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एक साधारण सा लड़का,जिसे लोग मामूली समझ रहे थे,उसने अपनी सूझबूझ और प्रक्रिया के दम पर पूरे सिस्टम को चुनौती दे दी।
बात सिर्फ थाना में पानी और व्यवस्था को लेकर पूछे गए एक सवाल से शुरू हुई थी।
लेकिन मामला इतना बढ़ गया कि गाली गलौज, मारपीट, धमकी, परिवार को बुलाना, पिता के सामने अपमान, PR bond, कागज़ पर साइन और केस की बातें तक पहुँच गईं।
फिर भी उसने हार नहीं मानी। उसने हंगामा नहीं किया, बल्कि application, paperwork, CCTV, Human Rights और कानूनी प्रक्रिया का रास्ता चुना।
धीरे धीरे यह मामला इतना ऊपर तक पहुँच गया कि SP, DSP, हवलदार से लेकर कई बड़े अधिकारी तक इसमें घिरते चले गए, और मामला आज भी चल रहा है।
अब सवाल ये है कि अगर एक आम आदमी सुरक्षा, इंसाफ और व्यवस्था पर भरोसा लेकर चले और उसे वहीं इतनी मशक्कत करनी पड़े, तो लोग आखिर किससे उम्मीद करेंगे?


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