भ्रष्टाचारी जेल गए नहीं।
कालाधन वापिस देश में आया नहीं।
गंगा साफ हुई नहीं।
सीमा पर जवानों की मौत कम हुई नहीं।
महंगाई कम हुई नहीं।
तेल सस्ता हुआ नहीं।
POK वापिस लिया नहीं।
तो क्या फिर ये मोदी सरकार बस आधार को फोन से लिंक करने के लिए ही बनवाई गई थी?
100% इथेनॉल फ्यूल को मंजूरी मिल गई।
कुछ साल पहले E10, फिर E20 और अब E100...
लगता है सरकार का अंतिम लक्ष्य यह है कि एक दिन पेट्रोल पंप की जगह गन्ने का रस निकालने वाली मशीनें लगा दी जाएँ और गाड़ियों में सीधे खेत से सप्लाई हो।
सवाल यह भी है कि इथेनॉल अच्छा है या बुरा। पर उससे भी बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत के पास इतना अतिरिक्त गन्ना, पानी और उत्पादन क्षमता है कि करोड़ों वाहनों को 100% इथेनॉल पर चलाया जा सके?
🔥 दिल्ली अग्निकांड का असली हीरो कौन?
जब लोग जान बचाने के लिए चीख रहे थे, तब आले रियाजुद्दीन मंसूरी ने बिना एक पल सोचे अपने ₹1.5 लाख के गद्दे नीचे बिछा दिए और 8 लोगों की जान बचा ली,
जनता ने उनके साहस को सलाम किया और चंदा जुटाकर उनके नुकसान की भरपाई कर दी,
लेकिन सवाल यह है कि करोड़ों के बजट वाली सरकार की ओर से इस अद्भुत बहादुरी के लिए सिर्फ ₹21,000 की "आर्थिक सहायता"?
जान बचाने वाले नायकों का सम्मान सिर्फ शब्दों से नहीं, बल्कि उनके योगदान के अनुरूप होना चाहिए,
रियाजुद्दीन मंसूरी ने दिखा दिया कि इंसानियत किसी पद, पार्टी या सत्ता की मोहताज नहीं होती,
देश ऐसे गुमनाम नायकों की वजह से ही जिंदा है।
युसूफ पठान v/s सायोनी घोष
मैदान पर दो-चार छक्के क्या मार दिए , यूसुफ पठान खुद को राजनीति का कैप्टन समझने लगे , युसूफ पठान ममता बनर्जी के रहम और करम पर सीधे संसद पहुँच गए आज वही बागी बन रहे हैं , ये लोग समाज को कैसे मुँह दिखाएंगे ,
जब क्रिकेट से निराशा हाथ लगी तब ममता बनर्जी ने युसूफ पठान पर भरोसा किया और TMC से टिकट दिया , लेकिन युसूफ पठान तो सबसे बड़े मैच फ़िक्सर निकले , जिसने अपनी ही पार्टी से बगावत की ,
सायोनी घोष ने तो हद्द ही पार कर दी , जिस फ्लॉप एक्ट्रेस को ममता बनर्जी ने ज़मीन उठाकर सांसद बनाया वो आज ममता बनर्जी को आँखे दिखा रही है, सायोनी घोष ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री बनाना चाहती थी लेकिन आज वो खुद बागी हो गयी ,
सायोनी घोष की बगावत उनकी खुद की राजनीतिक अपरिपक्वता और लालच को दिखाती है , ममता बनर्जी एक महिला का नाम नहीं , बल्कि बंगाल की अस्मिता और संघर्ष का नाम है , पार्टी से गद्दारी करने वालों का राजनीतिक पतन निश्चित है, बंगाल का बच्चा-बच्चा अपनी दीदी के साथ मजबूती से खड़ा है , बंगाल झुकने वाला नहीं है ,
मोहन भागवत तुम लोग हिटलर से बदतर हो,
पाकिस्तान को ही क्यों हराना है आखिर हमेशा,
चीन को हराओ अमेरिका 3 लोगों को मार दिया इन लोगों से लड़ो क्यों नहीं लड़ते हैं इन सबसे,
पाकिस्तान पाकिस्तान हमेशा याद क्यो आता है 🤣🔥
मेरे देश का हाल ~ चुनाव खत्म होने के बाद EVM जला दो ।
NEET पेपर लीक होने पर शिक्षा विभाग में आग लगवा दो।
हिन्दू मुस्लीम करके देश में नफरत फैला दों।
देश के युवा को काॅकरोच, अध्यापक को दो कौङी का यूट्यूबर, और किसान को आतं*कवादी बता दों।
Thanks Trump चाचा..
आपका ये एहसान हम लोग कभी नहीं भूलेंगे...
स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज पूरी तरह खुल चुका है, Trump के हिसाब से,ईरान ने जो sea mines बिछा रखी थी, उन्हें भी ढूंढवा कर हटवा दीजिएगा.......
आज लगभग 1600 first grade teacher joining order निकले हैं,
इनमें से लगभग 260-70 लोगों ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी में DV करवा रखा है, मतलब 200 से 300 पोस्ट अकेली फर्स्ट ग्रेड चतुर्थ श्रेणी के लिए खाली करके चली गई।
अगली भर्तियां भी पोस्ट खाली करेगी, बहुतों को रोजगार मिलेगा ❣️🙏
फीफा वर्ल्ड कप 2026 इतिहास में पहली बार तीन देशों में हो रहा है जो Cannada, USA और Mexico है और इतिहास में पहली बार 3 शुभंकर भी है,,,,
इसमें छोटे-छोटे देश qualify करके खेल रहे हैं लेकिन दुनिया में सर्वाधिक जनसंख्या रखने वाला अपना भारत क्यों नहीं खेल पाता🙄🙄
इस भाई साहब ने IndiGo एयरलाइंस के एक खेल को उजागर किया है।
इनकी सुबह 6 बजे पुणे की फ्लाइट थी। जब समय पर एयरपोर्ट पहुंचे, इनका web check-in नहीं हो रहा था।
काउंटर पर इन्हें बोल दिया कि वेब चेक-इन 24 घंटे पहले ही करना होता है
अब फ्लाइट फुल हो गई है।
अब इनका सवाल यह है कि अगर फ्लाइट में जितनी सीटें हैं उतने ही टिकट बिके हैं,
आपकी सीट किसी और को कैसे मिल गई?
क्या ये कंपनियां सीटों से ज़्यादा टिकट बेच रही हैं?
दूसरा सवाल इनका यह है कि अगर कोई इमरजेंसी में फ्लाइट से 4-5 घंटे पहले टिकट बुक करता है,
वह 24 घंटे पहले वेब चेक-इन कैसे करेगा?
एयरलाइंस आसानी से कह देती हैं कि हम फ्लाइट चेंज कर देंगे लेकिन यात्री के समय, मानसिक परेशानी और अर्जेंट मीटिंग का नुकसान हो जाता है।
रौशन आंनद के भाई प्रिंस यादव की मौत हत्या के तार खान सर से जुड़े हैं?
ज्ञान बिंदु के डायरेक्टर रोशन आंनद को पटना पुलिस खान सर के इंस्टिट्यूट पर गोलीबारी के आरोप मे गिरफ्तार करके जेल भेज चुकी है
उसी मामले मे प्रिंस यादव भी आरोपी था फरार था और नेपाल मे अपने कुछ दोस्तों के साथ छुपा हुआ था
अब नेपाल से प्रिंस की मौत की खबर आयी है और लोग इसे हत्या मान कर खान सर से इसके तार जोड़ रहे है
क्या खान सर इतना बेवकूफ आदमी है जो इतना बड़ा कांड करवा के अपना नुकसान करेगा जबकि उसे पता है शक की सुई उसी पर आएगी?
क्या ये मुमकिन नहीं की प्रिंस की मौत किन्ही अन्य कारणों से हुई हो?
अगर हत्या भी हुई है तो क्या इसकी संभावना नहीं है की क़ोई तीसरा व्यक्ति है जो इनकी आपसी लड़ाई का फायदा उठाना चाहता हो?
क्योंकि पूरा खेल तो इंस्टिट्यूट के वर्चस्व को लेकर है...