Dhanrajbhamat Youth Leader 84 aadivasi 리트윗함

लोकसभा में आदिवासी समुदायों को अपनी भाषा, संस्कृति और अधिकारों (जल-जंगल-जमीन) के संरक्षण के मुद्दे उठाने का पूर्ण संवैधानिक अधिकार है। अनुच्छेद 330 के तहत, लोकसभा में आदिवासियों के लिए 47 सीटें आरक्षित हैं। हालिया सत्रों में, सांसद राजकुमार रोत और अन्य नेताओं ने विस्थापन, नक्सलवाद के नाम पर उत्पीड़न और आधुनिक शिक्षा के मुद्दों पर खुलकर बात की है कही है लेकिन देश में मोदी सरकार ओर बड़े दिग्गजों नेताओं द्वारा आदिवासी की आवाज उठाने पर दबाने का काम करते है
संवैधानिक प्रतिनिधित्व: संविधान की 5वीं अनुसूची के अंतर्गत ग्राम सभा को सर्वोच्च अधिकार प्राप्त हैं।
संवैधानिक सुरक्षा: अनुच्छेद 29 के तहत आदिवासियों को अपनी संस्कृति बचाने का अधिकार है, और अनुच्छेद 164 आदिवासी कल्याण के लिए मंत्री नियुक्ति का प्रावधान करता है।
हालिया आवाज: सांसद पप्पू यादव और भारत आदिवासी पार्टी के सांसदों ने आदिवासी समुदायों को कार्बन क्रेडिट का लाभ, एआई/ड्रोन शिक्षा, और विस्थापन से रक्षा के मुद्दे उठाए।
प्रतिनिधित्व का मुद्दा: सदन में 47 आरक्षित सीटों के बावजूद, यह मुद्दा भी उठा है कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों से आ रहे सांसदों को कितना बोलने का अवसर मिलता है।
आदिवासी सांसद संसद में अपनी भाषा में अपनी बात रखने के हकदार हैं।
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