
Arvind Pandey(भारतीय संविधान के अनुसार खरबपति)
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Arvind Pandey(भारतीय संविधान के अनुसार खरबपति)
@agsarvind
Brahman







एक आदमी एक मुर्गा खरीदकर लाया। एक दिन वह मुर्गे को मारना चाहता था, इसलिए उसने मुर्गे को मारने का बहाना सोचा और मुर्गे से कहा, "तुम कल से बाँग नहीं दोगे, नहीं तो मैं तुम्हें मार डालूँगा.. मुर्गे ने कहा, "ठीक है सर, जो भी आप चाहते हैं, वैसा ही होगा!" सुबह, जैसे ही मुर्गे के बाँग देने का समय हुआ, मालिक ने देखा कि मुर्गा बाँग नहीं दे रहा है, लेकिन हमेशा की तरह अपने पंख फड़फड़ा रहा है। मालिक ने अगला आदेश जारी किया कि कल से तुम अपने पंख भी नहीं फड़फड़ाओगे, नहीं तो मैं तुम्हारा वध कर दूँगा। अगली सुबह, बाँग के समय, मुर्गे ने आज्ञा का पालन करते हुए अपने पंख नहीं फड़फड़ाए, लेकिन आदत से मजबूर होकर अपनी गर्दन लंबी कर ली और उसे उठाया। मालिक ने परेशान होकर अगला आदेश जारी कर दिया कि कल से गर्दन भी नहीं हिलनी चाहिए। अगले दिन मुर्गा चुपचाप मुर्गी बनकर सहमा रहा और कुछ नहीं किया। मालिक ने सोचा, यह तो बात नहीं बनी। इस बार मालिक ने कुछ ऐसा सोचा जो वास्तव में मुर्गे के लिए नामुमकिन था। मालिक ने कहा कि कल से तुम्हें अंडे देने होंगे, नहीं तो मैं तुम्हारा वध कर दूँगा। अब मुर्गे को अपनी मौत साफ दिखाई देने लगी और वह बहुत रोया। मालिक ने पूछा, "क्या बात है? मौत के डर से रो रहे हो?" मुर्गा कहने लगा, "नहीं, मैं इसलिए रो रहा हूँ कि अंडे न देने पर मरने से बेहतर है कि बाँग देकर मरता। बाँग मेरी पहचान और अस्मिता थी। मैंने सब कुछ त्याग दिया और तुम्हारी हर बात मानी, लेकिन जिसका इरादा ही मारने का हो, उसके आगे समर्पण करने से बेहतर संघर्ष करना होता है। तभी जान बचाई जा सकती है, जो मैं नहीं कर सका।" #UGC_काला_कानून_वापस_लो











बड़ी ख़बर— आख़िर शंकराचार्य ने योगी आदित्यनाथ को लेकर अम्बेडकर नगर में ऐसा क्या कह दिया, कि अख़बारों ने पहले छापा फिर सेंसर्ड कर दिया? क्या ये अब तक की सबसे बड़ी चोट है? क्या सनातन से भिड़ने के दुष्परिणामों का डर सत्ता की आँख और नींद के बीच की दीवार बन गया है? ब्राह्मण बटुकों की चोटी खींच खींचकर मारने वालों पर आज तक कार्रवाई न करने वाली सरकार, क्या शंकराचार्य के तीसरे नेत्र से भयाक्रांत हो उठी है?

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