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@Mayank_2024

LLB-NLU JODHPUR, Optimistic 🫰 Proud INDIAN (भारतीय )🇮🇳

Rajasthan Katılım Eylül 2020
10 Takip Edilen122 Takipçiler
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MSM@Mayank_2024·
@omiigothwal_01 मुझे इन पर कभी भरोसा नहीं था
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Om Prakash Gothwal
Om Prakash Gothwal@omiigothwal_01·
हम मीणा ही भाईचारे को कंधा दे रहे हैं,नहीं गुर्जर तो तुम्हें घंटा ही कुछ नहीं समझते, और तुम अपने मीणा नेताओ को गाली देते हो,और सचिन पायलट के झंडे उठा के नारे लगाते फिरते हो, अब तो समझो मीणाओ
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MSM@Mayank_2024·
@up_ka_l_adka बंद करो ये अंग्रेज़ी नव सामंती service
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निर्मोही
निर्मोही@up_ka_l_adka·
उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर से एक वीडियो वायरल हो रहा है…और इसने सिस्टम पर फिर से बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है...!!😲 एक बेटा अपनी घायल मां के लिए न्याय की गुहार लेकर DM ऑफिस पहुंचता है बताता है कि बंदरों के हमले में उसकी बुज़ुर्ग मां बुरी तरह घायल हो गई… सिर पर टांके लगे…पहले भी शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं। और उधर…साहब कुर्सी पर आराम मोड में हाथ में मोबाइल, स्क्रीन पर रील…और सामने खड़ा इंसान… बस एक नजरअंदाज कहानी बनकर रह गया। सोचिए जिस सिस्टम को जनसेवा के लिए बनाया गया,वहीं अगर इंसान की तकलीफ स्क्रॉल में खो जाए,तो फिर उम्मीद किससे रखी जाए ? यह सिर्फ लापरवाही नहीं…संवेदनहीनता की हद है। कभी-कभी लगता है क्या सच में इस देश में उसकी ही सुनवाई होती है जिसके पास पैसा, पहुंच या पहचान हो ? अगर एक आम आदमी की चीख कुर्सी तक पहुंचकर भी अनसुनी रह जाए,तो यह सिर्फ उसकी हार नहीं…पूरे सिस्टम की नाकामी है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई सिर्फ जरूरी नहीं,बल्कि सिस्टम पर भरोसा बनाए रखने के लिए अनिवार्य है। क्योंकि कुर्सी पर बैठना आसान है…लेकिन उस कुर्सी की जिम्मेदारी निभाना ही असली परीक्षा है। अब सवाल सीधा है क्या हम ऐसे व्यवहार को सामान्य मान लें…या जवाबदेही की मांग करें ? 🤔
निर्मोही tweet media
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Hemant Kumar
Hemant Kumar@hemantkumarnews·
#सीकर में NEET की तैयारी कर रहे छात्र की आत्महत्या की खबर आज के अखबार में कौनसे पन्ने पर है ? ये बताती है की पेपरलीक के विरोध में हम कहाँ खड़े हैं
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MSM@Mayank_2024·
@MukAn_X 18 साल मे कितनी प्रोपर्टी बना ली होगी मैडम ने अब भले निकालो नौकरी से
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Rahul Kumar
Rahul Kumar@MukAn_X·
18 साल के बाद आखिरकार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हस्ताक्षर से कल आईएएस IAS पद्मा जायसवाल को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। इन्हें नौकरी से हटाने के लिए सरकार को बहुत पापड़ बेलने पड़े। साल 2008 से ही इन्हें हटाने की कोशिशें चल रही थीं जो आखिरकार 18 साल बाद मुकाम पर पहुंचीं। यह मामला 2007-2008 का है, जब वह अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिले में DC के पद पर तैनात थीं। फरवरी 2008 में वहां के स्थानीय निवासियों ने शिकायत दर्ज कराई कि वह अपने पद का गलत इस्तेमाल कर रही हैं। जांच में सामने आया कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर सरकारी खजाने से ₹28 लाख रुपये का गबन किया इस पैसे से अपने रिश्तेदारों के नाम पर संपत्तियां खरीदीं। जनता की शिकायत के बाद उन्हें अप्रैल 2008 में निलंबित किया गया था, लेकिन अक्टूबर 2010 में बहाल कर दिया गया। इसके बाद अखिल भारतीय सेवा नियमों के तहत उनके खिलाफ लंबी विभागीय जांच चली। CAT के एक फैसले के कारण केंद्र की कार्रवाई रुकी हुई थी, लेकिन दिल्ली उच्च न्यायालय ने CAT के आदेश को पलटते हुए DOPT को जांच और बर्खास्तगी की अंतिम अनुमति दे दी।
Rahul Kumar tweet mediaRahul Kumar tweet media
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MSM@Mayank_2024·
@masijeevi Koi inke khilaf na bole bas
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Vijender Chauhan
Vijender Chauhan@masijeevi·
I thought it was some fake news but then it cropped up everywhere and now it appears that CJI actually mentioned this hate for unemployed youth, activists and social media professionals. Someone please tell me - just how- how head of judiciary of a democracy be this prejudiced?
Vijender Chauhan tweet media
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MSM@Mayank_2024·
@ipsvijrk तब गलत सरकार थी एक्शन नहीं लिया तो अब लेना जयाज़ है
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RK Vij
RK Vij@ipsvijrk·
पश्चिम बंगाल के 3 ips officers को आज निलंबित किया है, RG Kar hospital प्रकरण के सम्बन्ध में. किसी को भी घटना के 2 साल बाद निलंबन करना reasonable नहीं लगता. आप dept enquiry करिये.
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Rajendra Meena
Rajendra Meena@RajendraMeena50·
हम पूर्वी राजस्थान वालों के लिए तो यह भाषा समझ से परे हैं मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी को भी समझ नहीं आयेगी, क्योंकि राजस्थानी भाषा पश्चिम राजस्थान की भाषा है यह पूर्वी राजस्थान और हाड़ौती के समझ में नहीं आती हैं इसलिए मेरा मानना है एक बार पूर्वी राजस्थान और हाड़ौती में राजस्थानी भाषा का सर्वे कराया जाएं।
Arvind Chotia@arvindchotia

डोळ तो कोनी दीखै लाख रिपियां को सो फेर भी म्हारा भाई तू सुण, राजस्थानी वा ई भासा है, जी मै मीरा बाई भजन गाया, राजस्थानी वा घ भासा है जी मै करमा बाई भगवान नै बुला र खीचड़ो खुवायो। राजस्थानी वा ई भासा है, जी मै चूरू रा कन्हैयालाल सेठिया जी "धरती धोरां री" अर "पातळ और पीथळ" सिरजी। राजस्थानी वा ई भासा है जी मै जैपर रा सीमा मिश्रा जी एक ऊं एक जोरका लोकगीत गाया है। राजस्थानी वा ई भासा है जी मै कोटा रा दुर्गादान सिंह जी गौड़ "गौरी गौरी गजबण बणी ठणी" गीत लिख्यो। राजस्थानी वा ई भासा है जी मै झुंझुनूं रा भागीरथ सिंह जी भाग्य "एक छोरी काळती" गीत लिख्यो। राजस्थानी वा ई भासा है जी मै नागौर रा कानदान जी कल्पित "डब डब भरिया, बाई सा रा नैण" जिस्यो विदाई गीत लिख्यो। राजस्थानी वा ई भासा है जकी मै घणा ई टाबर पीएचडी अर एम ए कर रिया है। राजस्थानी वा ई भासा है जीकी सेवा वास्तै सीताराम जी लालस नै पद्म श्री सम्मान मिल्यो। राजस्थानी वा ई भासा है जकी मै केंद्रीय साहित्य अकादमी राजस्थानी साहित्यकारां नै सम्मान देवै। अर सुण, राजस्थानी वा ई भासा है जकी आणै वाळा दिनां मै आपणी इस्कूलां मै भी पढ़ाई जावैगी। सब री बोलियां न्यारी-न्यारी है पण मूल सब रो राजस्थानी है। एक भासा री जित्ती ज्यादा बोलियां होवै, वा भासा उत्ती ई समरथ मानी जै। अब ओजूं मत आ ज्याई ज्ञान देवण

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MSM@Mayank_2024·
@ShrimanG_23 @ashokshera94 कुछ भी बोलो पर बेनिवाल काम तो करवाते है अपने लोकसभा मे
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Gyaanesh S Tanwar
Gyaanesh S Tanwar@ShrimanG_23·
@ashokshera94 कुछ काम धाम करो बस परिवार को लेके साऊथ इंडिया घूम लिया, मुंबई घूम लिया उत्तराखंड चले गए, दिल्ली में लड़के का टॉप क्लास बर्थडे मनवा दिया 30-40 गाड़ियों के साथ रैली निकाल दी, पब्लिक को खुश करने के लिए फॉन्फ गप्प ठोक दिया। ऑलवेज I me Myself, जैसे खुद के बिना समाज तो पहले था ही नही
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Ashok Shera
Ashok Shera@ashokshera94·
सांसद हनुमान बेनीवाल मीटिंग में अधिकारी पर भड़के। सांसद ने कहा- “आपके आने के बाद सभी कामों का सत्यानाश हो गया। थोड़ा काम भी कीजिए। सिर्फ कमीशन लेकर फार्महाउस बनवाने पर ध्यान मत दीजिए, जनता के कामों पर भी ध्यान दें।”
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MSM@Mayank_2024·
@aajtak Batao mc kya gyandu h
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AajTak
AajTak@aajtak·
720 में से केवल 107 नंबर का ही जवाब दे पाया दिनेश का बेटा , पिता ने 10 लाख में खरीदा था NEET का पेपर NEET UG-2026 पेपर लीक केस में CBI जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है. आरोपी दिनेश बिवाल ने बेटे के लिए 10 लाख रुपये में पेपर खरीदा, लेकिन बेटा ऋषि परीक्षा में सिर्फ 107 नंबर का ही सवाल सही कर पाया. जांच में टेलीग्राफ पीडीएफ, WhatsApp चैट, सीकर फ्लैट, 150 संदिग्ध छात्रों और करोड़ों के नेटवर्क की बात सामने आई है. पूरी खबर intdy.in/i37dqf @sharatjpr #NEETPaperLeak #NEETUG2026 #CBI #EducationScam
AajTak tweet media
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MSM@Mayank_2024·
@8PMnoCM इस बार ये कुछ ज्यादा दिखावा कर गए बेनिवाल जी, ऐसे बेतुके बयान से बचना चाहिए
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राजस्थानी ट्वीट
कलेक्टर का नाम सार्वजनिक करना चाहिए सांसद महोदय को, वरना गप्प मानी जाएगी
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MSM@Mayank_2024·
@tribalvoice99 अगर ऐसा हुआ तो जैपुर वाले राज मे मीणा गुर्जर और जोधपुर वाले राज मे जाट राजपूत राजनीतिक रूप से बहुत पॉवरफुल होजायेंगे
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The Tribal Voice 🇮🇳
The Tribal Voice 🇮🇳@tribalvoice99·
राजस्थान एक बड़ा राज्य है और मेरे हिसाब से इसे दो राज्यों में विभाजित कर देना चाहिए। जोधपुर जैसा बड़ा और अच्छा शहर मरुप्रदेश की राजधानी बनने की क्षमता रखता है, और मेरे हिसाब से वह अपने राज्य को संभालने के काबिल भी है। इससे मारवाड़ी भाषा और संस्कृति को भी अलग पहचान मिलेगी। ओवरऑल यह एक अच्छा कदम हो सकता है। हम और हमारा जयपुर वाला राजस्थान भी अलग राज्य के रूप में अच्छा विकास कर सकता है. #MaruPradesh #Marwadi #Rajasthani #Rajasthan
The Tribal Voice 🇮🇳 tweet media
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MSM@Mayank_2024·
@tribalvoice99 मेरा ननिहाल चुरू मे रह जायेगा, रियासती समय से राजस्थान एक रहा है इसलिए एक ही रहने दीजिये
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MSM@Mayank_2024·
@TheTribhuvan Doatsara ko bahut time hogya hatao ab
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Tribhuvan_Official
Tribhuvan_Official@TheTribhuvan·
केरल का एक मज़बूत संकेत राजस्थान के लिए है और वह यह कि अगर 2028 में काँग्रेस सत्ता में आती है और गोविंदसिंह डोटासरा तब तक अध्यक्ष बने रहते हैं तो फिर गोविंदसिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ही राजस्थान में मुख्यमंत्री पद के दावेदार होंगे। इसमें किसी तीसरे के आ पाने की संभावना उसी तरह कम हो जाएगी, जिस तरह केसी वेणुगोपाल की हालत नीचे के इस फ़ोटो में देखी जा सकती है। इसलिए अब राजस्थान के प्रदेश नेतृत्व के लिए झीना झपटी बढ़ेगी। डोटासरा अपने आपको प्रदेश अध्यक्ष पद पर बचा पाए तो यह उनके लिए बड़ी बात होगी। लेकिन कांग्रेस ने चुनाव से साल भर पहले तक अध्यक्ष बदला तो उसकी हालत सनी जोसेफ़ जैसी रहेगी। तो कांग्रेस के इस फ़ैसले के कई निहितार्थ हैं और वे बहुत ही गहरे हैं। अगर आज वेणुगोपाल की यह हालत है तो किसी और की ऐसी हालत नहीं होगी, यह सोचना ख़ामख़याली है।
Tribhuvan_Official tweet media
Tribhuvan_Official@TheTribhuvan

केरल में कांग्रेस ने आज वीडी सतीशन को मुख्यमंत्री बनाने का फ़ैसला करके केवल एक नाम घोषित नहीं किया; उसने अपने ही इतिहास की एक पुरानी बीमारी मुख्यमंत्री चयन की अनंत अनिश्चय-ग्रंथि से बाहर निकलने की कोशिश की है। UDF ने 140 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत पाया और कांग्रेस अकेले 63 सीटों पर जीती (INC 63, IUML 22, CPI(M) 26, CPI 8 और BJP 3)। इतने स्पष्ट जनादेश के बाद भी कांग्रेस को CM तय करने में करीब दस दिन लगे और अंततः सतीशन को केसी वेणुगोपाल तथा रमेश चेन्निथला पर वरीयता दी गई। यानी निर्णय काफी सही और सोच विचार कर लिया गया है। केरल कांग्रेस के लिए यह असामान्य नहीं, लगभग परंपरा है। 1960 में भी कांग्रेस 63 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी; लेकिन मुख्यमंत्री कांग्रेस का नहीं बना। तब कांग्रेस-PSP-मुस्लिम लीग की “मुक्कूटु मुन्नानी” सरकार में PSP नेता पट्टम ए थानु पिल्लै मुख्यमंत्री बने और आर शंकर उपमुख्यमंत्री। कारण वही था] जो कांग्रेस की पुरानी कमज़ोरी रही है। जातीय-सामाजिक संतुलन, सहयोगी दलों का गणित और अपने नेताओं के बीच अविश्वास। अंततः 1962 में दिल्ली के हस्तक्षेप के बाद पट्टम को पंजाब का राज्यपाल बनाया गया और आर शंकर केरल के पहले कांग्रेस मुख्यमंत्री बने। लेकिन शंकर सरकार भी स्थिरता नहीं दे सकी। पीटी चाको विवाद, कांग्रेस के भीतर विद्रोह और 15 कांग्रेस विधायकों का अपनी ही सरकार के ख़िलाफ़ वोट करने का घटनाक्रम, जिसने सरकार गिरा दी। बाद में असंतुष्टों से केरल कांग्रेस जैसी ताक़त निकली। यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण है कि 1960 के दशक में कांग्रेस की 63 सीटों की शक्ति भी उसकी अंदरूनी लड़ाई के सामने कमज़ोर पड़ गई थी; 2026 में भी वही संख्या लौटी, पर इस बार कांग्रेस ने अंततः सतीशन पर निर्णय लेकर उस अभिशप्त स्मृति को तोड़ने की कोशिश की है। मुझे लगता है, इस मामले में कांग्रेस के वयोवृद्ध नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के अनुभव काम आए हैं। 1970 में भी कांग्रेस सत्ता में लौटी; लेकिन शीर्ष पद फिर उसके पास नहीं आया। कांग्रेस ने 30 सीटें जीतीं, CPI केवल 16 पर थी, फिर भी सी अच्युत मेनन मुख्यमंत्री बने। कई लोगों को लगता था कि के करुणाकरण मुख्यमंत्री बनेंगे, मगर वे गृह मंत्री बने। 1977 में करुणाकरण मुख्यमंत्री बने; लेकिन राजन केस की छाया में एक महीने से भी कम समय में हटना पड़ा। उसके बाद कांग्रेस ने 37 वर्षीय एके एंटनी को मुख्यमंत्री बनाया, जो तब विधायक भी नहीं थे। यह कांग्रेस की केरल शैली थी। संकट में अचानक नैतिक छवि, समझौता और दिल्ली-निर्णय का मिश्रण। 1981 और 1982 में करुणाकरण लौटे, पर 1981 की सरकार कमज़ोर बहुमत पर चली और केरल कांग्रेस (एम) के समर्थन वापसी से गिर गई। 1982 में करुणाकरण ने स्थिर सरकार दी और पांच साल पूरे किए। 1995 में फिर कांग्रेस संकट में फंसी। करुणाकरण 1991 में मुख्यमंत्री बने थे, मगर ISRO जासूसी केस, गुटीय युद्ध और राजनीतिक दबाव ने उन्हें हटाया। एंटनी लौटे और बाद में तिरूरंगाड़ी उपचुनाव से विधानसभा में आए। यानी कांग्रेस ने एक बार फिर चुनावी जनादेश की सीधी रेखा को गुटीय-संकट और नैतिक-प्रतिस्थापन की वक्र रेखा से पार किया। 2001 में UDF को 99 सीटें मिलीं। एंटनी मुख्यमंत्री बने; लेकिन 2004 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की ख़राब हालत और गुटीय तनाव के बाद उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया। तब ओमन चांडी आए। यह परिवर्तन दिलचस्प था; क्योंकि एंटनी ने ही चांडी का नाम आगे किया। बाद में 2011 में चांडी ने पूर्ण कार्यकाल पूरा किया। इस पूरी यात्रा में कांग्रेस केरल में दस बार सत्ता में आई, लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी पर केवल चार कांग्रेस चेहरे बैठे : आर शंकर, करुणाकरण, एंटनी और ओमन चांडी; इनमें भी पूर्ण पांच साल पूरा करने वाले केवल करुणाकरण और चांडी रहे। इस पृष्ठभूमि में वीडी सतीशन का चयन बहुत अहम है। वे केवल “एक और कांग्रेस नेता” नहीं हैं। वे 61 वर्ष के हैं, एर्नाकुलम जिले की परवूर सीट से लगातार छठी बार विधायक चुने गए हैं, कानून-शिक्षित हैं, NSUI से राजनीति में आए और विधानसभा में आक्रामक, तथ्य-समर्थ, बहसक्षम नेता के रूप में पहचाने गए। 2021 में कांग्रेस की हार के बाद जब पार्टी का मनोबल लगभग टूट गया था, तब उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाया गया। यह चयन उस समय पीढ़ीगत बदलाव का संकेत था; 2026 में वही प्रयोग सत्ता की सीढ़ी तक पहुंच गया। सतीशन की असली ताक़त यह रही कि उन्होंने पिनराई विजयन जैसे अत्यंत मज़बूत मुख्यमंत्री को विपक्ष से निरंतर चुनौती दी। उन्होंने विकास, भ्रष्टाचार, सत्ता के केंद्रीकरण और सामाजिक ध्रुवीकरण पर कांग्रेस को आक्रामक बनाया। उन्होंने कांग्रेस के बूथ कमेटियों को फिर सक्रिय कराया, जिला नेताओं से नियमित संपर्क रखा और चुनाव प्रचार में राज्य भर में लगातार घूमे। वे केवल अपने क्षेत्र के नेता की तरह नहीं, UDF के अभियान-चेहरे की तरह उभरे। वेणुगोपाल की तुलना में सतीशन का चयन इसलिए अधिक उपयुक्त दिखता है कि वे केरल की जमीन पर संघर्ष करते हुए निकले नेता हैं। वेणुगोपाल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव संगठन हैं, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के करीबी माने जाते हैं और संगठन में अत्यंत प्रभावशाली हैं। लेकिन यही उनकी सीमा भी थी। वे 2009 से केंद्रीय राजनीति में हैं, इसलिए राज्य कांग्रेस के बड़े हिस्से को वे “स्थानीय जनादेश के स्वाभाविक चेहरा” नहीं लगते थे। सतीशन नेता प्रतिपक्ष थे, चुनावी अभियान का सार्वजनिक चेहरा बने और केरल की राजनीतिक परंपरा में नेता प्रतिपक्ष को भावी मुख्यमंत्री के रूप में देखा जाता रहा है। वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाने में तकनीकी और राजनीतिक लागत भी थी। वे लोकसभा सांसद हैं; उन्हें मुख्यमंत्री बनाने पर एक लोकसभा उपचुनाव और फिर केरल विधानसभा में प्रवेश के लिए दूसरा उपचुनाव आवश्यक होता। साथ ही कांग्रेस को राष्ट्रीय स्तर पर महासचिव संगठन का नया चेहरा भी खोजना पड़ता। ऐसे समय में जब कांग्रेस केरल को अपने सबसे मज़बूत राज्यों में गिन रही है, दिल्ली के नेता को थोपना पार्टी के भीतर “हाईकमान बनाम केरल जनादेश” का विवाद बना सकता था। रमेश चेन्निथला का मामला भी अलग था। वे वरिष्ठ, अनुभवी और लंबे समय से राज्य राजनीति में हैं; लेकिन 2021 में वे विपक्ष के प्रमुख चेहरे थे और UDF सत्ता में नहीं लौट सकी। इसलिए कई लोगों को लगा कि उनका क्षण गुजर चुका है। सतीशन में उम्र, आक्रामकता, वैचारिक स्पष्टता और भविष्य की 10-15 वर्ष की राजनीति का संयोजन दिखा। केरल में नेता “महानायक” नहीं होता, “first among equals” होता है; सतीशन फिलहाल कांग्रेस-UDF के भीतर वही भूमिका निभाने की स्थिति में हैं। सतीशन के चयन का एक सामाजिक संकेत भी है। उन्होंने समुदाय-आधारित दबावों के सामने अपेक्षाकृत सख़्त रुख रखा, ध्रुवीकरण के खिलाफ स्पष्ट secular stand लिया और सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों से संवाद करते हुए UDF की पुरानी दूरी कम करने की कोशिश की। IUML जैसे सहयोगी दलों में भी उनके पक्ष में सकारात्मक संकेत दिखे, हालांकि NSS ने सहयोगी दलों के हस्तक्षेप पर आपत्ति भी जताई। यह बताता है कि सतीशन का चयन केवल कांग्रेस का अंदरूनी निर्णय नहीं, UDF की गठबंधन-संरचना की परीक्षा भी है। लब्बेलुबाब ये कि कांग्रेस ने इस बार करुणाकरण-एंटनी-चांडी युग के बाद केरल में अपना नया केंद्रीय चेहरा चुन लिया है। यह फै़सला अगर सफल हुआ तो सतीशन कांग्रेस को दक्षिण भारत में एक मज़बूत शासन-मॉडल दे सकते हैं। लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होगी: क्या वे गुटों को साथ रख पाएंगे, IUML-केरल कांग्रेस जैसे सहयोगियों को संतुलित कर पाएंगे और UDF की 102 सीटों की विराट जीत को स्थिर, ईमानदार और आधुनिक प्रशासन में बदल पाएंगे? कांग्रेस ने संकट से निकलने के लिए नाम चुन लिया है; अब सतीशन को साबित करना होगा कि वे सिर्फ संकट का समाधान नहीं, केरल कांग्रेस के नए युग की शुरुआत हैं। लेकिन इसका एक और मज़बूत संकेत राजस्थान के लिए है और वह यह कि अगर 2028 में काँग्रेस सत्ता में आती है और गोविंदसिंह डोटासरा तब तक अध्यक्ष बने रहते हैं तो फिर गोविंदसिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ही राजस्थान में मुख्यमंत्री पद के दावेदार होंगे। इसमें किसी तीसरे के आ पाने की संभावना उसी तरह कम हो जाएगी, जिस तरह केसी वेणुगोपाल की हालत नीचे के इस फ़ोटो में देखी जा सकती है। इसलिए अब राजस्थान के प्रदेश नेतृत्व के लिए झीना झपटी बढ़ेगी। डोटासरा अपने आपको प्रदेश अध्यक्ष पद पर बचा पाए तो यह उनके लिए बड़ी बात होगी। लेकिन कांग्रेस ने चुनाव से साल भर पहले तक अध्यक्ष बदला तो उसकी हालत सनी जोसेफ़ जैसी रहेगी। तो कांग्रेस के इस फ़ैसले के कई निहितार्थ हैं और वे बहुत ही गहरे हैं। अगर आज वेणुगोपाल की यह हालत है तो किसी और की ऐसी हालत नहीं होगी, यह सोचना ख़ामख़याली है। #VDSatheesan @vdsatheesan @kcvenugopalmp #Keral

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MSM@Mayank_2024·
@RahulMeena @iRishabhKSharma Jo भी है भाई पर राजस्थान की नहीं
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Dr. Rishabh Kumar Sharma
Dr. Rishabh Kumar Sharma@iRishabhKSharma·
राजस्थान को बनवो भरतपुर और अलवर ते ही शुरू हुओ है। सबते पैले 1948 में मत्स्य मंडल ही बनो हतो। तो राजस्थान की सबते पहली भाषा बृज भाषा हुई। जब कोर्ट राजस्थानी की कह रो, तो बृज भाषा बामें जरूर होनी चहिए।
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MSM@Mayank_2024·
@parmarshivendra जातिगत सेनेरीऔ मे भी तो फिट बैठना चाहिए न अतः खोज जारी है
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Shivendra Singh Parmar
Shivendra Singh Parmar@parmarshivendra·
कोटा जैसे संवेदनशील रेंज में IG की पोस्ट 13 दिन से खाली है योग्य IPS अधिकारी नहीं मिल रहा क्या ?
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Deep 😎 तंवर
विश्व का गारंटी वाला बैच सलेक्शन नहीं तो फीस वापस। में यूट्यूबर आशु से पूछना चाहता हूं , दोस्त EO RO की भर्ती कब आएगी..? कितने पदों पर आएगी ..! एग्जाम कब होगा...? तुम अपनी दुकान चलाने के लिए क्यों बेरोजगारों को गुमराह कर रहे हो ...! बच्चे फेल हो गए तो उनका कीमती समय लौटा दोगे
Deep 😎 तंवर tweet media
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Dr. Ruchika Sharma
Dr. Ruchika Sharma@tishasaroyan·
Lol! Brahmins lived most comfortably in most of Indian history. From Ashoka to Aurangzeb, every ruler patronized the Brahmins, gave them tax free land grants. RS Sharma's thesis shows how under the Guptas the Brahmins were free to exploit the peasant on his Agrahara (tax free land grants), evict them at will, and charge a number of extra cesses. Brahmins were also the benefactors of the deeply dehumanizing Devadasi system, especially under the Cholas. The system was natally alienating and séxúally exploitative. Keeping Brahmins happy and well fed allowed the rulers to enjoy uninterrupted social legitimacy. Stop whitewashing the history of the Brahmins. Most lived a lavish life of doing nothing but having everything
Dr. Ruchika Sharma tweet media
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MSM@Mayank_2024·
@qunisk96 और यही कोई sc st 50 हजार रिश्वत लेता पाया जाये तो इनका विधवा विलाप शुरू होजाता है और सीधे सभी sc st को संपन्न बता कर आरक्षण हटाने की माँग कर डालते है, खैर हम तो उस 50 हजार लेने वाले के भी खिलाफ खड़े रहते है भले हमारा भाई हो पर ये करोडो के घोटाले करने बाद भी भाईचारा रखते है दोगले
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Qunisk
Qunisk@qunisk96·
अच्छी स्कीम है गरीब SC-ST-OBC किसानों की जमीन सस्ते में खरीदों... फिर वहां से हाईवे प्रोजेक्ट निकलवा कर उसको करोड़ के भाव बेच दो... फिर इन्हीं की औ'लादें आकर आरक्षण को गालियां देती फिरती हैं। Mfkr चोर- 100% सवर्ण (95% ब्राह्मण-बणीया) #NEETExam2026 #Hantavirüs #upsc
Qunisk tweet media
Dainik Bhaskar@DainikBhaskar

भोपाल में देशभर के करीब 50 आईएएस और आईपीएस अफसरों ने एक ही दिन खेती की बेशकीमती जमीन खरीदी है। 16 महीने में वहीं से ₹3200 करोड़ की सड़क मंजूर; भास्कर इन्वेस्टिगेशन में पढ़िए खरीदी से लेकर कीमत बढ़ने तक का खेल... dainik.bhaskar.com/VbghtAAV42b #MPNews #Investigation #Bhopal #IAS #IPS #HindiNews

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