
@Javedakhtarjadu My condolences 🙏...he was a gem of Urdu poetry
कहीं चाँद राहो में खो गया कहीं चाँदनी भी भटक गई
मैं चराग वो भी बुझा हुआ मेरा रात कैसे चमक गई
कभी हम मिले भी तो क्या मिले वही दूरियाँ वही फासले
न कभी हमारे कदम बढ़े न कभी तुम्हारी झिझक गई
- बशीर बद्र
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