मनीष कुमार nag-retweet
मनीष कुमार
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आख़िर हिंदू लड़कियों की मतिभ्रष्ट क्यों हो गई है? क्या इतनी-सी बात नहीं समझ आती कि मुसलमान लड़के के लिए तुम भोगदासी के अतिरिक्त कुछ नहीं? कितने केस चाहिए, कितनी मिसालें और कितनी चीखें?
और अपने भाईजानों की मदद के लिए ज़िहादन बहनें भी ज़मीन पर कार्यरत हैं। हिंदू लड़कियों को फँसाकर मुसलमान लड़कों को सौंपती हैं। यह कुछ ही मामले नहीं है। कुछ ही सामने आए हैं, लेकिन नेटवर्क, पैटर्न और तारतम्यता बताती है कि यह समूचे भारत में चल रहा है।
टीसीएस मामले में वारिस पठान से लेकर अरफ़ा ख़ानम उन श्वानों को कवर देने के लिए मैदान में हैं। बाक़ी लिबरल और इस्लामिस्ट चुप है। इन आत्महीनों से निंदा तक नहीं होती। ये अपने लक्ष्य में इतने अडिग है।
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गोरखपुर के निषाद हिन्दू समुदाय के दो सगे भाई, निखिल सहनी और अनीश सहनी मालेगांव में बिल्डिंग और ऑफिस इत्यादि के रंगाई पुताई का कॉन्ट्रेक्ट लेते थे
उन्होंने मोहम्मद राजा और अली नाम के दो मुस्लिम युवकों को काम पर रखा था।
एक विवाद के बाद, दोनों मुस्लिम युवकों ने उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया और बकरी काटने वाले चाकू से उन पर 25 बार वार किए। दोनों सगे भाइयों की अब मौत हो चुकी है। उनके परिवार में अब कोई कमाने वाला नहीं बचा है।
किसी को भी नौकरी पर रखने के पहले यह जान लीजिए कि आप किसे नौकरी पर रख रहे हैं
पुलिस अभी तक हत्यारों को गिरफ्तार नहीं कर पाई है।
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अमेरिका या कनाडा में बसे भारतीयता के प्रखर शोधक @RajivMessage वर्षों से इस बात को उठा रहे हैं, तथ्यों के साथ सतर्क कर रहे हैं, कैसे भारत की दिग्गज कंपनियां अमेरिका के हार्वड व विश्व की अन्य यूनिवर्सिटीज को #भारत_और_हिंदुत्व विरोधी शोधकार्य, रणनीति बनाने के लिए फंडिंग कर रही है। बावजूद यदि "भारत का बहुसंख्य" अपनी ही विद्वता को बोझ से दबा, अन्य को ना सुनने-समझने-स्वीकार करने की क्षमता खो चुका है तो #प्रभु_श्रीराम ही सहाय।
खुद को करो इतना बुलन्द कि बाकी सब बौने हो जाएं।
#TCS
@narendramodi
@AmitShah

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This is really shocking : Some miscreants have put a urine filled condom at a temple gate in Delhi...
I hope @DelhiPolice will find the culprits soon and set an example...
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#Live: बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करते हुए… twitter.com/i/broadcasts/1…
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प्रधानमंत्री @narendramodi के कहे, "एक हाथ में #कुरान और एक हाथ में #कम्प्यूटर" की बड़ी खिल्ली उड़ा रहे हैं, हिंदुत्व के कट्टर योद्धा। मेरा मानना है, कुछ भी करने को हर व्यक्ति स्वतन्त्र हैं। जवाबदेह भी खुद होगा।
लेकिन मेरा अधिकार भी सवाल खड़े करना है, इनसे एक सवाल..सलीम वास्तिक जैसे तमाम मुसलमान किस कोख से जन्म लिए? पदयात्रा कर रहे हैं? ये तमाम कुरान की पैदाइश हैं या कम्प्यूटर की? किस माध्यम से आप इन तक या आप तक पहुंच रहे हैं? यह #एक्स_मुस्लिम प्रजाति कहां से आई?
इस्लाम और कम्युनिज्म का सबसे बड़ा #शत्रु हिंन्दुत्व नहीं, #संवाद है। संवाद जितना अधिक व्यापक होगा, सशक्त होगा..स्वच्छ होगा..हिंदुत्व उतना ही अधिक स्थापित होगा। कल्याणकारी होगा। विजयी होगा।
इस #आभासी_पटल पर हम और आप क्या कर रहे हैं? संवाद ही तो कर रहे हैं ना? या पकौड़ी छानते हैं मिलकर? विमर्श-संवाद से दृष्टिकोण बना रहे हैं। साझा सहमति खड़ी कर रहे हैं। व्यवस्था संशोधन का प्रयास कर रहे हैं।
तो आपको क्या लगता है, संवाद से मुस्लिम या कोई समाज खारिज बचा है?
#कम्प्यूटर यानी संवाद का वाहक...#कुरान यानी अलगाव। स्थिरता। संवादहीनता। जड़ता। वर्चस्व।
@PMOIndia
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पश्चिम बंगाल के वोटर कितने खौफ में जीते हैं इसका अहसास आपको यह वीडियो देख कर हो जाएगा।
सेंट्रल फोर्सेस के यह अधिकारी गरीब लोगों की बस्तियों में जाकर उन्हें समझा रहे हैं कि बिना किसी डर के वोट डालने जाएं। और जो भी उन्हें धमकाएगा उसे वोट देने लायक नहीं छोड़ा जाएगा।
इसके बाद भी बुजुर्ग कहते हैं कि वो वोट देने नहीं जायेंगे।
पीछे से एक महिला की आवाज सुनें, "आप तो चले जाएंगे..वो लोग हमारे घर आ जाएंगे"
समझिए कि पश्चिम बंगाल में कैसे चुनाव जीते जाते रहे हैं।
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@sumantkabir वाह दादा!
कितने स्पष्ट और कम शब्दों में आपने समझा दिया कि जब तक हिंदू है, तभी तक आप के पास पूजा और अर्चना की स्वतंत्रता है...
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आज देश डॉ भीमराव अंबेडकर जी की जन्मजयंती मना रहा है। पक्ष-विपक्ष में बहुतेरी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही है। लेकिन ऐसे में अंबेडकर जी के भाषण के एक अंश को लोकविमर्श में रखना चाहूंगा। जो अंबेडकर जी के जीवन पर सर्वाधिक विश्वसनीय और अधिकृत लेखक "धनन्जय कीर" की पुस्तक में सुरक्षित है, अंबेडकर जी के एक भाषण के रूप में। जिसमें अंबेडकर जी कहते हैं...
"..अछूत महिलाओं को #ब्राह्मण महिलाओं से सीखना चाहिए, कैसे अभाव में भी अपने बच्चो को #शिक्षित किया जाता है, और घर को #साफ_सुथरा रखते हैं।"
यह वाक्य बताता है, डॉ अंबेडकर की दृष्टि में ब्राह्मण व्यवस्था जीवन का #श्रेष्ठतम_मार्ग है।
उदाहरण के लिए इन व्यक्ति का वीडियो देखिए, घण्टी बजाकर, गले में रुद्राक्ष की माला डाल अंबेडकर जी की #आरती कर रहे हैं। चाहते तो लाऊड स्पीकर लगाकर पांच वक्त सजदा भी कर सकते थे? नहीं किया, क्योंकि #इस्लाम के बारे में अंबेडकर जी का कहा या लिखा बहुत ही घातक है #कथित_भाईचारे के लिए। कथित प्रगतिशील के लिए सहन कर पाना संभव नहीं। इसलिए #चरणवन्दना के लिए #ब्राह्मण_व्यवस्था पर ही आना पड़ा। कोई विकल्प ही नहीं।
वर्षों पहले यही प्रश्न देश के मूर्धन्य दलित चिंतकों से पूछा था...
"क्या #ब्राह्म्णवाद के बिना खड़ा हो सकता है #अंबेडकरवाद?" कोई उत्तर नहीं मिला। ना इस बिंदू पर विमर्श को बढ़ाने का साहस दिखाया।
जब आप किसी #व्यवस्था से विद्रोह करते हैं या किसी व्यवस्था को खारिज करते हैं तो यह आपका दायित्व है, #वैकल्पिक_व्यवस्था भी आप सुझाएँ। नहीं तो हर ऐसा बिरोध निरर्थक मौत मरता है।
#अंबेडकर_जयंती
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@sharma_views कल तक जो केजरीवाल भ्रष्टाचार खत्म करने की बात करता था, आज वो खुद के भ्रष्टाचार से बचने के लिए जज बदलने की मांग करने लगा है...
वैसे ये आदमी भारतीय शासन व्यवस्था में नेता और अधिकारियों द्वारा बनाए गए भ्रष्ट सिस्टम का खुलकर प्रयोग कर रहा है...!
जय संविधान
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यह सच है, भारत के तमाम मुख्यमंत्रियों, राजनेताओं में @MamataOfficial दीदी का जीवन और रहन-सहन स्वयं में उदाहरण है। सन 1996 में कोलकाता के कालीघाट स्थित ममता जी के घर में गया था। बांस की चाली का मकान। सामने बर्तन मांजती ममता जी की माता जी। स्वयं ममता जी साधारण सूती साड़ी, पैरों में सामान्य सी चप्पल पहने। वहीं चाली के भीतर जमीन पर बैठ कर भोजन किया गया। बंगाल में जमीन पर हाथ से भोजन आम बात है। बड़े-बड़े दिग्गज करते हैं।
इस सच को स्वीकार करने में भी कोई संकोच नहीं, बंगाल को #लेफ्टफ्रंट के #गहन_अंधकार से निकालने में ममता जी के संघर्ष को भुलाना अक्षम्य अपराध है।
लेकिन ना जाने क्या हुआ? नीतिगत स्तर पर दीदी #मुस्लिम_परस्त होती गई? यहां तक भी सह्य था, लेकिन हिंदुओं के तीज-त्योहार, अस्मिता के प्रति कटु भाव दिन पर दिन मुखर होते गए। क्यों? मुझे नहीं पता। कहने को दुर्गा पूजा पंडालों को धन देती थी, पर सम्मान शायद ही दिया।
फिर दीदी! सामान्य व्यक्ति की तरह भतीजे #अभिषेक_बनर्जी के मोहपाश में बंधती गईं? अभिषेक के काबिज होते ही तृणमूल के आधार स्तंभ ढहते चले गए। ध्यान रहे, बंगाल का हिन्दू समाज बहुत ही #व्यक्तिनिष्ठ_समाज है। अकेले व्यक्ति नहीं हटता। आस्था, विश्वास, निष्ठा..व्यक्ति के साथ सब हटता चला जाता है।
आखिर में, ममता दीदी! जो बंगाल में #परिवर्तन_की_नायिका बन कर उभरी। अपने पहले कार्यकाल में ही कमोबेश #लेफ्ट_मॉडल की प्रतिकृति बन गईं।
ताज्जुब ममता के पतन पर नहीं है, वह तो सामने दिख रहा है। ताज्जुब है, आखिर हर रोज खत्म होती नाउम्मीदी से कैसे दीदी ने 15 साल हुकूमत की। अच्छा होता, दीदी स्वयं से सत्ता त्याग देतीं। शेष जीवन सम्मान से जीतीं। पर #भतीजा_मोह असम्मानजनक मृत्यु को निमंत्रण दे रहा है।
संभवतः दीदी की हठधर्मिता, आत्ममुग्धता विनाश का कारण बनी। जो सामान्य परिवारों से निकले उन बच्चों में बहुत अधिक दिखाई देता है, जो जीवन में आशातीत पा जाते हैं। इस दृष्टि से ममता दीदी और Lalu Prasad Yadav में बहुत कुछ समान पाएंगे।
संभवतः यही कारण है जो @narendramodi जी ने इस बार चुनाव अभियान में #दीदी_ओ_दीदी से ममता बनर्जी पर व्यक्तिगत कटाक्ष नहीं किया, #व्यवस्था को मुद्दा बनाया। बंगाल की #हताशा और #घुटन को आवाज दी। पिछली बार नतीजों से पहले लिखा था, नरेंद्र भाई! ममता दीदी पर व्यक्तिगत निशाना मत साधिए। जिंदा हो उठेगी। यह सलाह बंगीय संस्कृति के अनुभव से दी थी।
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@_sayema गिरे हुए को औकात दिखाने के लिए खुद को थोड़ा तो गिराना हीं पड़ता है...
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Lowest point of Doordarshan! Such cheap anchors.
Narendra Nath Mishra@iamnarendranath
दूरदर्शन पर बौद्धिक चर्चा। सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स के लिए जरूरी नोट्स।
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@sameersharmaa @NITING4321 ग्राहक ऐसे हीं लौट गए,
बिना कुछ लिए दिए....🤣
लेकिन कोई ये तो बताओ कि हीरा मंडी के होटलों का बिल कौन भरेगा...
दल्ला तो पहले से हीं कंगाल है😄
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कल #ज्योतिबा_फुले पर काफी हंगामा था। पर क्या इस सत्य को जानते हैं, ज्योतिबा फुले #चितपावन_ब्राह्मण थे। एक या दी पीढ़ी पहले #नासिक से #पुणे आए थे, पुणे में मंदिर के सामने #फूल_माला बेचने लगे। तो #फूलवाले से #ज्योतिबा_फुले हो गए। वाले छूट गए। कर्म आधारित जन्म ही सन 1871 में हुए #जाति_जनगणना के आधार बना।
नहीं विश्वास हो तो नासिक या जहां कहीं भी हो, ज्योतिबा फुले के तीर्थ पुरोहित या घाट के पंडे से #वंशावली निकलवा कर स्वयं जांच लें। या इनकी सन्तति स्वयं घोषित करे। अब यह मत कहना, इनके कोई तीर्थ या घाट पंडा नहीं होते थे। मॉरीशस के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री घाट पण्डों से ही वंशावली निकाल कर ले गए।
आज जो जातियां स्वयं को पांच हजार वर्षों से #जल_वंचित घोषित कर रही हैं? क्या वो अपने तीर्थ पुरोहित या घाट के पंडे के नामों का सार्वजनिक घोषणा करेंगे।
सच तो यह है, इस्लाम और इसाईत्व को जन्म देने वाले पूर्व पुरुष भी ब्राह्मण थे। पतित होकर #अब्राह्मण यानी #अब्राहम हो गए।

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