BJP TMC AAP और Congress जैसे दलों में प्रथम पंक्ति की लीडरशिप में दलित और आदिवासी नेता नही हैं. भारत में 29 राज्य हैं, किसी भी प्रदेश में दलित मुख्यमंत्री नही है.
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Mudit
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शुभेंदु अधिकारी की शपथ ग्रहण कुंडली का सच! कैसी चलेगी सरकार? 🥳 👇👇👇👇👇👇👇👇 youtu.be/PnHFMJOACYM #SuvenduAdhikari #ShubhenduAdhikari #शुभेंदु
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शुभेंदु अधिकारी की शपथ ग्रहण कुंडली का सच! कैसी चलेगी सरकार? 👇👇👇👇👇👇👇👇 youtu.be/PnHFMJOACYM #SuvenduAdhikari #ShubhenduAdhikari #शुभेंदु
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Mudit
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जब ममता बानो ने जय श्री राम को कह दिया गाली ! 2021 में ममता ने जय श्री राम को ही बंगाल विरोधी बताकर जय बांग्ला का राग अलाप दिया था, आज उसी बंगाल में चारों ओर जय श्री राम की गूंज है। इस ममता ने जय श्री राम को गाली करार दिया था, जय श्री राम बोलने वालों को गिरफ्तार करवाया था, जय श्री राम को अपनी बेइज्जती बता दिया था। 209 में ममत के काफ़िले के रास्ते पर किसी ने 'जय श्री राम' का नारा लगा दिया। ममता बनर्जी को नारा सुनाई दिया तो उसने गुस्से में अपना काफिला रुकवा दिया। सीएम के काफ़िले को रुकता हुआ देख नारे लगाने वाले युवकों ने पीछे हटना शुरू कर दिया। लेकिन यह औरत उनके पास जाकर कहती है "क्या रे, तू भाग क्यों रहा है, इधर आ, इधर आ. भाग क्यों रहा है?" यह ममता बानो यहीं नहीं रुकी. कहती है, "मेरे को गाली देने की हिम्मत कैसे हुई?" जय श्री राम के नारे को यह गाली कह रही थी। इसके तुरन्त बाद पुलिस ने तीनों युवकों को गिरफ़्तार कर लिया था। यह वीडियो खूब वायरल हुई थी। यह हाल इस औरत की सल्तनत में था। फिर जनवरी 2021 में नेताजी बोस के जयन्ती कार्यक्रम में कुछ लोगों ने 'जय श्रीराम' और 'भारत माता की जय' के नारे लगा दिए, पीएम भी वहीं थे। इससे नाराज ममता बानो ने भाषण देने से इनकार कर दिया और कहती है कि कार्यक्रम में जय श्री राम और भारत माता की जय कहकर उसकी बेइज्‍जती की गई। ऐसी पराधीनता, मजहबी शासन से भी बदतर स्थिति में बंगाल था। उसे अब जाकर बलिदानों के बाद स्वतंत्रता मिली है एक बख्तियार खिलजी की परंपरा की औरत से। बंगाल में हर कोई जय श्री राम कह रहा है। पूरा शपथग्रहण, गांव गांव, शहर शहर जय श्री राम के उद्घोष से गुंजायमान हो रहा है। स्वतंत्रता प्राप्ति से लोग फूले नहीं समा रहे हैं। जय श्री राम @MuditUpdates
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Mudit
Mudit@MuditUpdates·
@ComradeMalal सही कहा, कोई ढंग का संपादकीय नहीं आया
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Comrade M
Comrade M@ComradeMalal·
प्रिंट पत्रकारिता की ऐसी दुर्गति हो चुकी है कि सुवेंदु अधिकारी बीजेपी से बंगाल के पहले CM बनने जा रहे हैं। इतना चार्जड इलेक्शन हुआ है , जिससे पूरा इलेक्ट्रॉनिक्स और सोशल मीडिया पटा हुआ है। मगर प्रिंट मीडिया से एक अदद अच्छा आर्टिकल / कवर स्टोरी तक नहीं आया है।
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Mudit รีทวีตแล้ว
स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती
बंगाल की जीत ने इनके भी सुर बदल दिए उत्तर प्रदेश की जीत के बाद,,इन्हें कोई नहीं पूछेगा तब ये और सुर बदलेंगे। पर डायर भी होना जाना कुछ नहीं इनका
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कुछ दिन पहले अपना अलग राष्ट्र मांग रहा था अब हिन्दू राष्ट्र पर आ गया। यह सोशल मीडिया के मुद्दों के अनुसार रंग बदलने वाला गिरगिट है।

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