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@CommanMan777589

SANGHI WHO NEVER WENT TO SANGH #Sanatan Dharma #Modi Fan #Hindu , RT not endorsement! #Dm for promotion

Indian occupied Pakistan Sumali Ekim 2025
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Sanatanii
Sanatanii@Sanatanii_·
मेरा श्री राम नाम से सब काम हो रहा है। जय हो प्रभु श्री रामचंद्र🙏
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Sanatanii
Sanatanii@Sanatanii_·
नवरात्र दूसरा माँ ब्रह्मचारिणी : माँ ब्रह्मचारिणी माँ दुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं जिन्हें तपस्या, संयम और धैर्य की देवी माना जाता है। उनके नाम का अर्थ ही है तप का आचरण करने वाली। स्वरूप : वे सफेद वस्त्र धारण करती हैं, एक हाथ में जपमाला और दूसरे हाथ में कमंडल रखती हैं और उनका शांत रूप साधना का प्रतीक है। व्रत फल : आज के दिन उनकी पूजा करने से मन में धैर्य और आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन की कठिनाइयों को सहने की शक्ति मिलती है। मंत्र : ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः
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श्रीष त्रिपाठी 🇮🇳
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलु। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।। "चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन माँ दुर्गा के तपस्विनी स्वरूप माँ ब्रह्मचारिणी को नमन💐 हाथों में जपमाला और कमंडल लिए माँ ब्रह्मचारिणी तप, त्याग और साधना की प्रतीक हैं। इनकी उपासना से जीवन में धैर्य, संयम और आत्मबल की प्राप्ति होती है। माँ का आशीर्वाद हमें हर कठिन राह पर अडिग रहने की शक्ति देता है और सफलता की ओर अग्रसर करता है। हे शक्ति स्वरूपा माता, हमारे जीवन में भी तप, त्याग और अटूट विश्वास भर दीजिए। 🔱जय माता दी👣🔱 जय ब्रह्मचारिणी माता रानी की 🙏🚩
श्रीष त्रिपाठी 🇮🇳 tweet media
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Uday Thakur
Uday Thakur@Uday_T2·
A wondrous glimpse of Hanuman at sunrise, blessing the day ahead. 🙏Jai Hanuman ji🙏
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Ritika
Ritika@Im_Ritikaa·
मां आदिशक्ति के अद्भुत अलौकिक दर्शन ❣️ #नवरात्रि द्वितीय स्वरूप 🚩 #GodMorningFriday #ఉగాదిస్పెషల్2026 #hindunavvarsh May Maa Durga
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Ayodhya Darshan
Ayodhya Darshan@ShriAyodhya_·
Only our view shapes our choices.❤️‍🔥
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Ayodhya Darshan
Ayodhya Darshan@ShriAyodhya_·
|| भगवान से भी बड़ा उनका नाम || राजा सुकंत की कहानी.. हनुमान जी और श्री राम के बीच युद्ध ! नारद जी बड़े लीला-बिहारी हैं। वे हर लीला भगवान के नाम, महिमा, गुण, और शरणागति की महिमा को पुष्ट करने के लिए ही प्रकट करते हैं। वे स्वयं भगवान का साक्षात स्वरूप हैं। एक बार की बात है.. सुकंत नामक एक राजा था। वह बड़ा प्रतापी था। उस समय भगवान श्रीराम जी चक्रवर्ती सम्राट पद पर विराजमान थे। एक सभा में बड़े-बड़े ब्रह्म ऋषि विराजमान थे। नारद जी सुकंत जी को सभा के बाहर मिल गए। नारद जी ने उनसे पूछा- "अंदर प्रभु के दर्शन करने जा रहे हो?" सुकंत जी ने कहा, "हाँ।” नारद जी बोले, "वहाँ बहुत से ब्रह्मऋषि बैठे हैं। सबको प्रणाम भी करोगे?" सुकंत जी ने कहा, "हाँ, मर्यादा है, संतों को प्रणाम करने की।" नारद जी बोले, "विश्वामित्र जी को भी प्रणाम करोगे?" सुकंत बोले, "हाँ, वे तो ब्रह्म ऋषि हैं।" नारद जी बोले, "ब्रह्म ऋषि कहाँ हैं? वे तो क्षत्रिय कुल में, कौशिक वंश में प्रकट हुए हैं।" सुकंत बोले, "हाँ, पर उन्होंने तपस्या से ब्रह्म पद प्राप्त किया है।" नारद जी बोले, "पर मूल में तो क्षत्रिय ही हैं ना?" सुकंत बोले, "आप कहना क्या चाहते हैं?" नारद जी बोले, "उन्हें बस ऐसे ही प्रणाम कर लेना, माथा मत रखना। बाकी सब ऋषियों के आगे माथा टेक लेना" इसके बाद सुकंत जी भगवान के दरबार में गए। उन्होंने भगवान को नमन किया, सभी ऋषियों के चरणों में मस्तक रखा। पर जब विश्वामित्र जी के पास पहुँचे, तो केवल हाथ जोड़कर प्रणाम किया, लेकिन माथा नहीं रखा। विश्वामित्र जी ने ध्यान तक नहीं दिया। सभा पूर्ण हुई। इसके बाद नारद जी विश्वामित्र जी के पास आकर बैठे। नारद जी ने विश्वामित्र जी से पूछा, "आपने कुछ देखा?" विश्वामित्र जी बोले, "क्या?" नारद जी बोले, "सुकंत को?" विश्वामित्र जी बोले, "क्या बात हुई? मैंने तो ध्यान नहीं दिया" नारद जी बोले, "सुकंत ने सबको माथा टेककर प्रणाम किया, आपको बस ऐसे ही प्रणाम कर दिया।" विश्वामित्र जी बोले, "हाँ, उसने ऐसे तो किया, पर इस बात पर मेरा ध्यान नहीं गया। इसका कोई विशेष कारण है?" नारद जी बोले, "हाँ, वो कह रहे थे कि आप मूल में तो क्षत्रिय ही हैं, ब्रह्म ऋषि तो आप बाद में तपस्या से बने।" यह सुनते ही विश्वामित्र जी को बहुत क्रोध आया। नारद जी ने कहा, "उसे दंड तो मिलना ही चाहिए। आप जैसे ब्रह्म ऋषि के साथ ऐसा व्यवहार?" नारद जी ने वहाँ सुकंत को विश्वामित्र जी का अपमान करना सिखाया और यहाँ उनकी शिकायत भी कर दी। इसमें उनका कुछ विशेष उद्देश्य था। विश्वामित्र जी आवेश में खड़े हुए और बोले- "रघुनाथ! आपके दरबार में हमारा अपमान हुआ है!" श्री राम बोले, "प्रभु, आपका अपमान!" विश्वामित्र जी ने कहा, "सूर्य अस्त होने से पहले सुकंत का मस्तक मेरे चरणों में होना चाहिए!" इसपर श्री राम जी ने कहा, "प्रभु, मैं आपके सामने सत्य वचन कहता हूँ- यदि सूर्यास्त से पहले मैं उसका मस्तक आपके चरणों में न डाल दूँ, तो मैं रघुवंशी नहीं! आप शांत हो जाइए" नारद जी सीधा सुकंत जी के राजमहल पहुँचे। वो सुकंत जी से बोले-"अब तो शाम तक मारे जाओगे! भगवान श्री राम ने संकल्प कर लिया है कि तुम्हारा गला काटकर विश्वामित्र जी के चरणों में डालेंगे। सुकंत जी घबरा गए। बोले, "महाराज! आपने हमें फँसा दिया। हम तो साष्टांग प्रणाम कर लौटने ही वाले थे। आपने ही कहा था कि बस हाथ जोड़ देना।" नारद जी बोले, "हमें क्या पता था कि बात इतनी बिगड़ जाएगी? अब तो समस्या सच में फँस गई है।" सुकंत जी रोने लगे, "प्रभु! अब कैसे बचें? भगवान ने तो कह दिया है - 'मैं रघुवंशी नहीं यदि सूर्यास्त से पहले उसका मस्तक आपके चरणों में न पहुँचाऊँ।' और भगवान कभी मिथ्या वचन नहीं कहते। अब तो मैं मारा ही जाऊँगा। कोई उपाय है प्रभु?" नारद जी बोले, "एक ही उपाय है.. हनुमान जी। वही बचा सकते हैं।" सुकंत बोले, "पर राम जी की आज्ञा का विरोध हनुमान जी कैसे कर सकते हैं? और फिर, हमारी पहुँच भी कहाँ है हनुमान जी तक?" नारद जी बोले, "हनुमान जी को यदि कोई राम जी के अलावा आज्ञा दे सकता है, तो वो हैं माता अंजनी। चलो, मैं तुम्हें उनसे मिलवाता हूँ।" नारद जी उन्हें अंजनी माता के पास ले गए। सुकंत जी ने साष्टांग दंडवत प्रणाम किया और रोते हुए कहा, "माँ! रक्षा कीजिए।" माता अंजनी बोलीं, "बेटा, बताओ तो सही, क्या समस्या है?" सुकंत बोले, "माँ, त्रिभुवन में अब केवल आप ही हैं जो मेरी रक्षा कर सकती हैं। एक राजा मुझे मारना चाहता है।" माता अंजनी ने कहा, "मेरा पुत्र महावली, हनुमान है। यदि मैं उसे आज्ञा दूँ, तो वह कभी मेरी आज्ञा का उल्लंघन नहीं करेगा। जाओ, मैं तुम्हारी रक्षा का व्रत लेती हूँ।" नारद जी मन ही मन प्रसन्न हुए - "काम बन गया! अब भगवान के नाम की महिमा प्रकट होगी।" हनुमान जी से माता अंजनी ने कहा, "बेटा, मैंने इसकी रक्षा का व्रत लिया है।" हनुमान जी बोले, "आपकी आज्ञा मेरे सिर-आँखों पर! त्रिभुवन में कोई ऐसा पैदा ही नहीं हुआ कि मेरी माँ किसी की रक्षा का व्रत ले और वो उसे मार दे! कौन राजा है, जो इसे मारना चाहता है? सुकंत ने हाथ जोड़कर धीरे से कहा, "भगवान श्रीराम।" हनुमान जी सुनकर सन्न रह गए। "क्या! मेरे स्वामी? माँ, आपने किसके विरुद्ध रक्षा का व्रत ले लिया!" "माँ, ये तो मेरे प्रभु हैं। उनके विरुद्ध मैं कैसे खड़ा हो सकता हूँ?" माता अंजनी बोलीं, "बेटा, हमने तो वचन दे दिया है। अब उसे निभाना होगा।" हनुमान जी बोले, "चलो, एकांत में चलो।" वे सुकंत को एकांत में ले गए। संध्या का समय निकट था। सूर्यास्त होने ही वाला था। हनुमान जी बोले, "अब बस एक उपाय है - तुझे अपनी हर श्वास में राम नाम जपना होगा। जहाँ राम नाम रुका, वहीं भगवान का बाण तुझे समाप्त कर देगा। पर यदि तेरी हर श्वास में राम-नाम चलता रहा, तो तू बच जाएगा। तू बस सीताराम... सीताराम... सीताराम - यही जपता रह। यह क्रम कभी टूटना नहीं चाहिए। यदि बीच में ज़रा भी अंतर पड़ा, तो प्रभु का अमोघ बाण तुझे काट देगा। अब तू चिंता मत कर। बैठ जा और नाम जप शुरू कर दे। सुकंत बैठ गए और जपने लगे, "सीताराम... सीताराम... सीताराम..." हनुमान जी महाराज ने करताल उठाई और वो भी प्रभु का नाम जपने लगे और उनके आस-पास नृत्य करने लगे। उधर भगवान श्रीराम ने अमोघ बाण का संधान किया। छोड़ा गया, और वह तीव्र वेग से चला... लेकिन जहाँ हनुमान जी महाराज और सुकंत नाम जप कर रहे थे, वहाँ पहुँचकर बाण रुक गया। उसने उन दोनों की परिक्रमा की और वापस लौट गया! भगवान श्रीराम चकित रह गए। "आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ! अमोघ बाण बिना लक्ष्य को बेधे वापस कैसे आ गया?" वे आश्चर्य से बोले, "त्रिभुवन में ऐसा कौन है, जिससे मेरा बाण टकराकर लौट आया?" उन्होंने लक्ष्मण जी से कहा, "जहाँ सुकंत हैं, वहाँ तुरंत जाओ। देखो, वहाँ ऐसा क्या हो गया कि बाण ने उसका गला नहीं काटा?" लक्ष्मण जी वहाँ पहुँचे। और जो दृश्य देखा वो अद्भुत था। हनुमान जी की आँखों में आँसू थे। वे प्रेम में डूबे, चारों ओर घूमते हुए नाम-संकीर्तन कर रहे थे "सीताराम... सीताराम... सीताराम..." सुकंत भी समाधि में लीन थे। लक्ष्मण जी का भी हृदय पिघल गया। वे भी वहाँ बैठ गए और तालियाँ बजाते हुए जपने लगेः "सीताराम... सीताराम... सीताराम..." इधर भगवान श्रीराम ने ध्यान किया - "बाण तो वापस आ गया... और अब लक्ष्मण भी नहीं लौटे और ना ही उनकी कोई सूचना आई... वहाँ कुछ तो विशेष चला है..." विश्वामित्र जी ने कहा: "आपने संकल्प लिया था कि संध्या से पहले इसका शीश काटकर लायेंगे।" भगवान श्रीराम ने विनम्रता से कहा: "गुरुदेव, कृपया धैर्य रखें। मैं स्वयं जाता हूँ।" यह सुनकर विश्वामित्र जी बोले: “तो मैं भी साथ चलूँगा। देखूँगा, तुम क्या निर्णय लेते हो।" साथ में सभी ब्रह्मर्षि और देवर्षि नारद जी भी वीणा लिए चल पड़े। भगवान श्रीराम वहाँ पहुँचे। जो दृश्य देखा, वह अद्भुत था। सुकंत प्रभु श्री राम का नाम जप रहे थे। हनुमान जी करताल लेकर कीर्तन कर रहे थेः "सीताराम... सीताराम... सीताराम..." उनके साथ लक्ष्मण जी भी कीर्तन में लीन थे। भगवान श्रीराम की आंखों में करुणा झलक उठी। "अब मुझे समझ आया,” प्रभु बोले, "जिसके गले में निरंतर मेरा नाम चल रहा हो - वहाँ मेरा अमोघ बाण भी छेदन नहीं कर सकता।" श्री राम ने विश्वामित्र जी से कहा, "गुरुदेव, आपने आज्ञा दी थी कि इसका शीश लाना है, लेकिन यह नहीं कहा था कि काटकर ही लाना है।" श्री राम ने सुकंत से कहा, "रखो अपना मस्तक विश्वामित्र जी के चरणों में!" विश्वामित्र जी प्रसन्न हो गए। नारद जी मुस्कराए और बोलेः "प्रभु ! न सुकंत का दोष है, न विश्वामित्र जी का। मैं बस यह दिखाना चाहता था - कि आपके अमोघ बाण से भी अधिक शक्तिशाली आपका 'नाम' है। जिस गले में निरंतर राम नाम गूंजता है, वहाँ सुदर्शन चक्र भी असमर्थ है।" नाम जापक एक अमोघ शक्ति से संपन्न हो जाता है। आप नाम जप शुरू करें। कुछ दिन नाम जपने के बाद अगर आपके जीवन में विपत्तियाँ आने लगे तो हारना मत, यह आपके पुराने कर्मों का हिसाब हो सकता है। यह एक युद्ध है। कभी विपक्ष से बाण आकर घायल करता है तो शूर-वीर पीठ दिखाकर थोड़ी भाग जाता है। चाहे जितनी विपत्तियाँ आएँ, अब नाम जप नहीं छूटना चाहिए। उन विपत्तियों का कोई प्रभाव आप पर नहीं पड़ेगा। हरि के स्मरण से सारी विपत्तियाँ दूर हो जाती हैं।
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Śrīrām 🇮🇳 (Modi's Family)
Nothing compares to the peace of this divine darshan at the heart of Warangal and Hanamkonda.
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राधा
राधा@Radha88139·
"शेरावाली माँ मेरी, तेरी दहाड़ में बसती है शक्ति अपार, तेरे चरणों में झुककर मिलता है सदा सुकून और प्यार!"
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राम 🏹
राम 🏹@Ram9699_·
शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं, वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌। हस्ते स्फाटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्‌, वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्‌॥ जय मां विद्यादायिनी विनाधारिणी सरस्वती देवी 🚩🙏🏻
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Akshita Rai
Akshita Rai@AkshitaL_·
धन, सम्पदा, शान्ति, समृद्धि की देवी महालक्ष्मी माँ सुन्दर सरूप अलौकिक दर्शन
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Anu Satheesh 🇮🇳🚩
Anu Satheesh 🇮🇳🚩@AnuSatheesh5·
Maha Mangalarati darshan from Sri Devi Karumariamman Temple Navaratri special Alankaram
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माखन सिंह🦁तंवर🚩
चैत्र नवरात्र व्रत की फलाहार बनाने की संपूर्ण विधि नीचे देखे👇 1. साबूदाना खिचड़ी सामग्री: साबूदाना, उबले आलू, मूंगफली, हरी मिर्च, जीरा, सेंधा नमक, घी विधि: साबूदाना 4–5 घंटे भिगो दें। कढ़ाई में घी गर्म करके जीरा, मूंगफली और हरी मिर्च डालें। फिर कटे हुए आलू डालकर भूनें। अंत में साबूदाना और सेंधा नमक डालकर 5–7 मिनट हल्का चलाएं। 2. साबूदाना वड़ा सामग्री: साबूदाना, उबले आलू, मूंगफली, हरी मिर्च, सेंधा नमक विधि: साबूदाना भिगोकर आलू व मूंगफली के साथ मिलाएं। इसमें मिर्च व नमक डालकर गोल वड़े बनाएं। मध्यम आंच पर सुनहरा होने तक तलें। 3. सामक चावल की खिचड़ी सामग्री: सामक चावल, आलू, जीरा, घी, सेंधा नमक विधि: घी में जीरा डालकर आलू भूनें। सामक चावल डालकर मिलाएं और पानी डालें। ढककर 10 मिनट तक पकाएं। 4. सामक चावल पुलाव सामग्री: सामक चावल, व्रत योग्य सब्जियाँ, जीरा, घी, सेंधा नमक विधि: घी में जीरा व सब्जियाँ भूनें। सामक चावल डालकर पानी डालें और पुलाव की तरह पकाएं। 5. कुट्टू के आटे की पूरी सामग्री: कुट्टू का आटा, उबला आलू, सेंधा नमक विधि: आटे में आलू मिलाकर गूंथ लें। छोटी पूरियाँ बेलकर गरम तेल में तलें। 6. कुट्टू का चीला सामग्री: कुट्टू का आटा, पानी, हरी मिर्च, सेंधा नमक विधि: आटे का पतला घोल बनाएं। तवे पर डालकर दोनों तरफ से सुनहरा सेकें। 7. सिंघाड़े का हलवा सामग्री: सिंघाड़े का आटा, घी, चीनी, पानी विधि: घी में आटा सुनहरा होने तक भूनें। पानी व चीनी डालकर गाढ़ा होने तक पकाएं। 8. सिंघाड़े की पूरी सामग्री: सिंघाड़े का आटा, उबला आलू, सेंधा नमक विधि: आटा गूंथकर पूरियाँ बेलें और तेल में तलें। 9. आलू की व्रत वाली सब्जी सामग्री: उबले आलू, जीरा, हरी मिर्च, सेंधा नमक, घी विधि: घी में जीरा व मिर्च भूनें। आलू डालकर हल्का चलाएं और नमक डालकर 5 मिनट पकाएं। 10. शकरकंद चाट सामग्री: उबली शकरकंद, नींबू, सेंधा नमक, काली मिर्च विधि: शकरकंद काटकर उसमें नींबू रस, नमक व मिर्च डालकर मिलाएं। 11. फलाहारी सलाद सामग्री: सेब, केला, पपीता, अनार, शहद विधि: सभी फल काटकर एक बाउल में मिलाएं। ऊपर से शहद डालें। 12. दही और मखाना सामग्री: दही, मखाना, सेंधा नमक विधि: मखाना घी में हल्का भून लें। दही में मिलाकर नमक डालें। 13. मखाने की खीर सामग्री: मखाना, दूध, चीनी, इलायची विधि: मखाना भूनकर दूध में उबालें। चीनी व इलायची डालकर गाढ़ा होने तक पकाएं। 14. राजगिरा लड्डू सामग्री: राजगिरा, गुड़, घी विधि: गुड़ पिघलाकर उसमें राजगिरा मिलाएं। हल्का ठंडा होने पर लड्डू बना लें। 15. नारियल पानी व फल सामग्री: नारियल पानी, ताजे फल विधि: फल काटकर नारियल पानी के साथ सेवन करें। जय माता दी
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Jaya_Upadhyaya
Jaya_Upadhyaya@Jayalko1·
A divine moment captured — Rare Aarti Darshan of Maa Kamakhya from Guwahati 🌺
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Jaya_Upadhyaya
Jaya_Upadhyaya@Jayalko1·
“O Skanda, hold my mind steady as You hold the Vel unshaken.” Om Saravana Bhava✴️
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