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अदब्धानि वरुणस्य व्रतानि Politics | Culture | Astrology (Views are personal)

Jaipur Sumali Haziran 2015
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Mudit@MuditUpdates·
साध्वी ऋतम्भरा जी ने अपने जीवन में एक प्रतिज्ञा की कि मैं अनाथ बच्चों की सेवा करके मदर टेरेसा नाम के बुलबुले को फोड़ दूंगी। अनाथ बच्चों का धर्मान्तरण रोकना मेरे जीवन का लक्ष्य होगा, मैं वात्सल्य ग्राम की स्थापना करूंगी। मदर टेरेसा अनाथों की आड़ में ज़बरन धर्मपरिवर्तन, गर्भपात, महिलाधिकारों का हनन, तानाशाही, अपराधियों का समर्थन कर उनसे पैसा लेना जैसे कृत्य करती थी। जियानलुइगी नुज़ी नाम की पत्रकार ने तो खुलासा किया था कि वेटिकन के एक बैंक में मदर टेरेसा ने चैरिटी के नाम पर अरबों डॉलर इकट्ठे कर रखे थे। परन्तु अरबों डॉलर होने पर भी ग़रीबों का इलाज न कराकर उन्हें पीड़ा सहन करने को कहती थी, पर जब खुद बीमार पड़ी सबसे उच्च अस्पताल में इलाज कराया। दुनिया भर से दान वसूलने के बावजूद टेरेसा के संस्थानों की हालत दयनीय थी। धर्मान्तरणकारी मदर टेरेसा को पश्चिम ने 1979 में नोबल से पुरस्कृत किया, और 1980 में उसे भारतरत्न दे दिया गया। मदर टेरेसा के इस पाखण्ड को उसके जीवित रहते साध्वी ऋतम्भरा ने अप्रैल 1995 में इंदौर की सभा में एक्सपोज़ कर दिया और उसे जादू के नाम पर धर्मान्तरण करने वाली घोषित कर दिया। उस समय चर्च की भारतीय शाखा खान्ग्रेस का शासन मप्र में था, जिसे अपनी मदर टेरेसा का अपमान सहन नहीं हुआ और साध्वी ऋतम्भरा समेत 169 हिन्दुओं को जेल में ठूंस दिया। इसी मदर टेरेसा के इतने कुकृत्य होने के उपरान्त भी पोप ने उसे सन्त घोषित कर दिया और भारत में स्कूलों में जबरन उसे वात्सल्य की मूर्ति के रूप में पढ़ाया जाता रहा। मदर टेरेसा की छत्रछाया में भारत की हिन्दू विरोधी वामपंथी शक्तियां भी फलती फूलती रहीं इसलिए वर्तमान के सभी वामपंथी अपने आपको मदर टेरेसा का कर्जदार मानते हैं। तब साध्वी ऋतम्भरा ने प्रतिज्ञा की कि पन्ना धाय के देश में एक कपटी स्त्री वात्सल्य की मूर्ति के रूप में स्थापित की जाए यह एक बहुत बड़ा षड्यन्त्र है और उन्होंने हिन्दुत्व की रेखा इस क्षेत्र में बड़ी करने की ठान ली, जिसमें सपा, कांग्रेस आदि सब रोड़े अटकाते रहे। पर उन्होंने अपने आपको इस एक असहाय बच्चों व महिलाओं की सुरक्षा के कार्य में पूर्णतः झोंक दिया। उसी का परिणाम निकला वात्सल्य ग्राम। ये कैसा हिन्दू समाज है जो साध्वी ऋतम्भरा को न्यून करने की कोशिश कर रहा है, जिस साध्वी के प्रयास से मदर टेरेसा का प्रोजेक्ट न्यून हो गया, अनाथों के क्षेत्र में मिशनरियों के कथित अहसान से हिन्दू समाज को मुक्ति मिली। पर हिन्दू समाज इतना कृतघ्न है कि उनके एक सामान्य से बयान, जिसमें वे हिन्दू समाज के ही संघर्ष को, अपमान को याद कर रही हैं, उसके आधार पर उनके जाति, लिंग, चरित्र का ऐसा वीभत्स चीरहरण करने लगा। हर प्रकार से कैसे भी साध्वी ऋतम्भरा जिस एक छोटी पर हिन्दुत्व के प्रति समर्पित बालिका को उसके गुरु स्वामी परमानंद गिरिजी ने ऐसे दिव्य संकल्पों को पूरा कर देने वाली बना दिया, उस भगवती का चीरहरण निकृष्ट नराधमों ने किया। यहां हिन्दू समाज का चरित्र भी दिख जाता है कि कैसे वेटिकन मदर टेरेसा जैसी कपटी को भी अपने लाभ के लिए सन्त घोषित कर देता है और कैसे कुछ हिन्दू एक परमवात्सल्यमयी माता का भी चरित्रहनन करते हैं। क्या यह भगवती के उपासकों का देश है? वही खोखला अहं, वही ईर्ष्या, सम्मिलित होकर कार्य करने की शक्ति का अभाव, गुलाम जाति का स्वभाव है, परन्तु हमें इसे उखाड़ फेंकने की चेष्टा करनी चाहिए। यही terrible jealousy हमारे समाज की प्रधान characteristic है। कौन हैं मां साध्वी ऋतम्भरा ? अनुसूया, विश्ववारा, सती ब्रह्मवादिनियों को तो मैंने नहीं देखा, पर यह हमारा सौभाग्य है कि हमारे समय में मां साध्वी ऋतम्भरा विराजमान हैं। उनकी वाणी के एक एक शब्द से करुणा टपकती है। शब्द प्रतिशब्द ऐसा लगता है कि अभी वे भावोद्रेक से रो पड़ेंगी। हृदय के भावतल में ही वे सदा आसीन रहती हैं। एक एक शब्द वे हृदय से बोलती हैं, करुणा से ओतप्रोत होकर बोलती हैं। कैसा भी रागद्वेष हानिलाभ यशोपयश का भाव उन्हें छू भी नहीं गया है। विवेकानंद का वो भावनाओं से भरा हृदय यदि किसी स्त्री में होता, तो वे शायद ऋतम्भरा ही होतीं, जिसे अपने समाज के अनाथों और असहायों की चिंता थी, तीव्र धार्मिक स्वाभिमान के साथ, शेर के समान। ऋत से तो वे लबालब भरी हुई ही हैं, करुणा से भी आप्लावित हो रही हैं। पुराने समय में जो माँ आनंदमयी जैसी माताओं का वर्णन मिलता है, वह मैं मां ऋतम्भरा में ही देखता हूँ। ऐसी साध्वी की वाणी निष्फल भी नहीं जाती। मेरे नानाजी ने बताया था कि राममन्दिर के लिए एक एक रुपया झोली फैलाकर इकट्ठा किया करती थीं साध्वी ऋतम्भरा जी गली गली धूप में घूम घूमकर, यह कहकर कि इतने हिन्दू एक एक रुपया दे दें तो भव्य मन्दिर निर्माण को इतने करोड़ रुपए हो जाएंगे... आज जैसे आसान समय में नहीं बल्कि उस समय जब हिंदुत्व एक अपराध समझा जाता था, और "परिंदा भी पर नहीं मार सकता" कहकर धमकाने वाले शासन करते थे... तभी मां ऋतम्भरा के आगे तो पूरा इतिहास डोल गया होगा, बोलीं, कितना अपमान सहकर यहां पहुंचे हैं। कभी महसूस नहीं कर पाओगे, कि कितने कष्ट के बाद उनके मुंह से ये बोल फूटा होगा, अनुभव नहीं किया ना वह इतिहास। "स्त्रियाःसमस्तास्तव देविभेदाः।" कहा है, कठिन है बहुत। पर कोई कोई विभूति होती है जिसमें जगन्माता के दर्शन हो जाते हैं, मुझे मां साध्वी ऋतम्भरा में दर्शन होते हैं। उनके मुखमण्डल पर सिर्फ भोलापन ही दिखता है, सभी के लिए वात्सल्य ही दिखता है। उनके गुरुदेव स्वामी श्री परमानंद गिरिजी महाराज बहुत बड़े वेदान्ती ब्रह्मवादी महात्मा हैं। वेदान्त के ऐसे ज्ञाता भी दुर्लभ ही हैं। उनका अद्वैत जीवंत अद्वैत है, क्षुद्र हृदय वालों जैसा नहीं कि सिद्धांत में कुछ और व्यवहार में उससे उलट। @MuditUpdates #sadhviritambhara
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सुवेंदु अधिकारी को भाजपा में कौन लाया ? मोदी -अमित शाह भाजपा में उन्हें 'फ्री हैंड' किसने दिया ? मोदी -अमित शाह ने जब अधिकारी भाजपा में आये तब कट्टरों का क्या रोना धोना था ? भाजपा ने सारी बाहरी भर लिये .. कार्यकर्ता तो सिर्फ दरी बिछाने के लिये है ! इस चुनाव में बंगाल में भाजपा को कौन लीड कर रहा था ? मोदीजी - अमित शाह और सुवेंदु अधिकारी। इस चुनाव में कट्टर लोग सोशल मीडिया पर क्या रहे थे ? भाजपा को बंगाल में हराने के लिये अपनी पूरी ताकत लगा रहे थे , ममता बेनर्जी की तारीफ कर रहे थे , मोदी -शाह का मजाक उड़ा रहे थे , मोदी को मौलाना बता रहे थे , मतगणना के बाद टीएमसी की जीत के बाद हिंदुओं के खिलाफ दंगे कितने बजे शुरू होंगे ये सर्वे करवा रहे थे। नतीजों के बाद कट्टर - झट्टर खंबा नोंचने के अलावा क्या कर रहे थे ? बंगाल में मुख्यमंत्री कौन होना चाहिये इस पर फतवा जारी कर भ्रम फैला रहे थे। भाजपा द्वारा सुवेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री बनाने के बाद .. भाजपा कार्यकर्ता :- खुशी के आँसू। कट्टर - झट्टर :- हमने बनवाया .. हमने बनवाया..हमने बनवाया। सुना है चुड़ैल भी एक घर छोड़ देती है लेकिन इनके आगे वो भी फेल है 😃😃 Ashish Retarekar
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@Felumittirr @SL_staylogical एक देश में दो निशान दो विधान नहीं चल सकते। ― श्यामाप्रसाद मुखर्जी
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Mudit@MuditUpdates·
धन्य हैं वे जो विनम्र हैं क्योंकि वे पृथ्वी का राज्य भोगेंगे! जो भगवान के भक्त हैं, वे विधर्मियों के प्रति प्रचंड और अजेय हैं, किन्तु संतों और भक्तों के प्रति परस्पर करुणा, प्रेम से परिपूर्ण! तुम उन्हें मंदिरों में भगवान की पूजा में नतमस्तक, भक्ति में लीन और प्रणाम करते देखोगे! उनके चेहरों पर भक्ति के पवित्र चिह्न हैं, जो उनके प्रणाम के प्रकाश से उद्भासित हैं! शास्त्रों में कहा गया है, एक बीज अंकुरित होकर शक्ति संचय करके स्वयं अपने आधार पर खड़ा होकर बोने वालों को आश्चर्य और आनंद से भर देता है! ऐसे ही भगवान ने पुण्य कर्म करने वाले धर्मनिष्ठ भक्तों को तेज, वीरता, क्षमा और महान पुण्यफल का वचन दिया है, जिन गुणों को देख विधर्मी क्रोध से जल उठते हैं! @MuditUpdates #SuvenduAdhikari
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अभय
अभय@_Sarfiraa·
ना बंगाल में हिंदू बचाया, ना तमिलनाडु में ब्राह्मण बस दिल्ली में बैठकर किताब और इंटरनेट पर बतकुच्चन करवा लो और तुम्हारा लगाव तो किसी पार्टी से है नहीं तो नाक क्यों घुसेड़ रहे हो, जाओ भारत को उपनिवेशवाद से मुक्त कराओ अंग्रेजी बोलकर।
Sai Deepak J@jsaideepak

"Mandalization" of Hindutva after such a stupendous victory in WB(!), is a completely avoidable stra-gedy. While every State has its realities, the success of a caste-agnostic Hindutva based on shared external threats & internal aspirations could be a great template for Bharat.

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स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती
विचित्र चिन्तन देखना है? कल तक जो शुभेन्दु अधिकारी के पक्ष में लिख रहे थे कल से वे उनका विरोध करते हुए लिखेंगे कि मोदी-शाह ने उसे मुख्यमन्त्री बनाया जो कांग्रेस-टीएमसी से भाजपा में आया। जिसने भाजपा को खून पसीने से सींचा उसे दरी बिछाने को छोड़ दिया। भाजपा में कार्यकर्त्ताओं को महत्त्व नहीं दिया जाता। -जिसे विरोध ही करना है वो विरोध ही करेगा। आप कुछ भी कर लीजिए। इसीलिए मोदी-शाह इन लोगों की बातों को महत्त्व नहीं देते,,क्योंकि जो अयोध्या में भगवान् श्रीराम का मन्दिर बनाने,धारा ३७० हटाने, CAA लागू करने जैसे अनेक असम्भव जैसे दिखने वाले कार्य हो जाने पर भी खुश नहीं हो सके उन्हें कुछ भी करके खुश नहीं किया जा सकता।
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Mudit@MuditUpdates·
@seema66766155 जय जय श्री राम
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जो भगवान के भक्त हैं, वे विधर्मियों के प्रति प्रचंड और अजेय हैं, किन्तु संतों और भक्तों के प्रति परस्पर करुणा, प्रेम से परिपूर्ण! तुम उन्हें मंदिरों में भगवान की पूजा में नतमस्तक, भक्ति में लीन और प्रणाम करते देखोगे! उनके चेहरों पर भक्ति के पवित्र चिह्न हैं, जो उनके प्रणाम के प्रकाश से उद्भासित हैं! शास्त्रों में कहा गया है, एक बीज अंकुरित होकर शक्ति संचय करके स्वयं अपने आधार पर खड़ा होकर बोने वालों को आश्चर्य और आनंद से भर देता है! ऐसे ही भगवान ने पुण्य कर्म करने वाले धर्मनिष्ठ भक्तों को तेज, वीरता, क्षमा और महान पुण्यफल का वचन दिया है, जिन गुणों को देख विधर्मी क्रोध से जल उठते हैं! @MuditUpdates #SuvenduAdhikari
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Mudit@MuditUpdates·
संघ के पास एक बहुत बड़ा व क्लियर विजन है जिसे लेकर वह काम करता है। इसलिए बंगाल में संघ या भाजपा को क्या करना है यह उन हराम^^ज्यादे ट्विटरीयों को नहीं बताना चाहिए जिनका बंगाल विजय में शून्य योगदान है और पूरे बंगाल चुनाव के दौरान संघ को गरिया रहे थे। उस समय गरीब से गरीब व सम्पन्न से सम्पन्न हिन्दू बंगाली की आशा की किरण यह संघ भाजपा ही थी, मोदी शाह ही थे। संघ भाजपा केवल बंगाली मतदाता के प्रति पूर्ण रूप से जिम्मेदार है क्योंकि संघ समाज में ही है, संघ समाज से अलग नहीं है, इसलिए वह अच्छी तरह जानता है बंगाल में कब क्या कैसे करना है। समाज से कटकर दिन रात गाली गलौज करने वाले ट्विटर एक्सपर्ट्स से मोदी शाह व संघ भाजपा को सीखना पड़े भगवान हिन्दू राष्ट्र को ऐसे दुर्दिन न दिखाए!!
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Sensei Kraken Zero
Sensei Kraken Zero@YearOfTheKraken·
Suvendu of the House Adhikari, the First of his Name, Lion of Nandigram, Bane of Mamata the Maleficient, Vanquisher of Abhishek the Uncouth, Tamer of Tyranny, Breaker of Chains, Matador of Bhabanipur, Voice of the People, Grand Patriarch of the Society of Enlightened Bhadraloks, Lord of the Siliguri Corridor and Protector of Vangadesha. Long May He Reign.
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@Aadii009 अंत में अर्जुन कह देता है, """करिष्ये वचनं तव""", अब कोई शंका नहीं, बस आपका वचन ही है शासन।
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Aadi🏹 ☀️🐚
Aadi🏹 ☀️🐚@Aadii009·
Lol. Confused Arjuna literally surrenders to Krishna. कार्पण्यदोषोपहतस्वभावः पृच्छामि त्वां धर्मसंमूढचेताः। यच्छ्रेयः स्यान्निश्चितं ब्रूहि तन्मे शिष्यस्तेऽहं शाधि मां त्वां प्रपन्नम्।।
Kashvi@KashviSpeaks

The Bhagavad Gita exists because God himself was questioned Not because he was blindly followed, just saying…

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पश्चिम बंगाल के पहले हिन्दू मुख्यमंत्री श्री शुभेन्दु अधिकारी @SuvenduWB
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जो भगवान के भक्त हैं, वे विधर्मियों के प्रति प्रचंड और अजेय हैं, किन्तु संतों और भक्तों के प्रति परस्पर करुणा, प्रेम से परिपूर्ण! तुम उन्हें मंदिरों में भगवान की पूजा में नतमस्तक, भक्ति में लीन और प्रणाम करते देखोगे! उनके चेहरों पर भक्ति के पवित्र चिह्न हैं, जो उनके प्रणाम के प्रकाश से उद्भासित हैं! शास्त्रों में कहा गया है, एक बीज अंकुरित होकर शक्ति संचय करके स्वयं अपने आधार पर खड़ा होकर बोने वालों को आश्चर्य और आनंद से भर देता है! ऐसे ही भगवान ने पुण्य कर्म करने वाले धर्मनिष्ठ भक्तों को तेज, वीरता, क्षमा और महान पुण्यफल का वचन दिया है, जिन गुणों को देख विधर्मी क्रोध से जल उठते हैं! @MuditUpdates #SuvenduAdhikari

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श्री शुभेंदु अधिकारी - पश्चिम बंगाल के पहले हिन्दू मुख्यमंत्री। देश की राजधानी में भी पहली बार 822 साल बाद हिन्दू सरकार 2014 में आई थी और बंगाल में भी 822 साल बाद 2026 में हिन्दू सरकार बनी। @SuvenduWB #suvenduadhikari
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