Shivendra Pratap Singh

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Shivendra Pratap Singh

Shivendra Pratap Singh

@01Shivendra

Katılım Ocak 2026
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MSM
MSM@Mayank_2024·
@crosschat_wala गंगा सिंह जी चुरू मे चौपाल लगा रहे थे गाँव मे तो ठाकुर को तलब क्यों करना पड़ा? राजा के प्रोटोकॉल मे गाँव का ठाकुर पहले से मौजूद नहीं रहते थे क्या 🤔🤔
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Lokendra Singh Kilanaut
Lokendra Singh Kilanaut@crosschat_wala·
महाराजा गंगासिंह के राज में रात्रि चौपाल लगा करती थी। न्याय होता था और तुरंत ठाकुर, हाकिम, नाजिम, नम्बरदार बर्खास्त होते थे। जो शाबाशी का काम करता उसे हाथोंहाथ पुरुस्कार दिया जाता था। लिहाजा गंगासिंह के राज का इकबाल चौतरफा बुलंद था। बीकानेर के इलाके में एक किस्सा आज भी बुजुर्गों से सुनने को मिल जाएगा कि एक दफे महाराजा चूरू के एक गांव में रात्रि चौपाल लगाकर बैठे थे। तभी एक मेघवाल जाति का पीड़ित उघाडे बदन आया और पीठ पर कोड़े के निशान दिखाए। महाराजा ने तुरंत गांव के ठाकुर को तलब किया और कहा कि अगर तुम्हारे रहते इस निसहाय की ये हालत हुई है तो इस देस में तुम्हे रहने का हक नहीं है। तुरंत देश छोड़ देने का फरमान हो गया। शासक अगर सीधे ही जनता के बीच पहुंच गया तो ये सबसे बेहतरीन बात है। लेकिन वह जनता के बीच जाकर कर क्या रहा है ? इस पर चर्चा कौन करेगा ? सिर्फ इतना कह देने भर से तारीफ नहीं की जा सकती कि सूबे के मुखिया गांव पहुंच गए, जनता के बीच है, जनता की सुन रहे है। राज का काम होता है न्याय करना। न्याय का इकबाल बुलंद करना। सब समस्याएं शुरू होती जब न्याय नहीं होता। जब न्याय होना शुरू होता है तो समस्याएं खत्म होने की शुरुआत हो जाती है। एक अच्छी पहल थी कि मुख्यमंत्री जी जनता के बीच पहुंचना शुरू कर रहे हैं। लेकिन हैशटैग भजनलाल जी की सादगी और दलित के घर खाना खा लेने जैसे इमेज बिल्ड की कोशिशों में असल मर्म की बात का गला घोंट दिया गया है। एक दलित के घर खाना खा लेने से कितना न्याय हुआ ? ये सब तो हम बीस सालों से देख रहे है कि एक फिक्स स्क्रिप्ट में दलित का टूटा सा घर होता है, मजदूर सा दिखने वाला दलित चेहरा होता है, चटाई होती है और नेताओं की एक जमात होती है। ऐसे भोज का आयोजन गरीब दिखने वाले दलित की झोंपड़ी में क्यों होता है ? क्या कोई नेता कभी किसी दलित की महंगी कोठी में इस तरह से खाना खाने के लिए गया ? इसलिए कि दलित फ्रेम में दलित जैसा दिखना चाहिए और जब तक वह दलित जैसा दिखता रहेगा तब तक कहानी के क्लाइमेक्स बना रहेगा। जबकि असल सवाल तो ये होना चाहिए कि अब तक देश में दलित की तस्वीर एक मजदूर और गरीब की शक्ल में क्यों दिख रही है। जनता और मीडिया ताली पर ताली ठोके जा रही है कि देखो भाई न्याय हो गया, न्याय हो गया क्योंकि दलित के घर चार कोर तोड़ लिए गए हैं जबकि ऐसी फोटोज इस बात की बानगी होती हैं कि न्याय नहीं हुआ इसलिए ही दलित अब भी मजदूर और निसहाय दिख रहा है। शेर ने अगर हिरन का शिकार किया है तो शेर की जाति के लोग उसे न्याय ही कहेंगे क्योंकि शेर ने बहादुरी दिखाई है। लेकिन कभी उस हिरन का पक्ष लेकर भी देखो जो सदियों से शेर का शिकार बन रहा है।
Lokendra Singh Kilanaut tweet media
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Shivendra Pratap Singh retweetledi
राघवेन्द्र प्रताप सिंह सोमवंशी
@narendramodi माननीय प्रधानमंत्री जी युवा नेता की बातों पर विशेष ध्यान दें। जन हित में सभी सांसदों और विधायकों की पेंशन और भत्ते भी समाप्त करें एवं समस्त नेताओं के काफिले में मात्र 2 वाहन की सीमा तय करें। सभी सांसदों और विधायकों की 90 प्रतिशत संपति देश हित में जब्त करें।
राघवेन्द्र प्रताप सिंह सोमवंशी tweet media
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Shivendra Pratap Singh
Shivendra Pratap Singh@01Shivendra·
सालों से पढ़ाते हुए हमेशा शिक्षामित्र साथियों को यही उम्मीद थी कि हमारे काम की सही पहचान मिले । ₹3500 से शुरू हुआ सफर आज ₹18,000 तक पहुंचा है, यह बहुत बड़ा बदलाव है माननीय CM @myogiadityanath का यह फैसला जीवन मेंस्थिरता लेकर आया है। #यूपी_शिक्षामित्रसम्मान #UPShikshaMitraSamman
Shivendra Pratap Singh tweet media
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Shivendra Pratap Singh
Shivendra Pratap Singh@01Shivendra·
@jpsin1 सरकार आपकी है ?? कर क्या रहे हैं ये सब हो रहा है तो सोशल मीडिया पोस्ट ?
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🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳
जरा टीसीएस हॉलिडे कैलेंडर देखिए और सोचिए भारत में हिंदुओं की दशा क्या हो गई है । जिम्मेदार टीसीएस नहीं है हम और आप हैं , हमारे पास लड़ने के लिए बहुत बहाने हैं पर जब बात धर्म की आती है तो साथ कोई आता ही नहीं । सबको सिर्फ खाने कमाने की पड़ी है और वो अभी सिर्फ प्राइवेट कंपनी में आए है अगर सरकार में आए तो सोचो होगा क्या ? इन कंपनियों में तो आरक्षण भी नहीं है, सोचिए कितना अच्छा नेटवॉक है जो ये सड़क छाप आराम से भर्ती हो रहे है ।
🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳 tweet media
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Shivendra Pratap Singh
Shivendra Pratap Singh@01Shivendra·
@pushpendrakum राजस्थान पोलिस जिंदाबाद ऐसे ही नाम रोशन करते रहो ।
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Pushpendra Singh
Pushpendra Singh@pushpendrakum·
Police issued a ₹10,000 pollution fine… on an ELECTRIC VEHICLE ⚡😂 ❌No engine. ❌ No emissions. Still “polluting” according to them. Even after explaining it’s an EV, they refused to listen instead started adding MORE fines (tinted glass, etc.) just to justify it. So the real question is: Are laws being enforced… or just used to extract money? 🤔 Educated system or automated extortion? 🚨Repost for better reach
Pushpendra Singh tweet media
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Shivendra Pratap Singh
Shivendra Pratap Singh@01Shivendra·
@abhinaymaths दिक्कत तो जनता को सांसद विधायकों से भी है ऐसे में उसपर भी कोई विचार कर रहे हैं क्या सर ये लोग ?
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Abhinay Maths
Abhinay Maths@abhinaymaths·
वाह साहब वाह…! कितनी आसानी से कह दिया- जनहित याचिका खत्म कर दो…! अरे भई, इतनी जल्दी क्या है सिस्टम समेटने की? आज कह रहे हो PIL बंद करो… कल को ये भी कह दोगे- अदालत की भी ज़रूरत नहीं है! मान लिया… कुछ लोग misuse करते हैं पर इसका मतलब ये थोड़ी है कि पूरी व्यवस्था ही उठा के फेंक दो? जनहित याचिका क्या है पता है? वो आवाज़ है उस आदमी की… जो खुद अदालत तक पहुँच ही नहीं सकता। गाँव का आदमी… गरीब आदमी… जिसके पास ना पैसा है, ना पहुँच है… उसी के लिए तो ये रास्ता बनाया गया था! और आज उसी को बंद करने की बात हो रही है…? तो सीधी बात है साहब, दिक्कत misuse से नहीं है… दिक्कत ये है कि अब आवाज़ ज़्यादा उठने लगी है।
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Shivendra Pratap Singh
Shivendra Pratap Singh@01Shivendra·
@TheLallantop सबसे घटिया पुलिसिंग वाला राज्य, सिर्फ लूटने के लिए बैठते हैं हाइवे पर, रात में तो सफर करने में लुटेरों से अधिक इनसे सावधान रहने की आवश्यकता है,
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The Lallantop
The Lallantop@TheLallantop·
जिस गाड़ी में साइलेंसर ही नहीं, उसका PUC चालान काट दिया! मामला राजस्थान के नागौर जिले का है. यहां एक पुलिस ने एक इलेक्ट्रिक कार (EV) का पॉल्यूशन सर्टिफिकेट (PUC) वाला चालान काट दिया. गाड़ी चालक ने इस घटना का वीडियो भी बनाया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल है. पुलिस ने 1500 रुपये का PUC चालान और 200 रुपये का टिंटेड ग्लास (काले शीशे) का चालान बनाकर कुल 1700 का जुर्माना वसूल लिया. वाहन चालक अशोक पंवार का आरोप है कि यह कार्रवाई पूरी तरह नियमों के विपरीत है. पूरी खबर: thelallantop.com/auto/post/ev-p…
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Shivendra Pratap Singh
Shivendra Pratap Singh@01Shivendra·
@ajeetbharti सूचना है कि आंगनवाड़ी और शिक्षकों पर दबाव बनाया जा रहा है कि वो खुद जाएं और कुछ को अपने साथ लेकर जाएं । आदेश मिलने पर साझा किया जाएगा
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Ajeet Bharti
Ajeet Bharti@ajeetbharti·
यह आदेश तो वापस ले लिया गया है, परंतु आप सोचिए कि भीड़ दिखाने के लिए सरकार के पदाधिकारियों पर कितना दवाब है। मेरठ की रैली के बाद काशी में रैली होते-होते रह गई क्योंकि वहाँ भीड़ की समस्या थी, और भीड़ से उत्पन्न हो सकने वाली समस्या भी थी। आँख बंद करके सामान्य वर्ग की उपेक्षा करते रहिए, सोचते रहिए कि ये थक जाएँगे। सत्य सामने है कि सरकारी विद्यालयों को ही नहीं बल्कि निजी को भी आदेश दिए जा रहे हैं कि पूरे प्रदेश से लोगों को लाने के लिए बसें चाहिए।
Ajeet Bharti tweet media
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Shivendra Pratap Singh
Shivendra Pratap Singh@01Shivendra·
@khurpenchh सीधे बर्खास्त होने चाहिए ऐसे लोग @PMOIndia से निवेदन है सख्त कार्यवाही हो खानापूर्ति नहीं
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खुरपेंच
खुरपेंच@khurpenchh·
राजस्थान के ये RTO साहब बचपन से फुटबॉलर बनना चाहते थे, लेकिन मां बाप के दबाव में RTO ऑफिसर बनना पड़ा, लेकिन अब जब भी कोई आम आदमी दिखता है और घूंस देने से मना करता है तो साहब उस पर रोनाल्डो से बेहतर हेडर लेकर अपने आपको संतुष्ट करते हैं।
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Shivendra Pratap Singh
Shivendra Pratap Singh@01Shivendra·
@Adv_Anil_Mishra उत्तरप्रदेश में सक्षम लोग मौजूद हैं, मध्यप्रदेश में सत्ता संतुलन कराएं सबसे अधिक सामान्य वर्ग के हक की लंका वही लग रही है ।
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Adv. Anil Mishra
Adv. Anil Mishra@Adv_Anil_Mishra·
लखनऊ में आयोजित ब्राह्मण सभा में उस समय माहौल गरमा गया जब मंच से शंकराचार्य जी और UGC से जुड़े मुद्दों पर चर्चा शुरू ही हुई थी कि भाजपा के राज्यसभा सांसद Dinesh Sharma मंच छोड़कर चले गए। इस घटनाक्रम ने सभा में मौजूद लोगों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए। क्या संवाद से दूरी समाधान है, या फिर खुलकर चर्चा ही लोकतंत्र की असली ताकत है? लखनऊ की इस सभा ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि समाज के मुद्दों पर गंभीर और पारदर्शी संवाद की आवश्यकता है। #Adv_anilmishra #ऑपरेशन_बगावत #BreakingNews #Lucknow #UttarPradesh #Update #ब्राह्मण #UGC
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Shivendra Pratap Singh
Shivendra Pratap Singh@01Shivendra·
@richaanirudh नियमतः BSA ने गलत नहीं कहा है, आप नजदीकी विद्यालय के साथ तालमेल बिठाकर उन्हें शिक्षा दिला सकती थी, और आप का सहयोग निःसन्देह स्थानीय शिक्षक जरूर खुशी खुशी करते ।
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richa anirudh
richa anirudh@richaanirudh·
नोएडा में पिछले BSA एक दिन हमसे लड़ने आए थे कि आप यहां जमघट पाठशाला में बच्चों को क्यों पढ़ा रही हैं..ये अपराध है 😃 मैंने कहा जब ये बच्चे सब्ज़ी का ठेला लगा रहे थे..कचरा बीन रहे थे..तब आप सरकारी लोग कहां थे? कोई जवाब नहीं था साहब के पास..इससे तो बेहतर होता ये किताबें हमारे जैसे NGOs को भी दे देते और बच्चों को भी...
खुरपेंच@khurpenchh

बहराइच में प्राइमरी स्कूल में मुफ्त बांटी जाने वाली किताबों को BSA की सहमति से कबाड़ी को 4 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बेच दिया गया, जब अनपढ़ रहेगा इंडिया , तभी तो बढ़ेगा चाइना, 13000 किताबें जब्त की गईं।

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Shivendra Pratap Singh
Shivendra Pratap Singh@01Shivendra·
@the_kilanaut भाई आप पर टिप्पणी करने वाले अति टाइप वाले समर्थक हैं इसमें नेता का क्या दोष ? मैं रवसा के शुरुआती दिनों से उनके प्रति आपकी सकारात्मक और आलोचनात्मक दोनों तरह की समीक्षा देख चुका हूं, इसलिए मुझे उम्मीद है आप और @RavindraBhati__ जब साथ बैठेंगे कुछ बेहतर चीजें निकलेंगी ।
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Lokendra Singh Kilanaut
Lokendra Singh Kilanaut@crosschat_wala·
प्रिय युवा साथियों... ओरण बचाओ आंदोलन पर एक जरूरी और आपके काम की बात साझा करने की इच्छा हुई है। मुझे मालूम है इसके बाद भी आप मुझे सिर्फ इसलिए भद्दा और घटिया बोलोगे क्योंकि मैं आपके नेता श्री रविन्द्रसिंह भाटी के लिए ठकुर सुहाती बात नहीं करूंगा। और आपकी बेशुमार नाराजगी मुझे लौटकर मिलेंगी। लेकिन मैं फिर भी अपनी बात आपसे कहूंगा क्योंकि ये सब कहना जरूरी है। कुछ युवाओं का मानना है कि मुझ जैसे गलीच लोग बातें बनाने के सिवाय कुछ कर नहीं सकते। यह तो हमारे क्रांतिकारी नेता की ही बिसात है कि ओरण जैसे आंदोलन को इतनी ऊंचाई पर ले जाकर खड़ा कर दिया। युवा साथियों बस आपकी इसी दंभ की भावना का दमन करने के लिए मुझे लिखना पडता है। और आज मैं इतना लिखना चाहता हूँ कि ऐसे आंदोलनों की बुनियाद बातें बनाने वाले और आपकी नजर में गलीच लोग रखकर जाते हैं जिन पर सियासी लोग अपनी इमारत खडी कर देते हैं। इसलिए गाहे - बगाहे ऐसे लोगों के लिए भी थोड़ी इज्जत बचाकर रखो। शायद आप लोग अनुपम मिश्र को नहीं जानते होंगे। लेकिन मैं उन्हें जानता हूँ और ओरण आन्दोलन के नारों के बीच उनका स्मरण भी करना चाहता हूँ। हिंदी साहित्य के महान कवि भवानी प्रसाद मिश्र के काबिल बेटे और विख्यात पर्यावरणविद, लेखक अनुपम मिश्र ने अपना सारा जीवन इसी ओरण, तालाब, रेगिस्तान और खेजड़ी पर लिखकर बिता दिया। कितनी सुन्दर बात है कि अनुपम मिश्र के पिता भवानी प्रसाद मिश्र ने एक कविता लिखी थी - "सतपुड़ा के जंगल" "सतपुड़ा के घने जंगल नींद में डूबे हुए-से, ऊँघते अनमने जंगल" लेकिन उनके बेटे अनुपम मिश्र जो महाराष्ट्र में पैदा हुए लेकिन सारा साहित्य राजस्थान के लिए लिखा। उन्होंने ओरण पर लिखा, राजस्थान के तालाबों पर लिखा, रेगिस्तान और रेगिस्तान के पेड़ों पर लिखा और किताब की किताबें लिखीं। उनकी किताब "आज भी खरे हैं तालाब" राजस्थान के तालाबों की पूरी हिस्ट्री और ज्योग्राफी की पड़ताल करती है। उनकी एक दूसरी दूसरी किताब है " साफ माथे का समाज" उसमें वे लिखते हैं कि राजस्थान के लोग भाग्यशाली हैं कि उनके पास ओरण जैसी परम्परा है। उन्होंने इन सब विषयों पर बहुत काम किया और जीवनभर किया। फिर एक राजस्थान पत्रिका में लेखक और पत्रकार हुए भुवनेश जैन जिन्होंने दशकों पहले ओरण के संरक्षण की कल्पना की थी। उन्होंने भी ओरण, खेजड़ी के मुद्दों पर लगातार रचनात्मक काम किया। अब तक कर रहे है और वे पहले शख्स होंगे जिन्होंने इस मुद्दे पर समाज का ध्यान आकर्षित करवाया था। इसलिए युवा साथियों, इस महफिल में आज चमन भले हो लेकिन उन लोगों को सम्मान भले मत दो लेकिन याद कम से कम रखो जो वीराने में महफिल सजाए बैठे थे। जब भी कोई ओरण पर बात करेगा तो वह भले अनुपम मिश्र को नहीं जानता होगा लेकिन उनका लिखा जरूर बोलेगा। ओरण पर जब भी बात की जाएगी तो भुवनेश जैन की कोई न कोई रिपोर्ट वहां पढ़ी जाएगी। लेकिन अब आप अनुपम मिश्र जैसी महान शख्सियत को नहीं जानते तो क्या मेरा ये फर्ज नहीं बनता कि मैं आपको वह सब बताऊं जो जरूरी है। लेकिन अब चूंकि आंदोलन की परिणिति सिर्फ लोकप्रिय नेता जी की एक फोटो तक आ टिकी है तो फिर मेरे साथ एक बार जोर से बोलो - रवसा भाटी - जिंदाबाद कमाल कर दिया रवसा आपने जो एक फोटो क्या खींची हमारे जैसे जलनखोरो के पिछवाड़े से धुआं निकल गया। वाह रवसा, वाह आप तो आप हो
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हरनाथ सिंह यादव
माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी सरकार UGC में 3 प्वाइंट और जोड़ दे तो शाय़द किसी को कोई आपत्ति नहीं होगी .. 1. अगर शिकायत फर्जी पाई जातो है तो उसके खिलाफ कठोर कार्यवाही होगी। 2. जांच के लिए जो टीम गठित होगी उसमें SC/ST, OBC सहित सामान्य वर्ग के भी सदस्य होंगे। 3. अगर सामान्य वर्ग के लोगों के साथ कोई जातिसूचक और शोषण हो तो उसके लिए भी सजा का प्रावधान होगा। विश्वास है मेरे निवेदन को सकारात्मक दिशा में लेंगे। #सबकासाथसबकाविकास #सबकाविकास_सबकासाथ_सबकाविश्वास #वन्देमातरम आदरणीय गृहमंत्री श्री @AmitShah जी आ0 शिक्षा मंत्री श्री @dpradhanbjp जी
हरनाथ सिंह यादव tweet media
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kapil bishnoi
kapil bishnoi@Kapil_Jyani_·
केन्द्र सरकार के हिसाब से….. सामान्य वर्ग के छात्र कॉलेज में दादागिरी करने जाते हैं और बाक़ी वाले सब पढ़ने जाते है…. इसलिए बाक़ी वालों को सामान्य वर्ग से बचाना ज़रूरी है… ग़ज़ब के लोग है….!! #UGCBlackLaw
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Meenakshi Joshi
Meenakshi Joshi@IMinakshiJoshi·
संविधान आर्टिकल 14 के तहत सभी को बराबरी का अधिकार देता है लेकिन ज़रूरी नहीं , क्युकी #UGCRegulations का फ़ायदा उठाकर कोई भी कभी भी आपको क़ानून का हवाला देकर किनारे कर सकता है । #UGC_RollBack
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The Conqueror
The Conqueror@EWS_WARRIOR·
सवर्ण समाज को ऐसे कालनेमियों से दूर रहना चाहिए, खासकर कायस्थ समाज को। रवि शंकर प्रसाद उस कमेटी का हिस्सा रहे हैं जिसने UGC के नियम बनाए। एक बार भी नहीं सोचा गया कि इन नियमों से कायस्थ समाज के बच्चों को बिना वजह फँसाया जा सकता है। 18 साल के छोटे-छोटे बच्चों का भविष्य तबाह किया जा रहा है UGC के काले कानून बनाकर, जिनसे उनका जीवन बर्बाद हो सकता है। ये शिक्षा सुधार नहीं, बल्कि एक पूरी पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। समाज को अब चुप नहीं रहना चाहिए। #ShameOnUGC
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kapil bishnoi
kapil bishnoi@Kapil_Jyani_·
हम लोग OBC में आते हैं….. और कॉलेज, विश्वविद्यालय में किसकी हिम्मत जो हमें डरा धमका सके… किसकी हिम्मत जो हमें पढ़ने से रोक सके… किसकी हिम्मत जो हमारे साथ भेदभाव कर सके… किसकी हिम्मत जो हमें नीचा दिखा सके…. हमें नहीं ज़रूरत UGC जैसी बैसाखियों की… फिर सरकार क्यों कॉलेज में ये सब थोपकर भेदभाव वाला वातावरण बढ़ा रही है….!!! #ShameOnUGC
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Shivendra Pratap Singh
Shivendra Pratap Singh@01Shivendra·
अगर झूठी शिकायतकर्ता पर कार्यवाही का नियम जुड़ जाएगा तो झूठी शिकायत करने से पहले वो 100 बार सोचेगा …..और कार्रवाई का डर रहेगा अगर ऐसा होता है तो 98% केस तो वैसे ही कम हो जाएँगे #ShameOnUGC
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Sushant Sinha
Sushant Sinha@SushantBSinha·
सीधी सी बात है कि अगर वोट लेते वक्त हिंदू एक है तो सेफ़ है बताते हैं तो कायदे बनाते वक्त जनरल और OBC-SC-ST में बाँटकर वो सेफ्टी क्यों छीन रहे? जब सब एक होकर सेफ़ हैं हीं तो सवर्णों से ख़तरा क्यों दिखने लगता है? #UGCRollBack UGC New Rule Explained 👇🏾 youtu.be/R8wzG1-q1MU
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