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ग़लत से ग़लत वक़्त में भी सही से सही बात कही जा सकती है ~ कुँवर नारायण
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पाँच पहर धंधे गया, तीन पहर गया सोय। एक पहर हरि नाम बिन, मुक्ति कैसे होय॥ - कबीरदास
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अब इस घर की आबादी मेहमानों पर है  कोई आ जाए तो वक़्त गुज़र जाता है  ~ज़ेहरा निगाह
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इंसान नहीं बोलता,उसके दिन बोलते हैं जब दिन नहीं बोलते, इंसान लाख बोले उसकी कोई नहीं सुनता! - अज्ञात
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तुम्हारे साथ रहकर अक्सर मुझे लगा है कि हम असमर्थताओं से नहीं संभावनाओं से घिरे हैं, हर दीवार में द्वार बन सकता है और हर द्वार से पूरा का पूरा पहाड़ गुज़र सकता है। ~ सर्वेश्वरदयाल सक्सेना 🌷
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ये मासूम सुबहें ये शामें सुहानी ज़रा याद रखना, यहाँ की कहानी। ये पेड़ों के झुरमुट ये अनजानी राहें हमें देखती ये शहर की निगाहें मिले थे यहीं पर कभी आग-पानी। ज़रा याद रखना, यहाँ की कहानी। - कुँअर बेचैन
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अगर दोबारा बनी ये दुनिया तो पहले तेरी गली बनेगी। ~ स्वप्निल तिवारी
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चलो ये इश्क़ नहीं चाहने की आदत है कि क्या करें हमें दू्सरे की आदत है तू अपनी शीशा-गरी का हुनर न कर ज़ाया मैं आईना हूँ मुझे टूटने की आदत है - अहमद फ़राज़
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वे भूखे हैं पर आदमी का मांस नहीं खाते प्यासे हैं पर लहू नहीं पीते नंगे हैं पर दूसरों को नंगा नहीं करते उनके सिर पर छत नहीं है पर दूसरों के लिए छत बनाते हैं। -ओमप्रकाश वाल्मीकि
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जिस दिन ईश्वर मारा जाएगा और जोड़ियाँ रब नहीं बनाएगा उस दिन बचा लेंगे मैं और तुम युद्ध से कराहती धरती में थोड़ी-सी ज़मीन मुहब्बत के लिए। - आलोक आज़ाद
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सोच रहा हूं उस पल आख़िर राम पे क्या बीती होगी गिरते बरगद के होंठों पर अंतिम कलमा था हे राम -इरशाद ख़ान सिकंदर 🌸
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गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
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जिंदगी... अक्सर वहां मोड़ लेती है जहां हमने कभी सोचा भी नहीं होता। लेकिन हर मोड़ कुछ सिखाने आता है बस नज़र चाहिए शिकायत नहीं। #Kitabalay #किताबालय📖
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घर में ईश्वर के दर से अधिक सुकून है इसलिए नहीं कि बहुत सुख सुविधा है घर पर बस इसलिए कि, 'माँ' रहती है घर पर माँ! माँ जो, कमाने नहीं जा पाती, इसलिए खुद को ही खर्च कर देती है घर पर! ~ प्रह्लाद पाठक
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विश्व हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। #Kitabalay #किताबालय📖 #hindidiwas
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ज्ञानरंजन उन रचनाकारों में थे जिन्होंने हिंदी कहानी को नए अनुभव-बोध, सामाजिक चेतना और वैचारिक साहस के साथ समृद्ध किया. उनके संपादन में निकलने वाली ‘पहल’ में छपना, हिंदी रचनाकारों के लिए उपलब्धि की तरह था. वे हमेशा स्मृतियों में रहेंगे #gyanranjan #Kitabalay
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“धर्म का काम आदमी को इंसान बनाना है, उसे अंधा बनाना नहीं।” प्रेमचन्द
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तुम बर्फ़ के समान विशुद्ध रहो और हिम के समान पवित्र, तो भी लोकनिंदा से नहीं बचोगे। - विलियम शेक्सपियर
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तुम्हारा प्रेम अलाव है मेरे लिए इस जाड़े में मेरा प्रेम हल्के गर्म दिन की तरह है तुम्हारे लिए जाड़े की धुंध को भगाते हुए घाटी में जाड़े का सबसे अच्छा अनुवादक बनकर। - शहंशाह आलम 🌸
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