NARAYAN PRASAD BAJAJ
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NARAYAN PRASAD BAJAJ
@NPB6510
Worked at Bowreah Jute Mill for 44 years till Jan'26, first as supervisor, then Cashier, Asst secretary and last 30 years as Commercial Manager







अनिल शारदा, 1. मुंशी प्रेमचंद, राजा राममोहन रॉय, मोती लाल नेहरू, भारतेंदु हरीशचंद्र, पंडित रामचंद्र शुक्ला, और राजेंद्र प्रसाद भी, मदरसों में पढ़े हैं। उनकी खतना करके उनको मुसलमान क्यों नहीं बना दिया गया? 2. ISIS वही बोलता है, जो तुम्हारे सामने बैठा संघी बोल रहा है। गज़वा ए हिंद और अखंड भारत में भी कुछ खास ज़्यादा फर्क नहीं है। तो क्या संघियों के हिन्दुइज्म जिसमें मुसलमान महिलाओं के बलात्कार और मर्दों की लिंचिंग को सही माना जाता है, उसको भी असली हिन्दुइज्म मान लिया जाए? 3. और शरजील इमाम का स्पीच भारत को असल में काटने के लिए नहीं था, चक्का जाम के बारे में था। उसने "काटने" शब्द का इस्तिमाल चक्का जाम करने के संदर्भ में किया था। और चक्का जाम आज़ाद भारत के इतिहास में प्रोटेस्ट का आम तरीका है। 4. जब ये संघी कहता है, "I dont hate them, but they don't give me a reason to love them". तो इस से कोई भी पढ़ा लिखा आदमी पूछता, "भाई, जिस आदमी में इतनी नफरत, इतना पूर्वाग्रह, इतना झूठ मुसलमानों के खिलाफ भरा है। Then why should muslims give you a reason to love them? 5. और आखिर में, कैपिटल (पूंजी) तीन तरह का होता है। जो कि आम तौर पर इंसान को विरासत में मिलता है। इकोनॉमिक कैपिटल, सोशल कैपिटल और पॉलिटिकल कैपिटल। जब संघी तुमसे कहता है कि उसे लगता है कि आरक्षण सिर्फ आर्थिक आधार पर मिलना चाहिए, तो तुम्हारा आसान सा सवाल था, फिर सोशल और पॉलिटिकल कैपिटल का क्या? पहले तो संघी के ये बात समझ नहीं आती। और जब आती तो उसका मुंह देखने लायक होता। तो ये तो हो गई 5 बातें। अब आते हैं असल मुद्दे पर। ये है मेरी प्रॉब्लम तुम्हारे जैसे काफी सारे हिंदुओं के साथ है, जो संघियों के खिलाफ आवाज़ उठा रहे हैं और माइक लेकर खड़े है। लेकिन आता जाता कम है, और संघी तुम्हें चुप करके चले जाते हैं। और तुम बिना शर्मिंदगी के उसका वीडियो भी सोशल मीडिया पे डाल देते हो। ये जो बातें संघी ने कहीं हैं, ये आम संघियों की बातें हैं, जो जयपुर में पुरानी बस्ती के हर चौराहे पे होती थी। और ये जब मेरे सामने बैठते थे, चितली उँगली जितना बड़ा मुंह लेकर वापस जाते थे। पर तुम्हारी एडवांटेज ये है, की तुम हिंदू नाम साथ पैदा हुए हो। तो तुम जो चाहे कर सकते हो, जो चाहे बन सकते हो, क्योंकि ये ठुकरा प्रिविलेज है। और सेक्युलरिज्म का बीड़ा का काम तुमने अपने नाज़ुक और अनपढ़ कंधों पे उठाया हुआ है। अच्छा हो, 2-4 किताबें पढ़ लो, या कम से कम संगत बदल लो। सेक्युलरिज्म की लड़ाई बारीक भी है और पैनी भी। जिसके लिये नज़र भी चाहिए, और नज़रिया भी।












'बेटी' बेटी होती है, बेटी का सम्मान होना चाहिए... बेटी के खिलाफ कोई भी अपमानजनक टिप्पणी स्वीकार्य नहीं...
















