पिन किया गया ट्वीट

एक ही AC कोच…
लेकिन किसी को ठंड नहीं लग रही थी
और किसी की रात कटना मुश्किल हो गई।
मेरे दोस्त को ट्रेन में Lower Berth मिली थी,
जबकि उसके ऊपर वाली सीट पर एक यात्री सो रहा था।
ऊपर वाली सीट AC vent के ज्यादा पास थी।
ठंडी हवा लगातार उसके चेहरे और शरीर पर पड़ रही थी।
वह बार-बार करवट बदल रहा था, लेकिन ठंड कम नहीं हो रही थी।
कुछ देर बाद उसने कोच अटेंडेंट को बुलाकर कहा—
“भाई, एक और कंबल मिल सकता है क्या? ऊपर बहुत ज्यादा ठंड लग रही है।”
अटेंडेंट ने जवाब दिया—
अतिरिक्त कंबल उपलब्ध नहीं है।”
वह यात्री चुपचाप अपनी सीट पर लौट गया।
नीचे बैठे मेरे दोस्त ने पूरी बात सुन ली। उसे Lower Berth पर उतनी ठंड महसूस नहीं हो रही थी।
उसने अपना कंबल ऊपर वाले यात्री को देते हुए कहा—
“आप यह भी रख लीजिए, मुझे नीचे ज्यादा ठंड नहीं लग रही।”
ऊपर वाले यात्री ने पहले मना किया, फिर मुस्कुराकर कंबल ले लिया।
उस रात एक अतिरिक्त कंबल रेलवे नहीं दे पाई, लेकिन एक अनजान सहयात्री ने अपनी सुविधा छोड़कर दूसरे की परेशानी कम कर दी।
कई बार सफर सुविधाओं से नहीं, साथ बैठे लोगों की संवेदनशीलता से यादगार बनता है।
लेकिन सवाल यह भी है—
जब एक ही कोच की अलग-अलग बर्थ पर AC का असर अलग होता है, तो जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कंबल देने की व्यवस्था क्यों नहीं होनी चाहिए?


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