zeenat shaikh
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सच से लोगों को सबसे ज़्यादा डर तब लगता है, जब वह उनके एजेंडे के अनुकूल नहीं होता। कुछ दिन पहले मैंने राम मंदिर में हुई चोरी के बारे में जो कहा, पूरी ईमानदारी और ज़िम्मेदारी से कहा। आज भी अपने हर शब्द पर कायम हूँ। लेकिन कुछ लोगों को सच से ज़्यादा एक मुद्दा चाहिए होता है। उन्हें बहस चाहिए, विवाद चाहिए, शोर चाहिए। इसलिए बात को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। मैं सिर्फ़ इतना कहना चाहता हूँ मैं न पहले कभी डरा हूँ, न आज डरता हूँ, और न आगे डरूँगा। ट्रोल्स हों, तथाकथित इन्फ्लुएंसर्स हों या नेता! किसी के शोर से मेरी बात नहीं बदलेगी। जो मुझे सही लगेगा, मैं वही कहूँगा। आप सहमत हों या असहमत, यह आपका अधिकार है। लेकिन सच बोलना मेरा अधिकार भी है और मेरा कर्तव्य भी। बाक़ी… जिसे जो करना है, वह करे। मैं जैसा हूँ, वैसा ही रहूँगा। जय श्री राम! 😍🕉🙏




