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CA Shyam Sundar Agarwal
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Nice ☺️ one
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बिहार के समस्तीपुर जिले के रोसड़ा गाँव में 1998 की बाढ़ वाली रात जब मिट्टी का घर आधा डूब गया था, तब रामसुभग पासवान की झोपड़ी में एक लड़का पैदा हुआ। दाई ने कहा, लड़का है। रामसुभग ने छत से टपकते पानी में ही माथा टेका। नाम रखा मनीष।
रामसुभग खेतिहर मजदूर, दिन के अस्सी रुपये। माँ सुनीता दूसरों के घर बर्तन। घर दो कमरे, एक में भैंस, एक में हम चार लोग। मनीष, उसकी बड़ी बहन, माँ बाप।
बचपन याद है तो भूख। स्कूल में मिड डे मील के लिए जाता। किताबें पुरानी, फटी। बिजली नहीं, लालटेन में पढ़ता। बारिश में छत चूती, तो किताब को पन्नी में लपेटता।
पाँचवीं में मास्टर ने पूछा, बड़ा हो कर क्या बनेगा। सबने कहा, पुलिस, फौजी। मनीष ने कहा, आविष्कारक। मास्टर हँसे, पहले चप्पल तो ले आ।
मनीष के पास चप्पल नहीं थी। वह नंगे पैर तीन किलोमीटर स्कूल जाता। रास्ते में कूड़े से टूटी रेडियो, मोटर उठा लाता। घर में खोलता, जोड़ता। माँ डाँटती, कबाड़ मत ला। वह कहता, इसमें बिजली है।
आठवीं में गाँव में पहली बार कंप्यूटर आया, ब्लॉक ऑफिस में। मनीष देखने गया। ऑपरेटर ने भगाया। वह रोज़ खिड़की से देखता। एक दिन ऑपरेटर ने दया कर के माउस पकड़ाया। मनीष ने पेंट में घर बनाया। उसी दिन तय किया, दुनिया बदलनी है।
दसवीं में 92 प्रतिशत आए। पूरे जिले में अखबार में नाम। हेडमास्टर ने कहा, साइंस ले। फीस कहाँ से। रामसुभग ने भैंस बेच दी। माँ ने मंगलसूत्र गिरवी रखा। बाप ने कहा, तू पढ़, हम देख लेंगे।
ग्यारहवीं में वह पटना गया, सरकारी कोचिंग। एक कमरे में छह लड़के। वह रात को लाइब्रेरी में पढ़ता, दिन में ट्यूशन पढ़ाता, पचास रुपये घंटा। खाना एक टाइम।
उसी साल गाँव में हैजा फैला। तालाब का पानी पीने से। उसकी बहन भी बीमार। अस्पताल दूर, पैसे नहीं। बहन बच गई, पर तीन बच्चे मर गए। मनीष ने तालाब देखा, गंदा, हरा। उसने सोचा, अगर पानी साफ हो जाए तो।
वहीं से सवाल जन्मा।
बारहवीं में उसने आईआईटी की तैयारी की। किताबें सेकंड हैंड, नोट्स माँगे हुए। 2016 में रिजल्ट आया, रैंक 1,247। आईआईटी खड़गपुर, मैकेनिकल। गाँव में पहली बार कोई आईआईटी गया। डीएम आए, मिठाई बाँटी। रामसुभग की आँखों में आँसू, बोला, अब भैंस खरीदेंगे।
हॉस्टल में मनीष को पहली बार लगा वह गरीब है। लड़कों के लैपटॉप, जूते। उसके पास एक बैग। वह चुप रहता, पढ़ता। पहले सेमेस्टर में टॉप किया। प्रोफेसर ने पूछा, क्या करना चाहते हो। उसने कहा, सस्ता वॉटर प्यूरिफायर। सब हँसे।
दूसरे साल उसने लैब में काम शुरू किया। पुराने वॉटर फिल्टर महंगे, बिजली चाहिए, मेंटेनेंस। गाँव में बिजली नहीं। उसने सोचा, मिट्टी, धूप, कुछ ऐसा।
तीसरे साल उसने मिट्टी के घड़े, सिल्वर नैनो पार्टिकल, और सोलर हीट का मॉडल बनाया। एक घड़ा जो बिना बिजली के पानी को 99 प्रतिशत साफ करे, कीमत दो सौ रुपये। प्रोफेसर ने कहा, इम्पॉसिबल। उसने रात भर टेस्ट किए।
चौथे साल फंड नहीं मिला। उसने कॉलेज फेस्ट में मॉडल दिखाया। एक एनजीओ वाले ने देखा। दस हजार दिए। मनीष ने गाँव जाकर पहला प्रोटोटाइप लगाया। तालाब का पानी डाला, नीचे साफ पानी। गाँव वाले पहले डरे, फिर पिया। कोई बीमार नहीं हुआ।
डिग्री के बाद उसे बेंगलुरु में जॉब ऑफर, बीस लाख पैकेज। माँ ने कहा, ले ले। उसने मना किया। कहा, मैं कंपनी बनाऊँगा। दोस्तों ने कहा, पागल है।
उसने खड़गपुर में ही इनक्यूबेशन लिया। नाम रखा, नीर। दो दोस्त जुड़े। उन्होंने घड़े को और बेहतर किया। मिट्टी लोकल, सिल्वर कोटिंग कम, धूप से चार्ज होने वाला यूवी ढक्कन। कीमत 199 रुपये। एक घड़ा एक परिवार के लिए साल भर।
पहले साल पाँच हजार घड़े बेचे, बिहार ओडिशा में। नुकसान। दूसरे साल एक वीडियो वायरल हुआ। एक बच्ची कह रही थी, पहले पेट दुखता था, अब नहीं। रतन टाटा ट्रस्ट ने नोटिस लिया। फंड मिला, पाँच करोड़।
मनीष ने फैक्ट्री नहीं लगाई। उसने मॉडल बदला। गाँव की औरतों को ट्रेनिंग दी, घड़े बनाना। मिट्टी फ्री, भट्ठा कम्युनिटी का। हर घड़े पर बनाने वाली का नाम। इससे रोजगार भी, पानी भी।
2023 तक दस लाख घड़े। 2024 में अफ्रीका से कॉल आया, केन्या। वही समस्या। मनीष गया। वहाँ भी औरतों को सिखाया। डिज़ाइन ओपन सोर्स कर दिया। कहा, पेटेंट नहीं, पानी सबका।
दुनिया बदलनी शुरू हुई। डब्ल्यूएचओ ने रिपोर्ट दी, नीर घड़े से डायरिया केस 40 प्रतिशत घटे। यूनिसेफ ने पार्टनरशिप की। 2025 में मनीष को मैग्सेसे अवार्ड मिला। स्टेज पर वह फटी चप्पल वाली फोटो दिखा कर बोला, मैं गरीब था, इसलिए अमीर सॉल्यूशन नहीं बना पाया। मुझे सस्ता बनाना पड़ा।
आज 2026 में, मनीष अट्ठाईस साल का है। उसकी कंपनी का वैल्यूएशन नहीं, इम्पैक्ट है। पचास देशों में तीन करोड़ लोग उसका घड़ा इस्तेमाल करते हैं। उसने खुद के लिए कुछ नहीं लिया। वही पुराना कुर्ता।
हिन्दी
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@LegalAdvisour Padhe likhe logo ko to desh ki economy barbad karne ka kaam de rakha hai
हिन्दी
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विपक्ष हारने लायक ही है,
मोदी और भाजपा को हराना असंभव है।
देश की सबसे बड़ी परीक्षा NEET का पेपर लीक हो गया और विपक्ष मुंह में दही जमाए बैठा है।
अब तक कांग्रेस, सपा, AAP, JUD, TMC, BSP, JJP और जितनी भी पार्टियां है उन्हें प्रेस कॉन्फ्रेंस करके देश को बताना चाहिए था।
आज देश में हर सड़क पर NEET पेपर लीक मुद्दा गूंजना चाहिए था, लेकिन सब विपक्षी AC में बैठे हैं।
इसी पेपर लीक के समय भाजपा विपक्ष में होती तो अब तक देश की सड़कों पर सरकार के खिलाफ नारे गूंज रहे होते।
विपक्ष की यही नाकामी उसे कभी सत्ता में नहीं आने देगी और भाजपा को कभी हारने नहीं देगी।
हिन्दी

@TMCWatch Few days back in a podcast he said he don't know Mamta Banerjee.
English

@niraj_shah Sir you are absolutely correct. In the time of crisis we should stand united and sacrifice as much as possible. The issue is the preacher must follow his words. After few hours of the speech, PM has participated in a road show. Was that necessary. Waste of fuel isn't it?
English

Some people are criticising PM Modi's message from yesterday.
Well, simple math will tell you that the country is dealing with a fuel-cost issue. The bills aren't favourable, for the country.
So what does the PM do - tell people to do things which can help reduce those bills - travel local, use public transport when and where feasible, buy local things, etc . What is wrong in that?
This is an appeal, not a gun to your head. Do it if you think you can, and if you can take some hit (to finances and to preferences) for a short while. It will help the country, and in turn help you.
English

@PTI_News Please confirm whether vehicles used in this roadshow will run on water?
English

VIDEO | Vadodara is fully geared up for Prime Minister Narendra Modi’s proposed roadshow, with preparations now in the final phase.
The Prime Minister will visit his karmabhoomi Vadodara tomorrow, where a 1.5-kilometre-long roadshow from Gada Circle to the airport has been planned to celebrate the local self-government election results and the major victory in West Bengal.
English
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This is Yogendra Upadhyay, Education Minister of Uttar Pradesh.
He summoned the media to speak on a very important issue of national emergency.
Do you know what it was?
The Poem -
Rain Rain go away
Come again another day
Little Johny wants to play
Rain Rain go away
He says that Johny by asking Rain to go away has insulted India’s traditions and values and hence this poem should be removed from all textbooks 😭😭
Literal clowns 🤡 are ruling this country and you can’t even do anything about it.
English
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अक्सर नगरपालिका द्वारा दबाण हटाने पर एक्शन तब लिया जाता है ? कब कोई हटाता नहीं है । तब नगरपालिका किसी का समान क़ब्ज़ा कर लेती है । लेकिन आप इस वीडियो में देख सकते हैं । ग़रीब सब्जी भाजी वाले अपना सामान रेहड़ी लेकर जा रहे हैं । फिर भी उनको ज़बरदस्ती 😫 पकड़कर उनका सामान के साथ रेहड़ी को जप्त किया जा रहा है । मतलब एक ग़रीब को और ज़्यादा ग़रीब और अपंग बनाया जा रहा है ।ये कैसा क़ानून ये कैसा न्याय ? आप वीडियो देखेंगे तो आपके दिल को धक्का लग जाएगा ।
ग़रीब को क़ानून का सहारा लेकर बरबाद किया जा रहा है । वीडियो सूरत शहर की है ।
हिन्दी

@zomatocare @zomato I have ordered from a pure veg restaurant but i have been delivered a non veg item. Now you customer care executive refuses to acknowledge the issue.
English
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@Form_45 Isi movie ko dekhkar avatar ka offer aya tha inko
Indonesia
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पटना में सैकड़ों लोगों के आशियाने पर क्यों चलेगा बुलडोजर, ज़िंदगी भर की गाढ़ी कमाई से घर बनाने वाले क्यों हैं बेबस? देखें यह रिपोर्ट… @samrat4bjp @BJP4Bihar @NitishKumar @Jduonline @INCBihar @LJP4India @yadavtejashwi @RJDforIndia
हिन्दी

@narendramodi Desh ne mauka dekar dekh liya ab aur experiment nahi kar sakte
Indonesia











