DEVDAT KUMAR

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@Devdatkumar74

सामाजिक कार्यकर्ता !किसान! student:— Bachelor of Science OBC जय हिन्द जोहार झारखंड Social worker जिंदगी तस्वीर बदलती है तकदीर नहीं [email protected]

झारखंड Se unió Haziran 2024
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DEVDAT KUMAR@Devdatkumar74·
अलविदा मित्र विनोद कुमार शुक्ल (1937 — 23 Dec 2025)
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DEVDAT KUMAR retuiteado
TANVIR RANGREZ
TANVIR RANGREZ@virjust18·
फ़र्श से अर्श तक:— मैडम सविता प्रधान IAS -दर्द,तकलीफ़ और इम्तिहानों की क़ैद से IAS तक का सफ़र तय करने वाली और मौत से हाथ छुड़ाकर लौटने वाली एक महिला की कहाँनी:- महज 16 साल की उम्र में सविता प्रधान की शादी हो गई थी। उनकी शादीशुदा जिंदगी बहुत तकलीफदेह हो गई। पति का सभी के सामने धमकाना, पीटना और बेइज्जती करना आम होने लगा था। ससुराल में ठीक से खाना खाना भी मुश्किल हो गया था। घर की सफाई करने के बाद खाना बनाने के लिए कहा जाता था। नौकरों की तरह ट्रीट किया गया। वो कहती हैं, 'मैं कई बार अपने अंडरगारमेंट्स में रोटी छिपाकर बाथरूम जाती थी और वहां सिर्फ रोटी से पेट भरती थी। उस समय भी मुझे अहसास नहीं हो रहा था कि आखिर मेरे साथ हो क्या रहा है।' वे बताती हैं, 'शोषण बढ़ता ही गया। मुझे छोटी-छोटी बातों पर पीटा जाता था। दिन-रात मैं शारीरिक हिंसा का शिकार होती थी।' जब एक दिन पिता मिलने आए, तो उन्होंने घर ले जाने की विनती की। 'उन्होंने शाम तक वापस आने और उसे घर ले जाने का वादा किया। लेकिन वे वापस नहीं आए। उस दिन, समझ आ गया कि इस नरक से मुझे बचाने कोई नहीं आएगा।' 'मैं फांसी लगाने ही वाली थी...' इस समय तक वह दो बच्चों की मां बन चुकी थीं, फिर भी उनकी स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ था। वे बताती हैं 'मेरा माथा फटा हुआ है, हाथ पर कट के निशान हैं, पीठ जली हुई है। रोज-रोज के अत्याचार अब सहन करना मुश्किल हो गया था। पता था कि खुद की जान लेना गलत है लेकिन इसके अलावा कोई और रास्ता नजर नहीं आ रहा था।' एक दिन उन्होंने अपनी जान देने का फैसला किया। उन्होंने बताया, 'मैंने अपने बेटे को सुला दिया। दूसरे बेटे को फीड कराया। माथा चूमा जैसे कि आखिरी बार सुला रही हूं। एक स्टूल खींचा और पंखें पर साड़ी लटका दी। मैं फांसी लगाने ही वाली थी कि खिड़की से मेरी सास का चेहरा दिखाई दिया। उन्होंने मुझे देखा, लेकिन उन्होंने रोका नहीं, उनके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे। वे वहां से ऐसे चली गईं जैसे उन्होंने कुछ देखा ही नहीं या उनके लिए कोई मायने नहीं रखता।' यह उनके लिए एक निर्णायक पल था। उन्होंने कहा, 'तब मुझे एहसास हुआ कि मैं ऐसे लोगों के लिए अपनी जान नहीं दे सकती।' हिम्मत जुटाकर वे ससुराल से भाग निकलीं। 'बाल्टी में पेशाब करके मुझपर फेंक दिया, बच्चों के सामने पीटा' ससुराल से भागने के बाद सविता अपनी चचेरी बहन की भाभी के घर में रहने लगी थीं। पार्लर में काम किया, ट्यूशन पढ़ाया और संघर्ष करते-करते आगे की पढ़ाई की। लेकिन अभी सब खत्म नहीं हुआ था। अलग होने के बाद भी पति कभी-कभी आता था और मारपीट करता था। उन्होंने बताया, 'वह बच्चों के सामने मुझे पीटता था। एक दिन एक बाल्टी में पेशाब किया और मुझ पर फेंक दिया। उस समय मैं एग्जाम देने जा रही थी। मैं फिर से नहाई, कपड़े बदले और अपना पेपर देने चली गई। मेरा दिल वाकई में कठोर हो गया था।' पहले अटेंप्ट में PCS और फिर UPSC CSE क्रैक कर IAS ऑफिसर बनीं सविता का लक्ष्य अच्छी सरकारी नौकरी पाने का था। उन्होंने अकेले बच्चों की परवरिश करते हुए सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी की और बहुत जल्द उनकी मेहनत रंग लाई। कई सालों के संघर्ष और परेशानियों से जूझते हुए सविता ने अपने पहले ही प्रयास में मध्य प्रदेश राज्य सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली। वे एक सरकारी अधिकारी बन गईं। एक आदिवासी छात्रा के तौर पर अपनी इस उपलब्धि के लिए, सरकार ने उन्हें 75,000 रुपये की छात्रवृत्ति भी दी। इसके बाद उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2017 का फॉर्म भरा। पहले ही अटेंप्ट में प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू कर लिया था। आज, सविता प्रधान एक IAS अधिकारी हैं। वे अपने पद का इस्तेमाल दूसरों की मदद करने के लिए करती हैं, खासकर गरीब समुदायों की महिलाओं और लड़कियों की। वे उनके शिक्षा के अधिकार और एक निडर जीवन के लिए संघर्ष करती हैं।
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DEVDAT KUMAR
DEVDAT KUMAR@Devdatkumar74·
@SitamarhiJila मेरे ख्याल से सही है क्युकी 11 और 12th करने के बाद ग्रजुवेशन और उनके बाद प्लेसमेंट के लिए दौड़ना इधर उधर बहुत दिकत है
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सीतामढ़ी जिला 🇮🇳
10वी के बाद क्या पॉलीटेक्निक करना बिहार से सही ऑप्शन है क्या 🤔
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Priya Maurya
Priya Maurya@annnu_annu96870·
आज मैं अपने यहां के पोस्ट ऑफिस गई थी आधार कार्ड में नाम में स्पेलिंग गलत है उसको सही कराने वहां जाकर पता चला कि स्पेलिंग ठीक करने मे जो डाक्यूमेंट्स लगना है वो 10th की मार्कशीट होनी चाहिए लेकिन मेरे पास जो 10th की मार्कशीट है वो 2009 की है जिसमें फोटो नहीं है अब बोल रहें है कि इससे आधार कार्ड नहीं अपडेट होगा इसके अलावा और कोई आईडी प्रूफ नहीं ले रहे हैं अब आप लोग बताइये मै क्या करूँ कैसे अपडेट कराऊं क्योंकि बिना आधार कार्ड के काम चलेगा नहीं @UIDAI @UIDAIDelhi @ceo_uidai
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DEVDAT KUMAR@Devdatkumar74·
महोदय @bihar_police @SitamarhiPolice महोदय अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है महोदय वीडियो मे साफ देखा जा सकता है की इनके द्वारा ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है महोदय उक्त मामले को सज्ञान मे ले और दिखाई दे रहे वाहनों पे चालान करे धन्यवाद 1/2
DEVDAT KUMAR@Devdatkumar74

@bihar_police @SitamarhiPolice महोदय अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है महोदय वीडियो मे साफ देखा जा सकता है की इनके द्वारा ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है महोदय उक्त मामले को सज्ञान मे ले और दिखाई दे रहे वाहनों पे चालान करे धन्यवाद

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National Testing Agency
Your journey is getting closer to the goal The Advance Intimation of Examination City for NEET (UG) 2026 has been released. Candidates can now check their allotted exam city and plan ahead with confidence. Exam Date: 03 May 2026 (Sunday) Time: 02:00 PM to 05:00 PM 🔗 Visit: neet.nta.nic.in #NEETUG2026 #NTA #NTAUpdate #NTAExams #NEET2026
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DEVDAT KUMAR@Devdatkumar74·
@deepakbiruajmm sir देखिए किस तरह से नियमों का मज़ाक उड़ाया जा रहा है वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति परिवहन विभाग के बनाए गए नियमों का मज़ाक उड़ा रहा है @ranchipolice @DC_Ranchi महोदय उक्त मामले को संज्ञान में ले और उचित से उचित कार्रवाई करें 1/2
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DEVDAT KUMAR@Devdatkumar74·
@TrueStoryUP इन दरिंदो को को जूता मार के भगाना चाहिए
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TRUE STORY
TRUE STORY@TrueStoryUP·
UP के हाथरस में 30+ छात्राओं के यौन शोषण मामले में फंसे बागला डिग्री कॉलेज के प्रोफेसर रजनीश कुमार ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेते हुई नौकरी छोड़ दी है। पिछले वर्ष यह मामला खुला था.. तब रजनीश कुमार के मोबाइल से छात्राओं संग 65 न्यूड वीडियो मिले थे। इनमे से कुछ वीडियो पोर्न साईट पर भी अपलोड मिले। अब रजनीश कुमार की कॉलेज में एंट्री बैन है। वही अदालत में यह केस साबित नहीं हो पाया। कुछ गवाह पलट गए तो अभियोजन पक्ष आरोप ही साबित नहीं कर पाया। सबूत के अभाव में सजा नहीं हो पाई और क्लीन चिट मिल गई।
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TRUE STORY@TrueStoryUP

UP के हाथरस स्थित सेठ पीजी बागला डिग्री कालेज में तैनात प्रो. रजनीश कुमार पर कॉलेज की छात्राओं को यौन शोषण का शिकार बनाने के आरोप में FIR दर्ज हुई है। पीड़िता ने 20 से अधिक लड़कियों के साथ अलग अलग फोटो पुलिस को उपलब्ध कराए है, जिसमे वह अपने ही दफ़्तर या आवास पर लड़कियों को अपना शिकार बना रहा है। बताया जा रहा है की आरोपी प्रोफेसर पिछले 20 साल से अब तक सैंकड़ो लड़कियों को पास कराने या फिर सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर अपना शिकार बना चुका है। दरअसल शिकायत पहले भी हुई थी, तब कॉलेज प्रबंधन ने आंतरिक जांच में प्रोफेसर को बेकसूर साबित किया था। मगर अब सारे वीडियो सामने आने के बाद FIR दर्ज हो पाई। आरोपी प्रोफेसर 👇🏻 कॉलेज बैग लिए लड़की संग

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Deepak Birua
Deepak Birua@deepakbiruajmm·
.@ranchipolice किस ग्रह से हैं ये लोग, नितांत आवश्यक है यह जानना क्योंकि संस्कार विहीन युवा अब सुधरने की बात सोच ही नहीं रहे, इनको इनकी रील के लिए पारितोषिक के रूप में नियमों के अनुसार दण्डित करें और इनका माफ़ीनामा साझा करें ताकि अन्य लोग सचेत हो सकें.. .@DC_Ranchi आपको विशेष अनुरोध करूंगा कि विधिसम्मत कार्यवाही कर बताएं, कल भी मैंने दो आवश्यक विषय साझा किए हैं, त्वरित कार्यवाही करें.. @HemantSorenJMM
DEVDAT KUMAR@Devdatkumar74

@deepakbiruajmm sir देखिए किस तरह से नियमों का मज़ाक उड़ाया जा रहा है वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति परिवहन विभाग के बनाए गए नियमों का मज़ाक उड़ा रहा है @ranchipolice @DC_Ranchi महोदय उक्त मामले को संज्ञान में ले और उचित से उचित कार्रवाई करें 1/2

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Ministry of Panchayati Raj, Government of India
#PanchayatQuiz अनुच्छेद 243D के अनुसार, पंचायतों में महिलाओं के लिए न्यूनतम कितने प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई हैं? #PMO #MoPR #ViksitBharat #ViksitPanchayat #PanchayatiRaj #NPRD2026 #NationalPanchayatiRajDay #PanchayatForViksitBharat #AtmanirbharPanchayat #SashaktPanchayat
Ministry of Panchayati Raj, Government of India tweet media
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DEVDAT KUMAR
DEVDAT KUMAR@Devdatkumar74·
@NTA_Exams Nta आप इतने चालक कैसे है
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National Testing Agency
Facing a photo mismatch issue in CUET (UG) 2026? Don’t stress — you’ve got time to fix it. Upload your verified certificate with a recent attested photo before the deadline and carry it on exam day. Stay alert, follow the official process, and avoid last-minute hassle. You’ve got this 💪 #CUETUG2026 #NTAUpdates #StudentAlert #NTA #NTAExams
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DEVDAT KUMAR@Devdatkumar74·
@MAryarishi @NTA_Exams Cuet ug के साइड मे लॉगिन कीजिए लॉगिन करते ही आपको मिल जाएगी
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Arya
Arya@MAryarishi·
@NTA_Exams How will I find if the photo is mismatched?
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DEVDAT KUMAR@Devdatkumar74·
@SitamarhiJila @bihar_police @SitamarhiPolice महोदय उक्त मामले को सज्ञान मे ले और जरा इन लोगो को कानून व्यस्था की जानकारी के साथ इनलोगो पे उचित कार्यवाही करें
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सीतामढ़ी जिला 🇮🇳
Mani Meraj के एक इवेंट में बड़ा हंगामा हुआ। मीडिया के एक व्यक्ति को उनके बाउंसर्स द्वारा बुरी तरह पीटा गया। ऐसी घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं।
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DEVDAT KUMAR
DEVDAT KUMAR@Devdatkumar74·
@shekhar_br02 रिजल्ट अन्य समय कॉलेज की याद आती है तब तक महाविद्यालय के प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर कुर्सी पर पेर लगाकर सोते हैं और बहुत दिनों बाद छात्रों को देखकर उन्हें भी थोड़ा मज़ाक करने का मन करता है बाकी अगर छात्र-छात्रा रेगुलर मोड में क्लास जाए तो सब सही हो जाएगी धन्यवाद
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DEVDAT KUMAR
DEVDAT KUMAR@Devdatkumar74·
@shekhar_br02 अधिकतर महाविद्यालय में छात्र छात्रा एडमिशन ले लेते हैं रेगुलर मोड मे और बढ़िया सब्जेक्ट में और कॉलेज के अगल-बगल रहने वाले लोगों (दलाल ) को कुछ ज्यादा पैसे देकर अधिकतर छात्र सो जाते हैं जिन्हें एग्जाम आने के समय है और बोनाफाइड सर्टिफिकेट एडमिट कार्ड के समय रिजल्ट के समय 1/2
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RAJSHEKHAR VERMA
RAJSHEKHAR VERMA@shekhar_br02·
नीतीश कुमार ~ देखिए तो कितना सुंदर म्यूजियम बनायें हैं और ग्रेजुएशन करने के लिए एक भी ढंग का कॉलेज नहीं है ।😅
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DEVDAT KUMAR@Devdatkumar74·
@thebiharoffice रिजल्ट अन्य समय कॉलेज की याद आती है तब तक महाविद्यालय के प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर कुर्सी पर पेर लगाकर सोते हैं और बहुत दिनों बाद छात्रों को देखकर उन्हें भी थोड़ा मज़ाक करने का मन करता है बाकी अगर छात्र-छात्रा रेगुलर मोड में क्लास जाए तो सब सही हो जाएगी धन्यवाद
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DEVDAT KUMAR@Devdatkumar74·
@thebiharoffice अधिकतर महाविद्यालय में छात्र छात्रा एडमिशन ले लेते हैं रेगुलर मोड मे और बढ़िया सब्जेक्ट में और कॉलेज के अगल-बगल रहने वाले लोगों (दलाल ) को कुछ ज्यादा पैसे देकर अधिकतर छात्र सो जाते हैं जिन्हें एग्जाम आने के समय है और बोनाफाइड सर्टिफिकेट एडमिट कार्ड के समय रिजल्ट के समय 1/2
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The Bihar
The Bihar@thebiharoffice·
भाई, कॉलेज जाने के लिए टाइम है? बिहार के कितने बच्चे ग्रेजुएशन में रेगुलर कॉलेज जाते हैं? सिर्फ फॉर्म भरने और एग्जाम देने जाते हैं। रेगुलर क्लास जाओ, व्यवस्था खुद ठीक हो जाएगी।
RAJSHEKHAR VERMA@shekhar_br02

नीतीश कुमार ~ देखिए तो कितना सुंदर म्यूजियम बनायें हैं और ग्रेजुएशन करने के लिए एक भी ढंग का कॉलेज नहीं है ।😅

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DEVDAT KUMAR@Devdatkumar74·
@imshvetank गाड़ी और हवा..................!
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Shvetank Rekha Maurya@imshvetank·
गाड़ी चलेगी तो हवा लगेगी
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Bihar_se_hai@Bihar_se_hai·
कुछ लोग बोलेंगे ये तालिबान है , लेकिन ये बिहार का दृश्य है , पूर्णिया की घटना
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DEVDAT KUMAR
DEVDAT KUMAR@Devdatkumar74·
@ChapraZila अगर परिजन समय-समय पर स्कूल जाए तो स्कूल की दिशा और दशा दोनों बदल सकती है क्युकी मेने इन चीजों को देखा क्युकी मे भी बचपन से एक सरकारी विद्यालय का छात्र रहा हूँ धन्यवाद
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DEVDAT KUMAR
DEVDAT KUMAR@Devdatkumar74·
@ChapraZila मेहनती होते है लेकिन कुछ स्कूल के शिक्षक कुर्सी पे पेर डाल के सो जाते है जिनका असर बच्चों पे पड़ता है मेने इन सभी प्रॉब्लमो को फेस किया है हलाकि मेने 1 कक्षा से लेके 12 तक जहाँ तक भी पढ़ाई की है शिक्षक ठिक थे लेकिन हर स्कूल मे एक दो शिक्षक थोड़े आलसी होते है अगर परिजन 1/3
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छपरा जिला 🇮🇳
सरकारी विद्यालय पर उँगली उठाने से पहले एक बार मेरे निम्नलिखित सवाल का जवाब दें? 1) क्या हम उस बच्चे की तुलना कर सकते हैं, जिसके माता पिता खुद कहते है कि आज स्कूल मत जाओ ,आज तूम्हें गेहूं कटनी के लिए चलना है। 2) क्या हम उस बच्चे की तुलना कर सकते हैं, जो बिना नाश्ता किए खाली पेट स्कूल चला आता है, और फिर उसी हालात में पढ़ने बैठ जाता है। 3) क्या हम उस बच्चे की तुलना कर सकते हैं। जिसके पास पेन पेंसिल क्या ही होगी जिसके ड्रेस के लिए सरकार से भी मिला पैसा उसके ही घर परिवार में हालात की वजह से खर्च हो जाते हैं। 4) क्या सरकारी विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को उसके अभिभावक प्रतिदिन तैयार करके भेजते हैं? 5) क्या हम उस बच्चे की तुलना कर सकते है जिनके पास न समय तय है और ना ही कोई मार्गदर्शन है। ज्यादातर अभिभावक अपने बच्चों को विद्यालय में केवल सरकारी योजनाओं से मिलने वाली लाभ के लिए ही विद्यालय भेजते हैं क्योंकि उनको फ्री की चीजों में ज्यादा मन लगता है और क्या ही कहें अधिकांश अभिभावक का सवाल सिर्फ मध्याह्न भोजन पर ही टिका रहता है। उनका कभी शिक्षकों से ये सवाल नहीं रहता कि आपने मेरे बच्चे को आज क्या पढ़ाया? निष्कर्ष - सरकारी स्कूल पीछे नही है, बस वहाँ के बच्चों के हालात कठिन है। तुलना नहीं, समझ और साथ दीजिए तभी बदलाव होगा।
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