Ashok Mushroof
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Ashok Mushroof
@AMushroof
कवि,लेखक,विचारक https://t.co/zBb0u1NAW6





(कुछ स्त्रियां आज भी झेल रहीं हैं औरत होने का अभिशाप... कृपया अन्यथा न लें कवयित्री के मन के उद्गार को पढ़कर... ✍🏼) (अस्तित्व) क्या मेरा खुद का कोई अस्तित्व नहीं? पत्नी बनकर घर की जिम्मेदारी उठाती हूँ, माँ बनकर औलाद की जिंदगी बनाती हूँ। सबका तिरस्कार सहकर भी रिश्तों को प्यार से सजाती हूँ। बेटी बनकर बाप की दहलीज़ की पगड़ी का सदा मान रखती हूँ। मायके के दिए संस्कारों पर खरी उतरती हूँ। नौ दिन पूजते हो दुर्गा, सीता, सरस्वती बनाकर मुझे, फिर रखते हो पांव की जूती बनाकर मुझे। रहना चाहती हूँ बस तुम्हारे बराबर ही होकर मैं, तुम से आगे निकलकर बोलो कहाँ जाऊंगी मैं! फिर भी सब भूलकर तुम पर प्यार ही बरसाती हूँ, हर रिश्ते को प्यार से सजाती हूँ। 🦋 ~ निधि 'मानसिंह' @nidhisinghiitr #छोटा_दरवाज़ा #नवरात्रि_स्पेशल_कविता









