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This guy who’s notorious for openly misbehaving with young female law students/lawyers sermonising about not sermonising to CJI Gavai is peak unironic Brahmin mentality. His cheapness can be gauged simply by asking any female lawyer how afraid she’s to meet him! #MeTooKatju
Markandey Katju@mkatju
I condemn the throwing of a shoe on CJI Gavai. But he invited this when while hearing a petition praying for restoration of a statue of Lord Vishnu in Khajuraho he commented " You say you are a staunch devotee of Vishnu. Go and ask the deity itself to do something. Go and pray ". Such remarks were totally unwarranted, inappropriate, and unnecessary, having no bearing on the legal issues involved in the case. Judges should talk less in court, and not deliver sermons, homilies, and lectures. What would happen if a Judge hearing a petition regarding demolition of a mosque said " Let Allah or Prophet Mohammed restore it ? " I have given my view in the article below : indicanews.com/judges-should-…
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मान्यवर कांशीराम साहब के प्रसिद्ध नारे
1“जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी।”
2“बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय।”
3“हम बहुजन हैं, बहुजन की बात करेंगे।”
4“राजनीतिक शक्ति ही समाज परिवर्तन की कुंजी है।”
5“हम सत्ता नहीं चाहते, समाज बदलना चाहते हैं।”
6“जब तक समाज में अन्याय है, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।”
7“शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो।” (बाबा साहेब डॉ. आंबेडकर का मार्गदर्शन, जिसे उन्होंने अपने आंदोलन का मूल बनाया)
8“मनुवाद खत्म किए बिना लोकतंत्र बच नहीं सकता।”
9“हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति से नहीं, विचारधारा से है।”
✊ कांशीराम साहब का जीवन संघर्ष (संक्षेप में)
•जन्म: 15 मार्च 1934, रोपड़ जिला (पंजाब) के एक साधारण परिवार में।
•शिक्षा: बी.एससी. (B.Sc.) की डिग्री हासिल की और बाद में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) में वैज्ञानिक के रूप में कार्य किया।
•नौकरी के दौरान उन्होंने देखा कि आरक्षण और समान अवसर केवल कागज़ों तक सीमित हैं — यहीं से उन्होंने सामाजिक क्रांति की राह पकड़ी।
🛤️ संघर्ष की यात्रा
•1971 में उन्होंने सरकारी नौकरी त्याग दी ताकि वे पूरी तरह समाज के उत्थान में लग सकें।
•1978 में “BAMCEF” (Backward and Minority Communities Employees Federation) की स्थापना की — यह शिक्षित बहुजन कर्मचारियों का संगठन था।
•1981 में “DS4” (Dalit Shoshit Samaj Sangharsh Samiti) बनाई — इसने आंदोलन को ज़मीनी स्तर पर पहुंचाया।
•1984 में “बहुजन समाज पार्टी (BSP)” की स्थापना की — उद्देश्य था कि बहुजन समाज को राजनीतिक शक्ति मिले ताकि नीतियां उन्हीं के हित में बनें।
•उन्होंने बिना कोई व्यक्तिगत संपत्ति बनाए, अपने जीवन का हर क्षण समाज जागरण को समर्पित किया।
🕊️ परिनिर्वाण
•9 अक्टूबर 2006 को उनका परिनिर्वाण हुआ।
•उन्होंने अपने पीछे एक सशक्त राजनीतिक-सामाजिक आंदोलन छोड़ गया — जो आज भी परम आदरणीय बहन मायावती जी के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है।
आपका जीवन संघर्ष, समर्पण और सामाजिक न्याय के लिए आपका योगदान सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।
आपने सोई हुई क़ौम को जगाया, स्वाभिमान और अधिकार की राह दिखाई।
आपके दिखाए मार्ग पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।
जय भीम! जय मान्यवर कांशीराम साहब!
मान्यवर कांशीराम साहब के परिनिर्वाण दिवस पर शत शत नमन ।💐💐💐💐💐💐💐🦣🦣🦣🦣
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जो भी लोग बाबासाहेब अंबेडकर, संविधान और दलित आदिवासी पिछड़ा वर्ग का अपमान कर रहे हैं वह सभी एक ही जाति से आते हैं, इन मुंह से जन्मी औलादों को तर्क और संवैधानिक तरीके से जवाब दीजिए,
मनुवादी तर्क में हारता है तो हिंसा करता है लेकिन यह लोग भूल जाते हैं कि देश मनुस्मृति से नहीं बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान से चलता है, आज नहीं तो कल इन सबको संविधान की शरण में आना पड़ेगा, ये लोग भी जय भीम बोलेंगे आप देखते जाइए ।




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