
वैसे कल दिल्ली हाईकोर्ट में तुषार मेहता इतना भड़के क्यों थे? क्योंकि उनके सामने अरविंद केजरीवाल ख़ुद अपने वक़ील के रूप में खड़े थे! वक़ील कोर्ट में नेतागिरी करे तो ठीक है, पर नेता कोर्ट में वक़ालत करे, ये इन्हें मंज़ूर नहीं!! वैसे मेहता जी भारत सरकार के सॉलिसिटर जनरल हैं, यानि देश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी वकील। मेहता जी, माननीय जज के सामने भड़कना ग़लत बात है, इससे कोर्ट की गरिमा को ठेस पहुँचता है…





















