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#SushantSinghRajput - Part 1
ऐसा ना था, कि सोचा नहीं था, ग़म नहीं, हँस दिए, चल दिए।
धूप गाढ़ी, बरसा पानी, काली छाया, दम नहीं, हँस दिए, चल दिए।
ऐसा ना था, कि दिल शिला था, ग़म नहीं, हँस दिए, चल दिए।
रात बहकी, दिन बिखेरा, फिर दुबारा, दम नहीं, हँस दिए, चल दिए।
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