Dear @grok भारत का युवा इस समय इतना परेशान क्यों है? जबकि यहां के नेताजी, खिलाड़ी,धर्मगुरु , अभिनेता और अफसर गुलछर्रे uड़ा रहे हैं? युवाओं की इतनी दयनीय स्थिति का जिम्मेदार कौन है?
भारत दुनिया के उन देशों में है जहाँ सबसे अधिक भाषाई विविधता देखने को मिलती है।
संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाओं को मान्यता प्राप्त है, लेकिन देशभर में सैकड़ों भाषाएँ और बोलियाँ बोली जाती हैं।
यही भारत की सबसे बड़ी सांस्कृतिक ताकत भी है।
लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है।
एक बच्चा अपनी मातृभाषा में पढ़ना चाहता है...
दूसरा हिंदी में...
तीसरा अंग्रेज़ी में...
और चौथा किसी अन्य क्षेत्रीय भाषा में।
यहीं से शिक्षा, प्रशासन, न्याय और रोज़गार में भाषा को लेकर बहस शुरू होती है।
कुछ लोग मानते हैं कि मातृभाषा में शिक्षा से सीखने की क्षमता बढ़ती है।
कुछ का मानना है कि अंग्रेज़ी वैश्विक अवसरों का माध्यम है।
तो कुछ लोग हिंदी या अन्य भारतीय भाषाओं को अधिक महत्व देने की बात करते हैं।
सवाल यह नहीं है कि कौन-सी भाषा बड़ी है।
सवाल यह है कि क्या भारत ऐसा मॉडल बना सकता है जहाँ मातृभाषा भी मज़बूत हो, भारतीय भाषाएँ भी आगे बढ़ें और अंग्रेज़ी के वैश्विक अवसर भी बने रहें?
भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं...
भाषा हमारी पहचान, संस्कृति और भविष्य से भी जुड़ी होती है।
आपकी राय में भारत की शिक्षा व्यवस्था में सबसे अधिक प्राथमिकता किसे मिलनी चाहिए—मातृभाषा, हिंदी, अंग्रेज़ी या एक संतुलित बहुभाषी मॉडल?
Image- सांकेतिक Ai generated
कुछ दिनों पहले एक डेढ़ साल के मासूम की पटककर हत्या करने वाले आरोपी जितेंद्र पाठक को फांसी की सजा सुनाई गई है।
ये घटना अभी कुछ महीने पहले ही हुई थी, ऐसे वीभत्स मामले में कोर्ट का इतनी जल्दी फैसला आना सराहनीय है।
बस ऐसी ही सजा उन घिनौना काम करने वाले राक्षसों की होनी चाहिए जो बेटियों पर बुरी नजर रखते हैं।
पिछले 2 वर्षों से कुछ बन रहा था हमारे कौशांबी में।
कंट्रक्शन का काम तेजी से चल रहा था, आज अंदर गया
तब देखा यह 70 करोड़ की लागत में बुद्ध बिहार बन रहा
बिहार के नालंदा स्टाइल में , यह जो लाल रंग के ईंटे दिख रही यह नॉर्मल इट नहींहै यह ईट सबसे अलग थी इस पर प्लास्टर नहीं लगेगा ठीक ऐसे ही बिल्डिंग दिखेगी
आप कौशांबी के बारे मे कितना जानते है ?
एक वाकया बताता हूं। इलाहाबाद से लखनऊ आ रहा था। फोटो में बाएं साइड जो लड़की बैठी है वह इंतजार कर रही थी कि कहीं बस रुके। असल में उसे वाशरूम जाना था।
बछरावां साइड उसने हिम्मत दिखाते हुए ड्राइवर से कह दिया कि बस 2 मिनट के लिए रोक दीजिए। ड्राइवर भले व्यक्ति थे, उन्होंने रोक दिया।
2 के बजाय 6-7 मिनट हो गए। बस में एक दो लोगों ने एतराज जताया। जल्दी पहुंचने की बात कही। ड्राइवर ने इग्नोर किया।
थोड़ी देर में ही बस के तमाम लोग उन दो के खिलाफ हो गए जो जल्दी पहुंचने की बात कर रहे थे। वो दोनों एकदम चुप हो गए।
2 मिनट बाद लड़की आई। बस चल दी। उसे नहीं पता कि उसके लिए बस में बैठे लोगों ने कितनी एकता दिखाई है।
मुझे आज भी लगता है कि समाज में 90 फीसदी भले लोग हैं। 10 ही बदमाश हैं। जो अपने जैसे लोगों के साथ मिलकर बदमाशी कर जाते हैं।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने से खाली हुई बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में भाजपा को नामांकन के अगले ही दिन अपना कैंडिडेट बदलना पड़ा। पहले घोषित कैंडिडेट अभिषेक सिन्हा ने नाम वापस लेने का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने उनकी जगह नीरज सिन्हा को नया उम्मीदवार बनाया है।
सूत्रों के मुताबिक, अभिषेक के नामांकन पत्र में परिवार और एजुकेशन से जुड़ी जानकारी में गड़बड़ियों के चलते भाजपा ने यह फैसला लिया। भाजपा को डर था गड़बड़ियों के चलते अभिषेक का नामांकन कैंसिल हो सकता है।
असफलता का सबसे बड़ा कारण असफल होना नहीं, बल्कि शुरुआत ही न करना है।
हम अक्सर खुद को यही समझाते रहते हैं—
"अभी सही समय नहीं है।"
"मेरे पास संसाधन नहीं हैं।"
"थोड़ी और तैयारी कर लूं, फिर शुरू करूंगा।"
लेकिन सच यह है कि सही समय का इंतज़ार करते-करते कई सपने अधूरे रह जाते हैं।
संसाधन बाद में भी जुटाए जा सकते हैं, अनुभव भी रास्ते में मिल जाता है। सबसे कठिन काम पहला कदम उठाना होता है।
शुरुआत कीजिए। क्योंकि अधूरी शुरुआत भी, बेहतरीन योजना के साथ बैठे रहने से बेहतर होती है।
तस्वीर में मुस्कुराती हुई महिला की सीता देवी उम्र 32 साल हैं और युवक नितीश कुमार की उम्र सिर्फ 22 साल है !
दोनों ने मंदिर में शादी कर लिया जबकि महिला का 10 साल पहले तलाक हो चुका हैं और एक बच्चा भी हैं !
शादी के बाद युवक थाने पहुंच गया और आरोप लगाया कि मुझे डरा धमकाकर शादी कराया गया हैं ,
वही महिला का कहना हैं कि पिछले दो महीने से बातचीत हो रही थी इनसे , ये शादी प्रेम प्रसंग में हुई हैं कोई जबरदस्ती नहीं की गई हैं !
लेकिन तस्वीर देखने से तो यही लग रहा हैं कि बेचारे का मन नहीं है शादी का , महिला जबरदस्ती पकड़ पकड़ कर फोटो वीडियो बनवा रही हैं !
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही हैं !
राम मंदिर घोटाला चंदा चोरी।।
देश के लिए बोलना कितना हानिकारक है!!!
लीजिए, अब शेखर सुमन जी के यहाँ भी ED की 'एंट्री' हो गई है! 🎬
लगता है सरकार यह साबित करने में जुटी है कि उनकी एजेंसियां पूरी तरह 'न्यूट्रल' हैं—क्या अपना, क्या पराया, जब स्क्रिप्ट की डिमांड हो तो रेड तो पड़ेगी ही!
या फिर 'वॉशिंग मशीन' में कोई तकनीकी खराबी आ गई है? 🤔
खैर, अभिनय के शौकीनों को अब असली पॉलिटिकल ड्रामा देखने को मिलेगा।
#ShekharSuman#EDRaid#PoliticsToday
हमारे देश में आजकल गजब की नौटंकी चल रही हैं ,
पेट्रोलियम मंत्री कोई और हैं , एथेनॉल ब्लेंडिंग के लिए बेचैन कोई और हैं , बेच के माल कोई और कमा रहा हैं ,
लेकिन कुछ लोग सवाल पेट्रोल पंप पर आठ दस हजार वाले कर्मचारी से कर रहे हैं !
एक युवक तेल डलवाने पेट्रोल पंप गया था जहां कर्मचारी से कह रहा हैं कि आप लोग हमें ऑप्शन क्यों नहीं दे रहा हैं Pure पेट्रोल का ,
अरे भाई ये सवाल सरकार से पूछो न , उस बेचारे की ड्यूटी बस नोजल पकड़ के तेल डालने की हैं, वो एथेनॉल थोड़े मिला रहा हैं !
एक सवाल जो हर नागरिक को खुद से पूछना चाहिए।
भारत में डॉक्टर बनने के लिए डिग्री चाहिए।
इंजीनियर बनने के लिए डिग्री चाहिए।
जज बनने के लिए कानून की पढ़ाई और वर्षों का अनुभव चाहिए।
यहाँ तक कि कई सरकारी नौकरियों के लिए भी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तय है।
लेकिन देश के कानून बनाने वाले सांसद (MP) और विधायक (MLA) बनने के लिए किसी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता की संवैधानिक अनिवार्यता नहीं है।
इसका मतलब यह नहीं कि कम पढ़ा-लिखा व्यक्ति अच्छा जनप्रतिनिधि नहीं बन सकता। नेतृत्व, ईमानदारी, अनुभव और जनता से जुड़ाव भी महत्वपूर्ण हैं।
लेकिन दूसरी ओर, आज सांसद और विधायक ऐसे विषयों पर निर्णय लेते हैं जिनका संबंध अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक, राष्ट्रीय सुरक्षा, डिजिटल कानून और करोड़ों लोगों के भविष्य से होता है।
इसीलिए यह सवाल बार-बार उठता है—
क्या कानून बनाने वाले लोगों के लिए भी किसी न्यूनतम शैक्षणिक या संवैधानिक प्रशिक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए?
यह लोकतंत्र को कमज़ोर करने का नहीं, बल्कि उसे और सक्षम बनाने का प्रश्न है।
लोकतंत्र का अर्थ केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि जटिल नीतियों को समझकर जनता के हित में निर्णय लेना भी है।
पिछले कई महीनों से सरकार पर तंज कसने वाले शेखर सुमन के शो से जुड़े एक बिजनेसमैन के यहां ED ने छापेमारी की है।
धर्मेश संघानी जो फिल्म प्रोड्यूसर और शेखर सुमन के शो के को फाउंडर भी हैं।
वही शेखर सुमन जो अपने शो में कई दिनों से सरकार की तीखी आलोचना कर रहे थे और उनका मजाक उड़ा रहे थे।
पिछले 1 महीने से राम मंदिर चंदा चोरी का मुद्दा जोरों पर है लेकिन न कोई ED पहुंची न कोई CBI जबकि
वो मामला हाई प्रोफाइल और कई सौ करोड़ का था। लेकिन ED नदारद दिखी।